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BMB ManoharFollow1 Aug 2024, 05:17 am
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करौली नगर परिषद के उपसभापति पद पर अमीनुद्दीन खान निर्वाचित

Karauli, Rajasthan:नगर निकायों में उपाध्यक्ष चुनाव संपन्न, करौली में अमीनुद्दीन खान निर्वाचित, एंकर इंट्रो - करौली जिले के नगर निकायों में उपाध्यक्ष और उपसभापति पद के चुनाव के परिणाम सामने आ गए हैं। करौली नगर परिषद में कांग्रेस के अमीनुद्दीन खान 34 वोट लेकर उपसभापति निर्वाचित हुए, जबकि भाजपा के पुष्पेंद्र उर्फ बबलू शुक्ला को 21 वोट मिले। वहीं हिण्डौन में भाजपा के विक्रम तोमर निर्विरोध उपसभापति चुने गए। टोडाभीम में निर्दलीय देवीसिंह मीना, मंडरायल में कांग्रेस की रेखा भदौरिया और सूरौठ में निर्दलीय आस्था मीणा ने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। सपोटरा में भाजपा की बरफी देवी निर्विरोध निर्वाचित हुईं। करौली नगर परिषद उपसभापति पद के चुनाव में कांग्रेस पार्षद अमीनुद्दीन खान ने जीत दर्ज की। उन्हें 34 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी पुष्पेंद्र उर्फ बबलू शुक्ला को 21 वोट मिले। अमीनुद्दीन खान वार्ड 35 से पार्षद निर्वाचित थे। परिणाम घोषित होने के बाद समर्थकों ने पटाखे चलाकर और मिठाई बांटकर खुशी मनाई। हिण्डौन सिटी नगर परिषद में भाजपा के विक्रम तोमर निर्विरोध उपसभापति निर्वाचित हुए। वे वार्ड 32 से निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए थे और भाजपा के पदाधिकारी भी हैं। रिटर्निंग अधिकारी महेश मान ने निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंपा। समर्थकों ने माला और साफा पहनाकर उनका स्वागत किया。 टोडाभीम नगरपालिका उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय देवीसिंह मीना 20 वोटों से विजयी हुए। उन्हें 27, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी रश्मी को 7 वोट मिले। एक वोट निरस्त हुआ। सभी 35 पार्षदों ने मतदान किया। जीत के बाद समर्थकों ने नारे लगाकर खुशी जताई। सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात रहा。 मंडरायल नगरपालिका उपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस की रेखा भदौरिया ने भाजपा के देवेंद्र शर्मा को 2 वोट से हराया। रेखा को 11 और देवेंद्र को 9 वोट मिले। सूरौठ नगरपालिका में निर्दलीय आस्था मीणा ने 15 वोट हासिल कर प्रवीण सैनी को 10 वोट से हराया। प्रवीण को 5 वोट मिले। आस्था वार्ड 19 से निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुई थीं। रिटर्निंग अधिकारी ने प्रमाण पत्र सौंपकर शपथ दिलाई。 सपोटरा नगरपालिका उपाध्यक्ष पद पर वार्ड 2 की पार्षद बरफी देवी निर्विरोध निर्वाचित हुईं। कांग्रेस की ओर से कोई नामांकन दाखिल नहीं होने के कारण उन्हें निर्विरोध चुना गया। रिटर्निंग अधिकारी अनूप सिंह ने प्रमाण पत्र सौंपा। बरफी देवी ने सपोटरा के विकास को प्राथमिकता देने की बात कही。
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पंचायती राज चुनावों के लिए लॉटरी पुख्ता, 3786 प्रतिनिधियों की सूची जारी

Pali, Rajasthan:पाली में भी पंचायती राज चुनाव का बजेगा बिगुल पाली में भी पंचायत चुनावों को लेकर लॉटरी की प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय तय कर दिया गया है ऐसे में जिले के लिए जिला परिषद सदस्यों, प्रधान एवं पंचायत समिति सदस्यों की लॉटरी 23 सितम्बर को जिला स्तर पर एवं सरपंच एवं वार्ड पंचो की लॉटरी 24 सितम्बर को उपखंड स्तर पर निकाली जाएगी, जिले में पंचायत चुनावों की बात करें तो पंचायतीराज में 9 पंचायत समितियों में प्रधान, 33 जिला परिषद सदस्य, 303 सरपंच एवं 9 पंचायत समितियों में 179 पंचायत समिति सदस्यों व 2931 वार्ड पंचों सहित कुल 3786 जनप्रतिनिधियों के लिए लॉटरी निकाली जाएंगे। इसके बाद इन पदों के लिए चुनाव होगे, वही जिला प्रमुख पद पूर्व में ही SC के लिए आरक्षित कर दी गई थी, लॉटरी सिस्टम को पारदर्शी बनाये रखने के लिए की वीडियोग्राफी होगी वही लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आचार संहिता जल्द लगने के भी आसार है, जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. रविन्द्र गोस्वामी ने चुनाव को लेकर सभी निकायों के लिए रिटर्निंग एवं सहायक रिटर्निंग अधिकारियों की भी नियुक्ति कर दी है।
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टोंक नगर परिषद: फरजाना सईद उपसभापति बनीं, कांग्रेस की भारी जीत

Tonk, Rajasthan:टोंक नगर परिषद उपसभापति चुनाव में कांग्रेस की फरजाना सईद की जीत कांग्रेस प्रत्याशी फरजाना सईद ने भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश पांडे को 13 वोटों के अंतर से हराकर उपसभापति पद पर जीत दर्ज की। चुनाव में फरजाना सईद को कुल 36 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश पांडे के खाते में 23 वोट आए। इस तरह फरजाना सईद ने 36 बनाम 23 के अंतर से जीत हासिल की। उपसभापति चुनाव के परिणाम के बाद कांग्रेस खेमे में खुशी का माहौल देखने को मिला। समर्थकों ने जीत पर खुशी जताई और नवनिर्वाचित उपसभापति फरजाना सईद का स्वागत किया। गौरतलब है कि टोंक नगर परिषद में सभापति पद पर भी कांग्रेस के मयंक गोयल निर्वाचित हुए हैं। अब उपसभापति पद पर फरजाना सईद की जीत के साथ नगर परिषद के दोनों प्रमुख पद कांग्रेस के पास आ गए हैं。
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ईश्वर गुप्त पुल पर टोल दोबारा शुरू, आज अचानक बंद

Chinsurah, West Bengal:ত্রিন মাস বন্ধ থাকার পর ঈশ্বর গুপ্ত সেতুতে টোল নেওয়া চালু হয়েছিল, ২৪ ঘন্টা কাটল না ফের বন্ধ হয়ে গেলো টোল আদায়। হুগলির বাঁশবেড়িয়া একদিকে অপরদিকে নদীয়ার কল্যাণী। গঙ্গার মাঝে ঈশ্বর গুপ্ত সেতু। সেই সেতুতে টোল আদায় হত। নতুন সরকার আসার পর সরকারি নির্দেশে অনুমোদনহীন টোল গেট গুলো বন্ধ করা হয়। কিন্তু এটি সরকারি অনুমতি টোল। গাড়ি চালকদের থেকে অভিযোগ পেয়ে সপ্তগ্রামের বিধায়ক স্বরাজ ঘোষ টোল বন্ধের নির্দেশ দেন। ঈশ্বর গুপ্ত সেতু জীর্ণ হয়ে যাওয়ায় ভারীযান চলাচল বন্ধ রয়েছে দীর্ঘদিন। ছোট চার চারাকা গাড়ি বাইক চলাচল করে। ছোট গাড়ি থেকে টোল নেওয়া হতো। ফাস্ট্যাগ ব্যবস্থা না থাকায় গাড়ি চালকদের থেকে টোল আদায় নিয়ে সমস্যা দেখা দিচ্ছিল। তার উপর টোল বন্ধ নিয়ে সরকারি নির্দেশ নিয়ে বিভ্রান্তি ছড়ানোয় অনেক গাড়ি চালক টোল দিতে অসম্মত হয়। তারপর টোল বন্ধ হয়ে যায়। প্রায় তিন মাস বন্ধ থাকার পর গতকাল থেকে নতুন করে টোল নেওয়া শুরু হয়। কিন্তু দেখা যায় আজ থেকে আবার বন্ধ হয়ে যায় টোল নেওয়া। টোলের হারেও কিছুটা পরিবর্তন করা হয়েছিল। আগে যেখানে গাড়ি অনুযায়ী ১০, ২০ এবং ৪০ টাকা পর্যন্ত টোল নেওয়া হতো, সেখানে বর্তমানে নতুন হারে ৫, ১৫ এবং ৩০ টাকা টোল নেওয়া হচ্ছিল। টোল ফের চালু হওয়ায় স্বস্তির নিঃশ্বাস ফেলছিলেন টোল কর্মীরা। কিন্তু আবার টোল বন্ধ হয়ে যাওয়ার ফলে চিন্তায় পড়লেন টোল কর্মীরা। অন্যদিকে আজ টোল বন্ধ হওয়ায় বেশ কয়েকজন গাড়িচালক খুশি হন। তাঁদের বক্তব্য, সেতু পারাপারের জন্য টোল দেওয়া তাঁদের উপর অতিরিক্ত আর্থিক বোঝা সৃষ্টি করছে। ঈশ্বর গুপ্ত সেতুর টোল বন্ধ রাখা নিয়ে পি ডব্লিউ ডি হাইওয়ে ডিভিশনের এক্সিকিউটিভ ইঞ্জিনিয়ার সুজয় সরকার জানান, Uppর্ধ্বতন কর্তৃপক্ষের নির্দেশে চালু হয়েছিল, আবার Upp draft কর্তৃপক্ষের নির্দেশে আপাতত বন্ধ রাখা হচ্ছে। পরবর্তী নির্দেশ না আসা পর্যন্ত বলবত থাকবে। তবে কারন জানা যায়নি, গতকাল নির্দেশ ছিল চালু করার তাই চালু হয়েছিল, আজ আবার নির্দেশ এসেছে বন্ধ রাখার তাই বাধা করা হয়েছে। বৈধভাবেই লিজ দিয়ে টোল আদায় করা হত।
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AISF के नेता पर आरोप, Samsur Ali Mallik ने इस्तीफा दे दिया

Chinsurah, West Bengal:আইএসএফ দলে গণতন্ত্র নেই,আছে নওশাদ সিদ্দিকীর কিছু পদলেহনকারী。 অভিযোগ তুলে দলের সদস্য পদ ছাড়লেন সামসুর আলি মল্লিক。 আইএসএফ চেয়ারম্যান নওশাদ সিদ্দিকীকে দেওয়া বার্তায় তিনি লিখেছেন,,,, প্রতি, মাননীয় চেয়ারম্যান, অল ইন্ডিয়া সেকুলার ফ্রন্ট (AISF) বিষয়: দলের কার্যকরী সভাপতি পদ এবং প্রাথমিক সদস্যপদ থেকে পদত্যাগ。 মহাশয়, গত ১৮ই সেপ্টেম্বর আমি আপনার স্বাক্ষরিত একটি শোকজ চিঠি পেয়েছিলাম। আমাকে জানানো হয়েছিল যে দলের প্রধান পৃষ্ঠপোষক আমার সাথে কথা বলবেন। চিঠিতে উল্লেখিত সময়ে আমি নির্দিষ্ট জায়গায় গিয়ে পৌঁছাই। কিন্তু সেখানে গিয়ে দেখি রাজ্য কমিটির অন্য সদস্যরাও উপস্থিত রয়েছেন। সেদিন আমার সঙ্গে দলের প্রধান পৃষ্ঠপোষকের যা আলোচনা করার ছিল তা তিনি করলেন। কিন্তু আলোচনা মাঝপথে যখন বড় ভাইজান ছিলেন না তখন শাহাবুদ্দিন সিরাজী প্রথমে আমাকে মারতে উদ্যত হন। অ্যাডভোকেট সাবির ভাই তাঁকে আটকে রাখেন । এইসময় রাজ্য কমিটির অন্য সদস্য কুতুবউদ্দিন ফাতেহি আমাকে ধাক্কা মারেন এবং পুরো ঘটনাটি আপনার উপস্থিতিতেই ঘটে। রাগ, ঘৃণা এবং যন্ত্রণা নিয়ে আমি যখন ওই ঘর থেকে বেরিয়ে আসতে চাই, তখন কুতুবউদ্দিন ফাতেহি আমাকে চোর ধরার মতো গায়ের জোরে আটকে রাখেন। ওই ঘরে উপস্থিত আপনি সহ কয়েকজনের ভূমিকা দেখে আজ ভাবতে অবাক লাগে যে এতদিন এরা আমার সহকর্মী ছিলো । আমি আশ্চর্য হয়ে গেলাম যখন দেখলাম, আমাকে শোকজ চিঠি দেওয়ার পর তা আমার হাতে এসে পৌঁছানোর আগেই সোশ্যাল মিডিয়ায় বিভিন্ন জনের হাতে হাতে ঘুরছে এবং আমার সম্পর্কে অত্যন্ত কুরুচিকর মন্তব্য করে একটি সংগঠিত প্রচার চালানো হচ্ছে। আমি তখন কাউকে একটি কথাও বলিনি, পার্টির শৃঙ্খলা রক্ষার দায়বদ্ধতার কারণেই চুপ থেকেছি। অথচ যেদিন আমার হাতে শোকজ চিঠিটি আসে, ওই দিনেই আমার একমাত্র সন্তানের গুরুতর অ্যাক্সিডেন্ট হয় এবং তার একপ্রকার মৃত্যুর সঙ্গে পাঞ্জা লড়ানো পরিস্থিতি তৈরি হয়। যারা এই খবরটা জানতেন না তাদের কথা বাদ দিলাম, কিন্তু আপনি সহ একাধিক রাজ্য নেতৃত্ব এই দুর্ঘটনার খবর জেনেছিলেন। একটিবারের জন্যও কেউ ফোন করে খোঁজ নেননি যে আমার ওপর দিয়ে কী ঝড় বয়ে যাচ্ছে। আমি এই সমস্ত কথাই সেদিন মিটিংয়ে বলেছিলাম, যদিও তার কোনো সদুত্তর পাইনি。 আজ থেকে দশ বছর আগে যে পার্টি গঠনের স্বপ্ন আমরা দেখলাম এবং নিজেদের হাতে তিল তিল করে গড়ে তুলেছিলাম, তার কোনো ছাপ আজ আপনার এবং আপনার নেতৃত্বাধীন কয়েকজনের মধ্যে আর দেখতে পাই না। সাংবিধানিক গণতন্ত্র, সামাজিক ন্যায় এবং মর্যাদা—এই তিন স্তম্ভের ওপর দাঁড়িয়ে অল ইন্ডিয়া সেকুলার ফ্রন্টের জন্ম। আমার প্রত্যক্ষ অভিজ্ঞতায় দেখলাম, পার্টিতে সাংবিধানিক গণতন্ত্র তো দূরের কথা, সাধারণ গণতান্ত্রিক পরিবেশটুকুও আর অবশিষ্ট নেই। আছে শুধু তোষামোদি এবং চরমতম অন্যায় দেখেও চুপ করে থাকা, অথবা সেটাকে ব্ল্যাকমেইল করে আরও অন্যায়ের রাস্তা খুলে দেওয়া। যেখানে দলের কার্যকরী সভাপতির কথা বলার, প্রশ্ন করার কিংবা সমালোচনা করার মতো কোনো পরিবেশ নেই, সেখানে সামাজিক ন্যায় প্রতিষ্ঠার ক্ষেত্র কতটা সঙ্কীর্ণ তা সহজেই অনুমেয়। আমি আমার দীর্ঘ রাজনৈতিক ও শিক্ষকতার জীবনে অনেক কঠিন পরিস্থিতির মধ্য দিয়ে গেছি, কিন্তু এহেন মর্যাদাহানি আর কোথাও হয়নি。 ২০২১ সালে আত্মপ্রকাশের পর থেকে বিরোধী দল হিসেবে এ আই ایس এফ -এর ওপর তৎকালীন শাসক তৃণমূল সরকার লাগাতার আক্রমণ চালিয়ে গেছে। সেই সন্ত্রাসের বিরুদ্ধে আমাদের নিচুতলার কর্মীরা—যাদের কোনো পদ নেই, স্বীকৃতি নেই—যেভাবে মোকাবিলা করেছেন, তাঁদের সাহসী আত্মত্যাগই ছিল দলের সাফল্যের চাবিকাঠি। কিন্তু অত্যন্ত আক্ষেপের বিষয়, রাজ্যে নতুন বিজেপি সরকার আসার পর থেকে দলের কোনো রাজনৈতিক দিশা বা কর্মসূচি নেই। আগের সরকারের সময় আমরা যেভাবে পথে নেমে লাগাতার আন্দোলন করতাম, আজ তার ছিটেফোঁটাও দেখা যায় না। পার্টির অধিকাংশ কর্মী পেশায় দিনমজুর—দিন আনা দিন খাওয়া ঘরের ছেলে। এই কর্মীদের পরিশ্রমকে কাজে লাগিয়ে যেভাবে ওপরতলায় অর্থ এবং ক্ষমতার গোপন আঁতাত তৈরি হয়েছে, তাকে না ভেঙে নতুন করে এক পা-ও এগোনো সম্ভব নয়। লক্ষ লক্ষ খেটে খাওয়া যুবকের সামনে এ আইএসএফ যে নতুন স্বপ্ন হাজির করেছিল, কিছু ক্ষমতালোভী ও দুর্নীতিগ্রস্ত নেতার জন্য সেই স্বপ্ন আজ ভেঙে চুরমার হতে চলেছে。 জনগণের মুক্তির এই স্বপ্নের রাস্তা নির্মাণের একদম শুরুর দিন থেকে আমি ছিলাম। আপনাদের মতো কিছু পদলেহনকারীর জন্য আমি সেই লড়াই মাঝপথে ছেড়ে যেতে পারি না। দলের প্রধান পৃষ্ঠপোষক সমস্ত কিছু বিচার-বিবেচনার জন্য ১৫ দিন সময় চেয়েছিলেন এবং আমাকে অনুরোধ জানিয়েছিলেন এই সময়ে বাইরে কিছু না বলতে এবং পার্টির কোনো কর্মসূচিতে অংশগ্রহণ না করতে। আমি সম্মত ছিলাম। কিন্তু বড় ভাইজান ঘর ছেড়ে চলে যাওয়ার পর যে অপ্রত্যাশিত ঘটনা ঘটল এবং তারপর থেকে সোশ্যাল মিডিয়ায় আমার নীরবতার সুযোগ নিয়ে যেভাবে একতরফা অপপ্রচার চলছে, তাতে চুপ থাকা সম্ভব নহে। আজ পর্যন্ত মৌখিকভাবে এই হেনস্থার জন্য কেউ একবারও দুঃখ প্রকাশ করেননি। চেয়ারম্যান সহ রাজ্য কমিটির কিছু নেতার এই বেপরোয়া মনোভাব এমন পর্যায়ে পৌঁছেছে যা সম্পূর্ণ সংশোধনের অযোগ্য এবং তা প্রধান পৃষ্ঠপোষকেরও আয়ত্তের বাইরে。 সেজন্য আমি সিদ্ধান্ত নিয়েছি, আমার সাধ্যমতো যথাযথ রাজনৈতিক ভূমিকা আমি পালন করে যাব। লড়াইয়ের রাস্তা থেকে আমি সরছি না, কিন্তু নওশাদ সিদ্দিকী এবং তাঁর পদলেহনকারী ব্যক্তিবর্গের সঙ্গে আমি আমার সমস্ত সম্পর্ক ছিন্ন করলাম এবং দলের যাবতীয় দায়িত্ব থেকে পদত্যাগ করছি。 ধন্যবাদান্তে সামসুর আলি মল্লিক
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Bandel के निजी बैंक में FD फर्जीवाड़ा, लाखों उड़े; पुलिस ने आरोपी गिरफ्तार किया

Chinsurah, West Bengal:নকল এফডি সার্টিফিকেট বানিয়ে ব্যান্ডেলের বেসরকারি ব্যাংকে লক্ষ লক্ষ টাকা উধাও! ব্যাঙ্কে বসে গ্রাহকদের সঙ্গে প্রতারণা ব্যাঙ্ক কর্মীর,মাথায় হাত গ্রাহকদের。 বেসরকারি ব্যাংকে ফিক্সড ডিপোজিট (এফডি) করেছিলেন অনেকে। গ্রাহকদের হাতে দেওয়া হয়েছিল ব্যাংকের নাম, কর্মীর এমপ্লয়ি কোড ও স্ট্যাম্প-সহ সার্টিফিকেট এবং রসিদ। কিন্তু পরে ব্যাংকে গিয়ে সেই নথি যাচাই করতে গিয়ে দেখা গেল, সংশ্লিষ্ট এফডির নামে কোনও টাকা জমা নেই। ঘটনায়银行의 একজন কর্মী নিখিল গুপ্তার বিরুদ্ধে प्रतারণার অভিযোগ ওঠে। পুলিশ তাঁকে গ্রেফতার করেছে বলে জানা গেছে。 স্থানীয় সূত্রে জানা যায়, বেশ কয়েক বছর ধরে ব্যান্ডেলের ওই বেসরকারি ব্যাংকে বহু মানুষ তাঁদের সঞ্চিত টাকা ফিক্সড ডিপোজিট করে আসছিলেন। অভিযোগ, ব্যাংকের কর্মী নিখিল গুপ্তাই গ্রাহকদের এফডি সংক্রান্ত বিভিন্ন তথ্য দিয়ে তাঁদের টাকা ফিক্সড ডিপোজিট করানোর প্রক্রিয়া সম্পন্ন করতেন। এফডি করার পর গ্রাহকদের হাতে ব্যাংকের pads-এ তৈরি সার্টিফিকেট ও রসিদ দেওয়া হত। সেই নথিতে ব্যাংকের নাম এবং সংশ্লিষ্ট কর্মীর এমপ্লয়ি কোড-সহ স্ট্যাম্পও ছিল বলে दावा গ্রাহকদের。 ব্যান্ডেলের বাসিন্দা ইন্দ্রজিৎ কৌরের অভিযোগ, তাঁর প্রায় সাড়ে ২৫ লক্ষ টাকা ফিক্সড ডিপোজিট করা হয়েছিল। নিখিল গুপ্তার দেওয়া স্ট্যাম্প-সহ সার্টিফিকেটও তাঁর কাছে ছিল। কয়েক দিন আগে সন্দেহ হওয়ায় তিনি ব্যাংকে গিয়ে নথিগুলি যাচাই করান। সেখানেই তাঁকে জানানো হয়, ওই এফডির বিপরীতে ব্যাংকের রেকর্ডে কোন টাকা নেই। বিষয়টি জানার পর কার্যত মাথায় হাত পড়ে তাঁর。 আর এক গ্রাহকের দাবি, তাঁর প্রায় ১২ লক্ষ টাকা ফিক্সড ডিপোজিট করা হয়েছিল। পরে তিনি জানতে পারেন, নিখিল গুপ্তার বিরুদ্ধে একাধিক গ্রাহকের সঙ্গে জালিয়াতির অভিযোগ উঠেছে। তাঁর বক্তব্য, ‘‘আমরা নিখিলকে দেখে এফডি করিনি। ব্যাংকের সুনাম এবং বিশ্বাসের উপর ভরসা করেই টাকা রেখেছিলাম। এখন আমাদের দাবি, ব্যাংক বিষয়টি খতিয়ে দেখে আমাদের টাকা ফেরতের ব্যবস্থা করুক।’’ ব্যান্ডেল মেরি পার্কের বাসিন্দা অনুশ্রী সেনগুপ্তার অভিযোগ, তাঁদের পরিবারের একাধিক সদস্য মিলে প্রায় ৯ লক্ষ টাকা ফিক্সড ডিপোজিট করেছিলেন। তাঁর কাছেও ব্যাংকের প্যাডে তৈরি সার্টিফিকেট এবং স্ট্যাম্প-সহ নথি রয়েছে বলে দাবি। অনুশ্রী বলেন, ‘‘আমরা নিখিলকে দেখে টাকা রাখিনি। ব্যাংকের উপর ভরসা করেই फिक्सড डিপোজিট করেছিলাম। এখন কীভাবে টাকা ফেরত পাব, সেটাই বুঝতে পারছি না।’’ অভিযোগ সামনে আসার পর মঙ্গলবার ব্যান্ডেল মোড়ের কাছে সংশ্লিষ্ট ব্যাংকের সামনে জড়ো হয়ে ক্ষোভ প্রকাশ করেন একাধিক গ্রাহক। তাঁদের দাবি, প্রথমে ব্যাংক কর্তৃপক্ষকে বিষয়টি জানানো হয়েছিল। পরে পুলিশের কাছে অভিযোগ দায়ের করা হয়。 শেষ খবর পাওয়া পর্যন্ত, ঘটনায় নিখিল গুপ্তাকে পুলিশ গ্রেফতার করেছে বলে জানা গিয়েছে। তবে ঠিক কত জন গ্রাহক এই ঘটনায় ক্ষতিগ্রস্ত হয়েছেন এবং মোট কত টাকা নিয়ে অনিয়মের অভিযোগ উঠেছে, তা এখনও স্পষ্ট নয়। ব্যাংকের অভ্যন্তরীণ তদন্তের পরই এ বিষয়ে বিস্তারিত তথ্য সামনে আসতে পারে。 ব্যাংকের ম্যানেজার বিপ্লব কুমার মন্ডল বলেন, ‘‘বিষয়টি আমাদের জানা আছে। সমস্ত দিক খতিয়ে দেখা হচ্ছে। আমাদের উচ্চতর ব্যাংকিং আধিকারিকরা বিষয়টি তদন্ত করছেন। খুব তাড়াতাড়িই সত্যটা সামনে আসবে।’’ তবে গ্রাহকদের প্রশ্ন, ব্যাংকের নাম ও স্ট্যাম্প-সহ নথি হাতে থাকার পরেও কীভাবে তাঁদের এফডির টাকা ব্যাংকের রেকর্ডে পাওয়া গেল না। সেই প্রশ্নের উত্তরই এখন খুঁজছেন তদন্তকারীরা。 পুলিশ সূত্রে জানা যায় নিখিল এখন পুলিশি হেফাজতে রয়েছে, জোরদার তদন্ত চলছে , খুব তাড়াতাড়ি সত্য সামনে আসবে
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