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सीकर के शेखावाटी विश्वविद्यालय में छठे दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन
ASAshok Singh Shekhawat
Mar 28, 2026 12:33:46
Sikar, Rajasthan
सीकर
पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय सीकर का छठा दीक्षांत समारोह
पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय सीकर का छठा दीक्षांत समारोह शनिवार को भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता राजस्थान के कुलाधिपति एवं राज्यपाल हरीभाऊ बागडे ने की, मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री एवं पूर्व एनसीईआरटी निदेशक जगनमोहन सिंह राजपूत मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत राज्यपाल बागडे ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर “प्रेरणा स्थल” के उद्घाटन से की। इसके साथ ही पंडित दीनदयाल उपाधाय रिसर्च सेंटर का लोकार्पण भी किया गया। राज्यपाल ने पंडित दीनदयाल उपाधाय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर दो दिवसीय कार्यक्रम “प्रत्युषा-2026” का विधिवत शुभारंभ किया। दीक्षांत समारोह में विभिन्न संकायों के 39 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं उपाधियां प्रदान की गईं। वहीं तीन विशिष्ट हस्तियों—महाराष्ट्र के रामचंद्र नीलकंठ भोगल, पश्चिम बंगाल के डॉ. धनपत राम अग्रवाल और झुंझुनू जिले के मुकुंदगढ़ निवासी शैलेंद्र नाथ अघोरी बाबा—को मानद पीएचडी उपाधि से सम्मानित किया गया। इसके अलावा समारोह के दौरान तीन शख्सियतों को “शेखावाटी शिरोमणि” और पांच विद्वानों को “शेखावाटी भूषण” पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की घोषणा भी की गई। सत्र 2024-25 के लिए कुल 90,598 छात्र-छात्राओं को डिग्री प्रदान किए जाने की घोषणा भी राज्यपाल द्वारा की गई।
राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि शेखावाटी की धरती देश में सबसे ज्यादा और अधिकारी देने वाली है। यदि व्यापार जगत की बात करें तो खासकर मारवाड़ी लोग जैसे बिड़ला,बजाज देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इतना ही नहीं राजस्थान के व्यापारी आपको देश और विदेश में मिलेंगे。
उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह कोई अंत नहीं बल्कि जीवन की नई चुनौतियां की शुरुआत है। डिग्री प्राप्त की,इसका मतलब यह नहीं कि अपनी शिक्षा पूरी हो गई यह नहीं मानो। अपने विश्वविद्यालय में जो भी अध्ययन किया और जो भी ज्ञान प्राप्त किया उससे देश की उन्नति,विकास कैसे हो इसके बारे में सोचते रहो। खुद की नौकरी करो,व्यापार करो और पैसे भी कमाओ। लेकिन उसके साथ-साथ आप अपने समाज की भी चिंता करो。
डिग्री की तो हासिल की लेकिन क्या करोगे, नौकरी मिलेगी तो मिलेगी, बिजनेस करोगे तो करोगे। अच्छी और झटपट नौकरी चाहिए। नौकरी मिली तो जल्दी छोकरी भी मिल सकती है,नहीं तो नहीं।
उन्होंने कहा कि यूपीएससी और आरपीएससी की तैयारी करो,इनकी परीक्षा बहुत कठिन होती है फिर भी लोग देते हैं। लेकिन इन परीक्षाओं में छात्राएं ज्यादा सफलता हासिल कर रही है छात्रों की बजाय।
शारीरिक क्षमता भी बढ़ाओ,शारीरिक क्षमता रही तो बौद्धिक क्षमता का भी विकास होगा। शारीरिक क्षमता नहीं रही तो आदमी काम ही नहीं कर पाएगा。
राज्यपाल ने कहा कि हमारे देश में अंग्रेज आने के पहले 8 लाख गुरुकुल थे। उसका रिकॉर्ड भी उनके पास है। उन गुरुकुल में जो बच्चे जाते थे वह आयुर्वेद और इंजीनियरिंग भी सीखते थे। पहले डिग्री नहीं होती लेकिन कला होती थी। जिसके हाथ में कौशल होगा वह कभी भूखा नहीं रहेगा।
केवल डिग्री वाला है तो गांव-गांव घूमेगा, कि कहीं पर जॉब मिलेगी क्या। इसलिए हाथ में कौशल होना जरूरी है। राजस्थान तो कौशल की खान है। रणकपुर में भगवान महावीर का एक मंदिर है जिसे तैयार करने में 64 साल लगे। उसमें नक्काशी और कलाकारी का इतना बेहतरीन काम है। आप देखोगे तो मुंह में उंगली डालोगे कि क्या काम है। कर्नाटक के मैसूर में भी एक मंदिर है जो 270 फीट का है। उस मंदिर के ऊपर एक 80 टन का पत्थर लेकर गए। मंदिर बनाने के बाद 80 टन का पत्थर रखा गया। उसे जमाने में तो ऐसी कोई मशीनरी नहीं थी फिर भी उन्होंने सोचा कि इस तरह से पत्थर ऊपर लेना है तो उन्होंने मिट्टी का 6 किलोमीटर का एक रैंप बनाया और हाथियों के जरिए पत्थर वहां रखा गया, यही तो इंजीनियरिंग है。
भारत ने तो हजारों साल तक संकट देखे हैं। लड़ाइयां के और आक्रमण के। यहां पर आक्रमण करने वालों ने हमारे संस्कृति को भी उखाड़ने का सोचा, हमारी शिक्षण पद्धति उन्होंने बदल दी। अंग्रेजों ने भी बोला कि हमें भारत के लोगों को गुलाम बनाना है तो उनको भूख मारना। जब तक भारत के लोग भूखे नहीं रहेंगे तब तक तो अपने गुलाम नहीं बनेंगे।
मुगलों का भी संकट था, उन्होंने लोगों का धर्मांतरण किया और काटा भी,मारा भी था। यह संकट भी हमने सह लिए। अभी न पेट्रोल बढ़ा, न डीजल बढ़ा और न गैस बढ़ा फिर भी लोग बोल रहे हैं यह बढ़ा,वह बढ़ा। वह लोग तो राजनीति कर रहे हैं। यह बात राजनीति की नहीं बल्कि सबके एक साथ एकजुट रहने की बात है। जो अलग चलता है उनका मत सुनो,लोग भी नहीं सुनेंगे।
जब हमारे पास नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय थे तब विदेश के लोग यहां पर पढ़ने के लिए आते थे। तक्षशिला पंजाब में था रावलपिंडी के पास। अभी भी 34-35 किलोमीटर दूर खंडहर पड़ा होगा। रावलपिंडी पता है किसके नाम से है
चित्तौड़गढ़ का राजा बप्पा रावल जिन पर आक्रमण हुआ था। उन पर आक्रमण करने वालों को बप्पा रावल ने बहुत पीटा। पीटते-पीटते उनको ईरान और इराक तक पहुंचा दिया,फिर वह लोग वापस एक गांव में आ गए। उसी जगह का नाम रावल और पिंडी का मतलब पंजाब में गांव को पिंडी बोलते हैं। इसलिए ही वह रावलपिंडी हो गया जो बप्पा रावल नाम से बना है。
इतिहास हमें कहां पर पढ़ाया गया है। ऐसा इतिहास हमें स्कूल में नहीं पढ़ाया गया। हमको इतिहास पढ़ाया गया मुगलों का। औरंगजेब बड़ा ताकतवर था, अकबर भी बहुत होशियार था यह सब कुछ पढ़ाया गया। राणा प्रताप नहीं पढ़ाया गया, छत्रपति शिवाजी महाराज नहीं पढ़ाये गया।
जिनसे हमारा धैर्य बढ़ जाता है,ऐसे महापुरुषों और योद्धाओं के बारे में हमें नहीं पढ़ाया गया। ऐसे लोगों को कोई पहचान तक नहीं दी गई। अब नालंदा और तक्षशिला का HISTORY फिर से लौट कर आएगा। यह भावना रखो,ऐसा जरूर हो सकता है。
राज्यपाल ने कहा कि इजराइल नाम का जो देश है वह खुद के समाज का देश नहीं था। 2000 साल तक वहां के लोग विश्व में घूमते थे और जहां भी रहते थे वहां एक ही प्रार्थना करते थे कि मैं आज इस देश में प्रार्थना कर रहा हूं,कल मेरे देश में प्रार्थना करूंगा। यह बात उन्होंने अपने मन में 2000 साल तक रखी। मिल गया न उनको देश। अब अड़ोस-पड़ोस के देशों को परेशान करता है। इतनी ताकत कमा ली उस देश ने क्योंकि वह एक साथ थे。
बाइट हरिभाऊ बागड़े राज्यपाल
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