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ASAmit SharmaFollow2 Nov 2024, 05:29 am
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कानपुर में SBI लॉकर 23 से 50 लाख के जेवर गायब, जांच शुरू

Kanpur, Uttar Pradesh:कानपुर\n\nSBI bank के लॉकर से जेवरात चोरी\n\nदो दिनों से लॉकर नंबर 23 का रहस्य नहीं सुलझा पा रही पुलिस, 50 लाख के जेवर हुए थे गायब\n- डीसीपी सेंट्रल बोले थाना स्वरुप नगर में दर्ज किया गया मुकदमा, सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे\n- कौशलपुरी की रहने वाली रश्मि अरोड़ा ने साल 2003 में खोला था खाता, बैंककर्मियों पर घूम रही शक की सुई\n\nकानपुर: शहर के थाना स्वरुप नगर क्षेत्र से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां सालों पहले संचालित रहे, स्टेट बैंक आफ त्रावणकोर के लॉकर नंबर 23 से 50 लाख रुपये के जेवरात गायब हो गए हैं। इस मामले को लेकर आरोप लगाते हुए कौशलपुरी निवासी रश्मि अरोड़ा ने पुलिस आयुक्त से गुहार लगाई थी, जिसके बाद थाना स्वरुप नगर में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। हालांकि, इस मामले पर पीड़िता की ओर से दो दिनों पहले पुलिस को जानकारी देने के बावजूद अभी तक पुलिस के साथ खाली हैं। कमिश्नरेट पुलिस के आला अफसरों की ओर से जो टीमें गठित हैं, वह लॉकर नंबर 23 का रहस्य नहीं सुलझा पा रही हैं। वहीं, पूरे मामले को लेकर डीसीपी सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव ने सोमवार को कहा, कि मामले में सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। जिन बैंक कर्मियों की संलिप्तता सामने आएगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा, साल 2020 में लॉकर धारक द्वारा दो बार लॉकर को देखा गया था, इसकी एंट्री बैंक के रजिस्टर में मिली है।\n\n27 जुलाई को बेटी के साथ पीड़िता ने की थी लॉकर की जानकारी: इस मामले को लेकर स्वरुप नगर थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह नेे बताया, 27 जुलाई को बेटी के साथ आकर पीड़िता ने जब लॉکر की जानकारी की थी, तो बैंक मैनेजर द्वारा उन्हें बताया गया था, कि स्टेट बैंक आफ त्रावणकोर की शाखा को स्टेट बैंक आफ इंडिया में विलय कर दिया गया। इस वजह से उन्हें लॉकर नंबर 23 की जानकारी तब तक नहीं थी। लेकिन, जब पीड़िता द्वारा लॉकर की फीस जमा की गई और 1000 रुपये देकर अपने खाते की केवाईसी कराई गई तो उन्होंने जाकर लॉकर देखा। जिसमें जेवरात गायब थे। इसकी सूचना भी पीड़िता ने पुलिस को दी थी। हालांकि, मौके पर जब उन्हें कोई मदद नहीं मिली तो पीड़िता द्वारा पुलिस आयुक्त से मुलाकात कर उन्हें मामले की जानकारी दी गई थी।\n\nबाइट-अतुल श्रीवास्तव-DCP सेंट्रल
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दिल्ली-नेपाल बॉर्डर पर हाईअलर्ट: मोस्ट वांटेड आतंकियों की तस्वीरों के बाद सुरक्षा बढ़ी

Maharajganj, Uttar Pradesh:देश की राजधानी दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो चुकी है। मोस्ट वांटेड आतंकियों के तस्वीरें सार्वजनिक होने के बाद दिल्ली पुलिस ने आम लोगों से सतर्क रहने के अपील भी की है वहीं इसका असर देश के संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में भी सुरक्षा तैयारिया पर दिखाई दे रहा है। दिल्ली पुलिस के इस इनपुट के बाद से ही महाराजगंज जनपद के भारत नेपाल सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। भारत नेपाल के 84 किलोमीटर के अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नेपाल से भारत में प्रवेश कर रहे हैं सभी नागरिकों की सघनता से तलाशी ली जा रही है। डॉग स्क्वायड से सामानों की जांच की जा रही है वही सीसीटीवी कैमरे से नजर रखी जा रही है कोई भी देश विरोधी तत्व राष्ट्रीय पर्व पर किसी बड़ी देश विरोधी साजिश को अंजाम न देने पाए इसको लेकर भारत नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट है।
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कॉर्बेट में हाथियों के कॉरिडोर असुरक्षित, मानव-हाथी संघर्ष रोकने के लिए रोडमैप जरूरी

Noida, Uttar Pradesh:विश्व हाथी दिवस विशेष: सिकुड़ते जंगल, बढ़ती बस्ती और बदलते रास्ते… सुरक्षित ठिकाने तलाश रहे गजराज Story.-विश्व हाथी दिवस विशेष: सिकुड़ते जंगल, बढ़ती बस्ती और बदलते रास्ते… सुरक्षित ठिकाने तलाश रहे गजराज विजय कश्यप कॉर्बेट लैंडस्केप में हाथियों की मौजूदगी हमेशा से इस क्षेत्र की जैव विविधता की पहचान रही है. जंगलों में हाथियों के बड़े-बड़े झुंड विचरण करते है. और एक वन क्षेत्र से दूसरे वन क्षेत्र तक लंबी दूरी तय करते थे,लेकिन अब इनके सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ भोजन की नहीं, बल्कि सुरक्षित आवागमन की भी है. वन्यजीव फोटोग्राफर दीप रजवार के मुताबिक कॉर्बेट लैंडस्केप के कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पहले हाथियों के बड़े झुंड नियमित रूप से दिखाई देते थे,लेकिन अब उनकी मौजूदगी में बदलाव देखने को मिल रहा है। पर्यटन गतिविधियां, सड़कों पर बढ़ता ट्रैफिक और देर रात तक होने वाला शोर हाथियों के प्राकृतिक व्यवहार को प्रभावित कर सकता है, ऐसे में हाथी टकराव से बचने के लिए अपने पुराने रास्तों और समय में बदलाव कर रहे हैं. वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार का कहना है कि हाथी बेहद संवेदनशील वन्यजीव है. जब उसे पुराने रास्ते में दखल और भोजन में कमी महसूस होती है तो वह वैकल्पिक रास्ता तलाशता है. उनका कहना है कि यदि समय रहते कूरी यानी लेंटाना को नियंत्रित नहीं किया गया और हाथी कॉरिडोर सुरक्षित नहीं किए गए, तो आने वाले समय में मानव-हाथी संघर्ष की समस्या और बढ़ सकती है. कॉर्बेट के घास के मैदान भी इस पूरी कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हाथियों के लिए घास भोजन का प्रमुख स्रोत है. पहले कई घास के मैदानों में नियंत्रित तरीके से प्रबंधन किया जाता था, जिसके बाद नई और कोमल घास उगती थी, हाथियों के झुंड इन क्षेत्रों में भोजन के लिए पहुंचते थे,लेकिन अब कई स्थानों पर लेंटाना यानी कूरी का तेजी से फैलाव चिंता का विषय बना हुआ है. यह आक्रामक खरपतवार देशी वनस्पतियों और घास को प्रभावित करती है,घास के मैदानों में इसका बढ़ता फैलाव हाथियों के प्राकृतिक भोजन पर असर डाल सकता है. वन्यजीव विशेषज्ञ संजय छिम्वाल के मुताबिक तराई-भाबर क्षेत्र में बढ़ती आबादी और निर्माण गतिविधियों का असर हाथियों के माइग्रेशन रूट पर पड़ा है। उनके अनुसार कई पुराने गलियारे अब आबादी और कंक्रीट के विस्तार के बीच बाधित हो चुके हैं, गोला रिवर कॉरिडोर और काठगोदाम के आसपास के क्षेत्र इसका उदाहरण हैं, उनका कहना है कि यमुना से लेकर नेपाल सीमा तक हाथियों के कई पारंपरिक कॉरिडोर अलग-अलग स्तर पर दबाव में आए हैं. उनके मुताबिक हाथी एक वन क्षेत्र से दूसरे वन क्षेत्र तक लगातार आवाजाही करते हैं,यदि उनके पारंपरिक रास्तों पर मानवीय गतिविधियाँ बढ़ती है. तो हाथियों को वैकल्पिक रास्ते तलाशने पड़ते है. और यही स्थिति आगे चलकर मानव-हाथी संघर्ष को बढ़ा सकती है. वहीं वन्यजीव प्रेमी हिमांशु तिरुवा हाथियों की बढ़ती संख्या को संरक्षण की बड़ी उपलब्धि मानते हैं, उनका कहना है कि करीब 1200 से बढ़कर 1226 के आसपास हाथियों की संख्या दर्ज हुई है,वह कहते है कि इसके साथ साथ चुनौतियां भी लगातार बढ़ रहीं है,जिस तरह जंगल कट रहे जंगल सिकुड़ रहे है और जानवर बढ़ रहे है यह कही न कही मानव वन्यजीव संघर्ष की ओर इशारा कर रहा है,वन्यजीव जंगलों से निकलकर आबादी की ओर रुख कर रहे है, अगर विकास की बात करें तो सड़कों का निर्माण और दूसरी विकास गतिविधियां हाथियों के पारंपरिक माइग्रेशन रूट यानी एलिफेंट कॉरिडोर को प्रभावित कर रही हैं,सीताबनी इसका एक बड़ा उदाहरण है,गर्मियों के दौरान पहले सीताबनी क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही और झुंड काफी अधिक दिखाई देते थे, लेकिन अब यहां हाथियों की मौजूदगी में कमी देखने को मिल रही है, यह निश्चित तौर पर चिंता का विषय है,हाथियों के पारंपरिक कॉरिडोर बाधित होने का असर सिर्फ उनके प्राकृतिक आवागमन पर नहीं पड़ता, बल्कि इससे मानव-हाथी संघर्ष की आशंका भी बढ़ जाती है, इसलिए इस पूरे विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए एक ठोस रोडमैप तैयार करने की जरूरत है. सबसे पहले यह वैज्ञानिक तरीके से चिन्हित किया जाना चाहिए कि कौन-कौन से क्षेत्र हाथियों के पारंपरिक कॉरिडोर हैं, इसके बाद वन विभाग और सड़क विकास से जुड़े विभागों को आपसी समन्वय के साथ समानांतर रूप से काम करना होगा, ताकि विकास कार्यों के दौरान हाथियों के इन प्राकृतिक गलियारों में बाधा न आए. हिमांशु तिरूवा कहते है अगर समय रहते इन कॉरिडोर को सुरक्षित नहीं किया गया तो हाथी अपने पारंपरिक माइग्रेशन रूट छोड़ने के लिए मजबूर हो सकते है. और इंसानी आबादी की तरफ उनका रुख बढ़ सकता है,इसलिए हाथियों के सुरक्षित आवागमन और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए एलिफेंट कॉरिडोर का संरक्षण बेहद जरूरी है. वहीं वन्यजीव प्रेमी गणेश रावत हाथियों को जंगल के लिए बेहद महत्वपूर्ण प्रजाति मानते हैं, उनके मुताबिक हाथी केवल एक बड़ा वन्यजीव नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करने वाली प्रजाति है,जंगल में हाथियों की गतिविधियां वनस्पतियों के फैलाव और प्राकृतिक संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. उनका कहना है कि उत्तराखंड की पहचान सिर्फ बाघों से नहीं, बल्कि हाथियों समेत तमाम वन्यजीवों की समृद्ध जैव विविधता से भी है. इसलिए हाथियों के संरक्षण को व्यापक वन संरक्षण से जोड़कर देखना जरूरी है. वहीं मामले में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला के मुताबिक कॉर्बेट सहित पूरा क्षेत्र शिवालिक एलिफेंट रिजर्व का हिस्सा है और हाथियों के व्यापक आवागमन क्षेत्र से जुड़ा हुआ है.डॉ. बडोला के मुताबिक हाथी कॉरिडोर की पहचान को लेकर पहले से काम किया जा रहा है. वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया यानी WTI ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के सहयोग से अलग-अलग हाथी कॉरिडोर को चिन्हित करने को लेकर रिपोर्ट तैयार की है,इसमें कई महत्वपूर्ण और अलग-थलग पड़ चुके कॉरिडोर की पहचान की गई है. कॉर्बेट क्षेत्र में भी चिन्हित हाथी कॉरिडोर की मौजूदा स्थिति का आकलन किया जा रहा है, वन विभाग WTI और मंत्रालय के सहयोग से सर्वे और निगरानी का काम जारी है, ताकि जरूरत के अनुसार इनके सुधार और संरक्षण की दिशा में आगे कदम उठाए जा सकें. हाथी लंबी दूरी तक सफर करने वाला वन्यजीव है. अपने जीवनकाल में वह बड़े भू-भाग का इस्तेमाल करता है,इसलिए उसके लिए जंगल सिर्फ एक जगह नहीं बल्कि अलग-अलग वन क्षेत्रों को जोड़ने वाला पूरा प्राकृतिक परिदृश्य है. ऐसे में विश्व हाथी दिवस सिर्फ हाथियों की बढ़ती संख्या का जश्न मनाने का दिन नहीं, बल्कि उनके सुरक्षित भविष्य पर सोचने का अवसर भी है। जंगल बचेंगे, भोजन के प्राकृतिक स्रोत सुरक्षित रहेंगे और हाथी कॉरिडोर खुले रहेंगे, तभी गजराज और इंसान के बीच संतुलन कायम रह सकेगा. कॉर्बेट में बढ़ते हाथियों के आंकड़े उम्मीद जगाते हैं, लेकिन बदलते रास्ते चेतावनी भी दे रहे हैं, अब जरूरत है कि विकास और संरक्षण के बीच ऐसा संतुलन बनाया जाए, जिसमें जंगल भी सुरक्षित रहें और सदियों पुराने हाथी गलियारे भी.
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गुहागर-विजापुर महामार्ग पर गड्ढों का राज, चिपळूण-पाटण मार्ग पर 1235 गड्ढे

Ratnagiri, Maharashtra:रत्नागिरी : गुहागर-विजापूर महामार्गावर खड्ड्यांचे साम्राज्य; चिपळूण-पाटण मार्गावर १,२३५ खड्डे पट्टी घेऊन राष्ट्रवादीचे शौकत मुकादम उतरले रस्त्यावर; खड्ड्यांचा आकार मोजत प्रशासनाची पोलखोल अँकर गुहागर-विजापूर महामार्गावरील चिपळूण ते पाटण दरम्यान रस्त्याची अक्षरशः चाळण झाली आहे. दहा ते पंधरा फूट लांब-रुंद आणि सुमारे पाच इंच खोल खड्ड्यांमुळे अनेक ठिकाणी रस्ता गायब झाल्याचे चित्र आहे.. चिपळूण ते पाटण या मार्गावर तब्बल १ हजार २३५ खड्डे पडल्याचा दावा करण्यात आला असून, हे खड्डे वाहनचालकांसाठी धोकादायक ठरत आहेत.. दरम्यान, राष्ट्रवादी काँग्रेसचे प्रदेश सदस्य तथा चिपळूण पंचायत समितीचे माजी सभापती शौकत मुकादम यांनी चक्क पट्टी घेऊन रस्त्यावर उतरत खड्ड्यांचा आकार मोजला.. खड्ड्यांची लांबी-रुंदी मोजत त्यांनी रस्त्याच्या दुरवस्थेची पोलखोल केली.. त्यांच्या या पाहणीचा व्हिडिओ सध्या सोशल मीडियावर मोठ्या प्रमाणात व्हायरल होत असून,महामार्गाच्या दुरवस्थेवरून प्रशासनाच्या कारभारावर प्रश्नचिन्ह उपस्थित होत आहे..
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नारायणबगड़ में अवैध खनन पर प्रशासन ने सीज किए जेसीबी-ट्रैक्टर, डंपर चालान

Karnaprayag, Uttarakhand:नारायणबगड़ तहसील के पंती गधेरे में चल रहे अवैध खनन पर प्रशासन ने कड़ा शिकंजा कसते हुए मौके से अवैध खनन में शामिल एक जेसीबी और एक ट्रैक्टर को सीज कर दिया। इसके अतिरिक्त तहसील प्रशाषन ने अधिक सामग्री ले जा रहे एक डंपर का चालान भी काटا गया है। शिकायत का संज्ञान लेते हुए तहसीलदार नारायणबगड़ ने राजस्व टीम के साथ मौके पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान गधेरे में अवैध खनन में लगी एक जेसीबी और एक ट्रैक्टर को सीज कर दिया गया। वहीं, विनायक स्टोन क्रेशर से खनन सामग्री लेकर जा रहे एक अन्य डंपर के पास रवन्ने से अधिक माल पाए जाने पर ओवरलोडिंग में चालान काटा गया। मामले की जानकारी देते हुए तहसीलदार राजेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि ब्लॉक प्रमुख से प्राप्त शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है। मौके से वाहनों को सीज व चालान कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उपजिलाधिकारी थराली को भेज दी गई है。
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Habibul Hasan ने TMC से रिश्ते तोड़े, पर पँचायत अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं

Mal Bazar, West Bengal:দলের সঙ্গে সবরকম সম্পর্ক ছেদ করলেন মেটেলির জনপ্রতিনিধি তথা মেটেলি পঞ্চায়েত সমিতির সভাপতি হাবিবুল হাসান (বাবু)। তবে দল ছাড়লেও পঞ্চায়েত সমিতির সভাপতির সরকারি পদ থেকে ইস্তফা দেওয়ার বিষয়ে এখনও কোনো মন্তব্য করেননি তিনি। একটি ভিডিও বার্তায় হাবিবুল হাসান জানান, তিনি দলের विभिन्न পদে ছিলেন। সম্প্রতি শারীরিক ও পারিবারিক কারণে দলের সমস্ত পদ থেকে সরে দাঁড়ানোর সিদ্ধান্ত নিয়েছেন। তবে দলীয় পদ থেকে সরে যাওয়ার পাশাপাশি পঞ্চায়েত সমিতির সভাপতির পদে তিনি থাকবেন কি না, সে বিষয়ে কোনো বক্তব্য দেননি। দলের সঙ্গে সম্পর্ক ছেদ করলেও সরকারি পদ থেকে ইস্তফা না দেওয়ায় বিভিন্ন মহলে প্রশ্ন উঠতে শুরু করেছে। উল্লেখ্য, গতকাল বাগরাকোট গ্রাম পঞ্চায়েতের প্রধান পুনম লোহারও তৃণমূল কংগ্রেসের সঙ্গে সম্পর্ক ছেদ করেছেন। বাইট: ১) হাবিবুল হাসান, সভাপতি, মেটেলি পঞ্চায়েত সমিতি। ২) মজনুল হক, সদস্য, বিজেপির জলপাইগুড়ি জেলা কমিটি।
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रात के अंधेरे में पाइप फोड़कर पानी बहा, नगरपालिका ने मोबाइल कंपनी की मशीन जब्त

Mollar Chak, West Bengal:রাত্রের অন্ধকারে মাটির নিচ দিয়ে কেবল তার নিয়ে যাওয়াতে বিপত্তি। জলের পাইপ ফেটে রাস্তার উপর দিয়ে বইছে জল। পৌরসভার চেয়ারম্যানের নজরে আসতেই চেন চাবি লাগিয়ে সিল করে বাজেয়াপ্ত করা হল মেশিন। ঘটনাটি ঘটেছে মেদিনীপুর শহরের কলেজ রোড গোলকুঁয়ার চক এলাকায়। জানা গেছে একটি মোবাইল কোম্পানি গত কয়েকদিন ধরেই শহরের বিভিন্ন রাস্তার নিচ দিয়ে কেবল তার পাতছে। গোলকুঁয়ার চক এলাকায় একই রকমভাবে মাটির নিচে তার পাততে গিয়ে পানীয় জলের পাইপ ফুটো হয়ে যায়। জলের এতটাই ফোর্স যে ওই এলাকায় গোটা রাস্তা জলমগ্ন হয়ে পড়ে। সকালে হর ঘর তিরঙ্গা কর্মসূচিতে ওই রাস্তা দিয়ে যাওয়ার সময় বিষয়টি নজরে আসে মেদিনীপুর পৌরসভার চেয়ারম্যান সৌমেন খানের। সঙ্গে সঙ্গে তিনি নির্দেশ দেন ওই মোবাইল কোম্পানির মেশিন বাজেয়াপ্ত করার জন্য। এরপর পৌরসভার কর্মীরা এসে মেশিনটিকে চেন চাবি লাগিয়ে সিল করে বাজেয়াপ্ত করে। চেয়ারম্যান বলেন, পৌরসভাকে না জানিয়ে রাতের অন্ধকারে এই কাজ করেছে কোন এক মোবাইল কোম্পানি। আমরা বারবার বলেছি যদি কোথাও কাজ করতে হয় তাহলে পৌরসভা কে জানিয়ে যেন তারা কাজ করে সেক্ষত্রে পৌরসভার কর্মীরা সঙ্গে থেকে তাদেরকে সহায়তা করবে। এক্ষত্রে তা না করার জন্য জলের লাইন ফেটেছে ফলে ওই এলাকার মানুষ জল পাবে না। মানুষ জল না পেলে তো পৌরসভাকে দুষবে। ফলে ওই কোম্পানির মেশিন সিজ করার পাশাপাশি ক্ষতিপূরণ দেওয়ার নির্দেশ দেওয়া হবে।
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बाराकपुर विधानसभा क्षेत्र में चार दिन के लिए MLA कैंटीन की सुविधा

Barrackpore, West Bengal:নিরন্ন মানুষের মুখে পূজোর সময় অন্ন তুলে দিতে ব্যারাকপুর বিধানসভা অঞ্চলের বিভিন্ন পয়েন্টে হবে এম এল এ ক্যান্টিন এমনটাই জানালেন ব্যারাকপুরের বিধায়ক কৌস্তব বাগচী। পুজোর সময় আমরা অনেক জায়গায় রেস্টুরেন্টে বিভিন্ন জায়গায় খেতে যাই। কিন্তু নিরন্ন মানুষগুলো খাওয়া জোগাড় করতে অসুবিধার মধ্যে পারেন। তাই পূজোর চারটে দিন যাতে ব্যারাকপুর বিধানসভা অঞ্চলের কোন মানুষের খাওয়ার অসুবিধা না হয় তার জন্য এবার খুলতে চলেছে পূজোর চার দিনের জন্য এমএলএ ক্যান্টিন। ব্যারাকপুরের বিভিন্ন পয়েন্টে এই ক্যান্টিন খোলা হবে। মানুষ যাতে ওই চারটে দিন ভালো মন্দ খেতে পারে সেটাই মূল উদ্দেশ্য।
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