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Amroha - चैत्र माह के अंतिम मंगल मेले में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, अब वर्ष भर बंद रहेंगे मंदिर के कपाट
Gajraula, Uttar Pradesh:अमरोहा जनपद के गजरौला में स्थित मां ललिता देवी के मंदिर में चैत्र माह के पांच मंगलवार को विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। यहां बड़ी संख्या में दूर दराज से आने वाले श्रद्धालु माता के दर्शन कर प्रसाद चढ़ाते हैं। नवजात शिशुओं का मुंडन संस्कार भी कराया जाता है। खास बात यह है कि यह मंदिर वर्ष में केवल पांच मंगलवार को ही खुलता है।0
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ड्रोन फुटेज में हंपबैक व्हेल के जन्म का दृश्य; माँ शिशु को सतह पर लाती है
Noida, Uttar Pradesh:First-ever drone footage of a humpback whale birth. The mother immediately lifts her newborn calf to the surface so it can take its first breath.0
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दिलचस्प नजारा: दो फ्लेमिंगोज़ Capybara को सहलाते दिखे
Noida, Uttar Pradesh:Nothing special to see, just two flamingoes busy with petting a sleeping capybara.0
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चीन के लॉजिस्टिक्स सेंटर में मानवरूपी रोबोट दिन-रात काम करते दिखे
Noida, Uttar Pradesh:A logistics center in China is reportedly run by humanoid robots working around the clock.0
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मिल्की वे आकाशगंगा Monument Valley के ऊपर उभरती दिखी तस्वीरें वायरल
Noida, Uttar Pradesh:Milky Way galaxy rising above Monument Valley.0
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दतिया उपचुनाव में 71.44% मतदान, स्ट्रॉन्ग रूम में सभी ईवीएम सुरक्षित
Datia, Madhya Pradesh:दतिया विधानसभा उपचुनाव: 71.44 प्रतिशत मतदान, सभी ईवीएम स्ट्रॉंग रूम में सुरक्षित जमा मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में गुरुवार को 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान पूरे जिले में शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ और कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना प्राप्त नहीं हुई। मतदान समाप्त होने के बाद सभी मतदान दलों ने अपनी-अपनी ईवीएम और वीवीपैट मशीनें शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, दतिया स्थित स्ट्रॉंग रूम में कड़ी सुरक्षा के बीच सुरक्षित जमा करा दी हैं। दतिया कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि मतदान प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण रही। जिन मतदान केंद्रों पर ईवीएम में तकनीकी खराबी आई थी, वहां तत्काल मशीनें बदलकर मतदान सुचारु रूप से कराया गया। सभी ईवीएम अब स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखी गई हैं। उन्होंने बताया कि 3 अगस्त को मतगणना होगी, जिसके लिए जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं。0
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राजसी बिल्ली की पूंछ ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा
Noida, Uttar Pradesh:0
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आराम के बारे में यह विचार आपके दिन बदल देगा
Noida, Uttar Pradesh:Sometimes it is about relaxing0
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मैनपुरी-करहल सराहनीय पहल,जैन कॉलेज के सामने जानलेवा गड्ढा भरवाया,राहगीरों ने ली राहत की सांस।
Kanakpur, Uttar Pradesh:करहल/मैनपुरी करहल में प्रशासन की एक सराहनीय पहल स्थानीय लोगों की शिकायत और Pinewz/Zee Media में खबर चलने के बाद PWD और प्रशासन हरकत में आया और गड्ढे को गिट्टी और डामर डालकर भरवा दिया गया। जैन इंटर कॉलेज तिराहा करहल का व्यस्ततम चौराहा है,यहां सड़क के बीच गहरा गड्ढा होने से आए दिन बाइक सवार गिरकर घायल हो रहे थे, स्कूली बच्चों और राहगीरों की सुरक्षा को लेकर खतरा बना हुआ था। गड्ढा भरने के बाद राहगीरों और अभिभावकों ने प्रशासन की इस पहल की सराहना की है,लोगों का कहना है कि समय पर कार्रवाई से एक बड़े हादसे को टाल दिया गया। सराहनीय पहल जैन कॉलेज के सामने गड्ढा भरवाया,राहगीरों ने प्रशासन की त्वरित कार्रवाई की सराहना की ।0
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विष्णु देव साय ने वैष्णव से मुलाकात; डोंगरगढ़-कटघोरा पर चर्चा
Noida, Uttar Pradesh:मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कटघोरा डोंगरगढ़ को लेकर हुई चर्चा वैष्णव ने दंतेवाड़ा गढ़चिरौली रेल से जोड़ने की बात भी कही0
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मस्जिद ज़मीन पर कथित अवैध निर्माण: मौलाना नकवी ने मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग की
Noida, Uttar Pradesh:LUCKNOW (UTTAR PRADESH) मौलाना कल्बे जवाद नकवी (Shia cleric) on alleged illegal construction on mosque land by Tunde Kababi / appeal to CM Yogi Adityanath for action / allegations against Shia Wakf Board मौलाना कल्बे जवाद नकवी (शिया धर्मगुरु) ने टुंडे कबाबी द्वारा मस्जिद की ज़मीन पर कथित अवैध निर्माण का मामला मस्जिद के अंदर दुकान नहीं बन सकती हम योगी जी से अपील करते हैं, इस मामले को देखें और जल्दी से जल्दी दोषियों पर कार्रवाई करें0
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जोधपुर हाईकोर्ट ने निवेशकों के हित के लिए समिति गठित करने का आदेश दिया
Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के कथित हजारों करोड़ रुपए के घोटाले में राजस्थान हाईकोर्ट ने निवेशकों को राहत दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जस्टिस समीर जैन की बेंच ने मामले की जटिलता और करीब 20 लाख निवेशकों की जमा पूंजी से जुड़े सार्वजनिक हित को देखते हुए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस (रिटायर्ड) संजीव खन्ना की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का आदेश दिया है। समिति का मुख्य उद्देश्य परिसमापन प्रक्रिया की निगरानी करना और निवेशकों को उनकी राशि जल्द से जल्द वापस दिलाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना होगा। कोर्ट के समक्ष निवेशकों की ओर से बताया गया कि सोसायटी और उसके प्रबंधन पर शेल कंपनियों के जरिए जनता की जमा राशि को कथित रूप से इधर-उधर करने के आरोप हैं। निवेशकों के अनुसार मूलधन करीब 10 हजार करोड़ रुपए और ब्याज सहित कुल दावा करीब 25 हजार करोड़ रुपए का है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामला बड़े पैमाने पर व्यवस्थित व्हाइट कॉलर अपराध से जुड़ा बताया गया है, जिसमें ऊंची ब्याज दरों का लालच देकर निवेश जुटाने, बिचौलियों को भारी कमीशन देने और धन को शेल कंपनियों के माध्यम से रियल एस्टेट में लगाने के आरोप सामने आए हैं। सुनवाई के दौरान ऑफिशियल लिक्विडेटर एचएस पटेल ने बेंच को बताया कि वर्ष 2018 में घोटाला सामने आने के बाद से निवेशकों को अब तक कोई रिटर्न नहीं मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि सीमित स्टाफ और संसाधनों के कारण परिसमापन प्रक्रिया को आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा है। विभिन्न एजेंसियों की कार्रवाई और अलग-अलग कोर्ट के स्टे के कारण कुर्क संपत्तियों की बिक्री और नीलामी की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। कोर्ट के समक्ष यह भी बताया गया कि करीब 2000 करोड़ रुपए की संपत्तियों पर प्रोविजनल अटैचमेंट है, जबकि उनका अनुमानित बाजार मूल्य करीब 5000 करोड़ रुपए बताया गया है। हाईकोर्ट ने कहा कि निवेशकों में बड़ी संख्या गरीब लोगों, पेंशनर्स और ऐसे लोगों की है जिन्होंने अपनी जीवनभर की बचत और सेवानिवृत्ति की राशि निवेश की थी। कई निवेशक चिकित्सा, विवाह और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए धन की तत्काल आवश्यकता में हैं। कोर्ट ने इस मामले की व्यापकता को देखते हुए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर और गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी गांधीनगर से भी समिति को अकादमिक और शोध सहयोग देने को कहा है। दोनों विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई है। आदेश के अनुसार ऑफिशियल लिक्विडेटर को 5 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे समिति के अध्यक्ष के समक्ष उपस्थित होकर प्रारंभिक जानकारी उपलब्ध करानी होगी। समिति अपने काम के लिए विशेषज्ञों, चार्टर्ड अकाउंटेंट और अधिवक्ताओं की सेवाएं लेने का प्रस्ताव हाईकोर्ट के समक्ष दो सप्ताह में रख सकेगी। प्रवर्तन निदेशालय, पुलिस और एसआईटी सहित संबंधित एजेंसियों से भी आवश्यक सहयोग लिया जा सकेगा। केंद्र सरकार को समिति के लिए कार्यालय, लॉजिस्टिक और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं, पूर्व प्रबंधन और शेल कंपनियों के पक्ष में दिए गए सभी अंतरिम आदेश अब समाप्त माने जाएंगे। समिति की पहली बैठक 5 अगस्त को होगी। समिति के अध्यक्ष को शुरुआती बैठक के लिए पांच लाख रुपए फीस और अन्य खर्च के तौर पर ऑफिशियल लिक्विडेटर द्वारा भुगतान किया जाएगा। हाईकोर्ट ने मामले को आगे आवेदन पेश होने पर सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है, अन्यथा अगली सुनवाई 24 अगस्त 2026 को होगी.0
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उदयपुर की पहाड़ियों, झीलों के खिलाफ तेज निर्माण पर राजस्थान हाईकोर्ट की गम्भीर टिप्पणी
Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर की पहाड़ियों, झीलों, वन्यजीव अभयारण्यों और संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र में तेजी से हो रहे निर्माण पर गंभीर चिंता जताई है। होटल निर्माण से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस समीर जैन ने कोर्ट कमिश्नर की निरीक्षण रिपोर्ट और एरियल फोटोग्राफी का अवलोकन करते हुए कहा कि उदयपुर की पहाड़ियों को बेरहमी से काटकर उन पर निर्माण किए जा रहे हैं और ऐसा लगता है कि पहाड़ियों की जगह होटल ले रहे हैं। कोर्ट ने इस पूरे मामले को शहर के पारिस्थितिक अस्तित्व से जुड़ा गंभीर विषय माना है। मामला बंसत होटल्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। कोर्ट के निर्देश पर कोर्ट कमिश्नर अधिवक्ता कामिनी जोशी और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राजेंद्र भणावत ने मौके का निरीक्षण कर अंतरिम रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में याचिकाकर्ता की संपत्ति के साथ आसपास के क्षेत्र की एरियल तस्वीरें भी शामिल हैं। सुनवाई के दौरान कमिश्नर ने बताया कि संबंधित पहाड़ियों पर कई होटल बन चुके हैं और संचालित हो रहे हैं। याचिकाकर्ता की संपत्ति की खास बात केवल यह है कि वह अपेक्षाकृत अधिक ढलान पर स्थित है। हाईकोर्ट ने कहा कि निरीक्षण रिपोर्ट से सामने आया है कि पहाड़ियों और पर्वतों को काटकर बड़े पैमाने पर निर्माण किया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि 2018 की हिल पॉलिसी और हिल बायलॉज तैयार करने में निजी बाहरी एजेंसियों की भूमिका रही, लेकिन जलवायु, वन्यजीव, प्रदूषण और पर्यावरण से जुड़े संबंधित वैधानिक विभागों और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से उचित सलाह या परामर्श नहीं लिया गया। कोर्ट ने उदयपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की जानकारी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि अधिकारियों को पहाड़ी निर्माण से संबंधित नीति और मौजूदा कानूनों की पर्याप्त जानकारी नहीं थी। हाईकोर्ट ने कहा कि झीलों, पहाड़ियों और वन्यजीव अभयारण्यों के लिए प्रसिद्ध उदयपुर में सतत विकास के नाम पर होटल, रिसॉर्ट और व्यावसायिक निर्माण तेजी से बढ़े हैं। कोर्ट ने सार्वजनिक न्यास सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण जीवन का अधिकार है और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा राज्य की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने संकेत दिया कि अगली सुनवाई में इस मामले को व्यापक जनहित के दृष्टिकोण से देखते हुए स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज करने पर भी विचार किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने और आसपास स्वीकृत सभी निर्माण एवं व्यावसायिक अनुमतियों का पूरा रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही 2018 और 2024 की हिल पॉलिसी के लेखकों के नाम, इनके निर्माण से जुड़े मूल दस्तावेज, नीतियों के औचित्य और निजी एजेंसी की रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है.0
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जोधपुर हाईकोर्ट: गवाहों पर दबाव, सामाजिक बहिष्कार के आरोपों की निष्पक्ष जांच के निर्देश
Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने लूणी थाना क्षेत्र में दर्ज एक मामले की जांच के दौरान गवाहों को कथित तौर पर धमकाने, दबाव बनाने और सामाजिक बहिष्कार किए जाने की शिकायतों को गंभीरता से लिया है। जस्टिस फरजंद अली ने कहा कि किसी भी व्यक्ति द्वारा गवाहों को धमकाना, प्रभावित करना, दबाव में लेना या सामाजिक बहिष्कार करना आपराधिक न्याय व्यवस्था में गंभीर हस्तक्षेप है और इसे कोर्ट बर्दाश्त नहीं कर सकती। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि मामले से जुड़े गवाह या इसी तरह प्रभावित कोई अन्य व्यक्ति जांच अधिकारी के समक्ष धमकी, दबाव, सामाजिक बहिष्कार या डराने-धमकाने की शिकायत करता है तो उसकी निष्पक्ष और शीघ्र जांच की जाए। मामला लूणी थाना क्षेत्र में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। याचिकाकर्ता राजाराम पालीवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की थी। एफआईआर के अनुसार, राजाराम ने 3 दिसंबर 2022 को युवती से विवाह किया था। आरोप है कि पत्नी के दूसरी जाति से होने की बात को लेकर पालीवाल समाज के कुछ लोगों ने राजाराम और उसके परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया। कई सामुदायिक पंचायतें आयोजित कर कथित रूप से परिवार को बंधक बनाया गया, अपमानित किया गया और सामाजिक बहिष्कार की धमकी दी गई। आरोप है कि एक लाख रुपए का जुर्माना वसूला गया तथा 21 लाख रुपए की अतिरिक्त राशि की मांग की गई। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि इस मामले की जांच पहले से हाईकोर्ट के निर्देश पर नियुक्त जांच अधिकारी कर रहे हैं और उन्हें जांच अधिकारी या जांच की प्रक्रिया से कोई शिकायत नहीं है। हालांकि, आरोप लगाया गया कि आरोपी पक्ष द्वारा मामले से जुड़े स्वतंत्र गवाहों पर दबाव बनाया जा रहा है। तीन गवाहों लादूराम, अशोक पालीवाल और अनिल के साथ धमकी, दबाव और सामाजिक बहिष्कार किए जाने का आरोप लगाया गया। यह भी कहा गया कि आरोपी पक्ष के खिलाफ नहीं जाने के कारण गवाहों के परिवारों को भी समाज से बाहर करने की कार्रवाई की गयी। कोर्ट ने कहा कि पहले दिए गए निर्देशों का उद्देश्य केवल किसी एक मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि जबरदस्ती, धमकी और सामाजिक बहिष्कार जैसी गैरकानूनी सामाजिक प्रथाओं को खत्म करना भी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि शिकायतों में तथ्य पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए। साथ ही, जांच को बाहरी दबाव से मुक्त रखते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी गवाह सच बोलने से भयभीत न हो। कोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए सभी लंबित आवेदन भी समाप्त कर दिए।0
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नागर के आरोपों से दूदू बैठक में हलचल, भ्रष्टाचार के दावे तेज
Dudu, Rajasthan:पूर्व मंत्री बाबूलाल नागर ने दूदू बैठक में दिया बयान, नागर ने कहा - मेरा दावा है... भ्रष्टाचार करने वाले इस साल में जेल नहीं जाएंगे तो दो साल बाद तो जरूर जेल जाएंगे। नागर ने आरोप लगाते हुए कहा - राज बदलते ही आबादी के पट्टों में कर दी हेराफेरी। नगरपालिका के अधिकारी और जनप्रतिनिधियों पर साधा निशाना। छापरवाडा बांध की नहर के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर के एक सोलर कंपनी को फायदा पहुंचाने का भी लगाया आरोप। छापरवाडा बांध के जीर्णोद्धार कार्य में गड़बड़झाले को लेकर भी उठाए सवाल। पंचायतीराज चुनाव के चलते पूर्व मंत्री हुए आक्रामक, नागर के बयान बने चर्चा का विषय।0
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राजस्थान हाईकोर्ट: उदयपुर में नाबालिग हत्या में मौत की सजा रद्द, उम्रकैद
Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर जिले में नाबालिग बच्ची की हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट से मिली मौत की सजा को रद्द करते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी को हत्या समेत अन्य अपराधों में दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि बलात्कार, पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट के तहत दोषसिद्धि को संदेह का लाभ देते हुए निरस्त कर दिया। वहीं मामले में दो सह आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत की ओर से भेजा गया डेथ रेफरेंस अब विचारणीय नहीं है। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने मर्डर रेफरेंस और उससे जुड़ी आपराधिक अपीलों पर आदेश सुनाया। अभियुक्तों की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता सपना वैष्णव ने बताया कि मामला 25 अक्टूबर 2024 को उदयपुर की विशेष पॉक्सो एवं चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्ट कोर्ट की ओर से सुनाई गई सजा से जुड़ा था। ट्रायल कोर्ट ने मुख्य आरोपी को कई धाराओं में दोषी ठहराते हुए बलात्कार और पॉक्सो एक्ट के तहत मौत की सजा तथा हत्या के मामले में उम्रकैद दी थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष हत्या का अपराध साबित करने में सफल रहा। कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषसिद्धि बरकरार रखी। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार बच्ची की मौत गला घोंटने से हुई थी और उसके बाद शव को कई टुकड़ों में काटा गया था। कोर्ट ने माना कि शव को काटकर छिपाने की कार्रवाई अपराध के साक्ष्य को मिटाने के उद्देश्य से की गई थी। इस आधार पर हत्या और साक्ष्य मिटाने से जुड़े अपराधों में आरोपी की दोषसिद्धि कायम रखी गई। हालांकि बलात्कार के आरोप को लेकर हाईकोर्ट ने कहा कि मेडिकल और फोरेंसिक साक्ष्य अभियोजन के आरोप को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। शव के काफी समय तक सड़ने के कारण मेडिकल बोर्ड यौन हमले को लेकर कोई निश्चित राय नहीं दे सका था। ऐसे में कोर्ट ने धारा 376एबी आईपीसी और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। साथ ही एससी-एसटी एक्ट के तहत दोषसिद्धि भी रद्द कर दी गई। फैसले के अंतिम आदेश में हाईकोर्ट ने आरोपी की धारा 201, 302, 342, 363 और 366 आईपीसी तथा आर्म्स एक्ट की धारा 4/25 के तहत दोषसिद्धि और सजा बरकरार रखी। हालांकि मौत की सजा हटाकर कोर्ट ने कहा कि न्याय के उद्देश्य के लिए उम्रकैद पर्याप्त होगी। इस तरह डेथ रेफरेंस को नकारते हुए मौत की सजा की पुष्टि नहीं की गई और आरोपी को अब आजीवन कारावास भुगतना होगा। मामले में सह आरोपी को भी हाईकोर्ट से राहत मिली। कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ साक्ष्य मिटाने या अपराध की जानकारी छिपाने के आरोप पर्याप्त रूप से साबित नहीं हुए। उनके खिलाफ न तो कोई बरामदगी हुई, न कोई वैज्ञानिक या फोरेंसिक साक्ष्य उन्हें अपराध से जोड़ता है और न ही कोई प्रत्यक्षदर्शी उनके खिलाफ सामने आया। इसके चलते दोनों को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।0
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