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Devendra RangireDevendra RangireFollow13 Sept 2024, 03:34 pm
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अनूपपुर में शिक्षक कमी से पढ़ाई प्रभावित: सरकारी महाविद्यालयों पर सवाल

Anuppur, Madhya Pradesh:अनूपपुर जिले में उच्च शिक्षा की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। शासकीय महाविद्यालय कोतमा और बिजुरी में कई विषयों के नियमित शिक्षक तो दूर, अतिथि विद्वान भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में छात्रों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है और महाविद्यालय की शिक्षा मात्र दिखावा साबित हो रही है। कोतमा और बिजुरी कॉलेज में कई विषय के पद लंबे समय से खाली हैं। हैरानी की बात ये है कि जहां नियमित शिक्षक नहीं हैं, वहां अतिथि विद्वान की भी व्यवस्था नहीं की गई है। छात्रों का कहना है कि बिना शिक्षक के आखिर पढ़ाई कैसे हो? जब क्लास ही नहीं लग रही, तो कोर्स समय पर पूरा होना लगभग नामुमкін हो गया है। परीक्षा नजदीक आने के बावजूद कई विषयों की पढ़ाई अधूरी है, जिससे छात्रों के भविष्य पर सीधा असर पड़ रहा है। एक तरफ सरकार शिक्षा के क्षेत्र में बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शिक्षक की कमी ने पूरी व्यवस्था को चरमराकर रख दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है—जब शिक्षक ही नहीं हैं, तो छात्रों का सिलेबस कैसे पूरा होगा? और कब तक छात्र इस अव्यवस्था का खामियाजा भुगतते रहेंगे? क्या जिम्मेदार अधिकारी समय रहते व्यवस्था सुधारेंगे, या फिर छात्रों का भविष्य यूं ही दांव पर लगा रहेगा?
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मंदसौर के पुलिसकर्मी की गर्मी में बच्चों को ठंडा पिलाने की पहल वायरल

Mandsaur, Madhya Pradesh:मध्य प्रदेश के मंदसौर के पुलिसकर्मी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में पुलिसकर्मी मोटरसाइकल सवार एक दंपति को गर्मी से परेशान बच्चों को ठंडा पिलाने के लिए पैसे देते हुए दिखाई दे रहा है. सोशल मीडिया पर इस पुलिस कर्मी की पहल की लोग तारीफ करते दिख रहे हैं. वीडियो में देखा जा सकता है कैसे पुलिस चेकिंग को देखकर अपने दो बच्चों के साथ जा रहे दंपति डर कर रुक जाते हैं; पति चेकिंग पॉइंट से कुछ दूर पहले मोटरसाइकिल को रोक देता है और अपनी पत्नी और एक बच्चे को उतार देता है लेकिन पुलिसकर्मी उन्हें देख लेता है और उन्हें डरने की सलाह देते हुए आगे बुलाता है. डरते सहमते पति-पत्नी अपने बच्चों के साथ जब मौके पर पहुंचते हैं तो पुलिस कर्मी कहता है कि डरने की जरूरत नहीं है; पुलिसकर्मी बच्चों के साथ जा रहे किसी परिवार को बेवजह परेशान नहीं करते हैं, आप डरिए मत. इसके बाद वह बताता है कि तेज गर्मी है; अपनी जेब से पर्स निकलता है और कुछ पैसे पति के हाथ में रखता है ताकि बच्चों को कुछ ठंडा पिला दें, बहुत गर्मी पड़ रही है. आम तौर पर पुलिस की इमेज यही मानी जाती है कि चेकिंग के दौरान चालान के नाम पर पैसों की वसूली की जाती है, लेकिन इस पुलिसकर्मी की पहल की लोग तारीफ कर रहे हैं. हालाँकि कुछ लोग यह भी कमेंट कर रहे हैं कि बिना हेलमेट के जा रहे इन दंपति को पुलिस कर्मी द्वारा समझाइश दी जानी थी, कम से कम कानून का इतना ज्ञान तो देना ही था कि अगली बार यह लोग बिना हेलमेट के घर से ना निकले और यातायात के नियमों का पालन करें. वहीं अधिकतर यूजर्स इस पुलिसकर्मी की पहल की तारीफ कर रहे हैं और लिख रहे हैं कि इस तरह के पुलिसकर्मी अगर और ज्यादा होते हैं तो पुलिस की इमेज काफी सुधर जाएगी और लोगों के मन से पुलिस का मिथ्या भय दूर होगा.
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ज़िला अस्पताल में BMO डॉ. रिचा मिश्रा हटते ही हड़कंप, गणेश भनारिया नया BMO

Narsinghpur, Madhya Pradesh:एंकर-नरसिंहपुर जिला अस्पताल के स्वास्थ्य महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब अचानक ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर BMO डॉ. रिचा मिश्रा को उनके पद से मुक्त कर दिया गया। इस आकस्मिक निर्णय ने विभाग के भीतर कई सवाल खड़े कर दिए हैं और कर्मचारियों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म है। डॉ. रिचा मिश्रा बीते एक वर्ष से जिला अस्पताल में बीएमओ के रूप में अपनी सेवाएं दे रही थीं। अपनी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में रहने वाली डॉ. मिश्रा ने इस कार्रवाई पर गहरी नाराजगी और हैरानी जताई है। उन्होंने बुधवार मीडिया से चर्चा के दौरान कहा, "यह निर्णय मेरे लिए भी अत्यंत आश्चर्यजनक है। पिछले एक साल से मैं निष्ठापूर्वक अपनी सेवाएं दे रही थी, लेकिन बिना किसी ठोस कारण या गलती के अचानक हटा दिया जाना समझ से परे है। फिलहाल, इस फेरबदल को लेकर एक आदेश जारी किया गया जिसने डॉक्टर गणेश भनारिया को BMO बनाया गया हैं। बिना किसी पूर्व सूचना के हुई इस कार्रवाई ने अस्पताल की आंतरिक राजनीति और प्रशासनिक तालमेल को कठघरे में खड़ा कर दिया है।और अब जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के इस आदेश पर सवाल खड़े होने लगे है की आखिर ऐसी क्या वजह थी कि स्वास्थ्य अधिकारी को जल्दबाजी में आदेश जारी करना पड़ा।
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भिंड शादी मामला: मंत्री पर धोखाधड़ी के आरोप, करोड़ों का घोटाला संकेत

Bhind, Madhya Pradesh:शादी में सत्ता की साख पर सवाल, हमारा पैसा लौटाओ, फिर दावत खाओ! सत्ता का नशा जब उतरता है, तो जनता हिसाब मांगती है... और जब हिसाब करोड़ों का हो, तो फिर न जगह देखी जाती है, न मौका। तस्वीरें मध्य प्रदेश के भिंड की हैं। जहाँ एक शादी समारोह अचानक रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। पूर्व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री और बीज निगम के उपाध्यक्ष राजकुमार कुशवाहा भिण्ड में शादी में मेहमान बनकर पहुंचे, महिलाओं की एक फौज ने उन्हें बंधक जैसा बना लिया। आरोप है— प्लॉट के नाम पर धोखाधड़ी, करोड़ों की देनदारी और बाउंस होते चेक। आज सवाल ये है कि क्या सफेदपोश चोला पहनकर जनता की गाढ़ी कमाई को डकार जाना इतना आसान है? ये तस्वीरें गवाही दें उस गुस्से की, जो पिछले सालों से दबा हुआ था। करीब एक दर्जन महिलाएं, जिनकी आँखों में आंसू और जुबान पर अपना हक था, उन्होंने पूर्व मंत्री को घेर लिया。 • आरोप नंबर 1: प्लॉट दिलाने के नाम पर लाखों रुपये लिए गए। • आरोप नंबर 2: एक ही प्लॉट की कई-कई रजिस्ट्रियां कर दी गईं। • आरोप नंबर 3: जब पैसे वापस मांगे, तो हाथ में थमा दिए गए बाउंस चेक。 मौके पर हाई-वोल्टेज ड्रामा चला। आरोप है कि जब महिलाओं ने मंत्री का मोबाइल छीनने की कोशिश तक की। धक्का-मुक्की हुई और एक घंटे तक मंत्री जी पसीने-पसीने होते रहे। अंत में खाकी वर्दी को आना पड़ा। पुलिस ने ढाल बनकर मंत्री जी को उस आक्रोश से बाहर निकाला, लेकिन उन महिलाओं के सवालों का क्या? इस पूरे मामले ने व्यवस्था पर तीन बड़े सवाल दाग दिए हैं: 1. पहला: क्या सत्ता में रहते हुए कॉलोनाइजिंग का ये खेल रसूख के दम पर खेला गया? 2. दूसरा: अगर चेक बाउंस के मामले और करोड़ों की देनदारी है, तो अब तक पुलिसिया कार्रवाई ठंडी क्यों है? 3. तीसरा: क्या आम आदमी को अपना हक मांगने के लिए अब नेताओं की निजी शादियों में घुसना पड़ेगा? वीडियो वायरल है, मंत्री जी की किरकिरी हो रही है और जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है। मंत्री जी भले ही पुलिस के घेरे में सुरक्षित निकल गए हों, लेकिन जनता की अदालत से निकलना अब उनके लिए मुश्किल होगा। अब देखना ये है कि क्या प्रशासन इन पीड़ितों को उनका पैसा वापस दिलाएगा, या फिर माननीय का रसूख एक बार फिर इंसाफ पर भारी पड़ेगा?
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मुरादाबाद में मदरसे की जमीन पर एमडीए कब्जा: कोर्ट ने पक्ष में फैसला

Moradabad, Uttar Pradesh:मुरादाबाद में जामिया अरबिया हयातूल उलूम मदरसा के खिलाफ योगी सरकार की बड़ी कार्यवाही, मदरसे की 3 हेक्टेयर भूमि पर हुआ एमडीए काबिज, पिछले लगभग ढाई दशक से हाई कोर्ट में चल रहा था मामला जो कि अब ढाई दशक बाद हाई कोर्ट की तरफ से मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के पक्ष में दिया गया फैसला, 1980 में मदरसे की रखी गई थी नींव लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार कॉंग्रेस के दौरन मदरसा आया था विवादों में, एमडीए हुआ जामिया अरबिया हयातूल उलूम मदरसे की जमीन पर काबिज मदरसे की जमीन पर बुलडोजर कार्यवाही के बाद बंद किये जा रहे मदरसे के गेट, एमडीए सचिव पंकज वर्मा के अनुसार मदरसे की भूमि जो की गाटा संख्या 498 एवं 499 में है पर वर्ष 2000 में एमडीए को कब्जा प्राप्त हो चुका था, 2004 में मदरसा कमेटी ने हाई कोर्ट में अपील की थी लेकिन 2005 में उनकी ये याचिका खारिज हो गयी थी...... जिसके बाद एमडीए के सामने मदरसा कमेटी द्वारा अनुमोदन रखा गया लेकिन 2007 में वो निरस्त हो गया था, जिसके बाद मदरसा कमेटी 2007 मे फिर हाई कोर्ट गयी लेकिन 2008 मे उनकी याचिका भी हाईकोर्ट से निरस्त कर दी गयी थी जिसके बाद तुरंत शासन स्तर पर गए लेकिन वहां भी कोई कामयाबी नहीं मिली, इसी कों लेकर एक बार फिर 2016 ने मदरसा कमेटी हाई कोर्ट पहुंची जिसपर अब उच्च न्यायलय ने फैसला सुनाते हुए कहा की उक्त गाटा संख्याओ की अर्जन विधिक है जिसकी सारी प्रक्रिया भी पूर्ण हो चुकी है....कोर्ट ने ये भी पुष्टि की कि ये भूमि प्राधिकरण कि स्वामित्व की भूमि है। मुरादाबाद के मझोला थाना क्षेत्र के दिल्ली रोड स्तिथ मंगूपुरा का पूरा मामला।
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जालौन: तहसील परिसर में बंदरों का आतंक, अधिवक्ताओं ने SDM से कार्रवाई की मांग

Jalaun, Uttar Pradesh:जालौन के कोच तहसील परिसर, कोतवाली और पार्कों में इन दिनों बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे अधिवक्ताओं, कर्मचारियों तथा आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या को लेकर तहसील कोँच में कार्यरत अधिवक्ताओं ने बुधवार को एसडीएम को शिकायती पत्र देकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। अधिवक्ताओं ने बताया कि तहसील परिसर में बंदरों के झुंड दिनभर इधर-उधर घूमते रहते हैं और न्यायिक कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। यदि कोई अधिवक्ता थोड़ी देर के लिए न्यायालय कक्ष, पानी पीने या अन्य कार्य से बाहर जाता है तो बंदर उनकी फाइलें, दस्तावेज और जरूरी कागजात उठा ले जाते हैं, जिससे कार्य प्रभावित हो रहा है। अधिवक्ताओं ने यह भी बताया कि बंदरों का हमला कई बार जानलेवा साबित हो सकता है। पिछले वर्ष भी तीन से चार अधिवक्ताओं को बंदरों ने काट लिया था। हाल ही में दिनांक 25 अप्रैल 2026 को बंदरों ने संदीप कुमार श्रीवास्तव एडवोकेट को काटकर घायल कर दिया। इसके अतिरिक्त बंदर परिसर में खड़ी मोटरसाइकिलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। वे गाड़ियों की सीटें फाड़ देते हैं तथा बैग और अन्य सामान भी क्षतिग्रस्त कर देते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों का सामान भी बंदर छीन ले जाते हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अधिवक्ताओं ने उपजिलाधिकारी से मांग की है कि वन विभाग की सहायता से बंदरों को शीघ्र पकड़वाकर तहसील परिसर को इस समस्या से मुक्त कराया जाए, ताकि सभी लोग सुरक्षित वातावरण में अपना कार्य कर सकें।
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केदारनाथ यात्रा में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत, मरीज का हेली एम्बुलेंस से एयरलिफ्ट

Noida, Uttar Pradesh:केदारनाथ धाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। यात्रा मार्ग से लेकर धाम क्षेत्र तक चिकित्सा, रेस्क्यू और आपात सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा सके। इसी क्रम में एक गंभीर हृदय रोगी श्रद्धालु को समय रहते हेली एम्बुलेंस के जरिए एयरलिफ्ट कर हायर सेंटर भेजा गया। जानकारी के अनुसार नारायणकोटी स्थित अस्पताल में भर्ती 47 वर्षीय दिवाकर शर्मा की तबीयत अचानक बिगड़ने पर चिकित्सकों ने उन्हें रेफर किया। विशेषज्ञों की सलाह और “फिट फॉर एयर ट्रैवल” घोषित किए जाने के बाद गुप्तकाशी से दोपहर 2:28 बजे हेली एम्बुलेंस के माध्यम से मरीज को सुरक्षित एयरलिफ्ट किया गया। जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग विशाल मिश्रा ने बताया कि केदारनाथ यात्रा के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह सक्रिय हैं। दिन के समय गंभीर मरीजों को हेली सेवाओं के माध्यम से हायर सेंटर भेजा जाता है, जबकि रात्रि में भी वैकल्पिक व्यवस्थाओं के जरिए तत्काल उपचार और रेस्क्यू सुनिश्चित किया जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी श्रद्धालु को स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर चिकित्सा विभाग, एसडीआरएफ और यात्रा मित्र टीमों द्वारा त्वरित कार्रवाई की जाती है। जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि हर श्रद्धालु को सुरक्षित और सुगम यात्रा अनुभव मिल सके।
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