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सीकर में जन्माष्टमी धूमधाम: गोपीनाथ मंदिर पर छप्पन भोग और दही हांडी उत्सव

Sikar, Rajasthan:सीकर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। जन्माष्टमी को लेकर शहरभर के मंदिरों को आकर्षक रोशनी और फूलों से सजाया गया है। मंदिरों में भगवान कृष्ण का विशेष श्रृंगार किया जा रहा है, वहीं भक्तों के लिए आकर्षक झांकियां भी सजाई गई हैं। नगर राजा गोपीनाथ जी के मंदिर में भगवान कृष्ण के लिए छप्पन भोग की भव्य झांकी सजाई गई है, जिसे देखने और दर्शन करने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मंदिरों में भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का दौर जारी है। जन्माष्टमी को लेकर शहर के लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। वहीं आज शाम जाट बाजार, श्री कल्याण धाम और सुभाष चौक में दही हांडी महोत्सव का आयोजन होगा। गोपीनाथ मंदिर के पुजारी तरुण गोस्वामी ने बताया कि यह गोपीनाथ राजा का प्राचीन मंदिर है, जो लगभग 300 से 400 वर्ष पुराना बताया जाता है। राजा राव सिंह से भी पहले के शासकों द्वारा भगवान गोपीनाथ जी को यहां लाकर स्थापित किया गया था और तभी मंदिर का निर्माण कराया गया था। उस समय से लेकर आज तक यहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व उसी परंपरा और विधि-विधान के साथ मनाया जाता है। अगर इतिहास की बात करें तो माना जाता है कि लगभग 1750 ईस्वी के आसपास गोपीनाथ जी को यहां लाकर स्थापित किया गया था। इसके बाद से लगातार जन्माष्टमी का आयोजन परंपरागत रूप से होता आ रहा है। यहाँ जन्माष्टमी का महोत्सव तीन दिवसीय रहता है। पहले दिन विशाल निशान पदयात्रा निकाली जाती है। दूसरे दिन भगवान गोपीनाथ जी को छप्पन भोग अर्पित किया जाता है। इसके साथ ही फूल बंगला सजाया जाता है, रबड़ी प्रसाद और पंचामृत अभिषेक का आयोजन होता है। जन्माष्टमी के अगले दिन नंदोत्सव मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का विशेष श्रृंगार किया जाता है। मंदिर में खिलौनों और अन्य आकर्षक वस्तुओं से बाल गोपाल की झांकी सजाई जाती है। भगवान को माखन-मिश्री सहित विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित किए जाते हैं और इसके बाद प्रसाद भक्तों में वितरित किया जाता है। यह पूरी परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है।
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जालौन में बारिश के बाद सड़क गड्ढों से हादसों का सिलसिला, ई-रिक्शा पलटा

Jalaun, Uttar Pradesh:ब्रेकिंग जालौन जालौन में बारिश के बाद सड़क गड्ढों में हुई तब्दील आएदिन हो रहे हादसे, बारिश के बाद सड़क पर जगह-जगह हुए बड़े-बड़े गड्ढे, सड़क पर गड्ढे में पलटा ई-रिक्शा, बाल-बाल बचा चालक, हादसे के बाद सड़क की बदहाली की खुली पोल, गुजरने वाले लोगों को हो रही परेशानी, राहगीरों और वाहन चालकों को रोजाना करना पड़ रहा जोखिम भरा सफर, गड्ढों के चलते आए दिन दुर्घटनाओं का बना हुआ है खतरा, जिम्मेदारों पर उठ रहे सवाल, सड़क पर गड्ढे में गिरे ई-रिक्शा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, कोंच कोतवाली क्षेत्र के नदीगांव रोड स्थित जिओ ऑफिस के सामने का मामला ।
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बरसाती नालों से रामनगर में हादसों की चिंता: पुल निर्माण की मांग तेज

Noida, Uttar Pradesh:रामनगर में इस बरसात बरसाती नाले लोगों के लिए मुसीबत का सबब बने हुए हैं,टेड़ा के पास रामनगर-भंडारखानी मार्ग पर स्थित बरसाती नाला लगातार उफान पर रहा, जिसमें एक थ्री-व्हीलर तक बह गया। वहीं रामनगर-हल्द्वानी राज्य मार्ग पर बेलगढ़ के पास स्थित नाले में भी कई बाइक सवार गिरकर चोटिल हो चुके हैं,लगातार हो रहे हादसों के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से इन नालों पर स्थायी पुल बनाए जाने की मांग की है. बताया जा रहा है कि पहाड़ों और आसपास के जंगल क्षेत्रों में बारिश होने के बाद बरसाती नालों में अचानक पानी का बहाव बढ़ जाता है,टेड़ा के पास भंडारखानी मार्ग पर बना नाला भी बारिश के दौरान कई बार उफान पर आ चुका है, तेज बहाव के कारण यहां से गुजरना लोगों के लिए जोखिम भरा हो जाता है। हालात तब और गंभीर हो गए जब पानी के तेज बहाव में एक थ्री-व्हीलर बह गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। हर साल बरसात के मौसम में नाले का जलस्तर बढ़ने के साथ यहां दुर्घटना का खतरा पैदा हो जाता है,इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है,इसी तरह रामनगर-हल्द्वानी राज्य मार्ग पर बेलगढ़ के पास स्थित बरसाती नाला भी वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है,बारिश के दौरान नाले पर पानी आने से सड़क और नाले के बीच का अंतर कई बार स्पष्ट नहीं दिखाई देता,ऐसे में बाइक सवार संतुलन खोकर नाले में गिर जाते हैं। कई बाइक सवार गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं. लोगों का कहना है कि महज चेतावनी बोर्ड लगाने या अस्थायी व्यवस्था करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बरसात शुरू होते ही हर साल इन स्थानों पर हादसों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में टेड़ा और बेलगढ़ समेत अन्य संवेदनशील बरसाती नालों का सर्वे कराकर वहां छोटे पुल या मजबूत कलवर्ट का निर्माण किया जाना चाहिए. स्थानीय लोगों ने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से जल्द कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि अगर समय रहते इन नालों पर पुल नहीं बनाए गए तो आने वाले समय में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है.
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पटना में बाढ़ गहराई, गांधी घाट-दीघा इलाके पानी में डूबे

Noida, Uttar Pradesh:पटना में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है। गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर अब रिहायशी इलाकों में भी दिखने लगा है। दीघा के बिंद टोली में कई घरों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। करीब 1500 परिवार जेपी गंगा पथ के आसपास अस्थायी ठिकानों में रहने को मजबूर हैं। वहीं गांधी घाट भी पूरी तरह पानी में डूब चुका है। घाट के बाहर सड़क और आस-पास के घरों तक भी पानी पहुंचने लगा है, जिससे लोगों की आवाजाही मुश्किल हो गई है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। राहत शिविरों के साथ पशुओं के लिए भी कैंप लगाए गए हैं। कम्युनिटी किचन, पीने के पानी और शौचालय की व्यवस्था की गई है। लोगों को लगातार अलर्ट रहने की अपील की जा रही है। जल संसाधन विभाग के मुताबिक, दीघा घाट पर गंगा का जलस्तर 51.68 मीटर है, जो खतरे के निशान से 1.23 मीटर ऊपर है। वहीं गांधी घाट पर जलस्तर 50.36 मीटर है, जो खतरे के निशान से 1.76 मीटर ऊपर बह रहा है। बढ़ते जलस्तर के बीच अब प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती लोगों को सुरक्षित रखना है।
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मथुरा में भक्तों की भीड़ और सुरक्षा की चेकलिस्ट: जन्मभूमि मंदिर में उत्साह

Noida, Uttar Pradesh:भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि में भक्तों के आने का सिलसिला जारी हैं, सैकड़ों की भीड़ में लोग अब तक दर्शन के लिए आ चुके हैं, मथुरा के SP सुरेश चंद्र रावत से सुरक्षा व्यवस्था पर बात की है उन्होंने बताया कि लगभग 50-60 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है लेकिन जिस तरह भीड़ आ रही है ये संख्या और बढ़ सकती है… लीला मंच पर भजन कीर्तन की शुरुवात हो गई है जिसके बाद सभी भक्त राधे राधे की गूंज के साथ झूम रहे हैं. भक्तों से बात की है. “मथुरा में लेकर जन्म… गोकुल पाई छांव… धन्य मात जसुदा हुई… धन्य हुआ है गांव…” जन्मभूमि मंदिर परसीर की तैयारियां और भीड़ को दिखाते हुए, आज के खास कार्यक्रम की जानकारी देते हुए किया है।
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भूपेंद्र यादव की बैठक से दिल्ली-एनसीआर वायु प्रदूषण पर केंद्र-राज्यों का एकजुट प्रयास

Noida, Uttar Pradesh:केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कल दिल्ली-NCR और आस-पास के इलाकों में वायु प्रदूषण के प्रबंधन और नियंत्रण पर चर्चा करने के लिए एक बैठक की। इस बैठक में दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के पर्यावरण मंत्रियों और सचिवों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के चेयरमैन और सदस्य सचिवों के साथ-साथ पंजाब के कृषि मंत्री, कृषि सचिव और पर्यावरण सचिव भी शामिल हुए। इसमें सभी संबंधित पक्षों (स्टेकहोल्डर्स) को साथ लेकर काम करने पर ज़ोर दिया गया। मंत्री ने राज्य सरकारों द्वारा पेश की गई खास योजनाओं पर चर्चा की और राज्यों से सबसे अच्छे तरीकों को अपनाने और उन्हें लागू करने का आग्रह किया। उन्होंने वायु प्रदूषण से निपटने की कोशिशों को और असरदार बनाने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर और केंद्रित तरीके से काम करने की ज़ूरत पर ज़ोर दिया। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने राज्यों को भरोसा दिलाया कि भारत सरकार उनके साथ है और वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने और कम करने की उनकी सकारात्मक कोशिशों में हर ज़रूरी मदद देगी।
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जयपुर बीजेपी मुख्यालय में बैठक: संतोष के साथ निकाय चुनाव की रणनीति तय

Jaipur, Rajasthan:जयपुर बीजेपी मुख्यालय में हो रही बैठक राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ले रहे बैठक निकाय चुनावों को लेकर हो रही बैठक में चर्चा चुनाव संचालन समिति के सदस्य और केंद्रीय प्रभारी, सह प्रभारी बैठक में मौजूद。 बीएल संतोष निकाय चुनावों की मौजूदा स्थिति और आगामी रणनीति का ले रहे फीडबैक。 प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल मौजूद निकाय चुनाव प्रभारी और राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी भी बैठक में मौजूद。 राजेंद्र राठौड़, अशोक परनामी, अरुण चतुर्वेदी, प्रभुलाल सैनी, लालचंद कटारिया सहित चुनाव संचालन समिति के सदस्य बैठक में मौजूद。
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बेगूसराय के मटिहानी में बाढ़ से जनजीवन तहस-नहस, लोग पलायन, फसलें डूब

Begusarai, Bihar:एंकर बेगूसराय में गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच अब बाढ़ ने तबाही मचानी शुरू कर दी है। मटिहानी विधानसभा क्षेत्र के सिहमा पंचायत में बाढ़ का पानी गांव और सड़कों पर फैल चुका है। हालात ऐसे हैं कि लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। घरों में पानी घुसने के बाद कई परिवार पलायन करने को मजबूर हैं, तो कुछ लोग अपने घर की छतों पर रहने को विवश हैं। वहीं, सड़कों पर घुटने से अधिक पानी जमा होने के कारण लोगों को जान जोखिम में डालकर पानी के बीच से आवागमन करना पड़ रहा है। बाढ़ के पानी में कई एकड़ फसलें भी डूबकर बर्बाद हो गई हैं।तस्वीरें बेगूसराय के मटिहानी विधानसभा क्षेत्र के सिहमा पंचायत की हैं, जहां बाढ़ का पानी अब लोगों के लिए मुसीबत बन चुका है। पिछले कई दिनों से गांव में लगातार पानी फैल रहा है और देखते ही देखते लोगों के घरों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। हलात बिगड़ने के बाद लोग अपने घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।गांव की सड़कों पर घुटने से अधिक पानी जमा है। यही सड़क अब लोगों के लिए आवागमन का एकमात्र सहारा बनी हुई है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी पानी के बीच से होकर आने-जाने को मजबूर हैं। सड़क पर पानी की गहराई और तेज बहाव के कारण कभी भी हादसा होने का खतरा बना हुआ है।बाढ़ के पानी ने सिर्फ लोगों के घरों को ही प्रभावित नहीं किया है, बल्कि किसानों की मेहनत पर भी पानी फेर दिया है। कई एकड़ में लगी फसलें पानी में डूब चुकी हैं। किसानों के सामने अब फसल बर्बाद होने के साथ-साथ परिवार के भरण-पोषण की भी चिंता खड़ी हो गई है।स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ का पानी तेजी से गांव में फैल रहा है। कई घरों में पानी प्रवेश कर चुका है, जिसके बाद लोग अपना जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं। वहीं, कुछ परिवार ऐसे भी हैं, जो घर छोड़कर नहीं जा सके और मजबूरी में छतों पर रहने को विवश हैं।लोगों की सबसे बड़ी परेशानी गांव की जलमग्न सड़कें हैं। सड़क पर घुटने से अधिक पानी होने के बावजूद रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए लोगों को इसी रास्ते से गुजरना पड़ रहा है। ग्रामीणों को डर है कि अगर पानी का स्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो हालात और भयावह हो सकते हैं।बाढ़ की इस स्थिति ने प्रशासन के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। ग्रामीणों को अब राहत और सुरक्षित स्थान की जरूरत है। लोगों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाए और जलमग्न इलाकों में जरूरी इंतजाम किए जाएं।फिलहाल सिहमा पंचायत में बाढ़ के पानी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। घरों से लेकर खेत और सड़क तक पानी ही पानी नजर आ रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को अब प्रशासन से राहत और मदद का इंतजार है।
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मुंगेर में कीचड़ भरे खेतों से 103 बच्चों की पढ़ाई खतरे में

Munger, Bihar:खजुआ में ‘स्कूल तक सड़क’ का इंतजार, 103 बच्चों की पढ़ाई पर कीचड़ का संकट .सड़क नहीं, खेत की पगडंडी से स्कूल पहुंचते हैं बच्चे मुंगेर : असरगंज प्रखंड से शिक्षा व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सिस्टम के दावों पर सवाल खड़े करती है। यहां स्कूल तो है, शिक्षक भी हैं और 103 बच्चे पढ़ने भी आते हैं, लेकिन स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं है। करीब 500 मीटर का रास्ता खेतों के बीच बनी पगडंडी से होकर गुजरता है। लगातार बारिश के बाद यह रास्ता कीचड़ में तब्दील हो गया है। हालात ऐसे हैं कि बच्चे गिरते-पड़ते स्कूल पहुंच रहे हैं और कई अभिभावकों को अपने बच्चों को गोद में उठाकर स्कूल तक पहुंचाना पड़ रहा है। ये तस्वीरें असरगंज प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय अनुसूचित संजुआ की हैं। स्कूल के आसपास धान के खेत हैं और मुख्य मार्ग से विद्यालय तक पहुंचने के लिए करीब 500 मीटर का रास्ता है। लेकिन इस रास्ते पर सड़क नहीं, सिर्फ खेतों के बीच बनी पगडंडी है। पूरा रास्ता कीचड़ और पानी से लबालब है। बच्चे स्कूल पहुंचते हैं तो जूते-चप्पल और कपड़े कीचड़ से सन जाते हैं। बरसात के मौसम में आने-जाने में बहुत कठिनाई होती है। कभी-कभी फिसलकर गिर भी जाते हैं। शिक्षक के साथ बच्चों को भी आने में पूरी परेशानी होती है। सड़क निर्माण को लेकर कई बार आवेदन और शिकायत की जा चुकी है। बैठकों में भी इस समस्या को उठाया गया, लेकिन वर्षों से सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा है। प्रधानाध्यापिका सोनाली कुमारी भी मानती हैं कि बरसात के दिनों में हालात बेहद मुश्किल हो जाते हैं। कीचड़ और पानी के बीच बच्चों के फिसलकर गिरने का डर हमेशा बना रहता है। बारिश के मौसम में बच्चों को बहुत ज्यादा दिक्कत होती है। रास्ते में कीचड़ और पानी रहता है। बच्चे फिसलकर गिर भी जाते हैं। हम लोगों को भी बहुत दिक्कत होती है।
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