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प्रतापगढ़ कलेक्टर-सांसद विवाद संसद तक पहुँचा; डीएमएफटी फंड पर सवाल
HUHITESH UPADHYAY
Mar 28, 2026 05:32:59
Pratapgarh, Rajasthan
अहंकार की आंच जब प्रशासन और जनप्रतिनिधि के बीच भड़कती है, तो उसका असर सीधे विकास कार्यों पर पड़ता है। कुछ ऐसा ही मामला राजस्थान के प्रतापगढ़ से सामने आया है, जहां कलेक्टर और सांसद के बीच का विवाद अब लोकसभा तक गूंज चुका है और डीएमएफटी फंड के उपयोग पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। सांसद ने विशेष रूप से प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना पीएमके KKवाय का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके स्पष्ट दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। उनके अनुसार, जनवरी 2024 के निर्देशों के तहत डीएमएफटी फंड का 70 प्रतिशत हिस्सा खनन क्षेत्र से 25 किलोमीटर के दायरे में खर्च करना अनिवार्य है। लेकिन प्रतापगढ़ में इस नियम की अनदेखी की जा रही है। मामले को और गंभीर बनाते हुए सांसद ने बताया कि गवर्निंग काउंसिल द्वारा स्वीकृत 54 विकास कार्यों में से कलेक्टर ने अपने स्तर पर केवल तीन कार्यों को ही मंजूरी दी। उनका आरोप है कि इस कारण स्कूल भवन निर्माण, पेयजल व्यवस्था और खनन क्षेत्र से प्रभावित लोगों के लिए राहत कार्य बाधित हो गए हैं। उन्होंने इसे सीधे तौर पर अहंकारपूर्ण रवैया बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। विवाद की शुरुआत डीएमएफटी फंड के उपयोग और दोनों पक्षों के बीच हुए पत्राचार से हुई। सांसद मन्नालाल रावत ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। इसके जवाब में कलेक्टर अंजलि राजोरिया ने भी विस्तृत पत्र भेजकर सांसद के आरोपों को निराधार बताया था। कलेक्टर ने अपने जवाब में कहा था कि सांसद स्वयं एक पूर्व राजपत्रित अधिकारी हैं और उन्हें प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी है, इसके बावजूद उन्होंने पत्राचार में अशासकीय भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने इसे एक महिला अधिकारी की छवि को नुकसान पहुंचाने और मानसिक दबाव बनाने का प्रयास बताया। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानांतरण या पदस्थापन की मांग करना निर्धारित नियमों के विरुद्ध है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह मांग भी उठने लगी है कि डीएमएफटी के अध्यक्ष पद पर सांसद को नियुक्त किया जाए, ताकि फंड के उपयोग में पारदर्शिता और संतुलन बना रहे। फिलहाल यह विवाद केवल प्रतापगढ़ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोकसभा में उठने के बाद यह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या वास्तव में जांच के जरिए सच्चाई सामने आ पाती है या नहीं.
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