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पेंच टाइगर रिजर्व की वरिष्ठ बाघिन पी.एन. 20 का प्राकृतिक निधन
PSPrashant Shukla
Mar 07, 2026 16:45:49
Seoni, Madhya Pradesh
पेंच टाइगर रिज़र्व की वरिष्ठ बाघिन पी.एन. 20 (टी-20) का प्राकृतिक कारणों से निधन
सिवनी पेंच टाइगर रिजर्व की प्रसिद्ध एवं वरिष्ठतम बाघिनों में से एक पी.एन. 20 (टी-20), जिसे “लंगड़ी बाघिन” के नाम से भी जाना जाता था, आज प्रातः लगभग 10:30 बजे कर्माझिरी रेंज के बाइसन बीट अंतर्गत जोड़ा मुनारा कैम्प के पास मृत अवस्था में पाई गई। वर्ष 2008 में जन्मी इस बाघिन की आयु लगभग 17 वर्ष थी। यह बाघिन दिनाँक 06.03.2026 को अंतिम बार पर्यटकों को दिखाई दृष्टि दी थी। बाघिन काफी समय से दीर्घ आयु होने के कारण शारीरिक रूप से कमजोर थी। बाघिन की मृत्यु वृद्धावस्था के कारण से हुई। यह पेंच टाइगर रिजर्व की सबसे अधिक आयु वाली बाघिनों में से एक थी।
पी.एन. 20 पेंच टाइगर रिजर्व की विश्वविख्यात “कॉलरवाली” बाघिन की सहोदर बहन थी। कर्माझिरी परिक्षेत्र के लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र में इसका विचरण रहा है। सामने के पंजे में जन्मजात विकृति के कारण यह बाघिन हल्का लंगड़ाकर चलती थी, जिसके कारण यह पर्यटकों के बीच “लंगड़ी बाघिन” के नाम से प्रसिद्ध हो गई थी।
पी.एन. 20 का प्रजनन इतिहास अत्यंत उल्लेखनीय रहा है—
दिसंबर 2012 में प्रथम बार दो मादा शावकों को जन्म
वर्ष 2016 में तीन शावक (एक नर, दो मादा)
वर्ष 2019 में चार नर शावक
वर्ष 2021 में एक मादा शावक, जो वर्तमान में पी.एन. 165 (लक्ष्मी) के नाम से कर्माझिरी परिक्षेत्र में विचरणरत है
इस प्रकार पी.एन. 20 ने अपने जीवनकाल में कुल 10 शावकों को जन्म दिया, जिन्होंने पेंच टाइगर रिजर्व एवं इसके आसपास के क्षेत्रों में अपने-अपने क्षेत्र स्थापित कर बाघों की संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वर्तमान में अत्यधिक वृद्धावस्था के कारण यह बाघिन शारीरिक रूप से कमजोर हो चुकी थी तथा स्वयं शिकार करने में भी असमर्थ हो गई थी। हालांकि, अन्य बाघों अथवा तेंदुओं द्वारा छोड़े गए शिकार से इसे समय-समय पर भोजन प्राप्त हो जाता था।
अत्यधिक आयु के बावजूद इस बाघिन ने लंबे समय तक जीवित रहने की अदम्य इच्छा और संघर्षशील जीवन शक्ति का परिचय दिया। अपने जीवनकाल में इसने पेंच टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस प्रतिष्ठित बाघिन के निधन पर मुख्य वन संरक्षक, सिवनी तथा पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन तथा द्वारा भावभीनी और सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। पी. एन. 20 को NTCA की निर्धारित गाइडलाइंस का पालन करते हुए वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक और स्थानीय पशु चिकित्सक द्वारा मुख्य वन संरक्षक सिवनी, उप संचालक पेंच टाइगर रिजर्व, NTCA प्रतिनिधि, स्थानीय जन प्रतिनिधि और राजस्व विभाग के प्रतिनिधि की उपस्थिति में पोस्टमार्टम एवं भस्मीकरण किया गया।
पी.एन. 20 न केवल पेंच टाइगर रिजर्व की जैव विविधता का प्रतीक रही है, बल्कि बाघ संरक्षण प्रयासों की एक प्रेरणाप्रद मिसाल भी है।
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