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Vijay MishraVijay MishraFollow11 Jul 2024, 01:12 am
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हरियाणा SIR सत्यापन पर कांग्रेस का कड़ा रुख, नोटिस जारी मतदाताओं पर निशाना

Hisar, Haryana:हरियाणा में वोटर लिस्ट के सत्यापन (SIR) के बाद सामने आए आंकड़ों पर कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाया है। जी मीडिया से विशेष बातचीत में हरियाणा कांग्रेस लीगल सेल के अध्यक्ष एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल ने कहा, "वर्तमान में कांग्रेस कार्यकर्ता हर जिले में उन मतदाताओं की पहचान कर रहे हैं जिन्हें नोटिस जारी हुए हैं, ताकि उनके जवाब समय पर तैयार कराए जा सकें।" उन्होंने SIR प्रक्रिया के दौरान वोट कटने की आशंका को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा निशाना साधा। यद्यपि नियमों के अनुसार मतदाता सूची से जुड़े मामलों में सामूहिक याचिका के बजाय व्यक्तिगत रूप से याचिका दायर करने का प्रावधान है, फिर भी कांग्रेस लीगल सेल प्रभावित लोगों की कानूनी लड़ाई लड़ने से पीछे नहीं हटेगा।
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अरवल में अवैध बालू भंडारण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, लगभग 1.32 लाख घनफीट जब्त

Makhdun pur Kabir, Bihar:अरवल जिले में अवैध बालू भंडारण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। आर्थिक अपराध इकाई की जांच के बाद खनन विभाग की टीम ने अरवल थाना क्षेत्र के कोरियम गांव में छापेमारी कर करीब 1 लाख 32 हजार घनफीट बालू जब्त किया है। यह बालू की कीमत करीब डेढ़ करोड़ रूपया से अधिक बताई जा रही है,यह बालू सोन नदी के कोरियम बालू घाट के एक सेकेंडरी भंडारण स्थल पर जमा था। जांच के दौरान बालू का ढेर करीब 80 फीट लंबा, 55 फीट चौड़ा और 30 फीट ऊंचा पाया गया। खास बात यह है कि बालू के ढेर पर पेड़-पौधे तक उग आए थे, जिससे इसके लंबे समय से भंडारित होने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि यह बालू करीब तीन वर्षों से यहां जमा था। आर्थिक अपराध इकाई की जांच के बाद खान निरीक्षक और खनन बल ने छापेमारी की। जब्त बालू को अरवल थाना के चौकीदार के जिम्मे सौंप दिया गया है। वहीं, अज्ञात भंडारणकर्ता के खिलाफ अरवल सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि इतने बड़े अवैध भंडारण के पीछे कौन लोग शामिल थे.
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धनबाद में पुलिस कार्रवाई पर सियासत तेज, विधायक ने सीबीआई जांच की मांग

Dhanbad, Jharkhand:धनबाद में छात्रों पर हुई हालिया पुलिस कार्रवाई को लेकर सियासत तेज हो गई है। धनबाद विधायक राज सिन्हा ने शनिवार को समाहरणालय स्थित वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार से मुलाकात की और पूरे मामले पर अपनी नाराजगी जताई। विधायक ने पुलिस कार्रवाई को आपातकाल जैसे हालात बताते हुए राज्य सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का गंभीर आरोप लगाया है। एसएसपी से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए विधायक राज सिन्हा ने कहा कि हाल की घटना उन्हें इमरजेंसी की याद दिलाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह आपातकाल के दौरान लोगों के अधिकारों और आवाज को दबाने का प्रयास किया गया था, उसी तरह आज झारखंड में भी सरकार प्रशासन के माध्यम से छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। विधायक ने कहा कि छात्रों को यदि अपने साथ अन्याय होने का अंदेशा है तो विरोध प्रदर्शन करना और अपनी आवाज उठाना उनका संवैधानिक और मौलिक अधिकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी कौन सी परिस्थिति बन गई थी कि पुलिस को हॉकी स्टिक और डंडे लेकर छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी। राज सिन्हा ने राज्य सरकार और प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता की आवाज को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सरकार को समय रहते जनता और छात्रों की बात सुननी चाहिए। विधायक राज सिन्हा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूरे मामले में गंभीरता से हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि छात्रों की शिकायतों और मांगों पर विचार किया जाए तथा पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जाए।
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सफाई कर्मचारी यूनियन और मंत्री के बीच बैठक बेनतीजा, फिर मीटिंग की उम्मीद

Kurukshetra, Haryana:कुरुक्षेत्र। जिम खाना क्लब में शनिवार को सफाई कर्मचारी यूनियन और कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी के बीच हुई बैठक पहले दौर में बेनतीजा रही। करीब 2 घंटे तक चली वार्ता के बाद यूनियन के पदाधिकारी और कर्मचारी बाहर आ गए। बातचीत के दौरान कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। बैठक खत्म होने के बाद एसडीएम अमन कुमार यूनियन के पदाधिकारियों को मनाने के लिए पहुंचे। यूनियन के स्टेट प्रधान नरेश शास्त्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार और यूनियन के बीच कई मुद्दों को लेकर बातचीत हुई, लेकिन कुछ मांगों पर मतभेद बने हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान कैबिनेट मंत्री उठकर चले गए। इसके बाद यूनियन के लोग भी बैठक से बाहर आ गए। नरेश शास्त्री ने कहा कि यूनियन अपने हक की लड़ाई लड़ रही है और कर्मचारियों की मांगों से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि अब मंत्री की ओर से दोबारा बातचीत के लिए न्योता आया है। यूनियन के पदाधिकारी फिर से बैठक में शामिल होने जा रहे हैं। उनका प्रयास है कि बातचीत के जरिए कर्मचारियों की मांगों का समाधान निकले, लेकिन यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती तो यूनियन अपने आंदोलन को आगे बढ़ाएगी। यूनियन नेताओं का कहना है कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि बातचीत केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि मांगों पर ठोस फैसला होना चाहिए। मांगों पर अड़े कर्मचारी नरेश शास्त्री ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी अपने अधिकारों से समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ बातचीत का रास्ता खुला है और यूनियन बातचीत से समाधान चाहती है, लेकिन कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट निर्णय जरूरी है। अब दोबारा होने वाली बैठक पर सभी की नजर है। यदि इस दौर में सरकार और यूनियन के बीच सहमति बनती है तो विवाद का समाधान निकल सकता है। वहीं, मांगों पर सहमति नहीं बनी तो सफाई कर्मचारी यूनियन अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला ले सकती है। बाईट:- नरेश शास्त्री, प्रधान सफाई कर्मी यूनियन
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टोंक से चुराए 31 लाख के ट्रक-जिम सामग्री मंडाना पुलिस ने बरामद

Kota, Rajasthan:मंडाना पुलिस की तत्परता: टोंक से चोरी हुआ 31 लाख का ट्रक व जिम सामग्री बरामद ​16 लाख के जिम उपकरणों से भरा ट्रक गोपालपुरा पुलिया के पास लावारिस मिला, दत्तावास पुलिस के किया सुपुर्द ​कोटा। कोटा ग्रामीण के मंडाना थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए टोंक जिले के दत्तावास थाना क्षेत्र से चोरी हुआ आईसर ट्रक (RJ 14 GK 3907) बरामद कर लिया है। ट्रक की बॉडी में 16 लाख रुपए मूल्य का जिम का सामान भरा हुआ था। 15 लाख रुपए कीमत के ट्रक सहित कुल 31 लाख रुपए का मशरूका जब्त किया गया है。 ​कोटा ग्रामीण पुलिस अधीक्षक सुजीत शंकर ने बताया कि 21 अगस्त की सुबह पुलिस कंट्रोल रूम से टोंक के दत्तावास से अज्ञात व्यक्ति द्वारा ट्रक चुरा ले जाने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना मिलते ही मंडाना पुलिस टीम ने गोपालपुरा टोल प्लाजा पर सख्त नाकाबंदी की और आसपास के होटल-ढाबों पर तलाश शुरू की。 ​सघन जांच के दौरान उक्त आईसर ट्रक फाटाखेड़ा पुलिया सर्विस रोड पर सड़क किनारे खड़ा मिल गया। मंडाना पुलिस ने बरामद ट्रक व जिम का सामान दत्तावास थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया है, जहां दर्ज प्रकरण संख्या 142/2026 धारा 303(2) बीएनएस में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है。
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रावणा राजपूत समाज ने सावन-राखी उत्सव में लहरिया परिधान में झलकाईं राजस्थान संस्कृति

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर रावणा राजपूत समाज ने मनाया सावन-राखी उत्सव, महिलाओं ने लहरिया पहनकर दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रावणा राजपूत समाज की ओर से शनिवार को रेलवे सामुदायिक भवन में सावन एवं राखी उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज की महिलाओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। महिलाएं पारंपरिक लहरिया परिधानों में सज-धजकर पहुंचीं, जिससे कार्यक्रम में राजस्थानी संस्कृति की झलक देखने को मिली。 उत्सव के दौरान रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। महिलाओं ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में समाज के बुजुर्गों, युवाओं, महिलाओं और बालिकाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और उत्सव का आनंद लिया。 आयोजन में रावणा राजपूत समाज के राजेंद्र सिंह, राखी, मनोज कुमार परिहार, किशोर सिंह, वंदना सांखला, देवी सिंह कुड़ी सहित समाज के कई सदस्य मौजूद रहे। इस दौरान सावन और राखी के पर्व को आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकजुटता के साथ मनाया गया。
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CAG ने राजस्थान में सड़क सुरक्षा दावों की पोल खोली चार साल बिना योजना मौतें बढ़ीं

Jaipur, Rajasthan:काशीराम चौधरी CAG ने खोली सड़क सुरक्षा दावों की पोल, 4 साल तक बिना कार्य योजना काम करते रहे परिवहन विभाग के अफसर! - भारी-भरकम वित्तीय प्रावधान, रिजल्ट सिफर, घट नहीं, हर साल बढ़ रहे हैं सड़क हादसे, CAG की वर्ष 2026 की ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा - वर्ष 2018 की तुलना में 1470 मौतें बढ़ी, 2.35 लाख ड्राइविंग लाइसेंस बिना ट्रैक पर ट्रायल के ही बांट दिए, केवल 7 परसेंट सड़कों की ही थ्री लेवल ऑडिट की गई जयपुर। राजस्थान में सड़क दुर्घटनाएं कम करने की दिशा में केवल कागजी योजनाएं बनाई जा रही हैं। यूं तो लुभावने नारों और भारी-भरकम बजट खर्च किया जा रहा है, लेकिन सड़कों पर असमय जान गंवाने वाले लोगों की संख्या में कमी आने के बजाय आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक यानी कैग की वर्ष 2026 की नवीनतम ऑडिट रिपोर्ट राजस्थान में सड़क सुरक्षा के प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या है रिपोर्ट में खास, देखिए, जी मीडिया की यह विशेष न्यूज रिपोर्ट- महा लेखापरीक्षक, राजस्थान की रिपोर्ट 'राजस्थान में सड़क सुरक्षा प्रणाली' ने राज्य सरकार के सड़क सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है। रिपोर्ट में साफ है कि नीतिगत निर्णयों में चार-चार साल की भारी देरी, सड़क सुरक्षा ऑडिट में घोर लापरवाही, जानलेवा 'ब्लैक स्पॉट्स' के सुधार में उदासीनता और आधुनिक तकनीकों व ऑटोमेटेड सिस्टम को लागू न करने की वजह से राज्य में सड़क हादसे बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में हादसों में होने वाली मौतें सरकारी आंकड़ों में लगातार बढ़ती जा रही हैं। राजस्थान सरकार ने मार्च 2017 में 'राज्य सड़क सुरक्षा नीति' को स्वीकृति दी थी, जिसके तहत वर्ष 2018-2020 के लिए एक कार्य योजना तैयार की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य वर्ष 2015 को आधार वर्ष मानकर 2020 के अंत तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में कुल 50 प्रतिशत की कमी लाना था। हालांकि आंकड़े बताते हैं कि यह लक्ष्य केवल सरकारी दस्तावेजों तक ही सीमित रहा। वर्ष 2018 में मौतों को घटाकर 8,933 पर सीमित करने का लक्ष्य था, लेकिन वास्तविक मौतें 10,320 यानी 16% अधिक हुईं। वर्ष 2020 तक मौतों की संख्या को 5254 पर लाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन इस वर्ष 9250 लोगों ने अपनी जान गंवा दी, जो लक्ष्य से 76% अधिक थी। इसके बाद अगले 4 साल तक सड़क सुरक्षा की व्यवस्था बिना किसी ठोस कार्य योजना के चलती रही। वर्ष 2020 में पिछली कार्य योजना समाप्त होने के बाद नई योजना बनाने में सरकार को 4 साल का लंबा वक्त लग गया। धरातल पर योजना नहीं, बढ़ती गई मौतें - जुलाई 2024 में 'सड़क सुरक्षा कार्य योजना 2024-33' बनाई गई - वर्ष 2021 से 2024 के दौरान विभाग की कोई ठोस योजना संचालित नहीं - तब वर्ष 2020 के ही लक्ष्य को आधार माना गया - इस दौरान निर्धारित आंकड़ों से 91% से 124% तक अधिक मौतें हुईं - वर्ष 2023 में 11762 और वर्ष 2024 में 11790 लोगों की जान गई हादसों में इस तरह बढ़ी मौतों की संख्या - वर्ष 2018 में 8933 अधिकतम मौतें होनी चाहिए थी, वास्तविकता में 10,320 मौतें हुई - निर्धारित सीमा से 1387 यानी 16% मौतें अधिक हुई - वर्ष 2019 में 7356 मौतें होनी चाहिए थी, लेकिन कुल 10,563 मौतें हुई - निर्धारित सीमा से 44 प्रतिशत यानी 3207 मौतें हुई - वर्ष 2020 में 5254 मौतों की सीमा रखी, 9250 की मौतें हुई - निर्धारित सीमा से 3996 यानी 76% अधिक मौतें हुई - वर्ष 2022 में 5254 मौतों की सीमा के विपरीत 11104 मौतें - निर्धारित सीमा से 5850 यानी 111% अधिक मौतें हुई - 2024 में 5254 मौतों की सीमा के विपरीत 11790 मौतें हुई - यानी निर्धारित सीमा से 6536 यानी 124% अधिक मौतें हुई सड़क सुरक्षा ऑडिट से भाग रहा PWD सड़क निर्माण के समय 'सड़क सुरक्षा ऑडिट' दुर्घटनाओं को रोकने का प्राथमिक कदम माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति और इंडियन रोड कांग्रेस के निर्देशानुसार 10 करोड़ से अधिक लागत वाली तथा 5 किलोमीटर से अधिक लंबी हर सड़क का त्रि-स्तरीय ऑडिट करना जरूरी है। सड़क की डिजाइन, निर्माण और परिचालन स्तर पर ऑडिट की जानी चाहिए। सीएजी द्वारा पीडब्ल्यूडी की 425 सड़कों के किए गए ऑडिट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इसके तहत कुल 425 प्रमुख सड़कों में से केवल 32 सड़कों यानी 7.53% सड़कों का ही त्रि-स्तरीय सुरक्षा ऑडिट किया गया। 146 सड़कों पर वर्ष 2018-19 से 2024-25 के दौरान किसी भी स्तर का सड़क सुरक्षा ऑडिट नहीं कराया गया। पीडब्ल्यूडी ने सड़क सुरक्षा ऑडिट के लिए किसी भी निष्पक्ष थर्ड पार्टी एजेंसी को एम्पैनल तक नहीं किया। सड़कों के दोषपूर्ण डिजाइन, गड्ढों, तीखे घुमावों और अपर्याप्त रखरखाव की वजह से वर्ष 2019 से 2024 के दौरान 11685 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 5184 लोगों की अकाल मृत्यु हो गई। ब्लैक स्पॉट्स को सुधारने पर जोर नहीं जिस 500 मीटर के सड़क खंड पर 3 साल में 5 गंभीर हादसे या 10 मौतें हों, उसे 'ब्लैक स्पॉट' माना जाता है। सीएजी रिपोर्ट दर्शाती है कि वर्ष 2019 से 2024 के दौरान चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स पर कुल 41857 दुर्घटनाएं हुईं और 28306 लोगों की जान गई। पीडब्लडी द्वारा चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स में से वर्ष 2023 में 61.08% तथा वर्ष 2024 में 63.16% ब्लैक स्पॉट्स में सुधार कार्य नहीं किए गए। यानी ये ब्लैक स्पॉट इसी तरह हादसों का कारण बने रहे। वर्ष 2019 में चिन्हित 7 ब्लैक स्पॉट्स तो ऐसे थे जो वर्ष 2024 तक नहीं सुधारे गए। इन 7 स्थानों पर 5 वर्षों में 156 हादसे हुए और 110 लोगों की मौत हो गई। एनएच-3/44 पर केवल 4 किमी के फासले में 3 स्थाई ब्लैक स्पॉट्स पाए गए। रोडमैप-2020 में तकनीक-आधारित 'ब्लैक स्पॉट प्रबंधन प्रणाली' बनाने का संकल्प लिया गया था, लेकिन 4 साल बाद भी यह सिस्टम विकसित नहीं किया जा सका। बिना टेस्ट और बिना ट्रैक के बांटे जा रहे ड्राइविंग लाइसेंस - सड़क हादसों में 79 प्रतिशत मौतें चालकों की गलती के कारण होती हैं - योग्य चालकों को लाइसेंस मिले, इसके लिए ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक बनाने थे - सितंबर 2017 में सड़क सुरक्षा कोष से 37 कार्यालयों के लिए 39 करोड़ मंजूर किए - लेकिन 7 साल बाद भी केवल 13 ट्रैक ही सुचारू हालत में - वर्ष 2022-23 में राज्य में 683699 लाइसेंस जारी हुए - इनमें से सबसे अधिक 34.45% (235557 लाइसेंस) 44 परिवहन कार्यालयों में बने - जहां ड्राइविंग टेस्ट ट्रायल के लिए कम से कम एक ट्रैक उपलब्ध नहीं था - ऑटोमेटेड ट्रैक पर सख्त जांच के कारण फेल का आंकड़ा अधिक - जबकि बिना ट्रैक वाले कार्यालयों में फेल होने की दर मात्र 0.32% थी - 24 परिवहन कार्यालय ऐसे, जहां 100% आवेदकों को ड्राइविंग टेस्ट में पास किया गया रॉन्ग-साइड ड्राइविंग और 'जुगाड़' वाहनों से अधिक हादसे वर्ष 2019 से 2024 के दौरान गलत दिशा में वाहन चलाने से 6266 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 2,794 मौतें दर्ज की गईं। पुलिस विभाग ने 15.22 लाख चालान काटे, लेकिन परिवहन विभाग ने इस अवधि में एक भी चालान नहीं काटा। इसके अलावा अवैध 'जुगाड़' वाहनों के खिलाफ 3.72 लाख चालान जारी हुए। नियमानुसार इन्हें जब्त कर कबाड़ किया जाना चाहिए था, लेकिन परिवहन विभाग ने 7 वर्षों में सिर्फ 65 वाहनों को ही कबाड़ किया। हाईवेज पर हर 50 किमी पर इंटरसेप्टर और हाईवे पेट्रोल वाहन तैनात होने थे। 563 इंटरसेप्टर और हाईवे पेट्रोलिंग वाहनों की आवश्यकता थी, लेकिन केवल 74 इंटरसेप्टर और 63 हाईवे पेट्रोलिंग वाहन ही चालू मिले, जो औसतन 381 से 447 किमी की अत्यधिक दूरी पर तैनात थे। भारी वाहनों के पंजीयन में स्पीड गवर्नर की जांच भी नहीं की जा रही है। सीएजी दल ने 4 जिलों दौसा, टोंक, सिरोही, उदयपुर में वाहनों के पंजीयन की जांच की। 23053 व्यावसायिक वाहनों को स्पीड गवर्नर लगाए बिना ही रजिस्टर कर दिया गया। सड़क हादसों में कमी लाने और ई-चालान की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए परिवहन विभाग ने एक और प्रयोग किया। जयपुर-भीलवाड़ा हाईवे पर 9.58 करोड़ की लागत से स्वचालित नंबर प्लेट पहचान वाले ANPR कैमरे लगाने की योजना तैयार की। लेकिन 6 साल बाद भी यह योजना कागजों से बाहर नहीं निकल सकी। सीएजी ने यह मुख्य सिफारिशें की - थर्ड पार्टी ऑडिट अनिवार्य हो: सभी नई व मौजूदा सड़कों का तृतीय-पक्ष एजेंसीों से त्रि-स्तरीय सुरक्षा ऑडिट कराकर ब्लैक स्पॉट्स को निश्चित समय-सीमा में सुधारा जाए। - स्वचालित ट्रैक की बहाली: सभी परिवहन कार्यालयों में पारदर्शी ड्राइविंग टेस्ट के लिए ऑटोमेटेड ट्रैकों की स्थापना व संचालन तुरंत शुरू हो। - इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन (ANPR/ITMS): ओवरस्पीडिंग व यातायात उल्लंघन रोकने के लिए अधिक जोखिम वाले मार्गों पर ANPR कैमरे व ई-चालान व्यवस्था लागू हो। - कठोर दंडात्मक कार्रवाई: रॉन्ग साइड ड्राइविंग, अवैध जुगाड़ वाहनों और ओवरस्पीडिंग पर भारी जुर्माना लगाया जाए, ऐसे वाहनों को सीधे जब्त किया जाए - बहु विभागीय समन्वय: सड़क निर्माण एजेंसियों, पुलिस, परिवहन विभाग और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच मजबूत समन्वय स्थापित किया जाए।
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सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर फरक्का संधि की 30 साल समीक्षा की मांग की

Noida, Uttar Pradesh:सुधाकर सिंह (आरजेडी सांसद) प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर संधि की समीक्षा की मांग की। फरक्का बैराज सम्बन्धी भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा समझौते (1996) की दिसम्बर 2026 में होने वाली 30-वर्षीय समीक्षा के सन्दर्भ में बिहार राज्य के जल, नौवहन एवं आर्थिक हितों की रक्षा हेतु आवश्यक एवं तत्काल कदम उठाने के सम्बन्ध में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को लिखा पत्र। 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई 30 साल की गंगा जल बंटवारा संधि यह फरक्का बैराज (पश्चिम बंगाल) पर शुष्क मौसम (1 जनवरी से 31 मई) के दौरान गंगा के पानी के बंटवारे को तय करती है संजय कुमार झा (JDU, राज्यसभा सांसद) मौजूदा स्वरूप में संधि का नवीकरण न हो। बिहार और गंगा बेसिन राज्यों की 2050 तक की जरूरत का वैज्ञानिक आकलन हो। बिहार को करीब 2000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी चाहिए। संधि से बिहार को बाढ़ सूखे की दोहरी मार पड़ी है। CM का विदेश मंत्री से मुलाकात भारत सरकार (MEA) तकनीकी स्तर पर चर्चा जारी है। Joint Rivers Commission के तहत बातचीत हो रही है। औपचारिक नवीकरण वार्ता अभी शुरू नहीं हुई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी, जेडी(यू) के संजय कुमार झा तीनों ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। इस बैठक में संजय झा ने फरक्का जल संधि का मुद्दा उठाया
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जयपुर में 600 बेड अस्पताल; चरण एक में 300 बेड, महेश्वरी मेडिकल संस्थान बनेगा

Jaipur, Rajasthan:जयपुर में माहेश्वरी समाज की ओर से 600 बेड के अत्याधुनिक सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल का शिलान्यास किया गया। मानसरोवर के गणपतपुरा में करीब 22 हजार वर्गगज क्षेत्र में माहेश्वरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर विकसित किया जाएगा। बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित मुख्य समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और श्री सीमेंट लिमिटेड के चेयरमैन हरिमोहन बांगड़ विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। परियोजना के पहले चरण में 300 बेड और करीब 5 लाख वर्गफीट में निर्माण होगा। इसके बाद इसे 600 बेड के अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा। संस्थान में आमजन को किफायती दरों पर आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इसके साथ मेडिकल शिक्षा और रिसर्च को भी बढ़ावा दिया जाएगा। परिसर में करीब 2 हजार वर्गगज में भगवान महेश का मंदिर भी बनाया जाएगा। समारोह में माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष उमेश सोनी, परियोजना अध्यक्ष बजरंग बाहेती सहित समाज के पदाधिकारी मौजूद रहे।
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पुलिस थाना परिसर में बाल वाहिनी चालकों की आंखों की जाँच शिविर आयोजित

Sikar, Rajasthan:ज़िला - सीकर विधानसभा - लक्ष्मणगढ़ सीकर लोकेशन - लक्ष्मणगढ़ पुलिस थाना परिसर में बाल वाहिनी चालकों की आई जाँच शिविर का आयोजन हुआ एंकर इन्ट्रो- लक्ष्मणगढ़ थाना परिसर कै सभागार में जिला कलेक्टर आशीष मोदी व पुलिस अधीक्षक प्रवीण नुनावत के निर्देशानुसार लक्ष्मणगढ़ जिला चिकित्सालय की ओर बाल वाहिनी चालकों की आंखों की जाँच के लिए शिविर का आयोजन किया गया। जिला चिकित्सालय की टीम के पवन कुमार ने बताया कि सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत जिला कलेक्टर आशीष मोदी व जिला पुलिस अधीक्षक प्रवीण नुनावत ने निर्देशानुसार आंखों की जाँच शिविर का आयोजन किया गया है। आयोजित शिविर में लक्ष्मणगढ़ उपखंड क्षेत्र में संचालित शिक्षण संस्थानों में बाल वाहिनी के चालकों की आंखों की जाँच की जा रही है। निशुल्क चश्मे व दवाईयां दी जाएंगी। उन्होंने बताया कि थाना परिसर में आज केवल एक दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें बाल वाहिनी के सभी चालकों ने जाँच करवाकर दवाईयां दी।
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