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झारखंड की नक्सली महिला ने आत्मसमर्पण किया, उड़ीसा सरेंडर नीति ने प्रेरणा दी
APAnand Priyadarshi
Mar 30, 2026 09:37:31
Chaibasa, Jharkhand
झारखण्ड की 19 वर्षीय महिला नक्सली ने किया आत्मसमर्पण, संगठन से मोहभंग के बाद उठाया बड़ा कदम
पुलिस को बताया - नक्सली संगठन के मानसिक और शारीरिक शोषण से थी परेशान
उड़ीसा के राउरकेला में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले की रहने वाली 19 वर्षीय महिला नक्सली मोगड़ी होनहागा ने সোমবার को राउरकेला पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। वह सीपीआई (माओवादी) संगठन से जुड़ी हुई थी और लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभा रही थी। खास बात यह है कि झारखंड की निवासी होने के बावजूद उसने पड़ोसी राज्य उड़ीसा में सरेंडर किया, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है।
मोगड़ी होनहागा पश्चिम सिंहभूम के छोटानागरा थाना क्षेत्र अंतर्गत मरंग पंगा गांव की निवासी है। वह कुख्यात माओवादी नेता अनमोल उर्फ सुशांत के संपर्क में आकर संगठन से जुड़ी थी। इसके बाद वह सारंडा क्षेत्र में सक्रिय हो गई और होलुंगहुली गांव में नक्सली भर्ती अभियान में सहयोग करने के साथ-साथ नए सदस्यों को ट्रेनिंग देने का काम कर रही थी。
बताया जाता है कि इसी साल 21 जनवरी को कुमडीह जंगल में हुए मुठभेड़ में भी वह शामिल थी। हालांकि, उस दौरान वह अन्य नक्सलियों के साथ मौके से फरार होने में सफल रही थी और तब से लगातार जंगल में छिपकर रह रही थी। इसके अलावा सुंदरगढ़ जिले के बांको पत्थर खदान में हुए विस्फोटक लूट कांड में भी उसकी संलिप्तता सामने आई है, जहां वह अनमोल के साथ सक्रिय थी।
आत्मसमर्पण के बाद मोगड़ी ने संगठन के भीतर की हकीकत भी उजागर की। उसने बताया कि माओवादी संगठन में उसे शारीरिक और मानसिक शोषण का सामना करना पड़ रहा था, जिससे वह बेहद निराश हो गई थी। इसी बीच उसे उड़ीसा सरकार की सरेंडर पॉलिसी के बारे में जानकारी मिली, जिससे प्रभावित होकर उसने संगठन छोड़ने का निर्णय लिया और गुप्त सूत्रों के जरिए राउरकेला पुलिस से संपर्क साधा।
इस पूरे मामले पर डीआईजी बृजेश कुमार राय ने कहा कि राज्य सरकार की सरेंडर नीति के तहत मिलने वाली सभी सुविधाएं और अनुकंपा सहायता मोगड़ी को उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जो भी नक्सली मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
यह आत्मसमर्पण ऐसे समय में हुआ है जब सारंडा और आसपास के इलाकों में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान तेज़ हो चुका है। ऐसे में मोगड़ी का सरेंडर न केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी कामयाबी है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि संगठन के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और युवा सदस्य अब मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुन रहे हैं।
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