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भिण्ड में गोहद उप स्वास्थ्य केंद्र में खुले में हुई महिला की डिलीवरी
Mehgaon, Madhya Pradesh:भिण्ड के गोहद उप स्वास्थ्य केंद्र में एक महिला की खुले में डिलीवरी होने का मामला सामने आया है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर डिलीवरी के लिए पैसे मांगने का आरोप लगाया है। महिला ने अस्पताल परिसर में पेड़ के नीचे बच्चे को जन्म दिया। परिजनों का कहना है कि अस्पताल की लापरवाही के कारण ऐसा हुआ। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को निराधार बताया है। एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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कोशी नदी के जलस्तर बढ़ने से मुरादाबाद के दर्जन गांव बाढ़ से प्रभावित
Moradabad, Uttar Pradesh:कोशी नदी मे जल स्तर बढ़ने से मुरादाबाद के एक दर्जन गांव आये चपेट में, आधा दर्जन गांवों को जोड़ने वाले मुख्य मार्गो पर भी आया बाढ़ का पानी, मोक्ष धाम जाने के लिए भी बाढ़ के पानी से निकल कर जाने को मजबूर है इलाके के लोग, बाढ़ के पानी से निकल कर अर्थी ले जाते नजर आए है लोग, मुंडापाण्डे ब्लॉक क्षेत्र से बहने वाली कोशी नदी में कल से बढ़ा हुआ जल स्तर。0
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मीसा बंदी चंद्रशेखर उपाध्याय का निधन: गार्ड ऑफ ऑनर के साथ राजकीय सम्मान
Anuppur, Madhya Pradesh:1975 के आपातकाल के दौरान महीनों जेल में बंद रहने वाले कोतमा के मीसा बंदी लोकतंत्र सेनानी चंद्रशेखर उपाध्याय का इलाज के दौरान कल दुखद निधन हो गया। उनके शव यात्रा आज निज निवास से मुक्तिधाम को रवाना हुई। शव यात्रा में सैकड़ों की संख्या के साथ कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल एवं जैतपुर विधायक जय सिंह मरावी सहित कई भाजपा नेता व जनप्रतिनिधि शामिल हुए। कोतमा के मुक्तिधाम में चंद्रशेखर उपाध्याय को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ राजकीय सम्मान प्रदान करते हुए अंतिम विदाई दी गई। इस अवसर पर मंत्री दिलीप जायसवाल ने श्रद्धांजलि दी और कहा लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनका संघर्ष और योगदान सदैव स्मरण किया जाएगा। मध्यप्रदेश सरकार ने 8 अप्रैल 2016 को नियमों में संशोधन करके मीसाबंदियों को 'लोकतंत्र सेनानी' का दर्जा दिया था, और बाद में अगस्त 2018 में 'मध्यप्रदेश लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम, 2018' पारित किया गया। पहले 2008 में 'लोकनायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि' शुरू की गई थी。0
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बैतूल की चाकूबाजी के बाद युवक की मौत; हत्या या आत्महत्या की Police जांच
Betul, Madhya Pradesh:बैतूल जिले के आमला-सारणी मार्ग पर बोरीखुर्द गांव के पास सुबह एक युवक खून से लथपथ खेत में मिला। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने घायल को पहले सिविल अस्पताल आमला पहुँचाया, फिर उसे जिला अस्पताल बैतूल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक की पहचान दिलीप बगाहे के रूप में हुई है, जो एक दिन पहले सारणी थाना क्षेत्र में चाकूबाजी के मामले में फरार चल रहा था। गले और पेट पर धारदार हथियार के निशान पाए गए, और घटनास्थल के पास उसकी बाइक बरामद हुई। पुलिस हत्या और आत्महत्या दोनों पहलुओं को देखते हुए जांच कर रही है; प्रारंभिक जानकारी के अनुसार परिवारिक विवाद भी बताये जा रहे हैं, पर पुष्टि नहीं हुई है। पोस्टमार्टम और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।0
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30 दिन बाद भी हड़ताल: सफाई कर्मचारियों ने मुंडन से लिखित आदेश की मांग की
Hansi, Haryana:हानसी हांसी में 30 दिन की हड़ताल के बाद सफाई कर्मचारियों ने कराया मुंडन सरकार के खिलाफ फूटा आक्रोश, बोले लिखित आदेश दो, एक घंटे में खत्म कर देंगे हड़ताल हांसी। नगर परिषद हांसी के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल शुक्रवार को 30वें दिन भी जारी रही। मांगों को लेकर सरकार और कर्मचारियों के बीच चल रहे गतिरोध के बीच कर्मचारियों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाते हुए नगर परिषद परिसर में मुंडन करवाया। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए कहा कि केवल आश्वासन से आंदोलन खत्म नहीं होगा। मांगों पर लिखित आदेश जारी होने के बाद ही हड़ताल समाप्त की जाएगी। मुंडन करवाने वालों में सफाई कर्मचारी जगदीश, सुखदेव और फायरमैन सुभाष शामिल रहे। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से कच्चे कर्मचारी के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर पिछले एक महीने से हड़ताल पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि आंदोलन के बावजूद सरकार की ओर से अभी तक ठोस लिखित आदेश जारी नहीं किए गए हैं। सर्व कर्मचारी संघ ऑडिटर अशोक यादव ने कहा कि सरकार की ओर से कर्मचारियों की 12 मांगें माने जाने की बात कही जा रही है, लेकिन कर्मचारियों को मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित आदेश चाहिए। उन्होंने कहा कि कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने सहित अन्य मांगों पर सरकार यदि लिखित आदेश जारी कर देती है तो कर्मचारी महज एक घंटे के भीतर हड़ताल खत्म कर शहर की सफाई व्यवस्था संभाल लेंगे। सर्व कर्मचारी संघ ऑडिटर अशोक यादव ने आरोप लगाया कि हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मचारियों और आंदोलन का समर्थन करने वाले अन्य कर्मचारियों को सरकारी नोटिस दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नोटिस जारी कर कर्मचारियों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि वे किसी दबाव में पीछे नहीं हटेंगे और मांगें पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने मंत्री विपुल गोयल, मंत्री कृष्ण बेदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के फोटो हाथों में लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। नगर परिषद परिसर में बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे और सरकार से यूनियन प्रतिनिधियों के साथ तत्काल बातचीत कर समस्या का समाधान करने की मांग की। सर्व कर्मचारी संघ ऑडिटर अशोक यादव ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। कर्मचारियों ने कहा कि बारिश होने की स्थिति में जमा कूड़ा सड़ने से दुर्गंध और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। वही सर्व कर्मचारी संघ ऑडिटर अशोक यादव ने कहा कि ये भी नहीं चाहते कि हड़ताल के कारण शहरवासियों को परेशानी हो, लेकिन अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर वे लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। सफाई कर्मचारियों ने सरकार से अपील की कि वह हठ छोड़कर यूनियन प्रतिनिधियों से तत्काल बातचीत करे और सभी मांगों पर लिखित निर्णय जारी करे। कर्मचारियों ने दो टूक कहा कि लिखित आदेश मिलते ही एक घंटे में हड़ताल खत्म कर देंगे, लेकिन केवल आश्वासन पर आंदोलन वापस नहीं होगा।0
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खैरागढ़ के 300 साल पुराने बनबिहारी मंदिर की सुरक्षा के लिए स्थानीय आग्रह तेज
Khairgarh, Uttar Pradesh:खैरागढ़ में जन्माष्टमी के मौके पर भक्ति का रंग देखने को मिला, लेकिन इसी आस्था के बीच करीब 300 साल पुराना एक मंदिर आज अपने संरक्षण की बाट जोह रहा है। जमातपारा का श्री राधा-कृष्ण बनबिहारी मंदिर इतिहास, आस्था और खैरागढ़ रियासत की विरासत को अपने भीतर समेटे हुए है। कहते हैं कुछ मंदिर सिर्फ पूजा की जगह नहीं होते, बल्कि इतिहास की जीवंत निशानी होते हैं। खैरागढ़ का बनबिहारी मंदिर भी ऐसी ही विरासत है। मान्यता है कि करीब 300 साल पहले खैरागढ़ रियासत के संस्थापक प्रथम नागवंशी राजा खड़गसिंह ने अपनी कृष्ण उपासक पत्नी के लिए इस मंदिर का निर्माण कराया था। रियासत के जानकार भागवत शरण सिंह बताते हैं कि खैरागढ़ कभी खैर के घने जंगलों से घिरा था। इसी ‘वन’ और श्रीकृष्ण के ‘बिहारी’ नाम से मंदिर का नाम बनबिहारी पड़ा। मंदिर की कृष्ण प्रतिमाओं में नृत्य मुद्राएं आज भी आकर्षण का केंद्र हैं। कभी यहां साधु-संतों का जमावड़ा लगता और मालपुए का प्रसाद बंटता था। इसी से जमातपारा नाम पड़ने की मान्यता है। लेकिन वक्त के साथ मंदिर की जमीन सिकुड़ती गई। पुजारी के मुताबिक मंदिर की करीब 3-4 एकड़ जमीन पर कब्जे कर मकान बना लिए गए हैं। अब स्थानीय लोगों को इंतजार है कि इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण हो और परिसर में डोम का निर्माण हो, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस विरासत से जुड़ सकें।0
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भोपाल में अगले 48 घंटों में भारी बारिश: IMD के बाद CM ने कलेक्टरों को निर्देश
Bhopal, Madhya Pradesh:भोपाल अगले 48 घंटों में भारी बारिश का एलर्ट भोपाल में हो रही झमाझम बारिश IMD चेतावनी के बाद CM मोहन ने कलेक्टरों को दिए निर्देश मध्य प्रदेश में 28 से अधिक जिलों में बारिश का अलर्ट0
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जन्माष्टमी पर एसडीएम गोपाल शर्मा ने किया कान्हा गौशाला का निरीक्षण, गौपूजन कर व्यवस्थाओं का लिया जाय
Baheri, Uttar Pradesh:बहेड़ी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर शुक्रवार को नगर पालिका परिषद बहेड़ी स्थित कान्हा गौशाला में गौपूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान उपजिलाधिकारी गोपाल शर्मा ने गौशाला का निरीक्षण कर गोवंशों की स्थिति, चारे-पानी, स्वास्थ्य, साफ-सफाई एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं। कान्हा गौशाला में वर्तमान में कुल 190 गोवंश संरक्षित हैं, जिनमें 78 बछड़े, 9 बछिया, 55 गाय और 48 नंदी शामिल हैं। निरीक्षण के दौरान सभी गोवंश स्वस्थ अवस्था में मिले। गोवंशों के लिए प्रतिदिन हरा चारा और दाना उपलब्ध कराया जा रहा है। पेयजल के लिए सबमर्सिबल की व्यवस्था है, जबकि छोटे गोवंशों के लिए अलग से पानी की व्यवस्था की गई है। एसडीएम ने गौशाला में साफ-सफाई व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। गोवंशों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए चिकित्सकों द्वारा प्रतिदिन जांच की जाती है और आवश्यक दवाएं उपलब्ध हैं। दुर्घटनाग्रस्त गोवंशों के उपचार के लिए अलग कक्ष बनाया गया है। धूप से बचाव के लिए शेड तथा हरे चारे की व्यवस्था के लिए चार मशीनें उपलब्ध हैं। सुरक्षा की दृष्टि से आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में चौकीदार तैनात हैं और सीसीटीवी कैमरे भी क्रियाशील मिले। गोबर के उचित निस्तारण, बिजली के लिए मीटर तथा वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में सोलर पैनल की भी व्यवस्था है। गौशाला में पर्याप्त भूसा, दाना तथा केयरटेकरों के रहने के लिए कमरे उपलब्ध हैं। सभी संरक्षित गोवंशों की ईयरटैगिंग की गई है तथा छोटे-बड़े गोवंशों के लिए अलग-अलग चेंबर बनाए गए हैं। इस दौरान एसडीएम गोपाल शर्मा ने संबंधित कर्मचारियों को निर्देश दिए कि किसी भी गोवंश को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। साथ ही बिना अनुमति किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति को गौशाला में प्रवेश न देने के निर्देश दिए। गौशाला प्रभारी एवं स्वास्थ्य निरीक्षक अहमद हसन को निर्देशित किया गया कि किसी भी प्रकार की समस्या सामने आने पर तत्काल उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाए।0
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वृहद गौसंरक्षण केंद्र में श्रद्धा से मनाई जन्माष्टमी, तहसीलदार ने किया गौपूजन
Baheri, Uttar Pradesh:बहेड़ी। क्षेत्र के गांव बांसबोझ स्थित वृहद गौसंरक्षण केंद्र में शुक्रवार को जन्माष्टमी के अवसर पर धार्मिक एवं श्रद्धामय वातावरण में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान तहसीलदार भानू प्रताप ने गौपूजन कर विधिवत पूजा-अर्चना की और गौवंश को चारा खिलाया। गौपूजन के दौरान तहसीलदार ने गौसेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को विशेष स्थान प्राप्त है। गौसंरक्षण और गौसेवा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने केंद्र में गौवंश की देखभाल, चारे-पानी और साफ-सफाई की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने भी श्रद्धाभाव के साथ गौपूजन में सहभागिता की। जन्माष्टमी के पर्व पर गौसंरक्षण केंद्र में दिनभर धार्मिक माहौल बना रहा। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने गौसेवा एवं संरक्षण का संकल्प भी लिया।0
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दतिया के चुनकर फाटक के मकान से श्याम बाबू पाठक की संगीत विरासत आज भी गूंजती है
Datia, Madhya Pradesh:दतिया के चुनकर फाटक में आज भी मौजूद है संगीतकार श्याम बाबू पाठक की यादें, कृष्ण जन्माष्टमी पर फिर गूंजा उनका अमर गीत 1940-50 के दशक में हिंदी फिल्मों को संगीत देने वाले दतिया के श्याम बाबू पाठक ने ‘जन्माष्टमी’ समेत कई फिल्मों में दिया था संगीत दतिया। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर जब देशभर में भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में गीत-संगीत गूंज रहा है, वहीं दतिया के चुनकर फाटक स्थित एक पुराना मकान शहर की उस संगीत विरासत की याद दिलाता है, जिसका नाम हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर के चर्चित संगीतकारों में लिया जाता है। यह मकान संगीतकार एवं गायक श्याम बाबू पाठक का बताया जाता है। 1940 और 1950 के दशक में हिंदी फिल्मों में संगीत देने वाले श्याम बाबू पाठक ने कई फिल्मों के गीतों को अपनी धुनों से सजाया था। परिवार से मिली जानकारी के अनुसार श्याम बाबू पाठक का जन्म वर्ष 1908 में हुआ था और उनका निधन 23 नवंबर 1980 को मुंबई में हुआ। दतिया से मुंबई तक का उनका संगीत का सफर उस दौर की कहानी है, जब हिंदी सिनेमा अपने शुरुआती दौर में था और फिल्मों में संगीत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही थी。 चुनकर फाटक का मकान बना था संगीत साधना का केंद्र दतिया के चुनकर फाटक में स्थित श्याम बाबू पाठक के पुराने मकान से उनकी संगीत साधना की यादें जुड़ी हुई हैं। बताया जाता है कि वे यहां संगीत का अभ्यास किया करते थे। उस समय दतिया के पुराने संगीतकार भी उनका सम्मान करते थे。 श्याम बाबू पाठक केवल संगीतकार ही नहीं बल्कि गायक भी थे। उन्होंने फिल्मों में संगीत देने के साथ अपनी आवाज में भी गीत रिकॉर्ड किए। उनके संगीत से जुड़ी फिल्मों में शमशेरबाज, घर संसार, लाजवंती, डबल फेस, नमक, ब्लैक मार्केट, किस्मतवाली, तकदीरवाले, इम्तिहान, जीत, रेत महल, अच्छा जी, जन्माष्टमी, प्रीत का गीत, हमारी दुनिया, सपना और वनराज जैसी फिल्में शामिल हैं। बाद के दौर में बॉम्बे सेंट्रल और महबूबा जैसी फिल्मों से भी उनका नाम जुड़ता है。 हालांकि उपलब्ध फिल्म-संगीत स्रोतों में उनकी फिल्मोग्राफ़ी को लेकर कुछ अंतर दिखाई देते हैं, इसलिए उनके पूरे फिल्मी सफर का अंतिम निर्धारण आधिकारिक फिल्म रिकॉर्ड से करना अधिक उचित होगा。 ‘जन्माष्टमी’ और कृष्ण भक्ति से जुड़ी यादगार धुन श्याम बाबू पाठक के संगीत सफर में फिल्म ‘जन्माष्टमी’ (1950) विशेष महत्व रखती है। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर इस फिल्म का जिक्र इसलिए भी खास हो जाता है, क्योंकि फिल्म के गीत-संगीत से श्याम बाबू पाठक का नाम जुड़ा हुआ है। परिवार से मिली जानकारी के अनुसार फिल्म का गीत ‘मोहन हमारे मधुबन में तुम आया न करो, जादू भरी यह बांसुरी बजाया न करो’ उस दौर में काफी लोकप्रिय हुआ था। बताया जाता है कि कृष्ण जन्माष्टमी और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े आयोजनों में यह गीत प्रमुखता से बजाया जाता था। फिल्म जन्माष्टमी में गीता दत्त के अभिनय का भी उल्लेख मिलता है। उस समय फिल्में श्वेत-श्याम हुआ करती थीं, लेकिन गीत और संगीत के माध्यम से उनका प्रभाव दर्शकों तक गहराई से पहुंचता था。 ‘जीत’ का गीत भी रहा चर्चित श्याम बाबू पाठक के संगीत सफर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव फिल्म ‘जीत’ (1949) रही। इस फिल्म में उनके संगीत और गायन से जुड़ा गीत ‘काम करो भाई काम करो, तुम जग में अपना नाम करो’ सुरैया के साथ रिकॉर्ड हुआ था। उपलब्ध संगीत-स्रोतों में यह गीत श्याम बाबू पाठक के चर्चित गीतों में दर्ज है। फिल्म जीत के संगीत से अनिल बिस्वास का नाम भी जुड़ा हुआ है। इस तरह श्याम बाबू पाठक ने उस दौर के प्रमुख संगीतकारों के साथ भी काम किया। इंदिवर और हरिकृष्ण प्रेमी जैसे रचनाकारों की रचनाओं को दी धुन श्याम बाबू पाठक ने अपने संगीत सफर में उस दौर के गीतकारों और कवियों की रचानाओं को भी संगीतबद्ध किया। उनके साथ इंदिवर और हरिकृष्ण प्रेमी जैसे रचनाकारों के नाम जुड़े मिलते हैं। उनकी संगीत शैली उस दौर के फिल्म संगीत की उस परंपरा का हिस्सा थी, जिसमें शास्त्रीय संगीत, लोकधुन और भक्ति संगीत की छाप दिखाई देती थी। दो बेटियां थीं, छोटी बेटी बनीं फिल्म अभिनेत्री श्याम बाबू पाठक के परिवार से जुड़ी जानकारी के अनुसार उनकी दो बेटियां थीं। बड़ी बेटी का नाम मनोरमा पाठक और छोटी बेटी का नाम मधु पाठक था। मधु पाठक ने फिल्म अभिनेत्री के रूप में भी काम किया, लेकिन कम उम्र में ही उनका अचानक निधन हो गया। बड़ी बेटी मनोरमा पाठक वर्तमान में मुंबई में रहती हैं। इस परिवार की कहानी दतिया से मुंबई तक पहुंची उस पीढ़ी की याद दिलाती है, जिसने हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर में अपनी प्रतिभा के जरिए पहचान बनाई। महेश मिश्रा से थी गहरी मित्रता श्याम बाबू पाठक के दतिया से जुड़े संबंधों में संगीतकार स्वर्गीय महेश मिश्रा की मित्रता भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। महेश मिश्रा के पुत्र विनोद मिश्रा, जो संगीतकार और संगीत इतिहास के जानकार हैं, ने श्याम बाबू पाठक के पुराने मकान और उनके परिवार से जुड़ी कई जानकारियां साझा की हैं。 बाइट — श्री विनोद कुमार मिश्रा, संगीतकार एवं संगीत इतिहासविद् विनोद मिश्रा के अनुसार श्याम बाबू पाठक दतिया की संगीत परंपरा से जुड़े महत्वपूर्ण नाम थे और चुनकर फाटक स्थित उनका पुराना मकान आज भी उनके संगीत सफर की स्मृतियों को अपने भीतर समेटे हुए है。 दतिया की संगीत विरासत का अनमोल अध्याय आज हिंदी सिनेमा के संगीत की चर्चा होते ही बड़े और लोकप्रिय संगीतकारों के नाम सामने आते हैं, लेकिन सिनेमा के शुरुआती दौर में ऐसे अनेक संगीतकार रहे जिन्होंने फिल्मों को अपनी धुनें दीं और धीरे-धीरे इतिहास के पन्नों में कहीं पीछे छूट गए। श्याम बाबू पाठक भी उन्हीं नामों में से एक हैं。 दतिया के लिए यह गौरव की बात है कि हिंदी फिल्म संगीत के उस शुरुआती दौर से जुड़ा एक नाम इसी शहर की गलियों और एक पुराने मकान से जुड़ा हुआ है। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन जब श्रीकृष्ण की बांसुरी और भक्ति गीतों की धुन सुनाई देती है, तब श्याम बाबू पाठक की संगीत साधना और फिल्म जन्माष्टमी से जुड़ा उनका योगदान दतिया की सांस्कृतिक विरासत को एक अलग पहचान देता है。 आज जरूरत इस बात की है कि चुनकर फाटक स्थित इस ऐतिहासिक मकान और श्याम बाबू पाठक से जुड़ी स्मृतियों को संरक्षित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां दतिया के इस भूले-बिसरे संगीतकार की कहानी को जान सकें। बाइट- विनोद कुमार मिश्रा संगीतकार0
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दिल्ली में जन्माष्टमी तैयारी के बीच तेज बारिश ने लोगों को परेशान किया
एंकर: राजधानी दिल्ली में अचानक तेज बारिश के कारण जन्माष्टमी की तैयारी कर रहे लोग प्रभावित हुए. दक्षिणी दिल्ली में तेज बारिश देर तक चली, जिससे सड़क पर पानी भर गया. तस्वीरों में दिख रहा है कि लोग जन्माष्टमी की तैयारी कर रहे थे और बारिश से उनका नुकसान हुआ. विजय कुमार की रिपोर्ट. खबर पर वॉकथ्रू.0
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96 वर्षीय धरतीपकड़ नागरमल बाजोरिया का निधन; चुनावी इतिहास का एक अध्याय समाप्त
Naya Chak, Bihar:भागलपुर के चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता और देशभर में धर्तीपकड़ के नाम से मशहूर नागरमल बाजोरिया का 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गुरुवार को पटना में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ ही भारतीय चुनावी इतिहास का एक ऐसा अनोखा अध्याय समाप्त हो गया, जिसने हार को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।नागरमल बाजोरिया का नाम चुनावी राजनीति में एक अलग पहचान रखता था। पंचायत से लेकर देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति तक, उन्होंने 280 से अधिक बार चुनावी मैदान में उतरकर अपनी दावेदारी पेश की। बताया जाता है कि उन्होंने करीब 252 बार चुनाव के लिए नामांकन किया और हर बार हार का सामना करना पड़ा, लेकिन किसी भी हार ने उनके हौसले को कम नहीं किया। ‘धरतीपकड़’ ने देश के कई बड़े नेताओं के खिलाफ भी चुनाव लड़ा। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ रायबरेली और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ अमेठा से चुनावी मैदान में ताल ठोकी थी। वर्ष 2012 में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी नामांकन दाखिल कर अपनी दावेदारी पेश की थी। उनकी पहचान सिर्फ चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं थी। भागलपुर में जब पेयजल संकट गहराया था, तब उन्होंने अपने निजी खर्च से कई सार्वजनिक स्थानों पर चापाकल लगवाए थे। जमीन से पानी निकालने और आम लोगों की मदद करने की इस पहल के कारण शहरवासियों ने उन्हें प्यार से ‘धरतीपकड़’ कहना शुरू किया। धीरे-धीरे यही नाम उनकी स्थायी पहचान बन गया और देशभर में लोग उन्हें इसी नाम से जानने लगे। नागरमल बाजोरिया की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि चुनाव में लगातार हार मिलने के बावजूद उन्होंने कभी चुनावी मैदान से दूरी नहीं बनाई। जमानत जब्त होने के बावजूद उनका हौसला नहीं टूटा। उनके लिए चुनाव लड़ना सिर्फ जीत-हार का मामला नहीं था, बल्कि अपनी बात और समाज की समस्याओं को लोगों तक पहुंचाने का माध्यम भी था। नागरमल बाजोरिया का पार्थिव शरीर गुरुवार रात भागलपुर स्थित उनके पैतृक आवास एमपी त्रिवेदी निवास लाया जाएगा। शुक्रवार सुबह आठ बजे भागलपुर में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। अपने पीछे वे चार पुत्र, एक बेटी सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। 280 से अधिक चुनाव लड़ने वाले ‘धरतीपकड़’ भले ही कभी कोई चुनाव नहीं जीत सके, लेकिन उनकी पहचान कभी हार न मानने वाले इंसान की रही। जीवनभर चुनावी मैदान में डटे रहने वाले नागरमल बाजोरिया के कदम आखिरकार 96 वर्ष की उम्र में थम गए।0
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तेजस्वी यादव ने बिदुपुर स्थिति की समीक्षा हेतु सरकार को जानकारी देने का संकेत दिया
Noida, Uttar Pradesh:पटना: बिहार विधानसभा नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा, "हम बिदुपुर जा रहे हैं। पिछले हफ्ते भी राघोपुर में भारी कटाव की स्थिति उत्पन्न हुई है। हम उपमुख्यमंत्री और कई अधिकारियों से भी बात की है। हम जाकर स्थिति का जायजा लेंगे और उसी अनुसार आपदा विभाग और सरकार के लोगों को जानकारी देंगे। हम चाहते हैं कि लोगों को राहत मिले।"0
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अस्मिता डे ने ग्लासगो जूडो में इतिहास रचा, पुलिस में डीएसपी बनने की राह
Noida, Uttar Pradesh:ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए महिला वर्ग जूडो में पहली बार गोल्ड मेडल जीतने वाली अस्मिता डे ने जी मीडिया से एक्सक्लूसिव बातचीत की। यूपी पुलिस और उत्तर प्रदेश सरकार ने उनकी बहुत मदद की है मुझे अपनी ट्रेनिंग के लिए बहुत सारे पैसे और इक्विपमेंट्स की जरूरत थी जो मैंने यूपी पुलिस की नौकरी करके जो सैलरी पाई उससे पूरा किया सीएम योगी आदित्यनाथ का भी धन्यवाद देना चाहती हूं जिनकी योजना के चलते अब मैं यूपी पुलिस में डीएसपी बनने जा रही हूं सिपाही से पुलिस में शुरुआत की थी फिर सब इंस्पेक्टर बनी और अब डीएसपी बनूंगी। हाल ही में मेरे पिताजी का देहांत हो गया उन्होंने मेरा बहुत सपोर्ट किया था वह चाहते थे मैं एक दिन देश के लिए मेडल जीतू मेडल मिलते ही मैं भावुक हो गई और इसको अपने पिताजी को डेडिकेट करना चाहती हूं। अभी तो यह शुरुआत है आने वाले टूर्नामेंट में भारत के लिए जूडो में और भी ज्यादा मेडल लाने की तैयारी है। हमारे पास टैलेंट की कमी नहीं है अच्छी ट्रेनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर से भारत ओलंपिक में भी मेडल ला सकता है। टीटी - अस्मिता डे आज लखनऊ में जूडो एसोसिएशन की तरफ से अस्मिता डे को सम्मानित किया गया जिसमें मौजूद सीएम योगी के मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी ने कहा कि सरकार की योजना के तहत खिलाड़ियों को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है और अब अस्मिता डे को डीएसपी का लेटर भी जल्द जारी होने जा रहा है। प्रदेश के तमाम जिलों में नए स्टेडियम बनाने की योजना भी तैयार है बनारस के क्रिकेट स्टेडियम का उद्घाटन भी जल्द होने जा रहा है। बाइट - अवनीश अवस्थी।0
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ISKCON चांदनी चौक में जन्माष्टमी उत्सव की खास व्यवस्था, श्रद्धालु दर्शन को उमड़े
New Delhi, Delhi:भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है को चांदनी चौक स्थित इस्कॉन मंदिर में भी भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव को लेकर विशेष व्यवस्था की गई है बारिश के बावजूद भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्री कृष्णा के दर्शन करने के लिए पहुंच रहे हैं और आनंद ले रहे हैं जैसा-जैसे भगवान श्री कृष्ण का जन्म का समय अर्थात प्रकट उत्सव का समय नजदीक श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जाएगी श्रद्धालु भक्तजन आनंद उठा रहे हैं वहीं मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था की गई है मंदिर प्रशासन की तरफ से महा आरती का भी आयोजन किया जाएगा साथ ही जब भगवान श्री कृष्ण का प्रकट उत्सव होगा तब बाकायदा उनके लिए केक भी काटा जाएगा और यह केक पूर्णतया मंदिर में ही बनाया गया है0
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जन्माष्टमी पर कुरुक्षेत्र के मंदिरों में भव्य सजावट, भक्तों की उमड़ती भीड़
Kurukshetra, Haryana:कुरुक्षेत्र :- देशभर के मंदिरों में आज जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है, ऐसे में जन्माष्टमी के पर्व पर धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के मंदिरों को भी खूब सजाया गया है। मंदिरों में दूर दराज से पहुंचे श्रद्धालु नन्हें कान्हा को झूले झुला रहे है, वहीं कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक बिरला मंदिर में भी भक्तों का ताँता लगा हुआ है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के तौर पर मनाया जाने वाल जन्माष्टमी का पर्व इस बार बेहद ही खास तरीके से मनाया जा रहा है, इसके लिए मंदिर को खूब सजाया गया है। यह त्यौहार भाद्रपद माह के दिन मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था। इसी मान्यता के चलते हर साल जन्माष्टमी का पर्व बड़े ही श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि करीब पांच हजार वर्ष पहले भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा में जन्म लेकर अधर्म के अंत और धर्म की स्थापना का संदेश दिया था।0
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