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यमुनानगर की संस्था लावारिस शवों को सम्मानपूर्वक विदाई देती है
KSKULWANT SINGH
Mar 12, 2026 14:22:40
Yamuna Nagar, Haryana
एंकर : आज के दौर में अक्सर कहा जाता है कि समाज में इंसानियत कम होती जा रही है, लेकिन यमुनानगर में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो यह साबित कर रहे हैंकि अच्छे लोग आज भी मौजूद हैं। यहां एक ऐसी संस्था पिछले करीब 8 से 10 सालों से सेवा का ऐसा काम कर रही है, जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हो जाती हैं।
कहते हैं कि समाज में अच्छा कार्य करने वाले अभी भी कायम है लेकिन यमुनानगर में एक संस्था है जो लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करती है, जिनका इस दुनिया में कोई अपना नहीं होता। सड़क किनारे, अस्पतालों में या फिर किसी दुर्घटना में मिले लावारिस शवों को जब कोई लेने वाला नहीं होता, तब यह संस्था आगे आती है। संस्था के सदस्य न सिर्फ इन शवों को उठाते हैं, बल्कि पूरे रीति-रिवाज और सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार भी करते हैं।
संस्था के सदस्यों का कहना है कि जब भी उन्हें किसी लावारिस शव की सूचना मिलती है, तो वे तुरंत मौके पर पहुंचते हैं। पुलिस और प्रशासन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे शव को श्मशान घाट तक लेकर जाते हैं और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार उसका अंतिम संस्कार करते हैं। कई बार ऐसे भी मौके आए जब किसी के अंतिम संस्कार में केवल यही संस्था के सदस्य ही मौजूद रहे।( शिव सेवा समिति )
पिछले 8 से 10 सालों में यह संस्था हजारों लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर चुकी है। संस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ एक है—कि इस दुनिया से जाने वाले हर इंसान को सम्मानजनक विदाई मिले, चाहे उसका कोई अपना हो या न हो।
संस्था के सदस्य मानते हैं कि यह सिर्फ सेवा नहीं बल्कि इंसानियत का धर्म है। उनका कहना है कि जब वे किसी लावारिस शव का संस्कार करते हैं, तो उन्हें लगता है कि शायद आज वे किसी के पिता, भाई या बेटे को सम्मानपूर्वक विदा कर रहे हैं। आज के समय में जब लोग अपने रिश्तों से भी दूरी बना रहे हैं, ऐसे में यमुनानगर की यह संस्था समाज के लिए एक प्रेरणा बनकर सामने आई है। यह लोग बिना किसी स्वार्थ के सिर्फ इंसानियत के नाते यह सेवा कर रहे हैं। इतना ही नहीं आज तक इस संस्था को सरकार व प्रशासन की तरफ से कोई सहायता नहीं मिल पाई।
यमुनानगर की यह संस्था आज समाज के लिए एक बड़ी मिसाल बन चुकी है। ऐसे लोग यह साबित करते हैं कि इंसानियत आज भी जिंदा है, बस जरूरत है उसे पहचानने और आगे बढ़ाने की। वाकई… ऐसे लोग ही समाज को उम्मीद देते हैं और यह बताते हैं कि इंसानियत आज भी जिंदा है।
Top Band : ( संस्था का नाम : शिव सेवा समिति )
जब कोई अपना नहीं आता… तब ये लोग देते हैं अंतिम विदाई
इंसानियत अभी जिंदा है: यमुनानगर में लावारिस शवों का सम्मान के साथ संस्कार
जिसका कोई नहीं… उसका सहारा बनी यमुनानगर की यह संस्था
10 साल में हजारों लावारिस शवों को दी सम्मानजनक विदाई
अनजान लोगों के भी बने अपने: अंतिम संस्कार कर निभा रहे इंसानियत का फर्ज
श्मशान घाट तक पहुंचा रहे वो लोग, जिनका इस दुनिया में कोई नहीं
निस्वार्थ सेवा की मिसाल: लावारिस शवों को दे रहे अंतिम सम्मान
जब रिश्ते भी साथ छोड़ दें, तब इंसानियत देती है अंतिम सहारा
अनाथ शवों की अंतिम यात्रा के साथी बने यमुनानगर के ये सेवाभावी लोग
हर अनजान शव को मिल रही सम्मानजनक विदाई, इंसानियत की अनोखी मिसाल
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