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VIKESH KUMARVIKESH KUMARFollow12 Oct 2024, 06:33 pm
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हरभजन बनकर शराब दुकान से 5.46 लाख लेकर फरार आरोपी गिरफ्तार

Chhindwara, Madhya Pradesh:हरभजन निकला साबिर अली 5.46 लाख लेकर हुआ था फरार पुलिस ने दिल्ली से किया गिरफ्तार छिंदवाड़ा में पहचान छिपाकर शराब दुकान में काम करने और 5.46 लाख रुपये लेकर फरार होने का मामला सामने आया है .कोतवाली पुलिस ने आरोपी को दिल्ली और पंजाब में दबिश देकर गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार आरोपी खुद को हरभजन बता कर पिछले तीन महीने से शराब दुकान में काम कर रहा था जबकि उसका असली नाम साबिर अली है.पुलिस के मुताबिक, आरोपी साबिर अली उत्तराखंड के उधमपुर नगर का रहने वाला है.पूछताछ में उसने बताया कि उसका पालन-पोषण पंजाबियों के बीच हुआ था. इसी वजह से उसे पंजाबी भाषा और सिख संस्कृति की अच्छी जानकारी थी .इसी का फायदा उठाकर वह हरभजन नाम से लोगों के बीच रह रहा था .वह गुरुद्वारे में अरदास भी करता था, जिससे किसी को उस पर शक नहीं हुआ. आरोपी के पास से पुलिस को 2 पहचान पत्र मिले है जिसमें एक में उसका नाम साबिर अली और दूसरे में हरभजन नाम दर्ज है. आरोपी शराब दुकान से कैश कलेक्शन का काम करता था जिसमें उसने बिछुआ और खमरपानी की शराब दुकान से 5.46 लाख रूपये जिला मुख्यालय पहुंचना था लेकिन उसने बस स्टैंड में गाड़ी खड़ी कर कैश लेकर फरार हो गया था और मोबाइल बंद कर लिया था उसी के बाद कोतवाली में उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई थी. पुलिस ने पंजाब और दिल्ली में दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार किया है .
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पटना गर्दनीबाग में पुलिस कस्टडी से आरोपी फरार, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

Patna, Bihar:लोकेशन पटना एंकर राजधानी पटना के गर्दनीबाग थाना क्षेत्र में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। तार चोरी के मामले में गिरफ्तार आरोपी पुलिस कस्टडी से फरार हो गया। आरोपी की पहचान जमील अख्तर उर्फ समीर के रूप में हुई है। घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है。 जानकारी के अनुसार, गर्दनीबाग थाना पुलिस ने जमील अख्तर उर्फ समीर को तार चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान आरोपी की निशानदेही पर चोरी के सामान की बरामदगी के लिए पुलिस टीम उसे अपने साथ लेकर गई थी। इसी दौरान आरोपी ने पुलिसकर्मियों को चकमा दिया और हथकड़ी समेत मौके से फरार हो गया। बताया जा रहा है कि यह घटना सोमवार शाम करीब 4:45 बजे की है। संयोग से उसी समय पटना सेंट्रल एसपी ममता कल्याणी थाने के औचक निरीक्षण पर पहुंची हुई थीं। एक ओर एसपी थाना परिसर का निरीक्षण कर रही थीं, वहीं दूसरी ओर आरोपी पुलिस कस्टडी से भाग निकला। घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आरोपी के फरार होने के बाद पुलिस की कई टीमें उसके संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं। हालांकि खबर लिखे जाने तक उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया था। इस घटना ने पुलिस की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के साथ-साथ पूरे मामले में हुई लापरवाही की भी जांच कर रही है।
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हाई कोर्ट ने 28 सप्ताह से गर्भवती दुष्कर्म पीड़िता को एमटीपी की अनुमति दी

Bilaspur, Chhattisgarh:बिलासपुर। हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में 14 साल 6 माह की दुष्कर्म पीड़िता को 28 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था होने के باوجود चिकित्सकीय गर्भपात (एमटीपी) की अनुमति दे दी है।कोर्ट ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद-21 हर व्यक्ति को गरिमा, निजता और शारीरिक स्वायत्तता के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है। इसलिए केवल एमटीपी अधिनियम की समय सीमा के आधार पर पीड़िता को राहत से वंचित नहीं किया जा सकता। यह आदेश हाई कोर्ट की सिंगल बेंच के न्यायमूर्ति ए.के. प्रसाद ने दिया।याचिका के अनुसार दिसंबर 2025 में नाबालिग के साथ दुष्कर्म हुआ था। आरोपी की धमकियों के कारण उसने किसी को घटना की जानकारी नहीं दी। जून 2026 में पेट दर्द होने पर परिजनों को उसके गर्भवती होने की जानकारी मिली। इसके बाद आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया गया।जब परिजन गर्भपात कराने अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने बताया कि गर्भ 28 सप्ताह से अधिक का हो चुका है। एमटीपी कानून में सामान्य परिस्थितियों में 24 सप्ताह तक ही गर्भपात की अनुमति है, इसलिए अस्पताल ने प्रक्रिया करने से इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़िता के पिता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।हाई कोर्ट के निर्देश पर मेडिकल बोर्ड ने पीड़िता की जांच की। रिपोर्ट में कहा गया कि इस अवस्था में गर्भपात कराने पर अत्यधिक रक्तस्राव और संक्रमण का खतरा है। वहीं यदि पीड़िता को गर्भ पूरा करने के लिए मजबूर किया जाता है तो उसके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर इससे भी अधिक गंभीर और लंबे समय तक असर पड़ सकता है। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद कोर्ट ने पीड़िता के हित को प्राथमिकता देते हुए गर्भपात की अनुमति देने का फैसला सुनाया।हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दुष्कर्म से ठहरा गर्भ कानून की नजर में महिला और बच्ची के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालता है। किसी नाबालिग को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भ पूरा करने के लिए मजबूर करना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा।अदालत ने कहा कि गरिमा, निजता और शारीरिक स्वायत्तता संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत संरक्षित अधिकार हैं और ऐसे मामलों में इन्हें सर्वोच्च महत्व दिया जाना चाहिए।हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया है कि पीड़िता को 10 जुलाई 2026 तक जिला अस्पताल या संबद्ध सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया जाए। गर्भपात की प्रक्रिया दो स्त्री रोग विशेषज्ञों और एक सर्जन की निगरानी में कराई जाएगी।राजनांदगांव के सीएमएचओ पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। अदालत ने भ्रूण के डीएनए और अन्य नमूनों को सुरक्षित रखने तथा जांच एजेंसी को सौंपने का भी निर्देश दिया है, ताकि आपराधिक मुकदमे में उनका उपयोग साक्ष्य के रूप में किया जा सके। साथ ही दो सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश करने के आदेश भी दिए गए हैं।
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पुष्कर सिंह धामी ने महाराष्ट्र में उत्तराखंडियों के साथ एकता पर विचार साझा किए

Noida, Uttar Pradesh:NAVI MUMBAI (MAHARASHTRA): PUSHKAR SINGH DHAMI (UTTARAKHAND CM) ON PARTICIPATING IN INTERACTION PROGRAMME WITH PEOPLE FROM UTTARAKHAND RESIDING IN MAHARASHTRA / REMARKS ON DEVELOPMENT AND GOVERNANCE INITIATIVES / CONTINUATION INTO THIRD TERM AS CHIEF MINISTER OF UTTARAKHAND नवी मुंबई: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कहते हैं, "महाराष्ट्र में रहने वाले उत्तराखंड के लोग, चाहे महाराष्ट्र की संस्कृति हो या उत्तराखंड की, हमारे देश की विविधता को दर्शाते हैं विविधता में एकता है। भाषा और पहनावे में अंतर के बावजूद, हम एक राष्ट्र हैं। उत्तराखंड के लोग अपनी संस्कृति से जुड़े रहते हैं और अपने गांवों में आते-जाते रहते हैं, साथ ही महाराष्ट्र के विकास में भी लगातार योगदान देते हैं वे दोनों जगहों की तरक्की में योगदान करते हैं। आज हमने उनकी संस्कृति को बचाने में मदद करने के लिए बातचीत शुरू की है। उत्तराखंड अभी देश भर में कई पहलों में सबसे आगे है—नए नियम और कानून बनाना, इनोवेशन को बढ़ावा देना और विज्ञान और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ना। उत्तराखंड के हमारे भाई-बहन हर साल होने वाले 'प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन' में बड़ी संख्या में हिस्सा लेते हैं और अपने सुझाव देते हैं। हमने आज यह बातचीत इसलिए शुरू की है ताकि दोनों क्षेत्रों के लिए उनका सहयोग और समर्थन बना रहे। आज यहां इतने सारे लोगों को देखकर बहुत अच्छा लग रहा है, खासकर तीन दिनों की भारी बारिश के बाद मैं सभी का आभार व्यक्त करता हूं..."
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हैदराबाद में H-FAST के अभियान से मिलावटखोरों पर कार्रवाई, 100 दिन में 185+ मामले

Noida, Uttar Pradesh:HYDERABAD (TELANGANA): VAIBHAV RAGHUNATH GAIKWAD (DCP TASK FORCE) ON H-FAST ANTI-FOOD ADULTERATION DRIVE/ OVER 185 CASES REGISTERED IN 100 DAYS AND 400 ACTIONS TAKEN हैदराबाद - DCP टास्क फ़ोर्स के वैभव रघुनाथ गायकवाड़ कहते हैं, "हैदराबाद सिटी पुलिस को पहले खाने में मिलावट और फ़ूड पॉइज़निंग के कई मामले मिले थे। इस पर कार्रवाई करने के लिए, हमने हैदराबाद सिटी पुलिस कमिश्नर VC सज्जनार की लीडरशिप में H-FAST टीम बनाई। H-FAST का मतलब है हैदाबाद फ़ूड एड्ट्रेशन सर्विलांस टीम। इस टीम का मुख्य मकसद हैदराबाद में मिलावटी खाना बनाने, बेचने या ट्रांसपोर्ट करने में शामिल किसी भी व्यक्ति के ख़िलाफ़ कार्रवाई करना और आपराधिक मामले दर्ज करना है। इसीलिए हमने H-FAST बनाई। पिछले तीन महीनों या लगभग 100 दिनों में, हमने 185 से ज़्यादा आपराधिक मामले दर्ज किए हैं। कुल मिलाकर, हमने खाने में मिलावट से जुड़े 400 से ज़्यादा मामलों में कार्रवाई की है... पहले मामले की बात करें तो, हमें हाल ही में एक कस्टमर से शिकायत मिली थी कि Zepto के वेयरहाउस में साफ़-सफ़ाई का ठीक से ध्यान नहीं रखा जा रहा था। वहाँ कॉकरोच और दूसरी चीज़ें मिलीं, जिससे पता चला कि वहाँ साफ़-सफ़ाई की कमी थी। इन कमियों के आधार पर, हमारी H-FAST टीम और एक फ़ूड सेफ़्टी ऑफ़िसर ने मिलकर रेड की। हमने कई कमियाँ देखीं। वे सामान को ठीक से स्टोर नहीं कर रहे थे, साफ़-सफ़ाई खराब थी और कॉकरोच जैसी चीज़ें घूमती हुई देखी गईं। इन कमियों के आधार पर, हमने उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की। हमें सिर्फ़ Zepto ही नहीं, बल्कि दूसरे ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म के बारे में भी कई शिकायतें मिल रही हैं। हम उन सभी पर कड़ी नज़र रख रहे हैं। अगर भविष्य में ऐसी कमियाँ पाई गईं, तो हम उनके ख़िलाफ़ भी मामले दर्ज करेंगे। दूसरी बात, लगभग 4 दिन पहले हमें जानकारी मिली कि मटन की एक दुकान का मालिक मटन में बीफ़ मिलाकर बेच रहा था। मटन बीफ़ से ज़्यादा महंगा होता है। पैसे कमाने और मुनाफ़े के लिए वह मटन में बीफ़ मिला रहा था और इस तरह लोगों को धोखा दे रहा था। हमने उसके ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की है। इसके बाद हमें कुछ और जगहों से भी ऐसी ही जानकारी मिली, और हम उन पर भी नज़र रख रहे हैं...
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Satluj Controversy: Opposition Attacks Centre Over Zee5 Film Removal

Noida, Uttar Pradesh:PATIALA: DHARMVEER GANDHI (AAP MP) ON SATLUJ CONTROVERSY CHANDIGARH: MALWINDER SINGH KANG (AAP MP) ON SATLUJ CONTROVERSY (SOURCE: AAP PARTY PUNJAB) OTT प्लेटफ़ॉर्म Zee5 से फ़िल्म 'सतलुज' को हटाए जाने पर कांग्रेस सांसद धर्मवीर गांधी ने कहा, "यह केंद्र सरकार का बहुत गलत फ़ैसला है... हर पंजाबी को सरकार के इस फ़ैसले की निंदा करनी चाहिए..." CHANDIGARH: KULTAR SINGH SANDHWAN (PUNJAB ASSEMBLY SPEAKER) ON SATLUJ CONTROVERSY (SOURCE: AAP PARTY PUNJAB) OTT प्लेटफ़ॉर्म Zee5 से फ़िल्म 'सतलुज' को हटाए जाने पर पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने कहा, "बीजेपी वही करने की कोशिश कर रही है जो कांग्रेस पार्टी ने किया था—यानी 'पंथ' के ख़िलाफ़ राजनीति करते हुए जसवंत सिंह खालरा की ज़िंदगी पर बनी फ़िल्म को OTT प्लेटफ़ॉर्म से हटाना। यह कोई काल्पनिक फ़िल्म नहीं है। पंजाब ऐसी मनमानी बर्दाश्त नहीं करेगा..."
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चायल के अहलादपुर में बुलडोजर विवाद: ITBP जवान ने सवाल उठाए

Gohara Marufpur, Uttar Pradesh:आर्मी जवान ने बुलडोजर कार्रवाई पर उठाए सवाल कौशांबी जिले में सरकारी जमीन पर हुई बुलडोजर कार्रवाई अब विवादों में घिर गई है। तहसील चायल के अहलादपुर गांव में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस यानी आईटीबीपी में तैनात एक जवान ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने उनके पिता के मकान पर कार्रवाई की, जबकि उसी गाटा संख्या पर बने अन्य कथित अवैध निर्माणों को छोड़ दिया गया। जवान ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कार्रवाई केवल अवैध निर्माण पर की गई है और किसी व्यक्ति विशेष को निशाना नहीं बनाया गया। मामला चायल तहसील के अहलादपुर गांव का है। आईटीबीपी में तैनात जवान ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर दावा किया है कि उनके पिता की जमीन पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाया, जबकि उसी गाटा संख्या में बने अन्य निर्माणों को नहीं हटाया गया। जवान का कहना है कि वह देश की सीमा पर तैनात होकर सेवा कर रहा है और उसके परिवार के साथ भेदभावपूर्ण कार्रवाई की गई है। उसने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। जवान का आरोप है कि प्रशासन ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए उनके परिवार को निशाना बनाया। उनका कहना है कि यदि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण था तो उसी गाटा संख्या में मौजूद सभी अवैध निर्माणों पर समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए थी। उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई है। वहीं इस पूरे मामले पर एसडीएम चायल ने प्रशासन का पक्ष रखते हुए कहा है कि जवान के पिता लल्लू प्रसाद द्वारा खलिहान जैसी सुरक्षित सरकारी भूमि पर नया अवैध निर्माण कराया जा रहा था, जिसे नियमानुसार हटाया गया। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि उनके पुश्तैनी मकान पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि जवान द्वारा जिन अन्य निर्माणों का उल्लेख किया गया है, उनकी जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। यदि कहीं भी अवैध निर्माण पाया जाएगा तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सरकारी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। फिलहाल बुलडोजर कार्रवाई को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। एक ओर आईटीबीपी जवान ने भेदभावपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया है, तो दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई केवल नए अवैध निर्माण पर की गई है। अब गठित जांच टीम की रिपोर्ट के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी
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