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KRKhalik RazaFollow11 Jan 2025, 06:03 am

Kanpur Dehat - ग्राम पंचायत चनुआ मेहरई मे सिर्फ कागजों में हो रही मनरेगा मजदूरों की उपस्थित

Gaur, Uttar Pradesh:

बनकटी ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत चनुआ मेहरई मे सिर्फ कागजो में हो रही मनरेगा मजदूरो की उपस्थित । डी0सी0 मनरेगा नहीं रोक पा रहे हैं फर्जी हाजरी लगाने का भ्रष्टाचार । प्रतिदिन 109 मजदूरों की हाजिरी,मौके पर 4,5 मजदूर,बाकी नदारद रहते है । सचिव आशुतोष का फोन रिसीव नही हुआ,जिससे वर्जन को शामिल किया जा सके। डिहवा मिट्टी पटाई एवं खड़ंजा कार्य पर एक भी मनरेगा मजदूर नहीं है ,MSRNO17971 डिहवा मंदिर पर पहले से था भीट ,मिट्टी को जेसीबी मशीन के द्वारा लेवल किया गया। दो साइड पर निर्माण कार्य में 100 से अधिक मनरेगा मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाई जा रही। 

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बीकानेर: नगर निगम मतदान के बीच विधायक जेठानंद व्यास पर बदसलूकी का आरोप

Jaipur, Rajasthan:बीकानेर से बड़ी चुनावी खबरनगर निगम चुनाव के मतदान के बीच विधायक जेठानंद व्यास से बदसलूकी का आरोप वार्ड नंबर 45 के बूथ संख्या 95 पर हुआ घटनाक्रम बूथ पर मौजूद अधिकारी द्वारा विधायक से “तू-तड़ाक” करने का आरोप विधायक को बूथ से 200 मीटर दूर जाने के लिए कहा गया इसके बाद अधिकारी द्वारा विधायक का वीडियो बनाने की भी सूचना विधायक से बदसलूकी देख बूथ के बाहर मौजूद लोग हुए आक्रोशित लोगों ने मौके पर नारेबाजी कर जताया विरोध रबड़ फैक्ट्री के पास बूथ का निरीक्षण करने पहुंचे थे विधायक जेठानंद व्यास ने जिला कलेक्टर निशांत जैन से की शिकायत मामले को लेकर मौके पर माहौल गरमाया, प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी
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पहले चरण के नगरीय निकाय चुनाव में EVM से तय होगा शहर की सरकार

Jaipur, Rajasthan:प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण का चुनावी फैसला EVM में लॉक हो गया. 39 जिलों के 162 नगरीय निकायों में मतदाताओं ने शहरों की नई सरकार चुनने के लिए वोट डाले. सुबह 7 बजे शुरू हुआ मतदान शाम 6 बजे तक चला. इस तरह मतदाताओं को अपने प्रतिनिधि चुनने के लिए कुल 11 घंटे मिले. मतदान समाप्त होने के साथ ही पहले चरण में मैदान में उतरे 20,623 प्रत्याशियों की किस्मत EVM में कैद हो गई. अब 14 सितंबर को मतगणना के साथ चुनावी पिटारा खुलेगा. पहले चरण में कुल 5,393 वार्डों के लिए 7,683 मतदान केंद्रों पर वोटिंग हुई. सुबह से ही अलग-अलग मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की आवाजाही शुरू हो गई थी. दिन चढ़ने के साथ कई बूथों पर कतारें भी नजर आईं. मतदाताओं ने स्थानीय सरकार के लिए अपनी पसंद का प्रत्याशी चुनकर फैसला मशीनों में बंद कर दिया. पहले चरण में अलवर, बीकानेर, भीलवाड़ा और भरतपुर नगर निगम में भी मतदान हुआ. इसके अलावा 27 नगर परिषद और 131 नगरपालिकाओं में वोट डाले गए. ऐसे में नगर निगमों से लेकर छोटे शहरों की नगरपालिकाओं तक प्रत्याशियों की नजर अब मतगणना पर टिक गई है. मतदान पूरा होने के बाद EVM को निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के बीच स्ट्रांग रूम में रखा गया है. 14 सितंबर को मतगणना होगी. उसी दिन साफ होगा कि किस प्रत्याशी को शहर की सरकार में जगह मिलेगी और किसे हार का सामना करना पड़ेगा.
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प्रतापगढ़ में संतान न होने से परेशान दंपति ने खाया जहरीला पदार्थ, दोनों की मौत

Pratapgarh, Uttar Pradesh:प्रतापगढ़ में दिल दहला देने वाली घटना - संतान न होने से परेशान दंपति ने खाया जहरीला पदार्थ, दोनों की मौत। देहात कोतवाली के श्रीकांत का पुरवा गांव की घटना, सुभाष चंद्र तिवारी (53) और पत्नी सपना तिवारी (50) ने ट्यूबवेल पर लिया खौफनाक कदम। भाई इंद्रमणि तिवारी के अनुसार बुधवार भोर 3 बजे घर से 100 मीटर दूर ट्यूबवेल पर गए थे दोनों, ग्रामीणों ने अचेत अवस्था में देखा। पुलिस ने अस्पताल पहुंचाया - सुभाष को डॉक्टरों ने मृत घोषित किया, सपना को प्रयागराज SRN रेफर किया गया जहां 11:30 बजे मौत हुई। मौके से सुसाइड नोट बरामद - संतान न होने से परेशान होने का जिक्र, परिवार को परेशान न करने की अपील लिखी थी। सीओ सिटी आशुतोष मिश्रा बोले - सुसाइड नोट मिला, दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है, परिजनों की मौजूदगी में पंचनामा, जांच जारी।
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रांची के सिनर्जी ग्लोबल हॉस्पिटल से गरीबों को सस्ता और बेहतरीन इलाज का भरोसा

Ranchi, Jharkhand:रांची के बरियातू में स्थित सिनर्जी ग्लोबल हॉस्पिटल, मदर एंड चाइल्ड केयर डिवीजन के डायरेक्टर डॉ रंजीत कुमार के नेतृत्व में बच्चों, मां और पूरे परिवार के समर्पित इलाज के लिए परिचित है। यह अस्पताल लेबल थ्री NICU, लेबल थ्री PICU, SDU, मैटर्नल वार्ड और ऑपरेशन थिएटर जैसी सुविधाओं के साथ 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों का उपचार करता है। यहाँ गायनिका से जुड़ी बीमारियों का इलाज भी किया जाता है और प्रीमेच्योर बच्चों को भी स्वस्थ कर डिस्चार्ज किया गया है। चिकित्सीय टीम Jharkhand के दूर-दूर से और साथ ही बिहार, UP बॉर्डर व छत्तीसगढ़ से भी मरीजों के लिए सस्ती चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराती है। अस्पताल का उद्देश्य है कि मरीज कम खर्च में उच्चस्तरीय इलाज प्राप्त करें और यदि संभव हो तो सामाजिक फंडिंग के माध्यम से किसी को इलाज से वंचित न रहना पड़े। आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के जरिए गरीबों को भी पुख्ता चिकित्सा सुविधाएं मिले, इस दिशा में प्रयास जारी हैं। डॉ रंजीत कुमार ने कहा कि दिल्ली में ट्रेनिंग के बाद रांची आकर उन्होंने ऐसा हॉस्पिटल बनाया ताकि गरीब मरीजों को उचित खर्च पर बेहतर इलाज मिल सके।
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अनूपगढ़ रेंज में अवैध लकड़ी ट्रक: 5 दिन बाद कागजात मिले, FIR क्यों नहीं?

Noida, Uttar Pradesh:श्री गंगानगर वन विभाग की अजब दास्ता, गजब कारनामा 5 दिन पूर्व पकड़ी गया लकड़ी से भरा अवैध ट्रक मौके पर कागजात नहीं होने पर ट्रक को विभाग के कर्मचारी रेंज के पास लेकर गए 5 दिन तक विभाग ने कोई कार्यवाही नहीं की 5 दिन बाद वन विभाग के समक्ष पेश हुए अवैध रुप से लकड़ी परिवहन कर रहे ट्रक के कागजात ऐसे में बड़ा सवाल आखिर दो दिन बाद ट्रक के कैसे आये वैध कागजात वन विभाग की अनूपगढ़ रेंज का मामला हालांकि आम तौर पर अवैध रूप से परिवहन करते पकड़े जाने पर वन विभाग द्वारा FIR का प्रावधान लेकिन 5 दिन बाद भी विभाग ने दर्ज नहीं की FIR
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Sanchita Basu की वेब सीरीज ठुकरा के मेरा प्यार सीजन-2 OTT पर तहलका मचा रही है

Naya Chak, Bihar:एंकर - भागलपुर की बेटी और अभिनेत्री संचिता बसु इन दिनों अपनी वेब सीरीज ठुकरा के मेरा प्यार सीजन-2 की जबरदस्त सफलता को लेकर सुर्खियों में हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुए सीजन-2 के सभी एपिसोड को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला है। 4 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच बनाने वाली इस सीरीज पर सोशल मीडिया में 10 लाख से ज्यादा रील बनाए गए हैं। अब Zee Media से खास बातचीत में अभिनेत्री संचिता बसु ने सीरीज की सफलता, अपने संघर्ष, आने वाले प्रोजेक्ट्स और बॉलीवुड के सपनों पर खुलकर बात की है। ठुकरा के मेरा प्यार के सीजन-1 के बाद दर्शकों को सीजन-2 का बेसब्री से इंतजार था और रिलीज के बाद सीरीज ने ओटीटी के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त धमाल मचाया। अभिनेत्री संचिता बसु ने Zee Media से खास बातचीत में बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कई महीनों की कड़ी मेहनत और लगातारShootिंग करनी पड़ी। संचिता बसु ने कहा कि दर्शकों ने सीजन-1 को जिस तरह प्यार दिया, उसी प्यार और उम्मीद के साथ सीजन-2 बनाया गया। अब सीजन-3 को लेकर सस्पेंस बरकरार है। वहीं अपने आने वाले प्रोजेक्ट्स को लेकर संचिता ने कहा कि अगर सब कुछ सही रहा तो बहुत जल्द उनके फैंस को एक बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। बातचीत के दौरान संचिता बसु ने अपने बॉलीवुड क्रश का भी खुलासा किया। उन्होंने कहा कि उनके पसंदीदा अभिनेता सलमान खान हैं और अगर कभी मौका मिला तो वह उनके साथ बड़े पर्दे पर जरूर काम करना चाहेंगी। संचिता बसु ने बिहार में बाढ़ के सवाल पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी है उन्होंने कहा कि बाढ़ आने के बाद लोग परेशानी में रहते हैं लोगों का संवारा हुआ घर बर्बाद होता है खेत खलिहान बर्बाद होते हैं। सरकार इसपर कार्य कर रही है लेकिन इसका समाधान भी होना चाहिए उन्होंने सभी अभिनेताओं अभिनेत्रियों सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर से आगे आकर बाढ़ पीड़ितों को मदद करने की अपील की है। देखिये खास बातचीत .....
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विदिशा सर्राफा एसोसिएशन में संजय जैन चौधरी को पुनः अध्यक्ष चयन

Vidisha, Madhya Pradesh:विदिशा में जहां बड़ा सर्राफा एसोसिएशन की चुनावी बैठक में फैसला लिया गया है. सर्राफा व्यापारियों की आम बैठक में आपसी सहमति से चुनाव संपन्न हुए, जिसमें संजय जैन 'चौधरी' को सर्वसम्मति से एक बार फिर बड़ा सर्राफा एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया है. बैठक में व्यापारियों की शत-प्रतिशत मौजूदगी रही और निवर्तमान कार्यकारिणी का लेखा-जोखा भी प्रस्तुत किया गया. विदिशा के बड़ा सर्राफा एसोसिएशन की बहुप्रतीक्षित चुनावी बैठक संरक्षक मनमोहन अग्रवाल के मुख्य आतिथ्य में सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई. बैठक की शुरुआत में महामंत्री राजेश खुबाल ने पिछले कार्यकाल का पूरा आय-व्यय और लेखा-जोखा प्रस्तुत किया, जिसे सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से पास कर दिया. इसके बाद चुनाव प्रक्रिया को लेकर चर्चा शुरू हुई, जिसमें व्यापारियों ने गुटबाजी से ऊपर उठकर सर्वसम्मति से नेतृत्व चुनने का फैसला किया. आम सहमति बनने के बाद संजय जैन 'चौधरी' के नाम पर मुहर लगी और उन्हें पुन: एसोसिएशन का अध्यक्ष चुन लिया गया. इस दौरान सर्राफा बाजार के व्यापारियों की सौ फीसदी मौजूदगी दर्ज की गई. नए अध्यक्ष के चुनाव के बाद संरक्षक मनमोहन अग्रवाल, अवधनारायण स्वर्णकार, हीरालाल रघुवंशी, सतेन्द्र लश्करी, राजेश सर्राफ, संजीव भंडारी और नीलू सोनी समेत बड़ी संख्या में मौजूद व्यापारियों ने उन्हें बधाई दी और संघ की मजबूती का संकल्प लिया. विदिशा सर्राफा एसोसिएशन ने आपसी सहमति से अध्यक्ष चुनकर व्यापारी एकता का बड़ा संदेश दिया है.
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दिल्ली के लिए स्वतंत्र इंजीनियरिंग कैडर को केंद्र से मंजूरी; 3,214 CPWD से अलग

New Delhi, Delhi:*ब्रेकिंग- दिल्ली के लिए अलग इंजीनियरिंग कैडर को केंद्र की मंजूरी* • दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी के लिए स्वतंत्र इंजीनियरिंग कैडर बनाने के प्रस्ताव को केंद्र सरकार की मंजूरी • 3,214 स्वीकृत इंजीनियरिंग पद अब सीपीडब्ल्यूडी कैडर से अलग होकर दिल्ली पीडब्ल्यूडी इंजीनियरिंग कैडर में आएंगे • पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरिंग विंग में 36 श्रेणियों के पद शामिल • करीब 30 वर्षों से लंबित था दिल्ली के लिए अलग इंजीनियरिंग कैडर का मुद्दा • अब दिल्ली सरकार अपनी विकास जरूरतों के अनुसार इंजीनियरिंग तंत्र को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित कर सकेगी • इंजीनियरों की उपलब्धता, पदों को भरने, परियोजनाओं की निगरानी और निर्माण कार्यों को गति देने में मिलेगी मदद • सड़कों, पुलों, सरकारी भवनों और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों में तेजी आने की उम्मीद • नए सचिवालय, सभी 11 जिलों में मिनी सचिवालय, मंडियों, खेल मैदानों और अन्य सार्वजनिक ढांचों के निर्माण के लिए मजबूत इंजीनियरिंग व्यवस्था तैयार होगी • अलग कैडर से इंजीनियरिंग अधिकारियों की जवाबदेही और कार्यों की निगरानी दिल्ली सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था से अधिक प्रभावी रूप से जुड़ सकेगी • निर्माण कार्यों में कमियों या अनियमितताओं की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने में भी मदद मिलेगी • सीएम रेखा गुप्ता ने केंद्र की मंजूरी को दिल्ली के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था में ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला बताया • सीएम ने कहा—अलग इंजीनियरिंग कैडर से दिल्ली अपने विकास कार्यों के लिए लंबे समय तक किसी अन्य कैडर पर निर्भर नहीं रहेगी • “दिल्ली को विकसित, सुरक्षित और विश्वस्तरीय राजधानी बनाने की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम है” — सीएम रेखा गुप्ता
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पोला पर्व के मिट्टी के खिलौनों से छत्तीसगढ़ी संस्कृति जीवंत: नारायणपुर में रौनक

Narayanpur, Jharkhand:एंकर - छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा और कृषि संस्कृति से जुड़ा पोला तिहार नजदीक आते ही नारायणपुर शहर में भी इसकी रौनक दिखाई देने लगी है। शहर के जयस्तम्भ चौक में पोला पर्व को लेकर मिट्टी के खिलौनों की दुकानें सज गई हैं। दुकानों में मिट्टी से बने नांदिया बैल, बैल की जोड़ियां, चूल्हा, चक्की, पोरा, हांडी सहित घरेलू किचन में उपयोग होने वाले सामान के छोटे-छोटे खिलौने लोगों, खासकर बच्चों को आकर्षित कर रहे हैं। पोला पर्व में मिट्टी के बैल और गृहस्थी से जुड़े खिलौनों की पूजा करने की परंपरा रही है। कृषि संस्कृति से जुड़े इस पर्व में बैलों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है, वहीं बच्चों को मिट्टी के पारंपरिक खिलौनों के माध्यम से अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का अवसर भी मिलता है। एक महीने पहले से शुरू हो जाती है तैयारी पोला पर्व कुम्हार परिवारों के लिए भी विशेष महत्व रखता है। पर्व के लिए मिट्टी के खिलौने तैयार करने का काम कुम्हार करीब एक महीने पहले से शुरू कर देते हैं। मिट्टी तैयार करने से लेकर नांदिया बैल और छोटे-छोटे घरेलू सामान को आकार देने, उन्हें सुखाने, पकाने और रंगों से सजाने तक कुम्हार परिवार दिन-रात मेहनत करते हैं। कुम्हारों का कहना है कि पोला पर्व उनके पारंपरिक कारोबार के लिए महत्वपूर्ण अवसर होता है। बारिश के मौसम में मिट्टी के सामान का काम प्रभावित रहता है, लेकिन पोला पर्व के लिए पहले से की गई तैयारी उन्हें अपनी कला और मेहनत को बाजार तक पहुंचाने का मौका देती है। पोला पर्व कुम्हार समुदाय के लिए रोजगार और पारंपरिक हस्तकला को जीवित रखने का भी माध्यम है। मिट्टी के खिलौनों में दिख रही छत्तीसगढ़ी संस्कृति जयस्तम्भ चौक में सजी दुकानों पर मिट्टी से बने नांदिया बैल विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। इसके साथ ही चूल्हा, चक्की, हांडी, पोरा और अन्य छोटे-छोटे घरेलू सामान भी उपलब्ध हैं। इन खिलौनों को देखकर बच्चों के चेहरे पर उत्साह नजर आ रहा है, वहीं बुजुर्ग इन पारंपरिक खिलौनों में छत्तीसगढ़ की पुरानी संस्कृति की झलक देख रहे हैं। आधुनिक दौर में जहां बच्चों के मनोरंजन के साधन तेजी से बदल रहे हैं, वहीं पोला के अवसर पर मिट्टी के पारंपरिक खिलौनों की खरीदारी आज भी इस लोक परंपरा को जीवित रखे हुए है। परंपरा के साथ रोजगार का भी पर्व पोला केवल बैलों की पूजा का पर्व नहीं, बल्कि किसान, पशुधन, मिट्टी और कुम्हार की मेहनत से जुड़ा लोकपर्व भी है। जयस्तम्भ चौक में लगी मिट्टी के खिलौनों की ये दुकानें इसी परंपरा की तस्वीर पेश कर रही हैं। एक ओर जहां परिवार पोला की तैयारी में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर कुम्हार अपनी कला से तैयार किए खिलौनों को बाजार तक पहुंचाकर पर्व का इंतजार कर रहे हैं। पोला की इस मिट्टी की दुनिया में नांदिया बैल के साथ चूल्हा-चक्की और घरेलू सामान के खिलौने केवल बच्चों के खेलने की चीजें नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी, संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा की पहचान हैं। बाइट 01 - कुम्हार बाइट 02 - कुम्हारीन
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