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नाले के तेज बहाव में बच्चे स्कूल जाने को मजबूर, पुल निर्माण की मांग तेज

Seoni, Madhya Pradesh:सिवनी (एमपी) जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल...! सिवनी में सिस्टम के दावों की पोल खोलती तस्वीरें सामने आई हैं। यहां मासूम स्कूली बच्चे उफनते नाले के तेज बहाव के बीच से गुजरकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। तस्वीरों में कहीं बच्चे एक-दूसरे का हाथ थामे नजर आ रहे हैं, तो कहीं छोटे बच्चों को कंधे पर बैठाकर नाला पार कराया जा रहा है। मामला लखनादौन तहसील की ग्राम पंचायत गुंगवारा के धौरीया और धाधर टोला के बीच का है। बारिश होते ही यह नाला उफान पर आ जाता है और ग्रामीणों का रास्ता मुश्किल हो जाता है। बावजूद इसके, पढ़ाई न छूटे इसलिए बच्चे हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर इस रास्ते से गुजर रहे हैं। ग्रामीण लंबे समय से यहां पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ
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Not a small matter: SIT again summons Vijay Sankla

Hoshiarpur, Punjab:होशियारपुर: विजय सांपला को SIT का समन होशियारपुर से बड़ी खबर है। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं भाजपा नेता विजय सांपला को बहबल कलां गोलीकांड मामले में SIT ने फिर समन भेजा है। उन्हें 27 अगस्त को चंडीगढ़ में पेश होने को कहा गया है। सांपला ने भाजपा कार्यक्रमों में व्यस्त होने का हवाला देते हुए पेश होने से असमर्थता जताई और सितंबर में दूसरी तारीख देने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं को परेशान किया जा रहा है और मामले से जुड़े दस्तावेज भी उपलब्ध करवाने की मांग की। थाना मॉडल टाउन प्रभारी बलजिंदर सिंह ने बताया कि SIT का समन सांपला के घर पहुंचाया गया है। बाइट: बलजिंदर सिंह, थाना मॉडल टाउन प्रभारी बाइट: विजय सांपला, पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री
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मैनपुरी-करहल तहसील के मुख्य गेट पर नहीं लगा बोर्ड,पहचान को लेकर लोगों में सवाल ।

Ajay KumarAjay KumarFollow2m ago
Karhal, Uttar Pradesh:रिपोर्ट-अजय कुमार मैनपुरी करहल/मैनपुरी मैनपुरी-करहल तहसील की पहचान धुंधली,गेट पर नाम-पट्ट न होने से बाहर से आने वाले लोगों को होती है परेशानी । मैनपुरी की महत्वपूर्ण तहसील करहल का मुख्य गेट एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहा है,यहां मुख्य गेट पर 'तहसील करहल'का स्पष्ट बोर्ड नजर नहीं आता। प्रतिदिन विभिन्न कार्यों के लिए तहसील पहुंचने वाले ग्रामीणों और आम लोगों का कहना है कि जब यह तहसील मुख्यालय है तो मुख्य गेट पर स्पष्ट रूप से बोर्ड होना चाहिए। लोगों का कहना है कि नाम-पट्ट न होने से बाहर से आने वाले,बुजुर्गों और दूर-दराज के लोगों को कार्यालय पहचानने में परेशानी होती है। अब सवाल उठ रहा है कि गेट पर नाम का बोर्ड क्यों नहीं लगा है ? क्या बोर्ड हट गया है ? खराब हो गया है ! या नया लगाने की प्रक्रिया लंबित है ? लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मुख्य गेट पर स्पष्ट और आकर्षक'तहसील करहल, जनपद मैनपुरी'का नाम-पट्ट लगाया जाए।
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रायगढ़ के म्हसळा में नाबालिग के साथ बलात्कार, शादी का लालच देकर

Chendhare, Maharashtra:रायगड़च्या म्हसळ्यात अल्पवयीन मुलीवर अत्याचार. लग्नाचे आमिष दाखवून अत्याचार. दोघांविरोधात म्हसळा पोलिसांत गुन्हा. रायगड़च्या म्हसळ्यात अल्पवयीन मुलीवर लैंगिक अत्याचार केल्याचा धक्कादायक प्रकार समोर आला है. मैत्री वाढवून लग्नाचे आमिष दाखवत अत्याचार केल्याचा आरोप असून, या प्रकरणी दोघांविरोधात पॉक्सो कायद्याअंतर्गत म्हसला पोलिस ठाण्यात गुन्हा दाखल करण्यात आला आहे. पीडितेला विविध ठिकाणी नेऊन अत्याचार केल्याची माहिती तपासातून समोर आली आहे. या प्रकरणी म्हसला पोलिसांकडून पुढील तपास सुरू आहे.
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उदयपुर नगर निकाय चुनाव: प्रत्याशी खर्च सीमा तय, 15 दिनों में विवरण दाखिला जरूरी

Udaipur, Rajasthan:उदयपुर नगर निकाय चुनाव 2026, निर्वाचन व्यय पर्यवेक्षक प्रकोष्ठ की बैठक, जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देशन एवं प्रकोष्ठ प्रभारी डीआईजी स्टाम्प रागिनी डामोर की अध्यक्षता में टीआरआई सभागार में चल रही बैठक, बैठक में मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि भी हैं उपस्थित, बैठक में नगर निकाय चुनावों में प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों की हो रहे होने वाले व्यय के लिए सामग्री की दरों के निर्धारण पर हो रही चर्चा, नगर निगम चुनाव में पार्षद प्रत्याशी अधिकतम 3.50 लाख तथा नगरपालिका चुनाव में प्रत्याशी 1.50 लाख रुपए तक कर सकेंगे व्यय चुनाव परिणाम की घोषणा के 15 दिनों के भीतर प्रत्याशियों को व्यय विवरण रिटिटिंग अधिकारी को करना होगा प्रस्तुत बैठक में सह प्रभारी महेंद्र सिंह सीमर भी हैं मौजूद
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चिड़ावा अस्पताल से मरीज की थैली चोरी, CCTV में दो संदिग्ध महिलाएं

Jhunjhunu, Rajasthan:झुंझुनूं जिले के चिड़ावा के उपजिला अस्पताल में इलाज के लिए आए एक मरीज की नकदी और जरूरी दस्तावेजों से भरी थैली चोरी होने का मामला सामने आया है। पीड़ित सांवरमल निवासी बगड़ के अनुसार थैली में करीब 20 हजार रुपए, आधार कार्ड, अन्य जरूरी दस्तावेज और दवाइयां रखी हुई थीं। सांवरमल ने बताया कि उन्होंने चिड़ावा में ऑपरेशन करवाया था। इसके बाद दवा लेने के लिए वह उपजिला अस्पताल में डॉक्टर के पास पहुंचे थे। इसी दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी जेब में रखी थैली निकाल ली। थैली में करीब 20 हजार रुपए के अलावा कुछ खुले पैसे भी थे, जिनकी कुल राशि पीड़ित को याद नहीं है। पीड़ित के मुताबिक थैली में आधार कार्ड, अन्य जरूरी दस्तावेज और दवाइयां भी रखी हुई थीं। घटना का पता चलने के बाद उन्होंने अस्पताल परिसर में तलाश की, लेकिन थैली नहीं मिली। घटना के बाद अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमलों की फुटेज खंगाली गई, जिसमें दो संदिग्ध महिलाएं कैद हुई हैं। फुटेज के आधार पर अब इन महिलाओं की पहचान और घटना में उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों की लगातार आवाजाही के बीच हुई इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित ने पुलिस से मामले की जांच कर चोरी हुई नकदी, दस्तावेज और सामान बरामद करने की मांग की है।
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Paradise Valley हादसे में तीन निःस्वार्थ मददगार, माँ ने साड़ी से बच्चों को बचाया

Ratlam, Madhya Pradesh:RATLAM के Paradise Valley हादसे में कुछ ऐसे सुपर हीरो सामने आये, जिन्होंने बिना किसी इंतजार के अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की मदद की. आज जी मीडिया आपको ऐसे ही तीन मददगारों से मिलवा रहा है. रेलवे के पीछे पहाड़ियों के बीच Paradise Valley में बड़ी संख्या में लोग पिकनिक मनाने पहुँचे थे. जावरा के त्रिमूर्ति कॉन्वेंट स्कूल के करीब 17 बच्चे, प्राचार्य और शिक्षक भी वहां पहुंचे थे. अचानक कुछ बच्चे गहरे पानी में चले गए. उन्हें बचाने पहुँचे शिक्षक भी डूबने लगे और मौके पर चीख-पुकार मच गई. इसी दौरान भीड़ से निकल कर आये मददगार, जिनमें से एक Anita BamharRatlam की रहने वाली महिला थीं, जिन्होंने अपने 15 वर्षीय बेटे Vishal को, जो तैरना जानता था, मदद के लिए पानी में उतरने को कहा. वहां पहले से खतरा था लोग डूब रहे थे, लेकिन मां की हिम्मत ऐसी कि उसने सिर्फ मदद की सोची, और अपने 15 वर्षीय बेटे Vishal को कहा कि नीचे उतरकर पानी से बच्चों को बाहर निकाले. उन्होंने अपनी साड़ी खोलकर पानी में फंसे बच्चों तक पहुंचाने का रास्ता बनाया. Vishal ने साड़ी का एक सिरा पकड़कर बच्चों तक पहुंचाया और तीन बच्चों को इसके सहारे बाहर निकाला. वही तीसरा मददगार Bilal Husain थे, जिन्होंने अन्य लोगों की मदद से भी डूबे शिक्षक और बच्चों को अस्पताल भिजवाने में सहायता की. इनकी मदद ने हादसे को और भयावह होने से रोकने में अहम भूमिका निभाई. अगर इनका नाम मिल जाता तो मौत का आंकड़ा और भयावह होता, यही तस्वीर है भारत की जहाँ जब कोई एक दूसरे की मदद के लिए ठान लेते हैं, तो समाज का कोई बंधन आड़े नहीं आता, बल्कि सिर्फ एक साथ मदद के लिए जुटे लोग नजर आते हैं. RatlamChanderShekhar Solanki
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राम रहीम की 21 दिन की फरलो पर सवाल, अंशुल छत्रपति सरकार से जवाब मांगते

Sirsa, Haryana:एंकर रीड सिरसा के डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को 21 दिन की फरलो मिलने के बाद एक बार फिर से उनकी रिहाई को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। विभिन्न आपराधिक मामलों में रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहे राम रहीम को फरलो दिए जाने पर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने प्रदेश सरकार और कानून की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अंशुल छत्रपति ने आरोप लगाया कि आखिर प्रदेश सरकार राम रहीम पर किस वजह से बार-बार मेहरबान हो रही है और उसे लगातार पैरोल व फरलो का लाभ क्यों मिल रहा है। अंशुल छत्रपति ने कहा कि राम रहीम एक सजायाफ्ता और आदतन अपराधी है। उसके खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं और कुछ मामले अभी भी अदालतों में विचाराधीन हैं। ऐसे में उसे बार-बार जेल से बाहर आने की अनुमति दिए जाने पर आपत्ति जाहिर की जा रही है। अंशुल छत्रपति ने कहा कि प्रदेश सरकार और प्रशासन को इस पूरे मामले में पारदर्शिता बरतनी चाहिए और बताया जाना चाहिए कि किन आधारों पर राम रहीम को बार-बार पैरोल और फरलो दी जा रही है। अंशुल छत्रपति ने कहा कि राम रहीम इस समय रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहा है। साध्वियों से दुष्कर्म के मामलों में उसे अदालत द्वारा दोषी ठहराया जा चुका है और वह सजा भुगत रहा है। इसके अलावा पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड सहित अन्य मामलों में भी उसे सजा सुनाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर मामलों में दोषी व्यक्ति को लगातार जेल से बाहर आने का अवसर मिलना कानून की प्रक्रिया और उसके समान रूप से लागू होने पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि आम कैदियों और प्रभावशाली लोगों के मामलों में कानून का व्यवहार एक जैसा दिखाई देना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति गंभीर अपराधों में सजा काट रहा है तो उसकी पैरोल और फरलो के मामलों में सभी कानूनी प्रावधानों और शर्तों का कड़ाई से पालन होना चाहिए। अंशुल छत्रपति ने कहा कि राम रहीम के मामले में बार-बार रिहाई मिलने से पीड़ित पक्ष और आम जनता के बीच कई तरह के सवाल पैदा होते हैं। अंशुल छत्रपति ने राम रहीम को आदतन अपराधी बताते हुए कहा कि उसके खिलाफ सिर्फ एक मामला नहीं बल्कि कई गंभीर आपराधिक मामले रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में भी राम रहीम से जुड़े मामलों की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में उसकी फरलो को लेकर संबंधित विभागों और सरकार को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने साधुओं को नपुंसक बनाए जाने से जुड़े मामले का भी जिक्र किया। अंशुल छत्रपति के अनुसार यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है और इसकी कानूनी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर मामलों में अदालती सुनवाई चल रही हो और वह अन्य मामलों में पहले से सजा काट रहा है तब उसे मिलने वाली रियायतों को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी है। अंशुल छत्रपति ने आरोप लगाया कि राम रहीम को बार-बार जेल से बाहर भेजने के पीछे उसे स्थायी रूप से बाहर रखने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक या प्रशासनिक मामला नहीं है, बल्कि कानून और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा सवाल है। उनके अनुसार यदि किसी सजायाफ्ता व्यक्ति को लगातार पैरोल और फरलो मिलती रहे तो इससे पीड़ितों के परिवारों में भी निराशा और असंतोष पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में न्याय पाने के लिए उनके परिवार को लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। कई वर्षों तक चली इस कानूनी प्रक्रिया के बाद दोषियों को सजा मिली है । ऐसे में जब दोषी व्यक्ति बार-बार जेल से बाहर आता है तो पीड़ित परिवार के मन में स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं। अंशुल छत्रपति ने कहा कि न्याय केवल सजा सुनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पूरी न्यायिक और कानूनी प्रक्रिया में पीड़ित पक्ष के अधिकारों और भावनाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। अंशुल छत्रपति ने कहा कि वह कानून और संविधान पर भरोसा रखते हैं, लेकिन राम रहीम को मिलने वाली पैरोल और फरलो के मामलों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किन परिस्थितियों और किस आधार पर बार-बार फरलो दी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को इस विषय पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए ताकि आम लोगों के मन में किसी तरह का संदेह न रहे। उन्होंने यह भी कहा कि कानून सभी नागरिकों के लिए समान होना चाहिए। किसी व्यक्ति की सामाजिक, धार्मिक या राजनीतिक पहचान के आधार पर कानून के pravधानों में किसी प्रकार की विशेष रियायत का संदेश नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई सामान्य कैदी गंभीर अपराध में सजा काट रहा होता है तो उसके मामले में भी वही नियम लागू होने चाहिए, जो किसी प्रभावशाली व्यक्ति के मामले में लागू होते हैं। अंशुल छत्रपति ने अदालतों से भी इस पूरे मामले का संज्ञान लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि राम रहीम को बार-बार मिलने वाली पैरोल और फरलो के रिकॉर्ड और परिस्थितियों पर नजर रखी जानी चाहिए। उनके अनुसार अदालत को यह देखना चाहिए कि कहीं कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल तो नहीं हो रहा है और सभी नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं। उन्होंने कहा कि राम रहीम के खिलाफ गंभीर अपराधों में अदालतें अपना फैसला दे चुकी हैं और कुछ अन्य मामले अभी न्यायालयों में लंबित हैं। इसलिए उसकी रिहाई से संबंधित हर निर्णय कानूनी मानकों के आधार पर होना चाहिए। अंशुल छत्रपति ने कहा कि इस तरह के मामलों में सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है, क्योंकि उनका हर फैसला जनता के बीच कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली की छवि को प्रभावित करता है। अंशुल छत्रपति ने आरोप लगाया कि राम रहीम को लगातार जेल से बाहर निकालने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह केवल कानूनी अधिकारों के तहत हो रहा है तो सरकार को स्पष्ट रूप से इसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। लेकिन यदि किसी प्रकार का विशेष व्यवहार किया जा रहा है तो यह गंभीर चिंता का विषय है। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में परिवार ने वर्षों तक न्याय के लिए संघर्ष किया और अदालत के फैसले के बाद दोषियों को सजा मिली है। ऐसे में परिवार चाहता है कि न्यायिक फैसलों और सजा की प्रक्रिया का सम्मान किया जाए। राम रहीम को 21 दिन की फरलो मिलने के बाद एक बार फिर उसकी जेल से बाहर रहने की अवधि और कानूनी प्रावधानों को लेकर राजनीतिक एवं सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। अंशुल छत्रपति के सवालों ने इस मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। अब देखना होगा कि प्रदेश सरकार, प्रशासन और संबंधित विभाग इन सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं。
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दमोह में एम्बुलेंस सेवाओं पर फिर जुर्माना, प्रसव के समय देरी से नवजात मौत

Damoh, Madhya Pradesh:फिर लगा एम्बुलेंट्स सेवा कंपनी पर जुर्माना, दो महीने में दूसरी बड़ी कार्यवाही... दमोह जिले में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के बीच मरीजों को एंबुलेंस और शवों को शव वाहन न मिलना आम बात हो गई है तो अक्सर एम्बुलेंस में लेट लतीफी की वजह से समय पर इलाज न मिल पाने की वजह से भी मरीज दम तोड़ देते है, इसे लेकर जिले के जिला अस्पताल से लेकर सिविल अस्पतालों में हंगामे और बबाल की खबरें भी आती रहती है लेकिन हालात सही नहीं हो पा रहे। इस बीच सरकार ने कलेक्टर की रिपोर्ट के बाद एक बार एम्बुलेंस सेवा कंपनी पर जुर्माना लगाया है और हिदायत दी गई है। दरअसल पिछले दिनों एक गर्भवती महिला रोशनी लोधी को प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल ले जाना था लेकिन घंटों तक एम्बुलेंस को काल करने के बाद भी जब वो नहीं आई तो महिला को लेकर उसके परिजन उसे निजी वाहन से हटा अस्पताल ले जाने निकले लेकिन महिला ने रास्ते में ही लड़की को जन्म दे दिया मतलब उसकी डिलीवरी हो है। असुरक्षित प्रसव की वजह से नवजात ने कुछ ही मिनटों में दम तोड़ दिया और महिला को गंभीर हालत में अस्पताल में दाखिल कराया गया। मामले ने काफी तूल पकड़ा तो जिले के कलेक्टर ने जांच कराई और जांच में पाया कि एम्बुलेंस सेवा में लापरवाही की गई और रिपोर्ट प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी गई जहां विभाग ने जिले में सेवा दे रही कपनी पर दो लाख 20 हजार 919 रूपए का जुर्माना लगाया गया है। ये दो महीने में दूसरा मौका है एम्बुलेंस सेवा कंपनी पर जुर्माने की कार्यवाही हुई है।
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