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SKSohrab KhanFollow21 Jan 2025, 11:21 am

अमेठीः घूर के गड्ढे से कब्जा मुक्त कराने की मांग

Mahe Mau, Uttar Pradesh:

 

राजस्व विभाग द्वारा दर्ज घूर गड्ढे पर दबंगो द्वारा कब्जाने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने संपूर्ण समाधान दिवस मे शिकायती पत्र देकर उच्च अधिकारीगणो से उनके कब्जे से मुक्त कराने की मांग की। मुसाफिरखाना तहसील के ग्राम पंचायत सिधियावा के ग्रामीणों ने दिए गए शिकायती पत्र मे बताया कि घूर गड्ढे के लिए ग्राम पंचायत में कई दशकों से ग्रामीणों द्वारा घूर गड्ढे का उपयोग किया जाता रहा है जिस पर गांव के दबंगो ने निर्माण कार्य कर लिया है। अब लोगों को घूर गड्ढे के लिे दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और बची हुई जमीन पर भी कब्जा करने की कोशिश में हैं।

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17 जुलाई तक वक्फ प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन करें: महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड का अलर्ट

Noida, Uttar Pradesh:महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड का अलर्ट - 17 जुलाई आखिरी तारीख, वक्फ प्रॉपर्टी रजिस्टर कराएं महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड ने उम्मीद पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के लिए 17 जुलाई 2026 की आखिरी तारीख तय की है। वक्फ बोर्ड चेयरमैन समीर काजी की 4 बड़ी बातें: 1. डेडलाइन अलर्ट: सभी वक्फ प्रॉपर्टीज का रजिस्ट्रेशन 17 जुलाई से पहले उम्मीद पोर्टल पर करा लें। डेडलाइन के बाद परेशानी हो सकती है。 2. कानूनी क्लीयरेंस: चेयरमैन ने कहा कि वक्फ की कोई भी प्रॉपर्टी अवैध नहीं है। न ही किसी प्रॉपर्टी के डॉक्यूमेंट्स कम हैं। सब कागज पूरे हैं。 3. बुलडोजर एक्शन पर टास्क Team: महाराष्ट्र में मस्जिदों-दरगाहों पर बुलडोजर कार्रवाई लगातार चल रही है। इसके लिए वक्फ बोर्ड ने स्पेशल टास्क टीम बनाई है। ये टीम हर जिले में जाकर लोगों की मदद करेगी। साथ में हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है。 4. लीगल टीम तैयार: जिन प्रॉपर्टीज के डॉक्यूमेंट कम हैं या कोई दिक्कत है, उनके लिए वक्फ बोर्ड ने लीगल टीम बनाई है। ये टीम लोगों को रजिस्ट्रेशन में मदद करेगी。 उम्मीद पोर्टल क्या है? केंद्र सरकार का पोर्टल है जहां देशभर की सभी वक्फ प्रॉपर्टीज का डिजिटल रिकॉर्ड बन रहा है। रजिस्ट्रेशन जरूरी है वरना प्रॉपर्टी पर दावा कमजोर पड़ सकता है。 निचोड़: वक्फ बोर्ड की अपील - 17 जुलाई का इंतजार न करें। आज ही अपनी मस्जिद, दरगाह, कब्रिस्तान या वक्फ जमीन का रजिस्ट्रेशन पूरा कराएं। दिक्कत हो तो टास्क टीम और लीगल टीम मदद को तैयार है
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मैनपुरी-मोहर्रम को लेकर प्रशासन सतर्क,उपजिलाधिकारी व क्षेत्राधिकारी ने धर्मगुरुओं के साथ की बैठक ।

Ajay KumarAjay KumarFollow6m ago
Karhal, Uttar Pradesh:करहल/मैनपुरी मोहर्रम को लेकर प्रशासन सतर्क,उपजिलाधिकारी सुनिष्ठा सिंह व क्षेत्राधिकारी अजय सिंह ने धर्मगुरुओं व ताजियादारों के साथ की बैठक मानक ऊंचाई के ताजिए निकालने और परंपरागत मार्गों का पालन करने के दिए निर्देश,सोशल मीडिया पर भी रहेगी कड़ी निगरानी करहल में आगामी मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से करहल में उपजिलाधिकारी व क्षेत्राधिकारी ने धर्मगुरुओं,ताजियादार कमेटियों के पदाधिकारियों तथा स्थानीय नागरिकों के साथ बैठक की। बैठक में मोहर्रम जुलूस एवं ताजियों के संबंध में शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों की जानकारी दी गई। उपजिलाधिकारी ने कहा कि सभी ताजिए शासन द्वारा निर्धारित मानक ऊंचाई के अनुरूप ही बनाए और निकाले जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में परंपरागत मार्गों के अतिरिक्त अन्य किसी मार्ग से जुलूस या ताजिया नहीं निकाला जाएगा। उन्होंने ताजियादार कमेटियों के पदाधिकारियों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को शासन की गाइडलाइन का पालन कराने के लिए जागरूक करें। बैठक में कानून व्यवस्था बनाए रखने,आपसी भाईचारे को मजबूत करने तथा पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने पर भी चर्चा की गई। उन्होंने सभी नागरिकों से प्रशासन का सहयोग करने तथा मोहर्रम पर्व को आपसी सद्भाव और शांति के साथ मनाने की अपील की।
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मध्यप्रदेश में IAS अफसरों के बड़े पैमाने पर तबादले: नई नियुक्तियों का दौर

Bhopal, Madhya Pradesh:बड़ी प्रशासनिक सर्जरी मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर IAS अधिकारियों के तबादले ​मध्यप्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कई वरिष्ठ और मध्य स्तर के आईएएस अधिकारियों के प्रभार बदले हैं और नई नियुक्तियाँ की हैं: ​ मुख्य बदलाव और नई पदस्थापनाएँ: ​ मुकेश चन्द गुप्ता (1998): इन्हें प्रमुख सचिव, जेल विभाग बनाया गया है और साथ ही सदस्य, राजस्व मण्डल, ग्वालियर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया गया है. ​डॉ. ई. रमेश कुमार (1999): इन्हें प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग तथा राहत आयुक्त एवं पुनर्वास आयुक्त की कमान दी गई है। इसके साथ ही पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण और विमुक्त घुमन्तु एवं अर्धघुमन्तु जनजाति विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा. विवेक कुमार पोरवाल (2000): इन्हें प्रमुख सचिव, खनिज साधन विभाग नियुक्त किया गया है. संजीव सिंह (2005): कमिश्नर भोपाल संभाग से हटाकर इन्हें अब सचिव, खेल एवं युवा कल्याण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. कर्मवीर शर्मा (2010): इन्हें नया आयुक्त, भोपाल संभाग (कमिश्नर) बनाया गया है. ​श्री शीलेन्द्र सिंह (2010): इन्हें आयुक्त, रीवा संभाग (कमिशनर) नियुक्त किया गया है. बाबू सिंह जामोद (2006): रीवा संभाग के कमिश्नर पद से हटाकर इन्हें सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग बनाया गया है. ​ दीपक सिंह (2007): इन्हें आयुक्त-सह-पंजीयक, सहकारी संस्थाएँ, भोपाल की जिम्मेदारी दी गई है. आलोक कुमार सिंह (2008): इन्हें पंजीयन महानिरीक्षक एवं अधीक्षक, मुद्रांक (Stamps & Registration), मध्यप्रदेश नियुक्त किया गया है. अमित तोमर (2009): इन्हें प्रबंध संचालक, ऊर्जा विकास निगम, भोपाल तथा आयुक्त, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. सतेन्द्र सिंह (2009): इन्हें आयुक्त-सह-संचालक, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा आयुक्त, अनुसूचित जाति विकास का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. अतिरिक्त प्रभार और प्रभार से मुक्ति: के.सी. गुप्ता (1992): अपर मुख्य सचिव, कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग को अपने वर्तमान कर्तव्यों के साथ कृषि उत्पादन आयुक्त (APC) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. अनिरूद्ध मुकर्जी (1993): इन्हें अपने वर्तमान प्रभारों के साथ अपर मुख्य सचिव, पर्यावरण विभाग तथा पर्यावरण आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार मिला है. सोनिया मीना (2013): इन्हें आयुक्त-सह-संचालक, संस्थागत वित्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. मनीष सिंह (2009): मुकेश चन्द गुप्ता द्वारा कार्यभार ग्रहण करने पर ये जेल विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त होंगे. मनीष सिंह (1997): संजीव सिंह द्वारा कार्यभार ग्रहण करने पर ये खेल एवं युवा कल्याण विभाग के प्रभार से मुक्त होंगे. अशोक बर्णवाल (1991): नए आदेशों के बाद ये कृषि उत्पादन आयुक्त और अपर मुख्य सचिव, पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगे.
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हरदोई के सांडी थाने में विवाद के बाद युवती बेहोश, KGMU रेफर

Hardoi, Uttar Pradesh:हरदोई के सांडी थाने में एक मामूली विवाद उस वक्त बड़े घटनाक्रम में बदल गया, जब सुनवाई के लिए पहुंची एक युवती अचानक बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी। देखते ही देखते थाने में अफरा-तफरी मच गई और पुलिसकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में युवती को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से मेडिकल कॉलेज हरदोई और फिर गंभीर हालत में लखनऊ के KGMU रेफर कर दिया गया। घटना के बाद पूरे इलाके में चर्चा का माहौल है। मामला बहादूरपुर गांव का है, जहां कृष्णपाल की बेटी अंकिता और जयवीर सिंह की बेटी पार्वती के बीच मंदिर परिसर के पास किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। आरोप है कि विवाद के दौरान पार्वती के भाई शोभित ने अंकिता के साथ मारपीट की। शिकायत लेकर दोनों पक्ष थाने पहुंचे थे। पुलिस दोनों पक्षों के खिलाफ शांति भंग की आशंका में धारा 151 के तहत कार्रवाई की तैयारी कर रही थी। इसी बीच अंकिता अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी। युवती के पिता का आरोप है कि उनकी बेटी पुलिस और SSC भर्ती की तैयारी कर रही है और परीक्षा भी दे चुके है। वह लगातार पुलिस से भविष्य खराब न करने की गुहार लगाते रहे, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। उधर डॉक्टरों का कहना है कि युवती के सिर के पिछले हिस्से में चोट के संकेत मिले हैं। सीटी स्कैन में कन्कशन की स्थिति सामने आई है, जिसके चलते मरीज लंबे समय तक बेहोश रह सकता है।फिलहाल युवती को KGMU रेफर किया गया है। वहीं इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या युवती की हालत तनाव से बिगड़ी या फिर मारपीट में लगी चोट इसकी वजह बनी? इसका जवाब अब जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट ही दे पाएगी.
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जयंत चौधरी का अखिलेश पर तंज: विपक्ष का बोलना ही काम

Mathura, Uttar Pradesh:"कुछ नहीं बोलेंगे तो लोग कहेंगे अखिलेश जी शांत क्यों हैं'— जयंत चौधरी का सपा प्रमुख पर बड़ा तंज" विपक्ष की भूमिका पर बोले केंद्रीय मंत्री— उनका काम ही है बोलना, यूपी में जमीन पर मजबूत है NDA का तालमेल ब्रज क्षेत्र की रग-रग से वाकिफ होने का दावा, बोले— विपक्ष सामने टिक ही नहीं पाएगा राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव और विपक्ष की राजनीति पर तीखा तंज कसा है। मथुरा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब उनसे विपक्ष के हमलों को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए सपा प्रमुख पर निशाना साधा और कहा कि विपक्ष का तो काम ही कुछ न कुछ बोलना है, वरना उनके शांत रहने पर भी सवाल खड़े हो जाएंगे। अखिलेश यादव शांत बैठ गए तो मीडिया ही सवाल उठाएगा: जयंत सरकार के कामकाज पर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों को खारिज करते हुए जयंत चौधरी ने कहा, “विपक्ष अपनी भूमिका निभा रहा है, वो कुछ कहेंगे नहीं तो आप (मीडिया) ही कहोगे कि अखिलेश जी अचानक शांत क्यों हैं।” उन्होंने साफ किया कि विपक्ष के बयानों में कोई दम नहीं है, वे सिर्फ राजनीति चमकाने के लिए बयानबाजी कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने पूरे भरोसे के साथ कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने एनडीए को लगातार दो बार ऐतिहासिक जनादेश दिया है और आज भी जमीन पर सरकार और सहयोगियों का तालमेल बेहद मजबूत है। यूपी सरकार में आरएलडी विधायकों की हो रही पूरी सुनवाई सपा और विपक्ष के इन दावों को जयंत चौधरी ने सिरे से खारिज कर दिया कि सरकार में सहयोगियों की उपेक्षा हो रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ अपनी पार्टी के मजबूत रिश्तों का हवाला देते हुए कहा: कैबिनेट में सम्मान: उत्तर प्रदेश की सरकार में राष्ट्रीय लोकदल के विधायक को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है; कदम से कदम मिलाकर काम: लोकदल के सभी विधायक सरकार के फैसलों को जमीन पर उतारने के लिए पूरी तरह से तत्पर हैं; मुख्यमंत्री से सीधा संवाद: जब भी आरएलडी के विधायक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलते हैं, तो उनके विभागों की हर समस्या और काम की पूरी सुनवाई होती है। ब्रज की रग-रग से वाकिफ हूँ, विपक्ष का टिकना नामुमकिन अखिलेश यादव और विपक्षी गठबंधन को चुनौती देते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि वे जिस क्षेत्र में खड़े हैं, उसकी नस-नस से वाकिफ हैं। उन्होंने कहा, "मैं ब्रज क्षेत्र की भावनाओं को बखूबी जानता हूँ। जिस प्रकार का शत-प्रतिशत रिकॉर्ड एनडीए के पक्ष में ब्रज की जनता ने पहले दिया है, आगे भी वही अटूट कायम रहेगा।" उन्होंने दावा किया कि जब कार्यकर्ताओं और विधायकों का ऐसा बेहतर तालमेल जमीन पर दिखाई दे रहा हो, तो चुनावी मैदान में एनडीए के सामने कोई भी विपक्षी दल टिक नहीं पाएगा।
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लोहनड़ खड्ड में तेज जलप्रवाह: एक युवक डूबा, तीन बचाए गए

Anandpur Sahib, Punjab:श्री किरतपूर साहिब के लोहनड़ खड्ड क्षेत्र में तेज जल प्रवाह पहले भी कई हादसों का कारण बन चुका है। आज भी नारायण इलाके के असंध क्षेत्र के एक युवक अपने भाई और साथियों के साथ श्री आनंदपुर साहिब के गुरुद्वारों के दर्शनों के बाद चंडीगढ़ वापस जा रहा था। रास्ते में लोहनड़ खड्ड में नहाने के दौरान चार युवक जल प्रवाह में फस गए। मौके पर स्थानीय लोगों ने तुंरत मदद कर तीन युवक सुरक्षित बचा लिए, लेकिन एक युवक जल लहरों में डूब गया। मृतक की पहचान जशनप्रीत सिंह पुत्र भूपिंदर सिंह असंध, जिला करنال, हरियाणा के रूप में है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और राहत टीम पहुंच गईं और लापता युवक की खोज के लिए खोज अभियान शुरू किया गया। इस हादसे से परिवारों का रो-रो कर बुरा हाल है, जबकि प्रशासन लोगों से तेज बहाव वाले पानी में न जाने की अपील कर रहा है।
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वाराणसी कैंट पर 3.15 किग्रा चरस के साथ गिरफ्तारी, संयुक्त गश्ती की बड़ी सफलता

JPJai Pal15m ago
Varanasi, Uttar Pradesh:वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन पर जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त टीम को बड़ी सफलता हाथ लगी है। चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस ने एक अभियुक्त को 3 किलो 150 ग्राम चरस के साथ गिरफ्तार किया है। बरामद चरस की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 75 लाख रुपये बताई जा रही है। गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान कुलदीप सेठ, निवासी नाटीमली, वाराणसी के रूप में हुई है। पूछताछ में पता चला कि वह गोरखपुर से बस के जरिए मादक पदार्थ लेकर वाराणसी पहुंचा था और यहां से मुंबई जाने वाली ट्रेन पकड़ने की फिराक में था। जीआरपी आरपीएफ सीआईबी की संयुक्त टीम द्वारा स्टेशन परिसर में चलाए जा रहे सघन चेकिंग अभियान के दौरान प्लेटफार्म नंबर 9 पर अभियुक्त की गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत हुईं। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से 3 किलो 150 ग्राम चरस बरामद हुई, जिसके बाद पुलिस ने उसे मौके से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने अभियुक्त के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और यह पता लगाने में जुटी है कि वह मादक पदार्थ कहां से लाया था तथा इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। जीआरपी और आरपीएफ की इस संयुक्त कार्रवाई को मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
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सीएम मोहन यादव ने महिदपुर में कांग्रेस पर तीखा हमला, नामांकन विवाद का संकेत

Ujjain, Madhya Pradesh:उज्जैन/महिदपुर। महिदपुर में आयोजित लोकार्पण एवं भूमि-पूजन समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेतृत्व, संगठन और उसकी नीतियों को लेकर तीखे तंज कसे। साथ ही हाल ही में चर्चा में रहे नामांकन विवाद का बिना नाम लिए उल्लेख करते हुए कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने मंच से कहा कि कांग्रेस के नेता कान खोलकर सुन लें। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने महिलाओं के हित में कभी कोई ठोस काम नहीं किया, जबकि प्रदेश सरकार की लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं के खातों में नियमित रूप से राशि पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि जब बहनों के खातों में पैसा जाता है तो कांग्रेस के लोग उसका भी मजाक उड़ाते हैं और महिलाओं का अपमान करने वाले बयान देते हैं। डॉ. यादव ने कांग्रेस पर हमला जारी रखते ہوئے कहा कि यही कारण है कि कांग्रेस आज अपने कर्मों की सजा भुगत रही है। उन्होंने कहा कि जनता कांग्रेस की मानसिकता और चरित्र को अच्छी तरह समझ चुकी है, इसलिए लगातार उससे दूरी बना रही है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर भी तंज कसते हुए कहा कि "वो पप्पू और पप्पू को चलाने वाले चप्पू, सब एक लाइन में हैं." उन्होंने कहा कि कांग्रेस में नेतृत्व की कमी साफ दिखाई दे रही है और पार्टी दिशा विहीन हो चुकी है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने हाल ही में सामने आए नामांकन विवाद का बिना नाम लिए जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने एक नौसिखिए व्यक्ति को संगठन की कमान सौंप दी है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि कोई गाड़ी को आगे बढ़ाने के बजाय पीछे ठокने लगे तो उसमें कोई क्या कर सकता है। यह कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है。 मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद समारोह में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। उनके संबोधन को कांग्रेस पर अब तक के सबसे तीखे राजनीतिक हमलों में से एक माना जा रहा है。
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उदयपुर: तेज हवाओं से स्वागत द्वार गिरा, चार वाहन क्षतिग्रस्त, क्रेन से उठवाया द्वार

Udaipur, Rajasthan:उदयपुर उदयपुर से खबर, शहर में चला तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश का दौरान, तेज हवा से बापूबाजार में लगा स्वागत द्वारा गिरा, स्वागत द्वार गिरने से चार वाहन हुए है क्षतिग्रस्त, दो कार और दो बाइक आई स्वागत द्वार की चपेट में, महाराणा प्रताप जयंती को लेकर व्यापार मंडल द्वारा लगाया गया था द्वार, स्वागत द्वार गिरते ही मौके पर मची अफरा तफरी, कुछ देर तक बापूबाजार में वाहनों का आवागमन रहा बंद, व्यापारियों ने क्रेन बुलाई और उठवाया स्वागत द्वार gनीमत रही नहीं हुई कोई जनहानि बड़ा हादसा होने से टला,
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रनगुवा डैम के बीच खड़ी प्राचीन गढ़ी बुंदेलखंड की शौर्य गाथा

Chhatarpur, Madhya Pradesh:एंकर : छतरपुर के पन्ना नेशनल पार्क की सीमा के नजदीक रनगुवा डैम के बीच स्थित एक प्राचीन गढ़ी इन दिनों लोगों के आकर्षण और चर्चा का केंद्र बनी हुई है। स्थानीय जनश्रुतियों और मान्यताओं के अनुसार इस गढ़ी का संबंध बुंदेलखंड केसरी महाराजा छत्रसाल के राज्य विस्तार और सैन्य व्यवस्था से रहा है। कहा जाता है कि मुगलों के खिलाफ संघर्ष के दौरान महाराजा छत्रसाल ने कई स्थानीय शासकों को पराजित कर इस क्षेत्र पर अधिकार स्थापित किया था। हालांकि इतिहासकारों के बीच इस विषय पर और शोध की आवश्यकता है,लेकिन स्थानीय लोगों की स्मृतियों में यह गढ़ी आज भी गौरवशाली अतीत की पहचान बनी हुई है। रनगुवा डैम...चारों ओर घना जंगल और पानी के बीच सदियों से खड़ी एक रहस्यमयी गढ़ी समय की मार झेल रही यह संरचना मानो अतीत के किसी भूले-बिसरे अध्याय की कहानी बयां कर रही हो। पानी के बीच खड़ी यह गढ़ी पहली नजर में भले ही एक साधारण खंडहर दिखाई देती हो,लेकिन स्थानीय लोगों के लिए यह बुंदेलखंड की शौर्यगाथा और गौरवशाली इतिहास की प्रतीक है। वर्षों से इसके बारे में अनेक कहानियां और किंवदंतियां सुनाई जाती रही हैं,स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार वर्ष 1671 में जब महाराजा छत्रसाल ने मुगल साम्राज्य के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंका,तब उन्हें कई स्थानीय शासकों से भी युद्ध करना पड़ा था। दावा किया जाता है कि उस समय रनगुवा क्षेत्र में बिजोरिया गौड़ Shासक का प्रभाव था। युद्ध में विजय के बाद यह क्षेत्र और यहां स्थित गढ़ी महाराजा छत्रसाल के अधिकार में आ गई। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह गढ़ी कभी सैन्य गतिविधियों और रणनीतिक संचालन का केंद्र रही होगी। हालांकि इन दावों की ऐतिहासिक पुष्टि के लिए विस्तृत शोध की आवश्यकता है,लेकिन लोगों की स्मृतियों में इसकी पहचान आज भी जीवित है। कहा जाता है कि महाराजा छत्रसाल ने अपने विशाल राज्य का विभाजन करते समय बड़े पुत्र हिरदेशाह को पन्ना रियासत और छोटे पुत्र जगतराज को जैतपुर रियासत सौंपी थी। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार रनगुवा की यह गढ़ी पन्ना रियासत के अधीन आती थी, जहां सैनिकों की तैनाती रहती थी और आसपास के क्षेत्रों से लगान वसूला जाता था। इतिहास के उपलब्ध दस्तावेज भले ही इस गढ़ी की पूरी कहानी स्पष्ट न करते हों, लेकिन इसकी भौगोलिक स्थिति और स्थापत्य शैली यह संकेत अवश्य देती है कि किसी समय यह स्थान रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा होगा। आज भी यह गढ़ी समय के थपेड़ों के बीच अडिग खड़ी होकर अपने गौरवशाली अतीत की गवाही देती नजर आती है। रनगुवा डैम के बीच खड़ी यह प्राचीन गढ़ी इतिहास,जनश्रुतियों और रहस्यों का ऐसा संगम है,जो आज भी कई सवाल खड़े करती है। क्या यह गढ़ी वास्तव में महाराजा छत्रसाल के विजय अभियान की साक्षी रही है? क्या यहां कभी सैनिक चौकियां संचालित होती थीं? और क्या इस गढ़ी में बुंदेलखंड के इतिहास के कुछ अनकहे अध्याय अब भी छिपे हुए हैं? इन सवालों के जवाब भविष्य के शोध और ऐतिहासिक अध्ययन में मिल सकते हैं। फिलहाल पानी के बीच खड़ी यह गढ़ी बुंदेलखंड के गौरवशाली अतीत खामोश है लेकिन मजबूत पहचान बनी हुई है
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