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Ambedkar Nagar224149

Ambedkar nagar - जनता जनार्दन की मांग पर डीएम ने जताई सहमति

Jan 27, 2025 09:33:40
Jalalpur, Uttar Pradesh

मालीपुर तिराहे पर स्थापित शिवाजी महाराज की प्रतिमा के नाम पर तिराहे का नामकरण शिवाजी तिराहा करने को लेकर स्थानीय लोगों की मांग पर सहमति जताते हुए, जिलाधिकारी ने बताया कि एमएलसी और एमएलए के प्रयास से पूरे जलालपुर कस्बे के लिए लगभग छः सौ करोड़ का प्रोजेक्ट शासन को भेजा दिया गया है।

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Jan 28, 2026 18:02:52
Barabanki, Uttar Pradesh:बाराबंकी में समाजवादी पार्टी (सपा) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के प्रदेश सचिव और नगर पालिका परिषद के पूर्व अध्यक्ष हफीज भारती ने अपने समर्थकों के साथ सपा छोड़कर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली। उन्होंने इसे अपनी 'घर वापसी' बताया। हफीज भारती ने लखनऊ में बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से मुलाकात कर औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल हुए। बसपा में शामिल होने के बाद हफीज भारती ने कहा कि समाजवादी पार्टी में परिवारवाद हावी है, जिसके कारण वे स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2027 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सत्ता में आने से रोकने के उद्देश्य से उन्होंने बसपा का दामन थामा है। भारती ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में जंगलराज कायम है। उनके अनुसार, गुंडे और माफिया सरकार के संरक्षण में फल-फूल रहे हैं, जिससे आम जनता त्रस्त है। उन्होंने दावा किया कि 2027 में मायावती पूर्ण बहुमत के साथ पांचवीं बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि अल्पसंख्यक और बहुजन समाज के एकजुट होने से बसपा और मजबूत होगी, और मुस्लिम समाज सहित सर्व समाज बसपा की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहा है।
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AMAsheesh Maheshwari
Jan 28, 2026 18:00:30
Noida, Uttar Pradesh:
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Jan 28, 2026 17:50:07
Kesharipur, Uttar Pradesh:मनरेगा मजदूर यूनियन ने आराजीलाईन में विकसित भारत-जी-राम-जी विधेयक के विरोध में बैठक की। बैठक में मुस्तफा, सरोज पटेल, कविता, रेनु पटेल, सुरेश राठौर, राजकुमार गुप्ता, पूजा गौतम, शांति, राधा, शुशीला, मंशा, राजकुमारी, राधिका और बड़ी संख्या में मजदूर शामिल हुए। उन्होंने बिल वापस लेने की मांग की और सरकार पर मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाया। यूनियन के संयोजक सुरेश राठौर ने कहा कि मनरेगा योजना ग्रामीण गरीबों के लिए जीवनरेखा है और इसमें बदलाव मजदूरों के हितों के खिलाफ होगा। कार्यक्रम का नेतृत्व रेनू पटेल ने किया और संचालन राजकुमार गुप्ता ने किया। अध्यक्षता निर्मला देवी ने की। यूनियन ने मनरेगा बचाने के संकल्प के साथ आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।
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AMAsheesh Maheshwari
Jan 28, 2026 17:48:41
Noida, Uttar Pradesh:
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AGAbhishek Gour
Jan 28, 2026 17:48:33
Narmadapuram, Madhya Pradesh:जिले के पिपरिया में सर्व समाज ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी नए अध्यादेश का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने रैली निकालकर तहसील कार्यालय तक मार्च किया और प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा। यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को “प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशनों रेगुलेशंस 2026” नामक नए नियम लागू किए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि नए नियमों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जबकि सामान्य वर्ग के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं हैं। समाज का मानना है कि ये नए नियम सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभावपूर्ण हैं और उन्हें उच्च शिक्षा के अवसरों से वंचित करने वाला हो सकते हैं। विशेष रूप से नए नियम 3(सी) को भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताया गया है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि नए नियमों में जातिगत भेदभाव की परिभाषा स्पष्ट नहीं है, जिससे आपसी संघर्ष और वैमनस्यता बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा, पुराने नियमों में झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत पर जुर्माना और निलंबन का प्रावधान था, जिसे नए नियमों से हटा दिया गया है। सर्व समाज ने तत्काल अध्यादेश में सुधार करने और सभी वर्गों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग की है।
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CSChandrashekhar Solanki
Jan 28, 2026 17:48:13
Ratlam, Madhya Pradesh:रतलाम में बंदूक दुकान विस्फोट मामले में जी मीडिया की आशंका पर मुहर लग गई है। जी मीडिया ने पहले दिन संकेत दिए थे कि यह धमाका बारूद में आग लगने से हुआ हो सकता है, और अब लापरवाही को लेकर दर्ज प्रकरण में भी वही बात सामने आई है। प्रकरण में बताया गया है कि दुकान में रखे बारूद में लापरवाही बर्तन से आग लगी, जिससे भीषण विस्फोट हुआ। सवाल अब भी बरकरार हैं कि दुकान में कितना बारूद रखा गया था, वह क्यों लाया गया और किस तरह का बारूद था—इन सभी बिंदुओं पर पुलिस की तफ्तीश जारी है। जी मीडिया ने छर्रे भी इस विस्फोट के बाद दिखाए थे, क्या ये छर्रे इस विस्फोट मामले से जुड़े हैं इसके अलावा दुकान के अंदर के दरवाजे पर भी कई सारे Holi दिखाई दिए हैं क्यों है أين दरवाजे पर इतने hole, क्या धमाके के दौरान हुए हैं फिलहाल पुलिस की पूरी तफ्तीश में इन सब सवालों के जवाब मिलेंगे। इस धमाके के सीसीटीवी भी सामने आए हैं जिसमें धमाका इतना भयावह है कि न सिर्फ दुकान के बाहर लोगों में अफरा-तफरी मची थी बल्कि धमाके के बाद बाहर आए युवक के शरीर के कपड़ों के चीथड़े उड़ गए थे और युवक के शरीर से धुआँ उठ रहा था। धमाका ऐसा भयानक था कि लोग चप्पल हाथ में लेकर दौड़ते दिखाई दिए। वहीं यह मामला अब और गंभीर हो गया है। 26 जनवरी को हुए इस धमाके में घायल चार लोगों में से एक की बुधवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक की पहचान बंदूक दुकान के मालिक Yousuf Ali के रूप में हुई है; उनका शव Ratlam लाया गया है। फिलहाल दुकान के दो कर्मचारी और एक ग्राहक का इलाज जारी है। अब देखना होगा कि पुलिस यह विस्फोट का पूरा खुलासा कब तक करती है। इसके अलावा SP Amit Kumar ने जिले की बंदूक दुकानों के निरीक्षण और उनमें सुरक्षा इंतजाम की जाँच की बात भी कही है; सबसे जरूरी इन हथियार दुकानों में CCTV हों अनिवार्य है, इसे लेकर भी सभी बंदूक दुकानों का निरीक्षण किए जाने की बात कही गई है।
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RKRakesh Kumar Bhardwaj
Jan 28, 2026 17:47:41
Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर–जैसलमेर राष्ट्रीय राजमार्ग पर हो रहे अतिक्रमणों को गंभीर मानते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और राज्य सरकार को सख्त निर्देश जारी किए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा एवं न्यायाधीश बलजिंदर सिंह संधू की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग और उसकी साइड लेन के निर्माण क्षेत्र में 75 मीटर की सीमा के भीतर यदि कहीं भी अतिक्रमण शेष है तो उसे तत्काल चिन्हित कर हटाया जाए। सवाई चंद की ओर से दायर प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अनिल व्यास ने अदालत को बताया कि जोधपुर–जैसलमेर एनएच पर अवैध अतिक्रमणों के कारण आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं, जिससे आमजन की जान जोखिम में पड़ रही है। इस पर कोर्ट ने एनएचएआई की ओर से अधिवक्ता अंकुर माथुर और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता एनएस राजपुरोहित को निर्देशित किया कि वे अतिक्रमण हटाने की अब तक की कार्रवाई को लेकर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करें। डिवीजन बेंच ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग महत्वपूर्ण सार्वजनिक आधारभूत ढांचा है और उस पर अवैध कब्जा यातायात में बाधा के साथ दुर्घटनाओं का कारण बनता है। अगली सुनवाई 24 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें ठोस प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए।
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RKRakesh Kumar Bhardwaj
Jan 28, 2026 17:47:09
Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोगों के सदस्यों व अध्यक्षों के कार्यकाल से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को जवाब के लिए समय दिया है। जस्टिस अरुण मोंगा एवं जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ में राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब मांगा। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनिल भंडारी ने तर्क दिया कि उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोगों के संबंधित सदस्य एवं अध्यक्षों को उनके कार्यकाल की अवधि पूर्ण हो जाने के बावजूद नए सदस्यों या अध्यक्षों की नियुक्ति होने तक कार्य जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 19 जनवरी 2026 को उर्मिला वर्मा बनाम राज्य सरकार मामलें में पारित आदेश का हवाला दिया गया। इस आदेश की प्रति हाईकोर्ट में प्रस्तुत की गई, जिसे रिकॉर्ड पर लिया गया। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार एवं अतिरिक्त महाधिवक्ता बंशीलाल भाटी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अध्ययन कर उसको लागू किए जाने को लेकर निर्देश प्राप्त करने के लिए अल्प समय की मांग की। राज्य सरकार की ओर से यह भी कहा कि जिन सदस्यों एवं अध्यक्षों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनके स्थान पर नई नियुक्तियों की प्रक्रिया एवं व्यवस्थाओं के संदर्भ में भी स्थिति स्पष्ट की जानी आवश्यक है। खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनते हुए राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन और आवश्यक निर्देश प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया। न्यायालय ने मामले को आगामी सुनवाई के लिए 24 फरवरी 2026 को सूचीबद्ध करने के आदेश दिए। इस आदेश को उपभोक्ता आयोगों में कार्यरत सदस्यों एवं अध्यक्षों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे आयोगों के कार्य में निरंतरता बनाए रखने और लंबित मामलों के निस्तारण में सहूलियत मिलने की संभावना है。
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RKRakesh Kumar Bhardwaj
Jan 28, 2026 17:46:45
Jodhpur, Rajasthan:जोथपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए कहा कि किसी भी न्यायिक मंच को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी पुलिस अधिकारी या व्यक्ति के विरुद्ध बिना सुनवाई के कठोर, प्रतिकूल या कलंकित टिप्पणियां करे। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां न्यायिक मर्यादा के विपरीत होने के साथ-साथ प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन हैं। जस्टिस फरजंद अली की बेंच ने जैसलमेर में पदस्थापित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (विशेष जांच इकाई, महिला अपराध) राजूराम चौधरी की याचिका स्वीकार करते हुए सत्र न्यायालय के 28 जुलाई 2022 और मजिस्ट्रेट अदालत के 1 मार्च 2025 के आदेशों में की गई सभी कठोर और प्रतिकूल टिप्पणियों को निरस्त कर दिया। मामले की पृष्ठभूमि में एक आपराधिक प्रकरण की जांच शामिल थी, जिसमें पुलिस ने धारा 173 CRPC के तहत रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट से असंतुष्ट परिवादिया ने धारा 190 CRPC के तहत अतिरिक्त आरोपियों को तलब करने का आवेदन किया, जिसे मजिस्ट्रेट ने 4 मई 2022 को खारिज कर दिया। इसके बाद सत्र न्यायालय में दायर निगरानी याचिका पर मजिस्ट्रेट का आदेश निरस्त कर मामला पुनर्विचार के लिए लौटाया गया, लेकिन इसी दौरान जांच अधिकारी के विरुद्ध गंभीर टिप्पणियां कर दी गईं। पुनर्विचार के बाद मजिस्ट्रेट अदालत ने 1 मार्च 2025 को और भी कठोर शब्दों में जांच अधिकारी पर लापरवाही और कानून की अवहेलना के आरोप लगाए तथा आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक को भेजी। हाईकोर्ट ने कहा कि संज्ञान, पुनरीक्षण या रिमांड के स्तर पर अदालतों को न्यायिक संयम बरतना चाहिए। जब तक निर्णय के लिए अनिवार्य न हो, किसी व्यक्ति की निष्पक्षता, दुर्भावना या लापरवाही पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाले जा सकते। बिना नोटिस और सुनवाई के की गई टिप्पणियां संबंधित अधिकारी की सेवा, पदोन्नति और प्रतिष्ठा पर गंभीर दुष्परिणाम डाल सकती हैं। हाईकोर्ट ने यह भी माना कि निष्पक्ष जांच आवश्यक है, लेकिन यह उद्देश्य कठोर और कलंकित टिप्पणियों के बिना भी हासिल किया जा सकता था। अदालत ने दो टूक कहा बिना सुने किसी को दोषी ठहराना कानूनन स्वीकार्य नहीं है।
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Jan 28, 2026 17:46:32
Tulsipur, Uttar Pradesh:विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में समता संवर्धन हेतु लाए गए 'विनियमन 2026' के विरोध में बुधवार को सवर्ण समाज के लोगों ने बलरामपुर जिला मुख्यालय और तुलसीपुर तहसील में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इस नियम को 'काला कानून' बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की और राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी (एसडीएम) तुलसीपुर को सौंपा। ​सामाजिक संतुलन बिगड़ने का आरोप: ज्ञापन के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यूजीसी 2026 का निर्णय सामाजिक समरसता को छिन्न-भिन्न कर देगा और समाज में जाति संघर्ष को बढ़ावा देगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस विनियमन से उच्च शिक्षा केंद्रों में पठन-पाठन का माहौल समाप्त हो जाएगा और इसके दुरुपयोग की पूरी संभावना है।
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BDBabulal Dhayal
Jan 28, 2026 17:46:25
Jaipur, Rajasthan:गहलोत सरकार के बहुचर्चित विधेयकों को राज्यपाल ने लौटाया लोकभवन में राज्यपाल की अनुमति की बाट जोह रहे गहलोत राज के 09 विधेयकों को राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने पुनर्विचार के लिए वापस लौटा दिया है। इनमेंऑनर किलिंग और मॉब लिंचिंग से जुड़े बिल भी शामिल हैं। 2 निजी विश्वविद्यालयों के विधेयक भी राज्यपाल ने वापस भेज दिए हैं इन विधेयकों को लौटाया राज्यपाल ने 1. राजस्थान लिंचिंग से संरक्षण विधेयक-2019 2. राजस्थान परंपरा के नाम पर वैवाहिक संबंधों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का प्रतिषेध विधेयक-2019 3. कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य ( संवर्धन और सरलीकरण) (राजस्थान संशोधन) विधेयक-2020 4. कषक ( सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और क्षि सेवा पर करार (राजस्थान संशोधन) विधेयक- 2020 5. आवश्यक वस्तु (विशेष उपबंध और राजस्थान संशोधन) विधेयक-2020 6. व्यास विद्यापीठ विश्वविद्यालय जोधपुर विधेयक-2022 7. सौरभ विश्वविद्यालय. हिंडौन सिटी (करौली) विधेयक-2022 8. राजस्थान विद्युत (शुल्क) विधेयक-2023 9. नाथद्वारा मंदिर ( संशोधन) विधेयक- 2023 कानूनी पहलुओं पर उठाए सवाल राज्यपाल ने इन बिलों के कानूनी पहलुओं पर सवाल उठाते हुए वापस भेजा है। आज अभिभाषण के बाद स्पीकर वासुदेव देवनानी ने सदन को बिलों के वापस लौटने की जानकारी दी साल 2019 से लेकर 2023 में गहलोत सरकार के समय इन बिलों को पारित किया गया था। गहलोत सरकार ने ऑनर किलिंग पर उम्रकैद और पांच लाख जुर्माने का प्रावधान किया था। मॉब लिंचिंग पर भी तत्कालीन गहलोत सरकार ने कड़ी सजा का प्रावधान किया था।इन दोनों ही बिलों के कई प्रावधान पहले से आईपीसी में थे। राज्यपाल ने इन बिल के प्रावधान केंद्रीय कानूनों से टकराव के कारण लौटाए हैं। गहलोत राज में पारित दो प्राइवेट यूनिवर्सिटी के बिल के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए लौटाया है। केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में लाए गए बिल भी लौटाए तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के जवाब में कांग्रेस ने देशभर में अभियान चलाया था। उस समय गहलोत सरकार केंद्रीय कृषि कानूनों की काट के तौर पर 2 नवंबर 2020 को कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) (राजस्थान संशोधन) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार (राजस्थान संशोधन) विधेयक लेकर आई थी। 2 नवंबर 2020 को दोनों बिल ध्वनिमत से पारित हुए थे。 बाद में केंद्र सरकार ने कृषि कानून वापस ले लिए थे। केंद्रीय कानून के जवाब में राज्य के कानूनों की वैधानिकता पर उस समय भी सवाल उठे थे। केंद्र के कानून वापस लेने के बाद इन दोनों बिल का कोई औचित्य नहीं रह गया था। राज्यपाल ने दोनों बिल के कानूनी आधार और औचित्य नहीं होने का तर्क देते हुए वापस भेजा है। मॉब लिंचिंग विरोधी बिल भी हुआ वापस राजस्थान सम्मान और परंपरा के नाम पर वैवाहिक संबंधों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का प्रतिषेध विधेयक को राष्ट्रपति के पास अनुमति के लिए भेजने के लिए राज्यपाल के पास लंबित था। राज्यपाल ने विधानसभा को बिल लौटाते हुए सरकार की तरफ से इसे वापस लेने के कारण गिनाए हैं पहले भी लौटाते जाते रहे हैं बिल ये कोई पहला मौका नहीं है जब राज्यपाल की मंजूरी के बिना ही बिलों को वापस लौटा दिया गया हो। राज्यपाल पहले भी इस तरह के बिल लौटाते रहे हैं। अगर ​राज्य के किसी बिल के प्रावधान केंद्रीय कानूनों के प्रावधानों से टकराते हैं तो राज्यपाल इन्हें वापस भेज देते हैं। केंद्र और राज्य के बीच ​कानून बनाने को लेकर साफ प्रावधान है। राज्य केवल राज्य सूची के विषयों पर ही कानून बना सकते हैं। समवर्ती सूची में केंद्र और राज्य, दोनों कानून बना सकते हैं, लेकिन यहां भी केंद्रीय कानून ही मान्य होंगे। कई बार केंद्र और राज्य में अलग अलग दलों की सरकारें होने पर राज्यपाल का झुकाव केंद्र की तरफ होता है। इससे भी बिलों को लेकर लिए जाने वाले फैसले प्रभावित होते हैं। सूबे में भाजपा की सरकार है। जब इन बिलों को पारित किया गया था। तब भाजपा ने विधानसभा में इनका विरोध भी किया था। सत्ता बदलने के बाद बिलों को लौटाना इससे भी जोड़कर देखा जा रहा है। कानून के लिए राज्यपाल की मंजूरी जरूरी। विधानसभा से पारित कोई भी बिल राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद ही कानून बनता है। राज्यपाल कानूनी, संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देकर बिल लौटा सकते हैं। राज्यपाल को बिल विधानसभा से मंजूरी के लिए भेजे जाते हैं, इसलिए लौटाया भी विधानसभा को जाता है। राज्यपाल के बिल रोकने की समय सीमा नहीं है। इसे लेकर कई बार कानूनी बहस भी छिड़ती रही है। बिल के प्रावधानों पर विधानसभा के जरिए सरकार से राज्यपाल स्पष्टीकरण मांग सकते हैं। हाल ही में तमिलनाडु सरकार के बिलों को लेकर काफी बहस हुई थी। सुप्रीम कोर्ट भी इस बारे में कई बार राज्यपालों को कानूनों प्रावधानों का पालन करने की हिदायत दे चुका है बाबूलाल धायल जी मीडिया जयपुर
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