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आईआईटी-ISM धनबाद: 2026-27 से क्रिटिकल मिनरल्स में एमटेक समेत तीन कोर्स शुरू
NMNitesh Mishra
Feb 26, 2026 11:50:06
Dhanbad, Jharkhand
देश में इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी की बढ़ती मांग के बीच अब क्रिटिकल मिनरल्स की अहमियत तेजी से बढ़ रही है। भविष्य की इन्ही जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आईआईटी (आइएसएम) धनबाद ने 2026-27 सत्र से एमटेक स्तर पर क्रिटिकल मिनरल्स समेत तीन नए कोर्स शुरू करने का फैसला लिया है। हर कोर्स में करीब 20 सीटें होंगी। सीनेट में अप्रूवल के बाद जल्द ही यह कोर्स शुरू हो जाएगा। संस्थान में इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए पहले ही सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जा चुकी है, जिसका उद्घाटन हाल ही में केंद्रीय कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी ने किया था। आईआईटी आईएसएम का मानना है कि लिथियम, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों पर विशेषज्ञ तैयार करना समय की जरूरत है। इस पहल से न सिर्फ छात्रों के लिए नए करियर अवसर खुलेेंगे, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और देश की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आईआईटी आईएसएम के डिप्टी डायरेक्टर प्रो. धीरज कुमार ने बताया कि माइनिंग विभाग के क्षेत्र में संस्थान का 100 साल से अधिक का इतिहास रहा है। पहले जहां पारंपरिक माइनिंग और मिनरल्स की बात होती थी, वहीं अब सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी क्रिटिकल मिनरल्स की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ऊर्जा क्षेत्र और हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए बड़ी संख्या में क्रिटिकल मिनिरल्स के विशेषज्ञों की जरूरत पड़ेगी। इसी को ध्यान में रखते हुए यहां एमटेक कोर्स शुरू किया जा रहा है। सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी की जाएगी। इस कोर्स में यूरोपीय विश्वविद्यालयों के साथ शैक्षणिक सहयोग की भी योजना है। साथ ही मेटलिक माइनिंग से जुड़ी इंडस्ट्री को भी जोड़ा जाएगा, ताकि छात्र एक साल संस्थान में थ्योरी और एक साल इंडस्ट्री में प्रैक्टिकल का प्रशिक्षण ले सकें। माइनिंग के दौरान निकलने वाले डंप में मौजूद क्रिटिकल मिनरल्स पर भी शोध कार्य जारी है। संस्थान का मानना है कि इंडस्ट्री और अकादमिक सहयोग से इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर विस्तार होगा और देश को रणनीतिक खनिजों के मामले में मजबूती मिलेगी। देश में इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी की तेजी से बढ़ती मांग के साथ अब क्रिटिकल मिनरल्स की अहमियत भी बढ़ गई है। विशेषज्ञ बताते हैं कि क्रिटिकल मिनरल्स वे खनिज हैं, जो आधुनिक तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र की रीढ़ हैं। इनमें लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे तत्व शामिल हैं। लिथियम और कोबाल्ट इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी बनाने में काम आते हैं। सिलिकॉन और गैलियम सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण में उपयोग होते हैं। वहीं रेयर अर्थ एलिमेंट्स का इस्तेमाल विंड टर्बाइन, रक्षा उपकरण और हाई-टेक मैग्नेट में किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए इन खनिजों की भूमिका और बढ़ने वाली है। यही वजह है कि अब देश में इस क्षेत्र में रिसर्च और विशेषज्ञ तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
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