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पीलीभीत में शारदा-देवहा नदियों से पानी छोड़ने पर बाढ़, 35 गांव प्रभावित

Pilibhit, Uttar Pradesh:पीलीभीत की शारदा नदी में बनबसा बैराज से पानी छोड़ा गया है तो वहीं देवहा नदी में डियूनी बैराज से पानी छोड़ा गया है जिसके चलते शहर में बाढ़ आ गई है साथ ही ग्रामीण इलाकों में 35 गांव बाढ़ के मुहाने पर आ गए हैं कलेक्ट्रेट,कचहरी व पुलिस लाइन जाने वाले रास्ते पर भी पानी आ गया है जिससे लोग कलेक्टर व कचहरी नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसके साथ ही पीलीभीत टनकपुर हाईवे पर भी पानी आने की संभावना बनी हुई है। जिससे उत्तराखंड के टनकपुर को जाने में लोगों को समस्या आ सकती है जिलाधिकारी ने अलर्ट घोषित किया है साथ ही लोगों से ज्यादा पैनिक ना होने की बात कही है उनका कहना है कि प्रशासन नेपाल से निपटने की सभी तैयारियां कर ली है लोग परेशान ना हो किसी भी आपात स्थिति में कंट्रोल रूम के नंबर व डीएम का स्वयं का नंबर लोग उपयोग कर सकते हैं। हालांकि बारिश नहीं आ रही है इसके बावजूद नदियां पहाड़ों पर हो रही बारिश से अपना गई है जिसके चलते शहर में बाढ़ की स्थिति बन गई है बीएसए ने भी बाढ़ के दृष्टिगत 3 सितंबर की सभी विद्यालयों व सभी बोर्ड के स्कूलों की छुट्टी घोषित की है।
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दिलिप घोष के बयानों से राजनीतिक हलचल तेज, कई मुद्दे उछले

Salt Lake City, Utah:Dilip Ghosh Reaction on several political issue. দিলীপ ঘোষ। ১)হোটেল থেকে মিলল পচা মাংস! সল্টলেক এবং মধ্যমগ্রামের প্রশাসনিক অভিযান। একদিকে বেআইনি হোটেল রেস্তোরাঁ ভরে গেছে। অন্যদিকে এই অস্বাস্থ্যকর পচা মাংস খাওয়ানো এটা বহুদিন ধরে চলে আসছে। সবে সবে আমাদের প্রশাসনের তরফ থেকে অভিযান শুরু হয়েছে। যেখানেই গ্রাহকদের থেকে অভিযোগ পাওয়া যাচ্ছে অভিযান হচ্ছে। এটা করতে সময় লাগবে, অনেকদিন ধরে এই প্র্যাকটিস হয়ে আসছে। বেআইনিভাবে সরকারি জায়গায় হোটেল হয়েছে, কোন বিধি মানা হয়নি। বেশিরভাগ হোটেল রাস্তার ধারে, সেখানে পরিছন্নতা এবং স্বাস্থ্যবিধি মানা হয় না। সেই রকম হলে তো সবগুলোই বন্ধ করে দিতে হয়, আমরা প্রশাসন থেকে চেষ্টা করছি। যারা নিজের জায়গায় হোটেল করেছেন প্রয়োজনীয় অনুমতি লাইসেন্স নিতে হবে তবে চলবে। যারা ব্যবসার সঙ্গে যুক্ত আছেন তাদের সতর্ক থাকা উচিত। নিয়মকানুন মেনেই করা উচিত। ২)অভিষেক বন্দ্যোপাধ্যায় এর হাজিরা। আপনার কাছে ফুটেজ আছে, উনি আদালতে যান। কিন্তু উনি যেটা করেছেন, সেটা ঠিক নয়। সেটাই полиция বলেছে। সবকিছু ঠিকঠাক আছে কিনা সেটাই দেখতে গিয়েছিল। এতে অসন্তুষ্ট হওয়ার কি আছে? উনি নেতা লোক। যদি আইনের বাইরে কাজ করেন, তাহলে সমাজে ভুল বার্তা যাবে। সেটা করা উচিত নয়। ৩)এবার হিঙ্গলগঞ্জ, সেখানেও ধর্মান্তকরণের চেষ্টা। সুন্দরবন এলাকা জঙ্গলমহলে এবং কলকাতার বস্তি এলাকায় কিছু জায়গায় ধর্মান্তকরণের চেষ্টা চলছে। এই খবর আমাদের কাছেও থাকে। এগুলো ঠিক নয়, আগের সরকার এই সব বিষয়গুলো দেখত না। ভোটের কথা মাথায় রাখতো। কিন্তু এতে সমাজে একটা বিশৃঙ্খলার সৃষ্টি হয়। পুলিশ কিছু কিছু ব্যবস্থা নিয়েছে। ধীরে ধীরে এগুলো বন্ধ হবে। সাধারণ মানুষকে সতর্ক থাকতে হবে, এই ধরনের ধর্মান্তকরণের ফলেই দেশভাগ হয়েছে আমাদের। সেটা যাতে দ্বিতীয়বার না হয়, সেই জন্য কাউকে অনুমতি দেওয়া হবে না। ৪)পাকিস্তানে হিন্দু মন্দির ভাঙ্গা হলো! পাকিস্তান যদি নিজের দেশকে গড়ার চেষ্টা করত তাহলে এই দুর্দশা হতো না। তারা এটা না করে অন্য ধর্মের লোককে উৎপিরণ করা। অন্য ধর্মের ধর্মস্থান নষ্ট করা। এতেই বেশি সময় দিয়েছে। এর ফলে উন্নত দেশ কিভাবে ধ্বংস হয় পাকিস্তানকে দেখলেই তা বোঝা যায়। আজ বাংলাদেশেও শুরু হয়েছে। এসব তাদের নিজের অস্তিত্বকেই বিপন্ন করবে। পৃথিবীতে এইভাবে কোন দেশ বড় হতে পারেনি। এটা চলেছে ওদের ওখানে আর এতে ওদেরই সর্বনাশ হচ্ছে। ৫)পেঁয়াজের দাম নিয়ন্ত্রণে কেন্দ্র থেকে আসছে পেঁয়াজ। ৩৫ টাকা কিলো দরে ন্যায্য মূল্যের দোকানে। কেন্দ্রীয় সংস্থা নাফেডের তরফ থেকে আমাদের এখানে পেঁয়াজ দেওয়া শুরু হয়ে গেছে। ৩৫ টাকা কিলো দু কিলোর প্যাকেট ৭০ টাকায়। আমিও উদ্বোধন করেছি। নাসিকে যখন পেঁয়াজ উৎপাদন হয় তখন এই সংস্থা পেঁয়াজ কিনে রাখে। এখন পশ্চিমবাংলায় যখন পেঁয়াজের দাম বাড়তে শুরু করেছে তখন नासিক থেকে এই সংস্থার গাড়ি আসছে এবং বিভিন্ন জেলাতে সেই পেঁয়াজ পাঠানো হচ্ছে। ৬)ব্রাজিল ভারত খেলা! আজ থেকে টিকিট! শান্তিপূর্ণ হবে তো? আশা করি এবার ঠিকঠাক হবে। বেশি নেতারা যদি ইনভলভ হন তাহলেই গন্ডগোল হয়। গত বছর নেতারা মেসিকে নিয়ে মোটামুটি তৃণমূল কংগ্রেসের যোগদানই করিয়ে দিয়েছিলেন। যেভাবে তার সঙ্গে ব্যবহার করা হয়েছিল। বাড়ির লোকজন চাকর বাকর নিয়ে গিয়ে ছবি তোলা হয়েছিল। আর যারা পয়সা দিয়ে টিকিট কেটেছিল তারা দেখতেই পায়নি। কিছুই দেখা হলো না শুধু একটা সার্কাস হলো। সেই ঘটনার তদন্ত এখনো চলছে। যারা এই ঘটনার সঙ্গে যুক্ত তাদেরকে সাজা পেতে হবে। ৭. দমদমের তৃণমূল কাউন্সিলর কেয়া দাস মুখ্যমন্ত্রী শুভেন্দু অধিকারীর সঙ্গে দেখা করলেন। উদ্দেশ্য কি? দেখুন আমার সঙ্গেও অনেকে এসে দেখা করেন। তারমানে এই নয় যে, রাজনৈতিক উদ্দেশ্য বা ব্যক্তিগত কারণ। মুখ্যমন্ত্রীর সঙ্গে সবাই দেখা করতে পারেন। এর মধ্যে কোন ওষুধ উদ্দেশ্য রয়েছে বলে আমি মনে করি না। ৮) সাংসদ মহুয়া মৈত্রকে এলাকায় প্রবেশ করতে গেলে পুলিশ নিয়ে ঢুকতে হবে। এত ভয় কেন সাংসদের? জনপ্রতিনিধি জনরোষের ভয় পাচ্ছেন কেন? পৈলানেও নতুন অভিযোগ সংসদের বিরুদ্ধে। মহুয়া মৈত্র একজন সাংসদ, বিতর্কিত মন্তব্য করেন। উনার দল বিব্রত। উনি সংসদীয় এলাকায় গিয়ে বিতর্কিত মন্তব্য করবে, মানুষ কি তাহলে আর ছেড়ে দেবে? অভিযোগ হবেই।
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रायसेन के अस्पताल में आयुष्मान कार्ड से फर्जी भर्ती, लाखों की ठगी का आरोप

Raisen, Madhya Pradesh:मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के मंडीदीप के एक निजी अस्पताल द्वारा एक शिविर लगाकर बीपी शुगर के 17 मरीजों को ढूंढ कर अपनी ही गाड़ी से ले जाकर अस्पताल में लगभग 7 दिन तक भरती रखा गया और इलाज के नाम पर उन्हें कुछ नहीं दिया गया. आयुष्मान कार्ड से उनके इलाज के नाम पर लाखों रुपए निकाल लिये गये. अस्पताल में भर्ती 17 मरीज ने छुट्टी होने के बाद मीडिया को बुलाकर अपनी आप बीती सुनाई कि कैसे फर्जी तरीके से जबरदस्ती भर्ती रखा गया और इलाज के नाम पर एक-दो बोतल चढ़ाने के अलावा कुछ नहीं किया गया. ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल ने किसी ग्रामीण को यह भी नहीं बताया कि उनके इलाज के नाम पर कितनी राशि आयुष्मान कार्ड के माध्यम से निकल गई. भोले-भाले गरीब बुजुर्गों को आयुष्मान में फर्जी तरीके से भर्ती कर राशि निकाल ली गई. भगवती बाई ने बताया कि उन्हें 8 दिन तक घुटनों के दर्द की शिकायत के बाद भरती रखा गया लेकिन लाभ नहीं हुआ; मातादीन ने कहा कि वह सांस लेने की परेशानी से जूझ रहे थे और 8 दिन भरती रहने के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ. इतने बड़े पैमाने पर 17 लोगों के साथ मंडीदीप के निजी अस्पताल द्वारा फर्जी भर्ती कर आयुष्मान की राशि निकाली गई. अब बुजुर्गों का आरोप है कि इस अस्पताल पर कार्रवाई होनी चाहिए. इस मामले में रायसेन कलेक्टर का कहना है कि मामला की गंभीरता से जांच कराई जाएगी और दोषी होगा तो कार्रवाई की जाएगी.
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भैरोगंज में गोलीबारी: उप मुखिया अशोक दास घायल, रंजिश का संदेह

Bagaha, Bihar:बगहा से बड़ी ख़बर आ रहीं है जहाँ भैरोगंज थाना क्षेत्र के कपरधिक्का में बुधवार की देर शाम आपसी रंजिश को लेकर अज्ञात अपराधियों ने भैरोगंज पंचायत के उप मुखिया अशोक दास और वार्ड सदस्य पति राधेश्याम राम को गोली मार दीं। गोली लगने से दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घटना के बाद इलाके में अफरा तफरी मच गई। सूचना डायल-112 और भैरोगंज थाना पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को अनुमंडलीय अस्पताल बगहा भेजा गया; अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार किया। दोनों की गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए जीएमसीएच बेतिया रेफर कर दिया गया है। सरकारीय योजनाओं के बारे में भी आपसी रंजिश के कारण घटना बताई जा रही है। इस सम्बन्ध में एसडीपीओ बगहा ने बताया है कि घायलों की पहचान कपरधिक्का वार्ड संख्या 9 निवासी 40 वर्षीय अशोक दास और लक्ष्मीपुर वार्ड संख्या 6 निवासी 38 वर्षीय राधेश्याम राम, पिता रामेश्वर राम के रूप में हुई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक घटना के पीछे पुरानी रंजिश को लेकर विवाद बताया जा रहा है। गोलीबारी के वास्तविक कारणों और इसमें शामिल अपराधियों की पहचान को लेकर पुलिस जांच कर रही है। वहीं पूर्व मुखिया मुन्ना दास समेत दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। एसडीपीओ ने बताया है कि घटना की सूचना मिलते हीं भैरोगंज थानाध्यक्ष सीता केवट पुलिस जवानों के साथ घटनास्थल पर पहुंचीं। पुलिस ने तत्काल घायलों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। इसके बाद एसडीपीओ निहार भूषण भी अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचे और पुलिस अभिरक्षा में दोनों घायलों का इलाज कराया गया। चिकित्सकों द्वारा गंभीर स्थिति बताए जाने के बाद दोनों को जीएमसीएच बेतिया भेज दिया गया है। घटना के बाद पुलिस ने आसपास के इलाके में छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस अपराधियों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस विभिन्न बिंदुओं पर मामले की गहन जांच में जुटी है। बाइट - निहार भूषण, SDPO बगहा
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रुद्रप्रयाग में चट्टान टूटने से मंदाकिनी नदी में उफान खतरा, सतर्क रहने की अपील

Noida, Uttar Pradesh:रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड: रुद्रप्रयाग जिले में लगातार बारिश के बीच, बंटोली के पास एक चट्टान का हिस्सा टूट गया, जिससे मोरखंडा नदी में भारी मात्रा में मलबा और पत्थर बह गए। इस घटना से नदी का पानी का लेवल बढ़ गया है और मंदाकिनी नदी का पानी का लेवल भी अचानक बढ़ने की चिंता बढ़ गई है। DDRF मध्यमहेश्वर से मिली जानकारी के बाद, कुंड में रेणु हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को अलर्ट पर रखा गया है। इस बीच, रुद्रप्रयाग नगर पालिका और तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि और उखीमठ की नगर पंचायतों में लाउडस्पीकर से अनाउंसमेंट किए जा रहे हैं, जिसमें नदी किनारे के इलाकों में रहने वालों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से नदियों, नालों और नदी घाटों से दूर रहने की अपील की है। कमजोर और नदी किनारे के इलाकों में रहने वाले लोगों को बहुत सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इमरजेंसी की स्थिति में, लोगों से तुरंत डिस्ट्रिक्ट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर या लोकल प्रशासन से संपर्क करने, अफवाहों पर ध्यान न देने और पुलिस और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है。
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गंगोत्री ग्लेशियर की छोटी झीलों से तत्काल खतरा नहीं; निगरानी जारी

Noida, Uttar Pradesh:देहरादून: गंगोत्री ग्लेशियर इलाके में कुछ छोटी ग्लेशियल झीलें बनने और उनसे जुड़े खतरों के बारे में अलग-अलग मीडिया में खबरें आ रही हैं। इन खबरों को देखते हुए, उत्तराखंड स्टेट डिज़ disaster मैनेजमेंट अथॉरिटी (USDMA) ने वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ हिमालयन जियोलॉजी से साइंटिफिक असेसमेंट और मौजूदा हालात पर अपडेट मांगा है। इंस्टीट्यूट के मुताबिक, इलाके में देखी गई ज़्यादातर छोटी ग्लेशियल झीलें टेम्पररी होती हैं और उनमें पानी की मात्रा बहुत कम होती है। ये झीलें मुख्य रूप से तब बनती हैं जब ग्लेशियर की सतह से पिघला हुआ पानी बर्फ पर छोटे-छोटे गड्ढों में टेम्पररी तौर पर जमा हो जाता है। इनका साइज़ और पानी की मात्रा तापमान, बर्फ और बर्फ के पिघलने, बारिश और सतह की स्थितियों में बदलाव के आधार पर तेज़ी से बदल सकती है। इसलिए, ऐसी झीलें पानी के निकलने, दोबारा जमने या ग्लेशियर की सतह में बदलाव के कारण अपने आप गायब होने से पहले कुछ समय तक दिखाई दे सकती हैं। गंगोत्री ग्लेशियर इलाके में देखी गई झीलें साइज़ में काफी छोटी होती हैं और उनमें पानी की मात्रा बहुत कम होती है। बड़ी ग्लेशियल झीलों के उलट, इनमें आमतौर पर बहुत ज़्यादा पानी जमा करने की क्षमता नहीं होती है। इसलिए, अभी मौजूद साइंटिफिक सबूतों के आधार पर, इन छोटी सुपरग्लेशियल झीलों से बड़े पैमाने पर बाढ़ या ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) का कोई तुरंत खतरा नहीं देखा गया है। किसी ग्लेशियल झील से होने वाले संभावित खतरे का अंदाज़ा सिर्फ़ उसके होने के आधार पर नहीं लगाया जाता, बल्कि उसके साइज़, पानी की मात्रा, पानी जमा करने की खासियतों, आस-पास या बर्फ/मलबे वाले स्ट्रक्चर के नेचर, पानी निकलने के संभावित रास्तों और इलाके की बड़ी ज्योग्राफिकल स्थितियों की पूरी जांच करके लगाया जाता है। गंगोत्री ग्लेशियर इलाके में समय-समय पर दिखने वाली छोटी सुपरग्लेशियल झीलें ज़्यादातर टेम्पररी होती हैं, साइज़ में छोटी होती हैं और उनमें पानी की मात्रा कम होती है। उनका बनना और गायब होना ग्लेशियर के नेचुरल मौसमी और सतही प्रोसेस का हिस्सा है। अभी के साइंटिफिक अंदाज़े के आधार पर, इन छोटी झीलों से तुरंत कोई बड़ा खतरा नहीं है。 देहराडून का वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ हिमालयन जियोलॉजी, उत्तराखंड स्टेट डिज़ Disaster मैनेजमेंट अथॉरिटी के साथ मिलकर, पहले से ही ग्लेशियल झीलों की सैटेलाइट-बेस्ड और फील्ड-लेवल मॉनिटरिंग कर रहा है, ताकि मौसम में बदलाव और बर्फ़ और बर्फ़ पिघलने की बदलती स्थितियों की वजह से हिमालय के ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों में होने वाले बदलावों को ट्रैक किया जा सके。
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