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RBRishabh BhardwajFollow21 Dec 2024, 01:16 pm
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जमैअत इस्लामी हिंद ने शिक्षा नीति पर व्यापक समीक्षा और बहाली के संकेत दिए

New Delhi, Delhi:जमात-ए-इस्लामी हिंद ने आज तीन अहम मुद्दों पर की प्रेस कॉन्फ्रेंस। प्रोफेसर सलीम इंजीनियर उपाध्यक्ष जमाते इस्लामी हिंद जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के निकट नीट विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा देश में शिक्षा की स्थिति को लेकर जनता की गहरी नाराज़गी को दिखाता है। हालाँकि, केवल एक व्यक्ति को बदलने से उन व्यवस्थागत कमियों को दूर नहीं किया जा सकता जो बरसों से जमा हो गई हैं। मौजूदा संकट भारत की शिक्षा व्यवस्था की दिशा, प्राथमिकताओं और कामकाज के तरीक़े की व्यापक समीक्षा की मांग करता है। भारत में शिक्षा के क्षेत्र में असमानता बढ़ रही है। हज़ारों सरकारी स्कूलों का बंद होना, सरकारी निवेश में कमी, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों को मिलने वाली ग्रांट में कटौती और शिक्षा के तेज़ी से हो रहे कमर्शियलाइज़ेशन ने समान और अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा की नींव को कमज़ोर कर दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि अल्पसंख्यक शिक्षा, स्कॉलरशिप और शिक्षा से जुड़े सपोर्ट प्रोग्राम के लिए बजट में बार-बार कटौती की जा रही है, जिसका सबसे ज़्यादा असर उन समुदायों पर पड़ रहा है जो पहले से ही पिछड़े हुए हैं। अल्पसंख्यकों, दलितों, आदिवासियों, ग्रामीण पृष्ठभूमि और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को अच्छी शिक्षा और उच्च शिक्षा के अवसरों तक पहुँचने में कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही कई अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को बढ़ते विनियामक दबाव और चुनिंदा तरीके से निशाना बनाए जाने का सामना करना पड़ा है। मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद ने असमान व्यवहार और अल्पसंख्यकों द्वारा चलाए जा रहे शैक्षिक प्रयासों के लिए घटती गुंजाइश को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। ऐसी घटनाएं शैक्षिक विविधता और समान अवसर के प्रति संवैधानिक प्रतिबद्धता में भरोसे को कम करती हैं। जमात शिक्षा और रोज़गार के बीच बढ़ती दूरी को लेकर भी चिंतित है। उच्च शिक्षा में दाखिले बढ़ने के बावजूद, लाखों पढ़े-लिखे युवा बेरोज़गारी और अपनी योग्यता से कम स्तर के काम (अंडर-एम्प्लॉयमेंट) से जूझ रहे हैं। जो शिक्षा प्रणाली छात्रों को ज़रूरी कौशल, इनोवेशन, हालात के अनुसार ढलने की क्षमता और आलोचनात्मक विचार नहीं सिखा पाती, वह उन्हें ऐसी अर्थव्यवस्था के लिए ठीक से तैयार नहीं कर सकती जो तेज़ी से टेक्नोलॉजी, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से आकार ले रही है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) और इसे लागू करने के तरीके पर भी जनता की ओर से गंभीरता से विचार-विमर्श और जांच-परख होनी चाहिए। बहुत ज़्यादा केंद्रीकरण, भाषा थोपने, डिजिटल सुविधाओं तक असमान पहुँच, अहम परीक्षाओं पर बहुत ज़्यादा निर्भरता और संघीय व संस्थागत स्वायत्तता के कमज़ोर होने जैसी चिंताओं पर ध्यान देना ज़रूरी है। उतनी ही चिंता की बात यह है कि "मूल्य-आधारित शिक्षा" का इस्तेमाल बहुसंख्यकवादी सांस्कृतिक नैरेटिव को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। मूल्यों की शिक्षा संवैधानिक सिद्धांतों, सार्वभौमिक नैतिक मूल्यों और भारत की सांस्कृतिक विविधता के प्रति सम्मान पर आधारित होनी चाहिए, न कि सांस्कृतिक एकरूपता या विचारधारा की समानता थोपने का ज़रिया बननी चाहिए। इसलिए जमाअत सरकार से आग्रह करता है कि वह शिक्षा नीतियों की व्यापक और विचार-विमर्श पर आधारित समीक्षा करे और निम्नलिखित उपाय अपनाए: • शिक्षा पर सरकारी खर्च को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का कम से कम 6% तक बढ़ाएं और स्कूलों, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों के लिए अनुदान में आई कमी को दूर की जाए। • अल्पसंख्यकों, दलितों, आदिवासियों, लड़कियों और आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्रों के लिए स्कॉलरशिप, फ़ेलोशिप और शैक्षिक सहायता योजनाओं को बहाल किया जाय और बेहतर बनाया जाय। • सरकारी स्कूलों और सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को मज़बूत किया जाए, खासकर ग्रामीण, आदिवासी और कम सुविधा वाले इलाकों में। • संवैधानिक गारंटियों के अनुसार, सभी शिक्षण • अत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षाओं और कोचिंग इंडस्ट्री पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए परीक्षा और प्रवेश प्रणालियों में सुधार की जाए। • शिक्षा को रोज़गार सृजन, व्यावसायिक प्रशिक्षण, उद्यमिता, अनुसंधान और उभरती हुई तकनीकों के साथ और अधिक निकटता से जोड़ा जाए। • शैक्षिक परिवेश में संस्थागत स्वायत्तता, शैक्षणिक स्वतंत्रता और विचारों की विविधता की रक्षा की जाए। • संवैधानिक मूल्यों, नैतिक नागरिकता, सामाजिक सद्भाव और भारत की विविधतापूर्ण विरासत के प्रति सम्मान पर आधारित मूल्य-शिक्षा के लिए एक सचमुच समावेशी ढांचा विकसित की जाए। शिक्षा को केवल बाज़ार के लिए कामगार तैयार करने का ज़रिया नहीं, बल्कि जागरूक, कुशल, नैतिक और सामाजिक रूप से ज़िम्मेदार नागरिक तैयार करने की प्रक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए। देश की तरक्की, सामाजिक justice और भारत के संवैधानिक विज़न को साकार करने के लिए एक लोकतांत्रिक, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा प्रणाली ज़रूरी है। 2, मलिक मोहतासीम खान उपाध्यक्ष जमाते इस्लामी हिंद राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने 'वंदे मातरम' से जुड़े 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' के पारित होने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। हालांकि जमाअत देश की संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान का पूरी तरह समर्थन करती है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से कहा जाना चाहिए कि 'वंदे मातरम' के कुछ छंद—खासकर वे जिनमें मातृभूमि को एक देवी के रूप में संबोधित किया गया है और उसे कुछ देवियों से जोड़ा गया है—इस्लाम की एकेश्वरवादी मान्यताओं के अनुकूल नहीं हैं। यह चिंता न तो नई है और न ही किसी खास समुदाय तक सीमित; मुस्लिम विद्वानों और संगठनों ने दशकों से इसे उठाया है और भारत के लोकतांत्रिक और संवैधानिक ढांचे के भीतर इसे मान्यता भी मिली है।इसलिए, यह बात चिंताजनक है कि संसद ने जिस तरह से कानून बनाया है, उससे धार्मिक अल्पसंख्यकों के बीच चिंताएं बढ़ सकती हैं और ऐसे मुद्दे पर अनावश्यक तनाव पैदा हो सकता है जो सीधे तौर पर अंतरात्मा और आस्था की स्वतंत्रता से जुड़ा है। हालांकि यह बिल साफ़ तौर पर 'वंदे मातरम' गाने के लिए मजबूर नहीं करता, लेकिन यह इस गाने के प्रति 'अपमान' या 'अनादर' माने जाने वाले कामों को अपराध बनाता है। जब इसे सरकारी कार्यक्रमों में इसे गाने के नियमों के साथ जोड़कर देखा जाता है, तो अपनी मर्ज़ी से सम्मान करने और मजबूरी में शामिल होने के बीच का फ़र्क़ नाजुक हद तक धुंधला हो जाता है। जमाअत को "अपमान" और "बेअदबी" जैसे शब्दों के अस्पष्ट और व्यक्तिपरक (subjective) स्वरूप को लेकर खास चिंता है। मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक माहौल में, ऐसे प्रावधानों के गलत इस्तेमाल का गंभीर खतरा है। मौलिक स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाले कानून स्पष्ट और सटीक होने चाहिए; उन्हें मनמाने ढंग से व्याख्या करने या बहुमत के दबाव के आधार पर तय करने के लिए खुला नहीं छोड़ा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने 'बिजो इमैनुएल' मामले के ऐतिहासिक फ़ैसले में यह माना कि सच्ची धार्मिक आस्था के आधार पर सम्मानपूर्वक किसी गतिविधि में शामिल न होना, संविधान के तहत सुरक्षित है। चुप रहने या किसी खास तरह से अपनी बात न कहने का अधिकार भी संवैधानिक आज़ादी का उतना ही अहम हिस्सा है, जितना कि उसमें शामिल होने का अधिकार। कोई भी ऐसा कानून जो इस अधिकार के इस्तेमाल को लेकर डर, अनिश्चितता या सज़ा का डर पैदा करता है, वह अनुच्छेद 19 और 25 की भावना और भारत के विविधतापूर्ण लोकतंत्र की नींव को भी कमज़ोर करता है। देशभक्ति को किसी खास गाने, नारे या प्रतीकात्मक काम में हिस्सा लेने से नहीं मापा जा सकता। देशभक्ति को किसी खास सांस्कृतिक या धार्मिक अभिव्यक्ति को मानने से जोड़कर देखने पर उन नागरिकों के अलग-थलग पड़ने का खतरा रहता है जिनकी मान्यताएं ऐसे कामों में हिस्सा लेने की इजाज़त नहीं देतीं। जमाअत का मानना है कि भारत की असली ताकत बिना किसी ज़बरदस्ती के विविधता को अपनाने की क्षमता में है। राष्ट्रीय एकता ऐसे कानूनों से नहीं बन सकती जो नागरिकों को अपनी अंतरात्मा की आवाज़ मानने और आरोप लगने के डर के बीच किसी एक को चुनने की मुश्किल स्थिति में डाल दें। ऐसे कदम लोगों को जोड़ने के बजाय अलग-थलग करते हैं और उस भरोसे को कमज़ोर करते हैं जो एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए ज़रूरी है। इसलिए जमाअत-ए-इस्लामी हिंद सरकार से आग्रह करती है कि वह इस कानून की समीक्षा करे और स्पष्ट सुरक्षा उपाय लागू करे। राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान तो बना रहना चाहिए, लेकिन भारतीय संविधान की मूल भावना यानी मौलिक अधिकारों और आज़ादी की कीमत पर नहीं। 3, प्रो सलीम इंजीनियर जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने असम और देश के कई अन्य हिस्सों यथा, ओडिशा, गुजरात, केरल और बाढ़ की आशंका वाले अन्य क्षेत्रों में बाढ़ से हुई व्यापक तबाही पर गहरी चिंता व्यक्त की है। इन आपदाओं के बारंबार होने से एक बार फिर यह साफ़ हो गया है कि राहत-केंद्रित नज़रिए से हटकर आपदा से बचाव, तैयारी और जलवायु के प्रति मज़बूती (क्लाइमेट रेज़िलिएंस) पर केंद्रित नज़रिए को अपनाने की तत्काल ज़रूरत है। हालांकि बचाव कार्य और मानवीय सहायता ज़रूरी हैं, लेकिन सरकारों को वैज्ञानिक तरीके से नदियों का प्रबंधन, आर्द्रभूमि का संरक्षण, बेहतर जल निकासी व्यवस्था, पूर्व चेतावनी यंत्र, जलवायु से प्रभावहीन इंफ्रास्ट्रक्चर और असुरक्षित समुदायों के सुनियोजित पुनर्वास जैसे स्थायी उपायों को भी समान रूप से प्राथमिकता देनी चाहिए। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद अपने स्वयंसेवकों और स्थानीय यूनिट्स के कार्यकर्ताओं की समर्पित कोशिशों की सराहना करती है जो देश के अलग-अलग हिस्सों में बाढ़ से प्रभावित परिवारों को राहत, भोजन, मेडिकल मदद और दूसरी ज़रूरी सहायता पहुँचाने में सक्रिय हैं। हम सरकारों, स्वयंसेवी संस्थाओं, कॉर्पोरेट निकायों और नागरिकों से अपील करते हैं कि वे उन लोगों की उदारतापूर्ण मदद करें जिन्होंने अपने घर, आजीविका और प्रियजनों को खो दिया है। टीटी विथ प्रो सलीम इंजीनियर मदरसे को लेकर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर बोले प्रोफेसर सलीम इंजीनियर अफसोस होता है कि ऐसे लोग संवैधानिक पद पर हैं जिनको भारत के इतिहास और मद्रास के इतिहास के बारे में पता नहीं है इनको नहीं मालूम मद्रास में जो स्वतंत्रता का आंदोलन चला उसमें लोगों ने शहादते दी है इनको नहीं पता है ना तो देश का इतिहास मालूम है ना देश की विरासत मालूम है इनको नहीं पता मदरसे में पड़े लोग देश के राष्ट्रपति बने हैं अगर इनको यह लगता है कि मद्रास में इस तरह की कोई गतिविधि होती है तो उसके लिए कानून है उसे पर कार्रवाई करें लेकिन इस तरह का बयान देना सिर्फ नफरत फैलाना है। वंदे मातरम बिल्कुल लेकर बोले सलीम इंजीनियर हमने इस बिल का मुतालबा किया है इस बिल में यह नहीं है कि जबरदस्ती पढ़ना जरूरी है लेकिन इस बिल के जरिए मुसलमान को टारगेट करने और उसे बिल का मिस यूज़ करने के इमकान ज्यादा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मद्रास में आप सिर्फ 12वीं तक पढ़ाई के दिए आदेश क्रिएशन की डिग्री मान्य नहीं होगी इस पर प्रोफेसर सलीम इंजरी का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था पहले से ही चौपट है इनको पता नहीं मद्रास से कौन और कैसे लोग देश में आगे आए हैं अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान की मौत को लेकर प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने कहा निष्पक्ष जांच होनी चाहिए सवाल उठने शुरू हुए हैं वाकई एक्सीडेंट है नेचुरल डेथ है या कुछ और इसकी सही से जांच होनी चाहिए।
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लातेहार में भ्रष्टाचार रोकथाम: मनिका पंचायत सचिव नागेश्वर रजक गिरफ्तार

Latehar, Jharkhand:लातेहार भ्रष्टाचार निरोधक दस्ता की टीम ने लातेहार जिले के मनिका प्रखंड में पंचायत सचिव नागेश्वर रजक को 10000 हज़ार रुपये लेते रंगों हाथ गिरफ्तार कर लिया है। ज्ञात हो मनिका बारकाडीह प्रखंड में वादी से चबूतरा निर्माण में बिल पास करने के एवज में 10000 हज़ार रुपये की माँग पिछले कई दिनों से कर रहा था। जिसके बाद पूरे मामले की जानकारी भ्रष्टाचार निरोधक टीम डाल्टनगंज से संपर्क किया जहाँ भ्रष्टाचार निरोधक टीम ने मनिका प्रखंड से पंचायत सचिव नागेश्वर रजक को गिरफ्तार किया। पंचायत सचिव की गिरफ्तारी से मानिका प्रखंड के अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों में भय व्याप्त है।
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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर करंट लगने से अज्ञात युवक की मौत, पुलिस जांच

New Delhi, Delhi:दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के नीचे करंट लगने से अज्ञात युवक की मौत, जांच में जुटी पुलिस उत्तर-पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क थाना क्षेत्र में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के पिलर नंबर-52 के नीचे एक अज्ञात युवक की करंट लगने से मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही शस्त्री पार्क थाना पुलिस मौके पर पहुंची और इलाके को सुरक्षित कर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम टीम और फोरेंसिक साइंस लैबोरेशनरी (एफएसएल) की टीम को भी मौके पर बुलाया गया। टीमों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और युवक की पहचान करने के साथ-साथ यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि करंट लगने की घटना किन परिस्थितियों में हुई। पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है।
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सलमान खान और अलवीरा अग्निहोत्री को नोटिस: बीइंग ह्यूमन ज्वेलरी धोखाधड़ी मामला

Chandigarh, Chandigarh:बॉलિવुड अभिनेता सलमान खान और उनकी बहन अलवीरा अग्निहोत्री को बीइंग ह्यूमन ज्वेलरी फ्रेंचाइजी से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले में चंडीगढ़ जिला अदालत से नोटिस जारी हुआ है। यह नोटिस चंडीगढ़ के कारोबारी अरुण गुप्ता द्वारा दायर दीवानी वाद पर जारी किया गया है। अदालत ने प्रतिवादियों को निर्धारित समय के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता अरुण गुप्ता का आरोप है कि उन्हें बीइंग ह्यूमन ज्वेलरी ब्रांड के तहत चंडीगढ़ में शोरूम खोलने के लिए प्रेरित किया गया। शिकायत के अनुसार, ब्रांड की प्रतिष्ठा और अभिनेता सलमान खान से जुड़े होने के कारण उन्होंने कारोबार में बड़ा निवेश किया। इसके लिए शोरूम तैयार कराया गया, इंटीरियर पर खर्च किया गया, ज्वेलरी का स्टॉक खरीदा गया और कर्मचारियों की नियुक्ति सहित अन्य व्यावसायिक तैयारियां की गयीं। अरुण गुप्ता का कहना है कि उन्हें फ्रेंचाइजी संचालन, ब्रांड प्रमोशन और व्यावसायिक सहयोग को लेकर कई आश्वासन दिए गए थे, लेकिन बाद में ये वादे पूरे नहीं किए गए। उनका आरोप है कि कारोबार अपेक्षित रूप से शुरू नहीं हो सका, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इसी आधार पर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया और नुकसान की भरपाई सहित अन्य राहत की मांग की है। यह विवाद नया नहीं है। शिकायतकर्ता का कहना है कि फ्रेंचाइजी शुरू करने के कुछ समय बाद ही उन्हें परियोजना में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उनका आरोप है कि ब्रांड से जुड़े पक्षों की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला, जिसके कारण निवेश फंस गया और कारोबार प्रभावित हुआ। मामले को लेकर पहले भी शिकायतकर्ता की ओर से संबंधित पक्षों के समक्ष अपनी बात रखे जाने का दावा किया गया था। समाधान नहीं निकलने पर अंततः उन्होंने न्यायालय का रुख किया। अब अदालत ने मामले पर संज्ञान लेते हुए सलमान खान, अलवीरा अग्निहोत्री और अन्य संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है।
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शिंदे की शिवसेना में उथल-पुथल, संजय राउत के बयानों से सियासी घमासान

Mumbai, Maharashtra:आदरणीय संपादक साहेब और पत्रकार बंधू-भगिनींनो आपल्यासाठी बाईट आणि पॉइंटर... शिवसेना राज्य प्रवक्ते अरुण सावंत विषयी: शिंदेंच्या शिवसेनेमध्ये चलबिझळ... संजय राऊत स्वर्गीय बाळासाहेब ठाकरे यांच्या विचारांनी पुढे जात असलेली शिवसेना जिच खंबीर नेतृत्व एकनाथ शिंदे करत आहेत ती शिवसेना मजबूत आहे. तिच्यामध्ये कोणताही प्रकारची चलबिझळ नाही. संजय राऊत म्हणतात की कायद्यानेच आम्ही शिवसेनाला संपवू. परंतु राऊत तशी वेळ येणार नाही. आम्हाला संपविण्याची भाषा करणारेच काही महिन्यांनी संपतील तेव्हा तुमची जर इच्छा असेल तर आमच्या मूळ शिवसेनेत येऊन विलीन व्हावे . श्रीमान एकनाथ शिंदे यांचे हृदय मोठा आहे ते आपल्याला जरूर माफ करतील.
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हाईकोर्ट: अनुकंपा नियुक्ति में विवाहित बहन को भी समान अधिकार, नियमों की पुनर्विचार के निर्देश

Bilaspur, Chhattisgarh:बिलासपुर। हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि शादी के बाद बेटी का मायके से रिश्ता खत्म नहीं होता और अविवाहित सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद उसकी शादीशुदा बहन भी अनुकंपा नियुक्ति की बराबर हकदार है। हाईकोर्ट के जस्टिस संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ ने राज्य सरकार के 19 सितंबर 2019 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें विवाहित बहन को अनुकंपा नियुक्ति देने से इनकार कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि केवल शादीशुदा होने के आधार पर किसी महिला को उसके संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।मामला बिलासपुर के नेहरू नगर निवासी दुर्गेश मिश्रा का है, जो जांजगीर-चांपा में जिला लोक अभियोजन अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2018 में सेवा के दौरान उनके निधन के बाद उनकी वृद्ध मां ने अपनी बेटी अमिता दुबे के लिए अनुकंपा नियुक्ति की मांग की थी। लेकिन राज्य सरकार ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि नीति में विवाहित बहन का प्रावधान नहीं है।याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि शादी के बाद भी बेटी या बहन का अपने मूल परिवार से रिश्ता समाप्त नहीं होता। हाईकोर्ट ने भी माना कि अनुकंपा नियुक्ति का आधार वैवाहिक स्थिति नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक निर्भरता और जरूरत होनी चाहिए।कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वर्तमान समय में कई शादीशुदा बेटियां भी अपने माता-पिता और परिवार की जिम्मेदारी निभाती हैं। ऐसे में केवल महिला के विवाहित होने के आधार पर उसे नौकरी से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 15(1) में दिए गए समानता के अधिकार का उल्लंघन है।हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अमिता दुबे के अनुकंपा नियुक्ति के मामले पर चार सप्ताह के भीतर नियमों के अनुसार पुनर्विचार कर नया और सकारात्मक आदेश जारी किया जाए। इस फैसले को महिलाओं के अधिकार और लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय माना जा रहा है।
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एटा में प्रसूता की मौत: अस्पताल और आशा कार्यकर्ता पर आरोप, जांच शुरू

Etah, Uttar Pradesh:एटा में डिलीवरी के बाद प्रसूता की मौत, परिजनों ने निजी अस्पताल और आशा कार्यकत्री पर आरोप लगाए. दो दिन पूर्व डिलीवरी के लिए जीटी रोड स्थित OM हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था प्रसूता को. डिलीवरी के दौरान बेटे का जन्म हुआ, परिजनों का आरोप—बिना सूचना दिए प्रसूता को आगरा भेजा गया, जबकि नवजात अस्पताल में ही भर्ती रहा. परिजनों ने इलाज में लापरवाही और कथित लालच के चलते प्रसूता की जान से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया. JAITHRA थाना क्षेत्र के गांव सर्रा निवासी थीं मृतका क्रांति पत्नी अजय पाल. वहीं पुलिस पूरे मामले की जांच पड़ताल में जुटी. थाना कोतवाली नगर क्षेत्र के OM हॉस्पिटल का पूरा मामला.
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राहुल गांधी के आरोपों पर पीयूष गोयल का पलटवार; पेपर लीक चुनौती बना

Jaipur, Rajasthan:जयपुर: केंद्रीय वाणिज्य उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को कोई गंभीरता से नहीं लेता। पीयूष गोयल ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान स्थिति को प्रशासन ने सही तरीके से संभाला और किसी प्रकार की कोई गलत कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन में कुछ आपराधिक पृष्ठभूमि वाले तत्व घुस गए थे, जिन्होंने आंदोलन को हाईजैक कर अराजकता फैलाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अब पूरे देश के सामने यह स्पष्ट हो चुका है कि प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ था। पेपर लीक पूरे देश की चुनौती झारखंड सहित विभिन्न राज्यों में सामने आए परीक्षा विवादों और पेपर लीक की घटनाओं पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह केवल किसी एक राज्य की समस्या नहीं, बल्कि पूरे देश के सामने एक साझा चुनौती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस विषय को गंभीरता से ले रही है और राज्यों से भी परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाने का आग्रह किया गया है। उन्होंने कहा कि सभी राज्य सरकारों को ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए प्रभावी और सख्त कदम उठाने चाहिए, ताकि युवाओं का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा बना रहे।
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