दिल्ली अमृतसर पठानकोट एक्सप्रेस पर पथराव, एक यात्री घायल
Khanna, Punjab:अमृतसर से नई दिल्ली जा रही दिल्ली पठानकोट एक्सप्रेस पर पथराव किया गया। लुधियाना और खन्ना के मध्य दोराहा रेलवे स्टेशन के पास यह घटना हुई। एक पत्थर बोगी की खिड़की का शीशा तोड़कर यात्री के मुंह पर लगा। पानीपत का रहने वाला यह यात्री घायल हो गया। जिसे सरहिंद रेलवे स्टेशन पर उतारना पड़ा और उसे फतेहगढ़ साहिब के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायल युवराज सिंह के दांत टूट गए हैं और होंठों पर गंभीर चोट है।हमें फेसबुक पर लाइक करें, ट्विटर पर फॉलो और यूट्यूब पर सब्सक्राइब्ड करें ताकि आप ताजा खबरें और लाइव अपडेट्स प्राप्त कर सकें| और यदि आप विस्तार से पढ़ना चाहते हैं तो https://pinewz.com/hindi से जुड़े और पाए अपने इलाके की हर छोटी सी छोटी खबर|
कोच्चि में मिनी कूपर की तेज रफ्तार ने Scooter पर सवार तीन युवाओं को मारी; ड्राइवर गिरफ्तार
Noida, Uttar Pradesh:Gifted Mini Cooper for birthday, teen runs over three in Kochi. All the deceased, one man and two women, were 21-year-olds working as part-time salespersons at a showroom near the airport. They were returning to duty when they were hit by the luxury hatchback. Three friends who had stepped out for tea were killed when an overspeeding Mini Cooper, driven by a 19-year-old student, ran over their scooter near the Kochi airport early on Sunday. The incident sparked outrage, especially with the accused driver allegedly under the influence of alcohol, purportedly heard telling eyewitnesses that 'his father will handle the issue.' The deceased were Ijaz (Karnataka), Gopika (Palakkad), and Devika (Way anad). All three worked at a craft shop in Thrikkakkara. The three were traveling on a scooter when a Mini Cooper, allegedly traveling at high speed, hit them from behind, killing them at the scene. Local residents said the car was moving at high speed. The collision was followed by a verbal altercation between the driver and onlookers. The driver, Suhail Sajeev, was arrested. Sajeev’s mother runs a design studio in Kochi and Alappuzha. In a Facebook post, she claimed she was presenting the Mini Cooper to her son as a birthday gift. The video went viral after Sunday’s incident. Police said the deceased were Iyas (Sullia, Karnataka), Devika (Way anad), and Gopika (Palakkad). Police said the trio was returning after a tea break with Iyas riding the scooter and the two women as pillion passengers. They were students at a college in Thrikkakara. They were thrown off the scooter after the car hit it from behind. The Motor Vehicles Department plans to revoke Suhail’s license; officials will examine footage showing the vehicle driven at high speed. The move to cancel the license will proceed after the police report. Two other individuals who had accompanied Suhail Sajeev were taken into custody; the group had visited bars to consume alcohol. After the incident, they fled in a WagonR car parked nearby. Charges of abetment have been filed against their companions, who are accused of failing to intervene despite knowing the driver was intoxicated.दूदू फागी की बारिश से किसानों की बंपर पैदावार की उम्मीद तेज
Dudu, Rajasthan:दूदू (जयपुर) किसान रबी की बुआई में जुटे, सरसों, गेहूं और चने की खेती किसानी का काम हुआ शुरू। दूदू फागी में बारिश होने से किसानों में खुशी, अब रबी की बंपर पैदावार की जगी उम्मीद। किसान दिन रात खेतों की जुताई में जुटे हुए हैं, खाद्य बीज की व्यवस्था करने के चलते दुकानों पर लगी है भीड़।बाड़मेर के गढ़ मंदिर: आस्था, इतिहास और थार की पहचान
Barmer, Rajasthan:बाड़मेर का गढ़ मंदिर: आस्था, इतिहास और धर्मध्वजा की पहचान बाड़मेर आने वाले हर व्यक्ति को शहर से कई किलोमीटर दूर से ही पहाड़ी पर लहराती धर्मध्वजा नजर आने लगती है। दूर से दिखाई देती यह ध्वजा मानो थार की धरती पर बसे बाड़मेर की पहचान और मां के प्रति अटूट आस्था का संदेश देती है। यह है बाड़मेर का ऐतिहासिक गढ़ मंदिर… पहाड़ी की चोटी पर विराजित मां जोगमाया का वह दरबार, जहां सदियों से श्रद्धालु सिर झुकाते आए हैं। आखिर क्या है इस मंदिर का इतिहास? कैसे जुड़ा है इसका रिश्ता बाड़मेर के प्राचीन गढ़ से? और क्यों यह मंदिर आज भी धार्मिक आस्था के साथ-साथ शहर की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बना हुआ है? आइए, जानते हैं बाड़मेर के गढ़ मंदिर की कहानी। गढ़ का इतिहास और मंदिर की विरासत थार के रेगिस्तान में बसा बाड़मेर… अपनी विशिष्ट भौगोलिक पहचान, ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। इसी शहर की एक पहाड़ी पर स्थित है गढ़ मंदिर, जिसकी पहचान दूर से नजर आने वाली धर्मध्वजा से भी जुड़ी हुई है। राजस्थान पर्यटन विभाग के ऐतिहासिक विवरण के अनुसार, वर्तमान बाड़मेर शहर की स्थापना वर्ष 1552 में रावत भीमा ने की थी। इसी ऐतिहासिक दौर में पहाड़ी पर गढ़ का निर्माण हुआ, जिसने शहर को एक विशिष्ट पहचान दी। गढ़ की सबसे ऊंची चोटी पर विराजित हैं मां जोगमाया। श्रद्धालु उन्हें मां जगदंबा के स्वरूप में पूजते हैं। मंदिर की स्थापना की सटीक तारीख और इसके शुरुआती निर्माण को लेकर स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन स्थानीय धार्मिक परंपराओं में इस मंदिर का विशेष महत्व है। गढ़ पहाड़ी पर पुराने काल के अवशेष आज भी बीते दौर की याद दिलाते हैं। ये उस समय की कहानी कहते हैं, जब पहाड़ियां सुरक्षा, सत्ता और धार्मिक आस्था के महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करती थीं। धर्मध्वजा, आस्था और श्रद्धालुओं की परंपरा बाड़मेर की ओर आने वाले यात्रियों के लिए पहाड़ी पर लहराती धर्मध्वजा एक परिचित दृश्य है। शहर से कई किलोमीटर पहले ही नजर आने वाली यह ध्वजा मानो आने वालों का स्वागत करती है। यह केवल कपड़े का एक ध्वज नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास और शहर की धार्मिक पहचान का प्रतीक है। बाड़मेर के लोगों के लिए गढ़ मंदिर का महत्व पीढ़ियों से जुड़ा हुआ है। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पहाड़ी की सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। कोई परिवार की सुख-समृद्धि की कामना लेकर आता है, कोई अपनी मनोकामना के साथ मां के दरबार में माथा टेकता है, तो कोई जीवन की कठिनाइयों के बीच मानसिक संबल पाने के लिए यहां पहुंचता है。 गढ़ की इसी पहाड़ी पर मां नागणेची का मंदिर भी स्थित है। ये दोनों धार्मिक स्थल बाड़मेर की आस्था और स्थानीय परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। नवरात्रि जैसे पर्वों पर देवी उपासना का विशेष महत्व रहता है। पूजा, दर्शन और धार्मिक आयोजनों के बीच यहां की परंपराएं जीवंत दिखाई देती हैं। समय बदलता रहा, पीढ़ियां बदलती रहीं, लेकिन मां के प्रति श्रद्धा की यह परंपरा आज भी कायम है। युद्धों से जुड़ी जनश्रुतियां और आज का महत्व बाड़मेर सीमावर्ती राजस्थान का वह हिस्सा है, जिसने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धों और सुरक्षा चुनौतियों का दौर भी देखा है। गढ़ मंदिर को लेकर वर्ष 1965 और 1971 के युद्धों से जुड़ी कई जनश्रुतियां स्थानीय स्तर पर प्रचलित हैं। इन कहानियों में मंदिर और मां की कृपा को लोगों की सुरक्षा तथा विश्वास से जोड़कर देखा जाता है। आज गढ़ मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि बाड़मेर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। एक तरफ पुराने गढ़ के अवशेष हैं, दूसरी तरफ पहाड़ी पर लहराती धर्मध्वजा। नीचे बसा शहर और ऊपर मां का दरबार , यह दृश्य बाड़मेर की पहचान को एक अलग स्वरूप देता है। गढ़ मंदिर… बाड़मेर की पहचान, इतिहास की विरासत और आस्था का अटूट केंद्र। दुर्गसिंह राजपुरोहित Zee मीडिया बाड़मेरसुल्तानपुर: 32 लाख से बदला 150 साल पुराना घंटा घर, लखनऊ के हजरतगंज की तर्ज पर किया जाएगा विकास
Alinagar Sonhara, Uttar Pradesh:यूपी में सुल्तानपुर के चौक स्थित करीब 150 साल पुराने घंटा घर का स्वरूप अब बदल गया है। करीब 32 लाख रुपये की लागत से इसका सौंदर्यीकरण कराया गया है। घंटाघर पर फिलिप्स कंपनी की 64 वाटरप्रूफ फ्लैश फसाड लाइटें लगाई गई हैं, जो अलग-अलग रंगों में रोशनी बिखेरती हैं। नगर पालिका की ओर से चौक की सड़कों, डिवाइडरों और रोशनी को भी बेहतर बनाने का काम किया जा रहा है। इसके साथ ही घंटाघर के आसपास की दुकानों के बोर्ड भी अयोध्या और लखनऊ के हजरतगंज की तर्ज पर एक समान रंग और प्रारूप में लगाने की योजना है।
सभासद दिनेश चौरसिया के मुताबिक, नगर पालिका अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल की पहल पर यह काम कराया गया है। घंटाघर के सौंदर्यीकरण से चौक की खूबसूरती बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, लोगों से शहर को साफ-सुथरा रखने और कचरा इधर-उधर न फेंकने की अपील भी की गई है।
