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Sehore466001

सीहोर जिला अस्पताल में जनऔषधी केंद्र की शुरुआत के लिए कलेक्टर ने किया निरीक्षण

Sept 03, 2024 12:21:52
Sehore, Madhya Pradesh

सीहोर जिला अस्पताल में जनऔषधी केंद्र की शुरुआत की तैयारी की जा रही है। कलेक्टर प्रवीण सिंह ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया और सिविल सर्जन प्रवीर गुप्ता को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने निर्माणाधीन अस्पताल भवन की गुणवत्ता भी जांची और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इस भवन का निर्माण पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन द्वारा 20 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है।

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MKMUKESH KUMAR
Jan 27, 2026 02:33:02
Darbhanga, Bihar:धार्मिक न्यास ट्रस्ट के ट्रस्टी बने महाराज कामेश्वर सिंह के बंशज कुमार कपलेश्वर सिंह, राजेश्वर सिंह; अंतिम महारानी कामसुन्दरी देवी के निधन के बाद डीड के अनुसार बने ट्रस्टी, पदभार ग्रहण, 108 मंदिरों के संरक्षण का संकल्प, मंदिर के पुजारियों का वेतन बढ़ेगा। महाराजा कामेश्वर सिंह ने 1948 में न्यास की स्थापना की थी। न्यास समिति के गठन के साथ, न्यास के अंतर्गत कुल 108 मंदिर हैं जिनके प्रबंधन के लिए 1 लाख 17 हजार एकड़ जमीन दी गयी है; सभी मंदिरों के पास एक तालाब भी है। दरभंगा के महाराजा कामेश्वर सिंह दरभंगा के अंतिम महराज के छोटे महारानी अधिरानी कामसुंदरी देवी के निधन के बाद ऐतिहासिक कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास ट्रस्ट की जिम्मेदारी अब कुमार शुभेश्वर सिंह के दोनों पुत्रों बड़े कुमार राजेश्वर सिंह और छोटे कुमार कपिलेश्वर सिंह ने विधिवत संभाल ली है। धार्मिक न्यास के कार्यालय पहुँचते ही दोनों भाइयों को पंडित लोगों ने माला पहना मंत्र उच्चारण, टिका़ लगा स्वागत किया, उसके बाद दोनों ने हस्ताक्षर कर कार्यभार संभाला, फिर कुल देवता के गोहबर पर माथा टेका। इससे पूर्व सितंबर माह में दरभंगा ही सिविल कोर्ट ने 47 वर्ष पुराने संपत्ति विवाद में फैसला सुनाते हुए दोनों भाइयों को महारानी अधिरानी कामसुन्दरी के निधन के बाद ट्रस्टी घोषित किया था। ट्रस्ट की जिम्मेदारी ग्रहण करने के बाद कपिलेश्वर सिंह ने कहा कि आज से उन्होंने और उनके बड़े भाई ने आधिकारिक रूप से ट्रस्ट का कार्यभार संभाल लिया है। सबसे पहले श्यामा, तारा और कंकाली माता का आशीर्वाद लिया गया और इसके बाद गोस्वामी घर पहुंचकर परंपरागत प्रक्रिया पूरी की गई। उन्होंने कहा कि दादी के जाने के बाद यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी हम दोनों पर आई है। انہوں ने बताया कि कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास के पास देश-विदेश में कुल लगभग 108 मंदिर हैं। बनारस में चार मंदिर हैं, वहीं पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी ट्रस्ट की संपत्तियां और मंदिर हैं। हाल ही में मटेश्वरनाथ परिसर स्थित tara मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है और मधेश्वरी परिसर के अन्य जर्जर मंदिरों को भी पुनर्जीवित किया जाएगा। रामबाग स्थित गोस्वामी घर और पूरे मधेश्वरा परिसर को धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां पार्किंग, साफ-सफाई और श्रद्धालुओं की सुविधा की पूरी व्यवस्था होगी। युवराज कपिलेश्वर सिंह ने कहा कि उनके दादा महाराजााधिराज डॉ. कामेश्वर सिंह सनातन धर्म के बड़े संरक्षक थे; वे न सिर्फ मंदिरों का निर्माण कराते थे, बल्कि जिन राजाओं से मंदिरों का रखरखाव नहीं हो पाता था, वे भी अपनी मंदिर संपत्ति इस ट्रस्ट को सौंप देते थे। इसी कारण आज ट्रस्ट के पास देशभर में मंदिर, ठाकुरबाड़ी, तालाब और भूमि सहित विशाल संपत्ति है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में कई स्थानों पर कुप्रबंधन की स्थिति है, जिसे सुधारना प्राथमिकता होगी; मंदिरों के पुजारियों का वेतन बहुत कम है, उसे व्यवस्थित और सम्मानजनक बनाया जाएगा। “मेरे और मेरे बड़े بھائی के ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेदारी आई है, जिसे हम पूरी निष्ठा और सही व्यवस्था के साथ निभाएंगे,” उन्होंने कहा। महाराजा कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास की स्थापना महाराजा कामेश्वर सिंह ने 1948 में की थी; इस न्यास के अंतर्गत कुल 108 मंदिर हैं, जिनके प्रबंधन के लिए 1 लाख 17 हजार एकड़ जमीन दी गयी है; न्यास की संपत्तियों में प्रतिमा पर के जवरात और अन्य प्रकार के आभूषण शामिल हैं, जिनका मूल्य 1 खरब से अधिक हैं (प्रासंगिक विवरण: दायित्व एवं आर्थिक योगदान सहित). इस न्यास का एकल न्यासी होगा जो परिवार का मुखिया या उससे नामित कुलवंश का सदस्य होगा। यह न्यास देवघर शिव मंदिर समेत करीब 25 मंदिरों को आर्थिक मदद भी करता रहा है और दुर्गा पूजा तथा अन्य सार्वजनिक आयोजन में भी इसकी सहभागिता दर्ज है; दरभंगा के मुहर्म में भी बड़े दानदाता के रूप में इसकी भूमिका रही है।
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HSHEMANT SANCHETI
Jan 27, 2026 02:31:25
Narayanpur, Chhattisgarh:नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र अंतर्गत कोड़नार गांव में संचालित प्राथमिक शाला की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। भवन विहीन यह स्कूल कभी घोटुल में तो अब आंगनबाड़ी भवन में संचालित किया जा रहा है, लेकिन इससे भी बड़ी समस्या यह है कि यहां पदस्थ शिक्षक अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक महीने में महज दो से तीन दिन ही स्कूल आते हैं और शेष दिनों में स्कूल पूरी तरह बंद रहता है। पहले जब स्कूल घोटुल में संचालित होता था, तब भी शिक्षक नियमित रूप से उपस्थित नहीं होते थे। अब आंगनबाड़ी भवन में आंगनबाड़ी के बच्चों के साथ प्राथमिक कक्षाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है, ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षकों की इस लापरवाही के कारण गांव के बच्चों का भविष्य अंधकार में जा रहा है। पढ़ाई ठप होने से बच्चे बुनियादी शिक्षा से वंचित हो रहे हैं, जिसका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ रहा है। इस पूरे मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी अशोक पटेल ने कहा है कि शिकायत की जांच कराई जाएगी और यदि शिक्षक दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिक्षक नियमित रूप से स्कूल जाते ही नहीं हैं, तो उन्हें पूरा वेतन कैसे मिल रहा है? यह मामला केवल कोड़नार गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि अबूझमाड़ क्षेत्र के कई स्कूलों में इसी तरह की स्थिति होने की बात सामने आ रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच के बाद प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है और कब तक बच्चों को उनका शिक्षा का अधिकार सही मायने में मिल पाता है。
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SMSandeep Mishra
Jan 27, 2026 02:30:19
Dindori, Madhya Pradesh:डिंडोरी के किसलपुरी गांव में रोज रात के अंधेरे में खनन और ब्लास्टिंग की जा रही है। क्रेशर के आसपास हो रही धमाकों की गूंज इतनी तेज कि मकानों में दरारें पड़ गईं, बच्चे डर के मारे कांप थर्रा उठते हैं। महिलाएं/बुजुर्ग दहशत में हैं? कलेक्टर को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। अब गांव पूछ रहा है ..क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है? हालाँकि कलेक्टर ने जल्द ही जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिया है इधर ग्रामीणों की मांग है कि अवैध खनन पर तुरंत रोक लगे और दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो और गांव को डर नहीं, सुरक्षा मिले। अब देखना ये होगा कि प्रशासन जागता है…या फिर गांव की रातें यूँ ही धमाकों से कांपती रहेंगी!
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DDDeepak Dwivedi
Jan 27, 2026 02:19:54
Gwalior, Bhopal, Madhya Pradesh:भोपाल सर्दी और कोहरे के बीच मध्य प्रदेश में बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने आज भोपाल, ग्वालियर समेत 28 जिलों में बारिश होने की चेतावनी जारी की साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) और ट्रफ की वजह से मौसम में बदलाव अगले 2 दिन तक एमपी में भी इसका असर अगले 2 दिन इन जिलों में बारिश 27 जनवरी : भोपाल, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, शाजापुर, देवास, विदिशा, सीहोर, हरदा, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, रायसेन, सागर, दमोह, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सतना, पन्ना 28 जनवरी को इन जिलों में बारिश ग्वालियर श्योपुर, मुरैना, भिंड दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, कटनी उत्तर-पश्चिम भारत में अगला नया सिस्टम 30 जनवरी को एक्टिव फरवरी की शुरुआत में भी प्रदेश में बारिश का रहेगा दौर
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ADAjay Dubey
Jan 27, 2026 02:19:13
Singrauli, Madhya Pradesh:सिंगरौली जिले के बरगवां रेलवे स्टेशन के पास सोमवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां रेलवे ट्रैक पर एक बारहवीं कक्षा के छात्र का शव दो हिस्सों में कटा हुआ मिला। सूचना मिलते ही जीआरपी और मोरवा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई। मृतक की पहचान मनिहारी गांव निवासी सत्री गौड़ बैसवार के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह एक स्कूल में पढ़ने वाला छात्र था। पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि पढ़ाई को लेकर पिता से हुए विवाद के बाद वह नाराज होकर घर से निकल गया था। परिजनों के अनुसार डांट के बाद सत्री सीधे बरगवां रेलवे स्टेशन की ओर चला गया। आशंका जताई जा रही है कि उसने मालगाड़ी के सामने लेटकर आत्महत्या कर ली। इसी दौरान वहां से गुजर रही मालगाड़ी की चपेट में आने से उसका शरीर पेट के हिस्से से दो भागों में कट गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलने पर रेलवे प्रशासन के अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। बरगवां थाना प्रभारी मोहम्मद समीर ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। मर्ग कायम कर लिया गया है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि घटना के समय कोई अन्य परिस्थिति तो नहीं थी। फिलहाल पूरे मामले की विवेचना जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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MDMahendra Dubey
Jan 27, 2026 02:19:00
Sagar, Madhya Pradesh:सेंट्रल जेल से सजा माफी के साथ रिहा हुए 9 कैदी.. एमपी सरकार के जेल विभाग द्वारा लिए गए निर्णय के मुताबिक गणतंत्र दिवस के मौके पर सेंट्रल जेल सागर से हत्या के आरोप में बंद 9 कैदियों को रिहा किया गया है इन सजायाफ्ता कैदियों की 6 साल की सजा माफ करते हुए जेल विभाग ने उन्हें जेल से बाहर किया है। दरअसल सरकार ने ऐसे उम्र कैद के कैदियों जिनकी सजा की 14 साल की अवधि पूरी हो गई है और उनका आचरण जेल के भीतर अच्छा रहा है उसका आंकलन कर के उन्हें रिहा किया गया है। जेल अधीक्षक के मुताबिक ये 9 कैदी सागर सेंट्रल जेल में बीते 14 सालों से बंद थे और इनके आचरण का परीक्षण कर उन्हें 6 साल पहले ही मुक्त किया गया है, जेल में रहते हुए इन्होंने व्यवसायिक गुण भी हासिल किए है और उम्मीद है कि जेल से रिहा होने के बाद उनका शेष जीवन बेहतरीन होगा।
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VKVIJAY KUMAR
Jan 27, 2026 02:17:03
Sirsa, Haryana:एंकर रीड सरकारी सुविधाएं न होने का रोना रोकर अपने कर्तव्यों से दूर भागने वाले शिक्षकों को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भरोखां के शिक्षाकर्मी आइना दिखा रहे है। भरोखा स्कूल के शिक्षा कर्मियों ने विभाग के फंड पर आश्रित न रहकर बच्चों की सुविधाओं पर अपनी सैलरी से पैसा लगाया। ग्रामीणों को अपनी सोच बताकर बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए शिक्षकों ने जन सहयोग मांगा। ग्रामीणों को प्रेरित कर उनका सहयोग लेकर यहां के अध्यापकों ने स्कूल की सूरत ही बदलकर रख दी है। यह सब क्रांतिकारी बदलाव आया है इसी गांव से, इसी विद्यालय में पढ़कर और अब यहाँ प्रधानाचार्य बनकर आए वेदप्रकाश रोज ने स्कूल की काया ही पलट दी है। वेद प्रकाश ने 1988 में इसी विद्यालय से दसवीं पास की थी। 3 दिसंबर 1997 को गांव भावदीन में वेद प्रकाश रोज ने गणित अध्यापक के रूप में ज्वाइन किया। 17 अगस्त 2005 को मॉडल संस्कृति स्कूल सरसा में नियुक्ति मिली। दो साल गांव पनिहारी स्कूल में भी सेवाएं दीं। 20 नवंबर 2024 को प्रधानाचार्य बनकर भरोखां स्कूल लौटे। उसी दिन गांव के मौजिज लोगों और स्कूल स्टाफ के साथ बैठक की, जिसमें स्कूल में डिजिटल लाइब्रेरी, ग्लोब, मिनी जल घर बनाने और शिक्षा के स्तर को सुधारने पर चर्चा हुई। जिसका परिणाम अब सबके सामने है। वेदप्रकाश रोज बताते है कि उनका सपना है कि उनका स्कूल जिले का सबसे अच्छा स्कूल बने। प्रधानाचार्य वेदप्रकाश रोज बताते हैं कि सरकारी संस्थान से ही पढ़ाई कर यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने बताया कि 1989 में भरोखां स्कूल सीनियर सेकेंडरी बना। 20 नवंबर 2024 को वे इस विद्यालय में प्रधानाचार्य बनकर आए है। वे लगातार जन सहयोग से स्कूल के आधारभूत ढांचे में सुधार के लिए कार्य कर रहे है। वेदप्रकाश रोज का दावा है कि उनके विद्यालय में बनने वाला मिड-डे-मील की पूरे प्रदेश में मिसाल दी जाती है। यहां विद्यार्थियों को मिड-डे-मील खाने के लिए डाइनिंग टेबल की सुविधा दी गई है। उन्होंने बताया कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र में अब तक पिछले साल के मुकाबले 100 विद्यार्थियों ने अधिक दाखिला लिया है। 11 लाख रुपये जुटाकर सीसीटीवी से लैस लाइब्रेरी, भौगोलिक पार्क और मिनी जल घर का निर्माण करवा रहे हैं। स्कूल के विकास के लिए 20 से अधिक स्टाफ और ग्रामीणों ने 11 लाख रुपये चंदा एकत्र किया। स्कूल में डिजिटल लाइब्रेरी, सोलर सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे, चार अत्याधुनिक शौचालय और शुद्ध पेयजल के लिए जल मंदिर बनाया गया है। लाइब्रेरी में डबल इंटरनेट कनेक्शन दिया गया है। 60 छात्रों के बैठने की क्षमता वाली यह एसी लाइब्रेरी हाई स्पीड इंटरनेट, आरामदायक फर्नीचर, इन्वर्टर बैकअप और सुरक्षा के लिए डिजिटल कैमरों से लैस है। जिसमें स्कूल के अलावा कॉलेज की छात्राएं भी अध्ययन कर सकेंगी। इसके अलावा विद्यालय परिसर में भौगोलिक पार्क भी बनाया जा रहा है, जिसमें हैदराबाद से घास मंगवाकर लगाया है। अब पार्क में बड़ा ग्लोब लगाया जाएगा, जिसे लुधियाना से मंगवाया जाएगा। इससे विद्यार्थी संसार के मानचित्र को देख पाएंगे। स्कूल का सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा, ताकि अभिभावक खुद बच्चों का दाखिला करवाने आएं। गांव वालों ने अपनी मेहनत की कमाई से स्कूल को 7.5 लाख रुपये दिए। कुल 11 लाख रुपये जुटाए गए। स्कूल के प्रिंसिपल का सपना है कि इसे बेहतरीन बनाया जाए। वे खुद दो से तीन क्लास में गणित पढ़ाते हैं। प्रधानाचार्य वेदप्रकाश रोज बताते है उनके विद्यालय में आस-पास के गांव बरवाली, मुसाहिब वाला, दड़बी व पनिहारी तक बच्चे शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते है। लेकिन स्कूल में बच्चों को आने-जाने में काफी परेशानी आ रही थी। इसलिए मौजूदा शैक्षणिक सत्र से स्कूल स्टाफ की ओर से अपनी सैलरी से पैसा एकत्रित कर एक स्कूल वैन खरीदी गई और वैन में तेल इत्यादि भी स्कूल स्टाफ द्वारा डलवाया जा रहा है। यह स्कूल वैन बच्चों को निशुल्क उपलब्ध कराई गई है। वोल सिरसा के गांव बरुवाली सहित 15 ढाणियों की करीब 40 बेटियां स्कूल की पढ़ाई जारी रख सकेंगी। भरोखां गांव के स्कूल स्टाफ और पंचायत ने मिलकर बेटियों के लिए वैन सेवा शुरू की है। इसका मकसद बेटियों को घर से स्कूल तक सुरक्षित लाना और ले जाना है। कई पेरेंट्स पढ़ाई का खर्च उठाने को तैयार थे। लेकिन स्कूल की दूरी बेटियों की पढ़ाई में बाधा बन रही थी। कुछ पेरेंट्स बेटियों की पढ़ाई छुड़वाने की सोचने लगे थे। यह देख स्कूल स्टाफ ने चंदा इकट्ठा कर एक वैन खरीदी। ग्राम पंचायत ने वैन के डीजल का खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली। बेटियां पढ़-लिखकर आगे बढ़ सकें, इसलिए स्कूल के प्रिंसिपल वेद प्रकाश रोज ने खुद वैन चलाने का फैसला किया। अब पेरेंट्स को बेटियों की स्कूल आवाजाही और सुरक्षा की चिंता नहीं रहेगी। वोल प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में पढ़ने आए बच्चों ने बताया कि प्राइवेट स्कूल में मोटी फीस भरने को उनके माता पिता मजबूर थे पढ़ाई ज्यादा नहीं होती थी लेकिन गांव भरोखां के सरकारी स्कूल में अच्छी पढ़ाई होती है यहाँ स्कूल का महोला काफी अच्छा है। बाइट स्कूली बच्चे। वोल वही स्कूल स्टाफ का भी मानना है कि उनके ज्वाइन करने से पहले स्कूल की दिशा अच्छी नहीं थी और उन्होंने स्कूल के आने के बाद प्रिंसिपल के सहयोग से स्कूल में काफी काम करवाए जिसकी बदौलत अब स्कूल की दिशा अच्छी हुई है। बाइट स्कूल स्टाफ। महिला टीचर सुमन बाला भी प्राइवेट संस्थान को छोड़कर अब सरकारी स्कूल में पढ़ाने के लिए आई है। प्राइवेट संस्थान की बजाए सरकारी स्कूलों में काफी अच्छी सुविधाएं देखने को मिल रही है। उनके गांव के स्कूल में काफी अच्छा माहौल है जिसके चलते बच्चे भी काफी उत्साहित होकर पढ़ाई करते रहते है। बाइट सुमन बाला , टीचर। बाइट सरोज बाला , टीचर। बाइट अंकु रानी , टीचर। बाइट जितेंद्र गिरी , टीचर।
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