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Navneet AgarwalNavneet AgarwalFollow27 Sept 2024, 09:00 am
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लोहारा में मादा तेंदुए के साथ दो शावकों का सुरक्षित रेस्क्यू

Bhandara, Maharashtra:शेतशिवारातून दोन बिबट शावकांचे सुरक्षित रेस्क्यू ! लोहारा (धोप) शिवारातील शेतकरी नत्थु ठाकरे यांच्या शेतात मादी बिबट दोन शावकांसह आढळली. दरम्यान प्रामस्थांची गर्दी आणि आरडाओरड झाल्यामुळे मादी बिबट्या लांब गेली. वनविभागाच्या रेस्क्यू टीमने तातडीने पावले उचलल शावकांना सुरक्षितपणे ताब्यात घेतले. प्राथमिक वैद्यकीय तपासणीनंतर तज्ज्ञांच्या सल्ल्याने शावकांचे त्यांच्या आईशी पुनर्मिलन करण्यात येणार आहे. लोहारा (धोप) येथील एका पडीक शेतात दोन चिमुकल्या बिबट शावकांना सुरक्षितपणे रेस्क्यू करण्यात वनविभागाला यश आले आहे.
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छत्रपती संभाजीनगर की लैब में नमूनों का भारी दबाव, विश्लेषण में देरी

Chhatrapati Sambhajinagar, Maharashtra:छत्रपती संभाजीनगर मध्ये अन्न व औषध प्रशासनाच्या विभागीय प्रयोगशाळेत मराठवाडा आणि नाशिक विभागातून दररोज ११० ते २०० अन्न व औषधांचे नमुने विश्लेषणासाठी दाखल होत आहेत. मात्र, प्रयोगशाळेत एकीकडे वाढत्या नमुन्यांचा ओघ आणि दुसरीकडे अपुरे मनुष्यबळ व साधनसामुग्रीमुळे विश्लेषकांवर कामाचा ताण वाढल्याने प्रत्येक नमुन्याला आवश्यक वेळ मिळत नसल्याने अचूकतेवर परिणाम होण्याची भीती आता व्यक्त होत आहे.. सध्या विभागीय प्रयोगशाळेत अन्न विभागासाठी ८, तर औषध विभागासाठी १२ विश्लेषक कार्यरत आहेत. नियमानुसार अन्न विभागातील एका विश्लेषकाने महिन्याला सुमारे ५० नमुन्यांचे विश्लेषण करणे अपेक्षित असते. मात्र, वाढत्या दबावामुळे त्यांना १०० ते १५० नमुन्यांचे विश्लेषण करावे लागत आहे. औषध विभागातही अशीच परिस्थिती आहे. नियमानुसार एका विश्लेषकाने महिन्याला १६ नमुन्यांचे विश्लेषण करणे अपेक्षित असते पण प्रत्यक्षात त्यांना २५ ते ३० नमुन्यांचा निपटारा करावा लागत आहे. एवढ्या वाढीव कामानंतरही प्रयोगशाळेत आजघडीला औषधांचे ७१५ आणि अन्नाचे १,३२२ असे एकूण २,०३७ नमुने प्रलंबित आहेत.
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रींगस जीआरपी चौकी के थानााध्यक्ष श्रीचंद जाखड़ का भावभीनी विदाई

Sikar, Rajasthan:सीकर जिले की रींगस जीआरपी चौकी में जीआरपी थानाधिकारी श्रीचंद जाखड़ के स्थानांतरण पर विदाई समारोह आयोजित किया गया। जाखड़ का नीमकाथाना जीआरपी थाने से जयपुर तबादला होने पर चौकी स्टाफ सहित शहर के प्रबुद्धजनों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी। समारोह की अध्यक्षता स्टेशन अधीक्षक बाबूलाल बाजिया ने की। चौकी प्रभारी मुकेश सैनी ने अतिथियों एवं उपस्थितजनों का स्वागत किया। इस दौरान शहर के प्रबुद्धजनों और जीआरपी स्टाफ ने श्रीचंद जाखड़ का माला पहनाकर एवं साफा बंधवाकर सम्मान किया। समारोह में वक्ताओं ने जाखड़ के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने रेलवे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ आमजन एवं यात्रियों की समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके व्यवहार एवं कार्यशैली की भी उपस्थितजनों ने प्रशंसा की। विदाई समारोह के दौरान जाखड़ ने रींगस जीआरपी चौकी स्टाफ एवं शहरवासियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि स्थानांतरण सरकारी सेवा का हिस्सा है, लेकिन रींगस में मिले स्नेह और सम्मान को वे हमेशा याद रखेंगे। इस दौरान जीआरपी चौकी स्टाफ सहित शहर के अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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फाटक बंद होते हुए भी रेलवे लाइन पार करने से व्यक्ति की मौत, जांच शुरू

Amritsar, Punjab:ਫਾਟਕ ਬੰਦ ਹੋਣ ਦੇ ਬਾਵਜੂਦ ਰੇਲਵੇ ਲਾਈਨ ਪਾਰ ਕਰਨਾ ਪਿਆ ਮਹਿੰਗਾ, ਡੀਐਮਯੂ ਦੀ ਲਪੇਟ ’ਚ ਆ ਕੇ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਮੌਤ ਸਾਈਕਲ ਸਮੇਤ ਬੰਦ ਫਾਟਕ ਹੇਠੋਂ ਲੰਘਣ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼, ਰੇਲਗੱਡੀ ਹੇਠਾਂ ਆਇਆ 40-45 ਸਾਲਾ ਵਿਅਕਤੀ ਰੇਲ ਹਾਦਸੇ ’ਚ ਮ੍ਰਿਤਕ ਦੀ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕੀ ਸ਼ਨਾਖਤ, ਜੀਆਰਪੀ ਨੇ 72 ਘੰਟਿਆਂ ਲਈ ਮੋਰਚਰੀ ’ਚ ਰੱਖੀ ਲਾਸ਼ ਰੇਲਵੇ ਫਾਟਕ ਬੰਦ ਹੋਣ ਦੇ ਬਾਵਜੂਦ ਸਾਈਕਲ ਸਮੇਤ ਰੇਲਵੇ ਲਾਈਨ ਪਾਰ ਕਰਨ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰਨਾ ਇੱਕ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਭਾਰੀ ਪੈ ਗਿਆ। ਡੀਐਮਯੂ ਰੇਲਗੱਡੀ ਦੀ ਲਪੇਟ ਵਿੱਚ ਆਉਣ ਕਾਰਨ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਮੌਕੇ ’ਤੇ ਹੀ ਮੌਤ ਹੋ ਗਈ। ਹਾਦਸੇ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮ੍ਰਿਤਕ ਦੀ ਪਛਾਣ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕੀ, ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਪੁਲਿਸ ਵੱਲੋਂ ਉਸ ਦੀ ਸ਼ਨਾਖਤ ਲਈ ਯਤਨ ਕੀਤੇ ਜਾ ਰਹੇ ਹਨ。 ਜਾਣਕਾਰੀ ਮੁਤਾਬਕ ਡੀਐਮਯੂ ਯਾਤਰੀ ਰੇਲਗੱਡੀ ਫਾਟਕ ਤੋਂ ਲੰਘ ਰਹੀ ਸੀ। ਇਸ ਦੌਰਾਨ ਫਾਟਕ ਬੰਦ ਸੀ ਅਤੇ ਇੱਕ ਵਿਅਕਤੀ ਸਾਈਕਲ ਸਮੇਤ ਫਾਟਕ ਦੇ ਹੇਠਾਂ ਤੋਂ ਲੰਘ ਕੇ ਰੇਲਵੇ ਲਾਈਨ ਪਾਰ ਕਰਨ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰ ਰਿਹਾ ਸੀ। ਇਸੇ ਦੌਰਾਨ ਉਹ ਰੇਲਗੱਡੀ ਦੀ ਲਪੇਟ ਵਿੱਚ ਆ ਗਿਆ। ਟੱਕਰ ਇੰਨੀ ਜ਼ਬਰਦਸਤ ਸੀ ਕਿ ਵਿਅਕਤੀ ਦੇ ਸਿਰ ਅਤੇ ਪੈਰ ’ਤੇ ਗੰਭੀਰ ਸੱਟਾਂ ਲੱਗੀਆਂ ਅਤੇ ਉਸ ਦੀ ਮੌਤ ਹੋ ਗਈ。 ਪੁਲਿਸ ਅਧਿਕਾਰੀ ਮੁਤਾਬਕ ਮ੍ਰਿਤਕ ਦੀ ਉਮਰ ਕਰੀਬ 40 ਤੋਂ 45 ਸਾਲ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਦੱਸੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਉਸ ਕੋਲੋਂ ਸਾਈਕਲ ਤਾਂ ਮਿਲੀ ਹੈ ਪਰ ਫਿਲਹਾਲ ਉਸ ਦੀ ਪਛਾਣ ਨਾਲ ਸਬੰਧਤ ਕੋਈ ਦਸਤਾਵੇਜ਼, ਫੋਟੋ ਜਾਂ ਹੋਰ ਜਾਣਕਾਰੀ ਨਹੀਂ ਮਿਲੀ। ਪੁਲਿਸ ਵੱਲੋਂ ਮ੍ਰਿਤਕ ਦੀ ਸ਼ਨਾਖਤ ਕਰਵਾਉਣ ਲਈ ਆਸ-ਪਾਸ ਦੇ ਇਲਾਕਿਆਂ ਅਤੇ ਧਾਰਮਿਕ ਸਥਾਨਾਂ ਰਾਹੀਂ ਵੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਪਹੁੰਚਾਉਣ ਦੇ ਯਤਨ ਕੀਤੇ ਜਾ ਰਹੇ ਹਨ。 ਪੁਲਿਸ ਨੇ ਮ੍ਰਿਤਕ ਦੀ ਲਾਸ਼ ਨੂੰ ਜੀਆਰਪੀ ਦੀ ਮੋਰਚਰੀ ਵਿੱਚ ਰੱਖਿਆ ਹੈ, ਜਿੱਥੇ ਕਰੀਬ 72 ਘੰਟਿਆਂ ਤੱਕ ਸ਼ਨਾਖਤ ਲਈ ਰੱਖਿਆ ਜਾਵੇਗਾ। ਜੇਕਰ ਇਸ ਸਮੇਂ ਦੌਰਾਨ ਵੀ ਮ੍ਰਿਤਕ ਦੀ ਪਛਾਣ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕਦੀ ਤਾਂ ਪੁਲਿਸ ਵੱਲੋਂ ਕਾਨੂੰਨੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਤਹਿਤ ਅਗਲੀ ਕਾਰਵਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇਗੀ。 ਪੁਲਿਸ ਵੱਲੋਂ ਇਸ ਮਾਮਲੇ ਵਿੱਚ ਕਾਨੂੰਨੀ ਕਾਰਵਾਈ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਹੈ। ਅਧਿਕਾਰੀ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਮਾਮਲੇ ਵਿੱਚ ਬੀਐਨਐਸ ਦੀ ਧਾਰਾ 194 ਤਹਿਤ ਕਾਰਵਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ ਮ੍ਰਿਤਕ ਦੀ ਸ਼ਨਾਖਤ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਅਗਲੀ ਕਾਨੂੰਨੀ ਕਾਰਵਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇਗੀ。 ਪੁਲਿਸ ਨੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਅਪੀਲ ਕੀਤੀ ਹੈ ਕਿ ਰੇਲਵੇ ਫਾਟਕ ਬੰਦ ਹੋਣ ਸਮੇਂ ਕਿਸੇ ਵੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਜਲਦਬਾਜ਼ੀ ਨਾ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ ਅਤੇ ਫਾਟਕ ਦੇ ਹੇਠਾਂ ਜਾਂ ਬੰਦ ਰਸਤੇ ਰਾਹੀਂ ਰੇਲਵੇ ਲਾਈਨ ਪਾਰ ਕਰਨ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਨਾ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ, ਤਾਂ ਜੋ ਅਜਿਹੇ ਹਾਦਸਿਆਂ ਤੋਂ ਬਚਿਆ ਜਾ ਸਕੇ。
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80 साल बाद भी सीमा के भीतर हाबासपुर-झोरपाड़ा के लोग आज़ादी से महरूम

Ranaghat, West Bengal:৮০তম স্বাধীনতা দিবসেও তারকাঁটায় বন্দী স্বাধীনতা! নদিয়ারের সীমান্ত গ্রামে বন্দিজীবন শতাধিক মানুষের একদিকে দেশজুড়েও ৮০তম স্বাধীনতা দিবস উদ্‌যাপনের প্রস্তুতি। আর অন্যদিকে, দেশের মাটিতেই যেন বন্দিজীৱন কাটাচ্ছেন নদিয়ার ধানতলা থানার অন্তর্গত হাবাসপুর ও ঝোরপাড়া গ্রামের বাসিন্দারা। ভারত-বাংলাদেশ সীমান্তের কাঁটাতারের বেড়ার ভিতরে থাকা এই গ্রামগুলির মানুষের অভিযোগ, দৈনন্দিন জীবনযাপনের ছোটখাটো কাজেও তাঁদের বিএসএফের অনুমতির উপর নির্ভর করতে হয়। স্বাধীনতার ৮০ বছর পরেও তাঁদের প্রশ্ন—তাহলে স্বাধীনতা কোথায়? দেশ স্বাধীনতার ৮০ বছর পূর্তি উদ্‌যাপনে মেতে উঠবে। সর্বত্র উড়বে তেরঙ্গা, হবে দেশাত্মবোধের অনুষ্ঠান। কিন্তু নদিয়ার হাবাসপুর ও ঝোরপাড়া গ্রামের ছবিটা যেন সম্পূর্ণ আলাদা। ভারত-বাংলাদেশ সীমান্তের কাঁটাতারের বেড়ার ভিতরে বসবাস করেন এই দুই গ্রামের শতাধিক মানুষ। দেশের নাগরিক হয়েও সীমান্তের কড়া নজরদারির মধ্যে কাটছে তাঁদের প্রতিদিনের জীবন。 স্থানীয় বাসিন্দাদের অভিযোগ, চাষের জমিতে যাওয়া, বাজারে যাওয়া কিংবা নিত্যপ্রয়োজনীয় কাজেও অনেক সময় বিএসএফের অনুমতি নিতে হয়। নির্দিষ্ট সময়ের মধ্যে যাতায়াত করতে হয়。 গ্রামবাসীদের দাবি, এই নিয়মের কারণে স্বাভাবিক জীবনযাপন কার্যত অসম্ভব হয়ে পড়েছে। সবচেয়ে বেশি সমস্যায় পড়তে হয় জরুরি পরিস্থিতিতে। অসুস্থ রোগীকে চিকিৎসার জন্য নিয়ে যাওয়া থেকে শুরু করে মৃত্যু হলে শেষকৃত্যের জন্য যাতায়াত—প্রতিটি ক্ষেত্রেও সীমান্তের নিয়ম মেনে চলতে হয় বলে অভিযোগ বাসিন্দাদের। চাষবাসই এই এলাকার অধিকাংশ পরিবারের প্রধান জীবিকা। কিন্তু কাঁটাতারের বেড়া এবং সীমান্তের বিধিনিষেধের কারণে জমিতে নিয়মিত কাজ করতেও সমস্যার মুখে পড়তে হয় বলে অভিযোগ。 গ্রামবাসীদের কথায়, স্বাধীনতার ৮০ বছর পরেও তাঁদের জীবন যেন অনুমতি আর নিষেধের বেড়াজালে আটকে রয়েছে। প্রতি বছর স্বাধীনতা দিবস আসে। পতাকা ওঠে, বক্তৃতা হয়, স্বাধীনতার কথা বলা হয়। কিন্তু হাবাসপুর ও ঝোরপাড়ার মানুষের জীবনযাত্রার সমস্যার স্থায়ী সমাধান এখনও হয়নি বলে অভিযোগ। তাঁদের প্রশ্ন—দেশের ভিতরে থেকেও যদি প্রতিটি পদক্ষেপে অনুমতির অপেক্ষা করতে হয়, তাহলে সেই স্বাধীনতার স্বাদ তাঁরা পাবেন কবে? কাঁটাতারের বেড়া কি শুধু সীমান্তকে আলাদা করে? নাকি সেই বেড়ার ভিতরেই আটকে পড়েছে শতাধিক মানুষের স্বাধীন জীবন? উত্তর খুঁজছে নদিয়ার হাবাসপুর ও ঝোরপাড়া।
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टनल में मलबा-पानी: 3 लोग अभी लापता, राहत अभियान जारी

Karnaprayag, Uttarakhand:एंकर मायापुर (पीपलकोटी) स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में मलबा एवं पानी भरने की घटना के बाद जिला प्रशासन की ओर से रातभर राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी रहा। जिलाधिकारी गौरव कुमार स्वयं घटनास्थल पर मौजूद रहकर रेस्क्यू अभियान की निगरानी कर रहे हैं। टीएचडीसी की विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना के टीआरटी टनल की लंबाई लगभग 3 किलोमीटर है। टनल के लगभग 1.50 किलोमीटर हिस्से में भूधंसाव के कारण मलबा एवं पानी आने की स्थिति उत्पन्न हुई है। इसके चलते टनल में कार्यरत कुछ लोग अंदर फंस गए। टनल में कुल 22 लोगों के फंसे होने की सूचना थी, जिनमें से रातभर चले राहत एवं बचाव अभियान में अब तक 19 लोगों को बाहर निकाल लिया गया है। वहीं शेष 3 लोगों की तलाश एवं रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है। घटना के बाद राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग के लिए टनल के अंदर गए 6 बचावकर्मी भी सुरक्षित हैं। घटना में अभी तक 7 लोगों की मृत्यु की सूचना है। रेस्क्यू किए गए घायलों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय गोपेश्वर लाया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है। चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा घायलों के उपचार एवं स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है। राहत एवं बचाव अभियान में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस सहित अन्य तकनीकी एवं विशेषज्ञ टीमें मौके पर मौजूद हैं। टनल के भीतर मलबा एवं पानी की चुनौती के बीच बचाव दल अत्यंत सावधानी एवं समन्वय के साथ अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं。 जिलाधिकारी गौरव कुमार ने मौके पर अधिकारियों एवं रेस्क्यू टीमों से लगातार जानकारी लेते हुए शेष लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सभी आवश्यक संसाधनों एवं तकनीकी सहायता का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन द्वारा घटनास्थल पर राहत एवं बचाव कार्यों के साथ ही घायलों के उपचार एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी लगातार जुटाई जा रही हैं。 जिला प्रशासन द्वारा पूरे घटनाक्रम पर लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा रेस्क्यू अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है।
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छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने मस्जिद-दरगाहों में तिरंगा फहराने की अपील

Begun, Rajasthan:स्वतंत्रता दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने प्रदेश की सभी मस्जिदों, दरगाहों और मदरसों में तिरंगा फहराने की अपील की है.. वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने कहा कि 15 अगस्त को देशभक्ति, आपसी एकता और भाईचारे के साथ यौमे आजादी मनाया जाए.. उन्होंने कहा कि इस्लाम मुल्क से मोहब्बत का पैगाम देता है और भारत का मुसलमान अपने देश और संविधान का सम्मान करता है.. साथ ही उन्होंने तिरंगा फहराने का विरोध करने वालों पर भी तीखी टिप्पणी की है.. उन्होंने कहा कि जो लोग ध्वजारोहण के खिलाफ हैं, वो देशभक्त नहीं बताए बल्कि देशद्रोही है.. वक्फ बोर्ड ने सभी वक्फ संस्थाओं से पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है..
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रोडवेज कर्मचारियों ने 5 सितंबर की हड़ताल की चेतावनी दी; वेतन-मानदेय बढ़ोतरी की मांग

Chandigarh, Chandigarh:चंडीगढ़ रोडवेज कर्मचारियों से दी गई हड़ताल की चेतावनी मांगे नहीं मानी गईं तो 5 सितंबर को की जाएगी हड़ताल रोडवेज कर्मचारियों का आरोप, 15 दिन में बैठक बनाने का दिया था आश्वासन लेकिन बैठक नहीं बुलाई गई जिसके चलते कर्मचारियों ने 5 सितंबर को हड़ताल का ऐलान रोडवेज कर्मचारियों की मुख्य मांगे परिचालकों का पे-ग्रेड बढ़ाना परिचालकों को लिपिकों की तर्ज पर तीन वेतन वृद्धि जोखिम वाली ड्यूटी के लिए जोखिम भत्ता स्टैंड इंचार्ज के पद सृजित कर पदोन्नति 2016 के भर्ती चालकों को पक्का करना 2018 के वर्कशॉप कर्मचारियों को तकनीकी पदों पर पदोन्नति एचकेआरएन के तहत लगे कर्मचारियों को नियमित करना इलेक्ट्रिक बसों की ठेका व्यवस्था खत्म करना अर्जित अवकाश का लाभ बढ़ाना शामिल है।
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मेदिनीनगर में कोयल नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब, प्रशासन सतर्क

Babhandih, Jharkhand:मेदिनीनगर में लगातार बारिश के बाद कोयल नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। नदी का पानी अब खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। जलस्तर बढ़ने से मेदिनीनगर स्थित कोयल रिवर फ्रंट का पूरा हिस्सा नदी के पानी में समा गया है। नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के इलाकों में भी लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। प्रशासन ने लोगों को कोयल नदी और उसके आसपास के क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी है। साथ ही नदी के किनारे अनावश्यक भीड़ नहीं लगाने और बच्चों को नदी से दूर रखने की अपील की गई है। प्रशासन लगातार नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों ने लोगों से किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है。
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