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अमेठी में शिक्षा को लेकर नई पहल
Katra Raja Himmat Sing, Uttar Pradesh
शिक्षा की नई मशाल:अमेठी के गोलू सोनी सर ने पेश की संघर्ष और सेवा की अनूठी मिसाल-
अमेठी:वर्तमान समय में जहाँ शिक्षा एक व्यापक 'व्यवसाय' का रूप ले चुकी है,वहीं उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले की माटी से निकले एक युवा ने इस धारणा को बदल दिया है।'रेंजर्स क्लासेज' के संचालक गोलू सोनी का जीवन उन हज़ारों नौजवानों के लिए एक जीवंत 'प्रेरणापुंज' है,जो संसाधनों के अभाव में अपने सपनों का त्याग कर देते हैं।
गोलू सोनी का सफर पुष्पों की सेज नहीं,बल्कि कांटों भरा रहा है।एक समय था जब वे पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन हेतु पैदल ही घर-घर जाकर ट्यूशन पढ़ाया करते थे।भीषण संघर्ष और विपरीत परिस्थितियों ने उन्हें थकाया नहीं,अपितु उनके संकल्प को 'फौलादी' बना दिया।उनकी इसी अटूट तपस्या का परिणाम है कि आज उनके द्वारा मार्गदर्शित अनेक छात्र प्रशासनिक पदों पर सुशोभित होकर देश की सेवा कर रहे हैं।
जब गणित और तर्कशक्ति बन जाते हैं खेल
R.R.P.G. डिग्री कॉलेज के समीप संचालित इस केंद्र की सफलता का रहस्य इसकी 'अद्वितीय' शिक्षण पद्धति में निहित है।गोलू सोनी सर गणित और तर्कशक्ति जैसे गूढ़ और पेचीदा विषयों को अपनी जादुई व्याख्या से अत्यंत सरल बना देते हैं। संस्थान की प्राथमिकता केवल भीड़ एकत्रित करना नहीं, बल्कि 'व्यक्तिगत ध्यानाकर्षण' के माध्यम से प्रत्येक छात्र की नींव सुदृढ़ करना है।
"रील देखोगे तो रोओगे, मेहनत करोगे तो राज करोगे।"— गोलू सोनी, संचालक (रेंजर्स क्लासेज)
अभिभावकों और युवाओं को संबोधित करते हुए गोलू सोनी ने कहा,"आज का युवा क्षणिक आनंद (रील) में उलझकर अपना बहुमूल्य समय नष्ट कर रहा है।मेरा ध्येय हर उस छात्र को 'शून्य' से उठाकर 'शिखर' तक पहुँचाना है,जिसके भीतर कुछ कर गुजरने का जज्बा है।" उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि उनका संस्थान गरीब छात्रों को विशेष 'रियायत' (छूट) प्रदान करता है।
वे कहते हैं, "मैं एक किसान और मजदूर पिता की विवशता को भली-भांति समझता हूँ।कोई भी छात्र धन के अभाव में शिक्षा से वंचित न रहे,यही मेरा संकल्प है।"
वर्दी के दीवानों के लिए ओजस्वी उद्घोष
आगामी परीक्षाओं और वर्दी का स्वप्न देख रहे अभ्यर्थियों में जोश भरते हुए उन्होंने एक ओजस्वी पंक्ति साझा की,जो क्षेत्र के युवाओं में अत्यंत लोकप्रिय हो रही है:
"किनारे-किनारे मत चलना,किनारा छूट जाएगा... और इस बार अगर नहीं बने दरोगा,तो दरोगा बनने का सपना टूट जाएगा।"
गोलू सोनी का जीवन उन सभी के लिए प्रेरणा है जो यह सोचते हैं कि सफलता के लिए केवल बड़े शहरों और भारी-भरकम फीस की जरूरत होती है।उन्होंने सिद्ध कर दिया है कि यदि संकल्प 'दृढ़' हो और गुरु का मार्गदर्शन 'सच्चा' हो,तो शून्य से शिखर तक का सफर असंभव नहीं है।
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