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प्रतापगढ़ में कृषि उपज मंडी एडी कार्यालय शुरू, किसानों को स्थानीय सेवाएं मिलने लगीं

Pratapgarh, Rajasthan:राजस्थान सरकार की बजट घोषणा के تحت प्रतापगढ़ में कृषि उपज मंडी समिति (एडी) कार्यालय की शुरुआत हो गई है. गुरुवार को इस कार्यालय में पहले अधिकारी के रूप में संजीव कुमार पंड्या ने पदभार ग्रहण किया. पंड्या इससे पहले प्रतापगढ़ कृषि मंडी सचिव के रूप में सेवाएं दे चुके हैं. नए कार्यालय के शुरू होने से प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और चित्तौड़गढ़ जिले के किसानों, व्यापारियों और मंडी समितियों को अब विभिन्न प्रशासनिक और विभागीय कार्यों के लिए उदयपुर नहीं जाना पड़ेगा. अब तक इन चारों जिलों की कृषि मंडियां उदयपुर स्थित खंड कार्यालय के अधीन संचालित होती थीं. प्रशासनिक स्वीकृतियों, निरीक्षण, विकास कार्यों और अन्य विभागीय प्रक्रियाओं के लिए किसानों और व्यापारियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी. विशेष रूप से आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के कारण यह व्यवस्था समय और आर्थिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण थी. प्रतापगढ़ में नए कार्यालय की स्थापना से अधिकांश कार्य स्थानीय स्तर पर ही पूरे किए जा सकेंगे. पदभार ग्रहण करने के बाद संजीव कुमार पंड्या ने बताया कि पहले पूरा उदयपुर संभाग एक ही खंड कार्यालय के अधीन था, जिसके कारण सभी मंडियों की प्रभावी मॉनिटरिंग और विकास कार्यों में कठिनाई आती थी. इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने जनजातीय क्षेत्र के महत्व को ध्यान में रखते हुए नए खंड कार्यालयों की घोषणा की थी, जिनमें प्रतापगढ़ भी शामिल है. उन्होंने बताया कि प्रतापगढ़ में कार्यालय शुरू होने से प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और चित्तौड़गढ़ की मंडियों का बेहतर पर्यवेक्षण किया जा सकेगा. मंडियों की समस्याओं की पहचान कर उनका त्वरित समाधान किया जाएगा और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी गति आएगी. संजीव कुमार पंड्या ने कहा कि यह क्षेत्र मध्यप्रदेश की सीमा से लगा हुआ है, जहां की मंडियों में कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं. ऐसे में राजस्थान के सीमावर्ती आदिवासी क्षेत्र की मंडियों को भी आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी. नया खंड कार्यालय इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. उन्होंने विश्वास जताया कि नए कार्यालय के माध्यम से चारों जिलों के किसानों, व्यापारियों और मंडी समितियों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी. स्थानीय स्तर पर निर्णय प्रक्रिया तेज होगी, विकास कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग होगी और मंडियों में पारदर्शी एवं प्रभावी नियमन सुनिश्चित किया जा सकेगा.
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राजस्थान एनर्जी समिट 2026: एनर्जी ट्रांज़िशन के अगले चरण पर जोर

Jaipur, Rajasthan:राजस्थान एनर्जी समिट 2026 का 7वां संस्करण 'एनर्जी ट्रांज़िशन के अगले चरण को गति देना' थीम के साथ समिट। समिट के दौरान तीन टेक्निकल सत्र भी आयोजित किए गए। उद्घाटन सत्र में राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, ब्रिटिश उच्चायोग के डिप्टी हाई कमिश्नर स्टिव हिकलिंग और CII राजस्थान चेयरमैन व एमडी रजनीश भंडारी विशेष अतिथि रहे। समिट में देशभर की इंडस्ट्री के MD—CEO मुख्य वक्ता थे। समिट का उद्देश्य भारत के विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य और आर्थिक विकास को गति देना है। इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने वाली बड़े पैमाने पर रणनीतियों, पॉलिसी फ्रेमवर्क और क्रांतिकारी इनोवेशन पर चर्चा की गई। इस क्रम में उद्घाटन सत्र के बाद तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए: पहला सत्र— 'इन्श्योरिंग एनर्जी सिक्योरिटी फॉर विकसित भारत: हार्नेसिंग रिन्यूएबल एनर्जी' जो रिन्यूएबल एनर्जी के ज़रिए भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को मज़बूत करने पर केंद्रित था; दूसरा सत्र— 'बिल्डिंग रोबस्ट एनर्जी सप्लाई सिस्टम्स— रोल ऑफ एआई एंड डिजिटल टेक्नोलॉजीज' विषय पर, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल टेक्नोलॉजी के योगदान पर प्रकाश डालता है; तीसरा सत्र— 'पॉवरिंग एफिशिएंसी: पॉलिसी, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, एंड एनर्जी कन्ज़र्वेशन फॉर राजस्थान एनर्जी ट्रांजिशन' जिसमें नीति उपायों, ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस और एनर्जी कन्ज़र्वेशन पर चर्चा की गई। उद्घाटन सत्र में वी श्रीनिवास, स्टिव हिकलिंग और राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन व एमडी डॉ. रोहित गुप्ता विशिष्ट अतिथि थे; प्रमुख वक्ताओं में बीआरपीएल के CEO अभिषेक रंजन, GE Power India Limited के MD और बिजनेस लीडर-स्टीम पावर सर्विसेज भारत GE Vernova पूनीत भटला, सिक्योर मीटर्स लिमिटेड के CIII राजस्थान वाइस चेयरमैन और ग्रुप CEO सुकेत सिंघल, CIII राजस्थान के वरिष्ठ डायरेक्टर व राज.हेड नितिन गुप्ता, न्यूरोइक्विलिब्रियम डायग्नोस्टिक सिस्टम्स लिमिटेड के चेयरमैन, CIII राजस्थान और MD रजनीश भंडारी, रेसोनिया लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट निनाद भानुदास पिटाले, QUB Grid Limited के CEO अरुण शर्मा और आदित्य बिड़ला रिन्यूएब्ल्स लिमिटेड की बिजनेस डेवलपमेंट (C&I) हेड सुष्मिता आर. अजवानी आदि शामिल थे।
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न्याय के इंतजार में 80 साल के बुजुर्ग की सिसकियां: बस्ती पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल

Ajeet MishraAjeet MishraFollow3m ago
Basti, Uttar Pradesh:अजीत मिश्रा (खोजी) ​बस्ती: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में कानून-व्यवस्था और पुलिस की संवेदनशीलता पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। मामला जिले के नगर थाना क्षेत्र का है, जहां दबंगों ने एक 80 वर्षीय बुजुर्ग पर जानलेवा हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल बुजुर्ग लंबी अवधि तक कोमा (अचेत अवस्था) में रहने के बाद मौत के मुँह से वापस लौटे, लेकिन खाकी की सुस्त कार्यशैली के चलते आज भी न्याय के लिए भटक रहे हैं। ​क्या है पूरा मामला? ​यह सनसनीखेज घटना नगर थाना क्षेत्र के कौठवा भरतपुर गांव की है। थाना क्षेत्र के रामापुर के पास दबंगों ने क्रूरता की हदें पार करते हुए 80 साल के एक बुजुर्ग को अपना निशाना बनाया और उनपर जानलेवा हमला कर दिया। ​हमले में बुजुर्ग को इतनी गंभीर चोटें आईं कि वे अचेत हो गए और उन्हें इलाज के लिए लखनऊ रेफर करना पड़ा। वहां लंबे समय तक वे कोमा जैसी अचेत अवस्था में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते रहे। ​होश में आते ही सामने आया सनसनीखेज सच ​ईश्वर की कृपा और डॉक्टरों के प्रयासों से बुजुर्ग की याददाश्त वापस आ गई। होश में आने के बाद पीड़ित ने खुद पर जानलेवा हमला करने वाले दबंगों के नाम का खुलासा किया। बुजुर्ग के बयान ने इस पूरे मामले में कई बड़े खुलासे किए हैं, जिससे आरोपियों की मुश्किलें बढ़नी चाहिए थीं। ​थाने का चक्कर काट रहा पीड़ित परिवार, पुलिस मौन ​घटना की भीषणता और पीड़ित की हालत को देखते हुए परिजनों ने नगर थाने में नामजद आरोपियों के खिलाफ लिखित तहरीर दी। इसके बावजूद, हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने अभी तक इस गंभीर मामले में मुकदमा दर्ज करना मुनासिब नहीं समझा। ​एक बुजुर्ग पर जानलेवा हमला, महीनों तक अस्पताल में कोमा में रहना और होश में आने के बाद खुद बयान देना—इन सबके बाद भी पुलिस की यह हीला-हवाली कई गंभीर सवाल खड़े करती है: ​आखिर नगर थाना अध्यक्ष इस गंभीर मामले में एफआईआर दर्ज करने से क्यों कतरा रहे हैं? ​क्या पुलिस किसी बड़े दबाव में है या उसे किसी अनहोनी का इंतजार है? ​क्या बुजुर्ग और उनके परिवार को न्याय दिलाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई तभी होगी जब कोई बड़ा बवाल मचेगा? ​निष्कर्ष ​बस्ती पुलिस का यह रवैया न केवल पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़क रहा है, बल्कि जिले में बढ़ते अपराध और दबंगों के हौसलों को भी बढ़ावा दे रहा है। यदि समय रहते पुलिस ने नामजद आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो यह मान लिया जाएगा कि खाकी अब गरीबों और मज़लूमों की रक्षा के बजाय अपराधियों की ढाल बन चुकी है। अब देखना यह है कि उच्च अधिकारी इस मामले में संज्ञान लेते हैं या पीड़ित न्याय के लिए यूं ही दर-दर भटकता रहेगा।
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प्रयागराज में गंगा-यमुना के जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बढ़ा

Prayagraj, Uttar Pradesh:संगम नगरी में गंगा और यमुना के जलस्तर में हो रही वृद्धि, दोनों नदियों के बढ़ते जलस्तर से तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा, दारागंज इलाके में गंगा का जलस्तर बस्ती के नजदीक पहुंचा, बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए डीएम ने अलर्ट जारी किया। संगम नगरी प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बीते एक सप्ताह से दोनों नदियां उफ़ान पर हैं, जिसके चलते अब गंगा और यमुना के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। दारागंज इलाके में बस्ती के बेहद नजदीक गंगा का जलस्तर पहुंच गया है। अगर इसी रफ्तार से गंगा के जलस्तर में वृद्धि होती रही तो अगले कुछ दिनों में तटवर्ती इलाकों में बाढ़ के हालात बन जाएंगे। वहीं संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। बाढ़ राहत चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है। संगम क्षेत्र में नाविकों और तीर्थ पुरोहितों को भी अलर्ट किया गया है। वहीं गंगा और यमुना के तटवर्ती इलाकों में जहां पूर्व के वर्षों में बाढ़ के हालात थे, वहां पर भी प्रशासनिक अमले ने दौरा कर स्थलीय निरीक्षण किया है और बाढ़ के حالात बनने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कह दिया गया है। डीएम मनीष वर्मा ने बताया कि गंगा की रफ़्तार में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। लेकिन यमुना की रफ़्तार थमी है, फिर भी बीते वर्षों से सबक लेते हुए बाढ़ के हालात बनने से पहले सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। हालांकि अभी बाढ़ के खतरे से गंगा और यमुना 12 मीटर दूर हैं। डीएम के अनुसार पिछले साल जो इलाके बाढ़ की जद में आए थे, उन इलाकों को चिन्हित किया गया है और वहां रहने वालों को अलर्ट भी कर दिया गया है। साथ ही प्रशासन के स्तर से जो भी जरूरी इंतजाम किए जा रहें हैं, ताकि बाढ़ जैसे हालात बनने पर प्रभावितों को जरूरी सहूलियत और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
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सीईओ शैलेन्द्र सिंह सोलंकी पर प्रशासनिक आदेशों को लेकर विवाद, हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला

Sidhi, Madhya Pradesh:ब्रेकिंग सीधी :सीधी जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) शैलेन्द्र सिंह सोलंकी एक बार फिर अपने प्रशासनिक आदेशों को लेकर विवादों में हैं। अतिरिक्त प्रभार और अनुमोदन से जुड़े आदेशों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि पंचायत राज अधिनियम और प्रशासनिक नियमों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से निर्णय लिए गए, जिससे पंचायत कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ रही है।हाल ही में जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश के जरिए सीईओ के अनुमोदन के बाद शैलेन्द्र सिंह चौहान को मझौली बीईओ का प्रभार सौंपा गया, जिस पर वरिष्ठता और पात्रता की अनदेखी के आरोप लगे हैं। वहीं, बरहाई ग्राम पंचायत में अतिरिक्त प्रभार दिए जाने और निलंबित सचिव से जुड़े मामले में भी विवाद गहरा गया है। बताया जा रहा है कि मामला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है।हालांकि, सीईओ शैलेन्द्र सिंह सोलंकी ने सभी आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि प्रभार देने का अधिकार संबंधित विभाग के अधिकारी का होता है। सीईओ का अनुमोदन केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है BYTE- मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ)
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हाईकोर्ट का राहत आदेश: 60 दिनों में जाति प्रमाण पत्र, 1950 दस्तावेज अनिवार्यता समाप्त

Bilaspur, Chhattisgarh:बिलासपुर। हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरा आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी परिवार के किसी सदस्य का वैध जाति प्रमाण पत्र पहले से जारी किया जा चुका है, तो केवल वर्ष 1950 के राजस्व अथवा अन्य पुराने दस्तावेजों के अभाव में परिवार के अन्य पात्र बच्चों को जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने से वंचित नहीं किया जा सकता। यह न्यायसंगत निर्णय जस्टिस एके प्रसाद की अदालत में एक परिवार की ओर से प्रस्तुत याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसकी पैरवी अधिवक्ता डॉ. प्राची दीवान ने करते हुए न्यायालय के समक्ष यह गंभीर तथ्य रखा था कि प्रदेश के हजारों परिवारों, विशेष रूप से भूमिहीन और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के पास पुराने अभिलेख उपलब्ध न होने के कारण बच्चों की शिक्षा, छात्रवृत्ति, प्रवेश और रोजगार संबंधी अवसर बुरी तरह प्रभावित होते हैं। मामले की गंभीरता को समझते हुए अदालत ने निर्देश दिया है कि यदि माता-पिता, भाई-बहन या परिवार के अन्य सदस्य का वैध जाति प्रमाण पत्र पहले से उपलब्ध है और ग्राम सभा या ग्राम स्तरीय समिति यह प्रमाणित कर देती है कि संबंधित बच्चा उसी परिवार और जाति से ताल्लुक रखता है, तो सक्षम अधिकारियों को आवेदक से अनावश्यक रूप से वर्ष 1950 के दस्तावेज प्रस्तुत करने की मांग नहीं करनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कड़े निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित अधिकारी आवेदन प्राप्त होने के पश्चात आवश्यक दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से पूरा करें और मात्र 60 दिनों के भीतर नया जाति प्रमाण पत्र जारी करना सुनिश्चित करें, ताकि पात्र बच्चों और उनके अभिभावकों को सरकारी दफ्तरों के अनगिनत चक्कर काटने से मुक्ति मिल सके और उन्हें अपने अधिकारों के लिए किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े。
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भजनपुरा में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की सप्लाई रोक, 34 रोल बरामद, तीन गिरफ्तार

New Delhi, Delhi:दिल्ली: भजनपुरा थाना पुलिस ने प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की अवैध बिक्री और सप्लाई के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से 34 रोल प्रतिबंधित चाइनीज मांझा बरामद किया है। मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, 22 जुलाई 2026 को थाना भजनपुरा को सूचना मिली थी कि यमुना विहार मेट्रो स्टेशन के पास प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की डिलीवरी की जानी है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। वहां पहले से मौजूद पीसीआर स्टाफ ने तीन संदिग्धों को पकड़ लिया था और शिकायतकर्ता के साथ उन्हें थाने ले आया। जांच के दौरान शिकायतकर्ता गौरव गुप्ता, जो पीपुल फॉर एनिमल्स (PFA) में एनिमल वेलफेयर ऑफिसर हैं, ने बताया कि उन्हें गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ लोग प्रतिबंधित चाइनीज मांझा बेच रहे हैं। उन्होंने ग्राहक बनकर आरोपियों से संपर्क किया और मांझे का ऑर्डर दिया। तय समय पर आरोपियों ने उन्हें यमुना विहार मेट्रो स्टेशन के पास माल लेने के लिए बुलाया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने 112 हेल्पलाइन पर पुलिस को सूचना दे दी। जैसे ही तीनों आरोपी प्लास्टिक के एक कट्टे में 34 रोल प्रतिबंधित चाइनीज मांझा लेकर मौके पर पहुंचे, पीसीआर स्टाफ ने उन्हें दबोच लिया। इस संबंध में थाना भजनपुरा में एफआईआर संख्या 333/2026 के तहत बीएनएस की धारा 223(B), 351, 3(5) तथा पर्यावरण संरक्षण अधिनयम, 1986 की धारा 5/15 के तहत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपी: - विनीत (21), निवासी करतार नगर, दिल्ली - हिमांशु (26), निवासी करतार नगर, दिल्ली - दीपांशु (18), निवासी करतार नगर, दिल्ली पुलिस ने बताया कि तीनों आरोपियों का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। भजनपुरा पुलिस का कहना है कि समय रहते की गई इस कार्रवाई से प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की अवैध सप्लाई को रोका गया। चाइनीज मांझा लोगों, विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों और पक्षियों के लिए बेहद खतरनाक साबित होता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों को यह मांझा कहां से मिला और इस अवैध कारोबार में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं
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केदारनाथ यात्रा 2026: 14 लाख श्रद्धालु, 800 रेस्क्यू; पुलिस ने 936 फर्जी प्लेटफॉर्म बंद किये

Noida, Uttar Pradesh:रेडिकल सामग्री नहीं: रुद्रप्रयाग: केदारनाथ यात्रा 2026: 14 लाख श्रद्धालु, 800 रेस्क्यू और 936 फर्जी। प्लेटफॉर्म बंद; पुलिस ने संभाला हर मोर्चा। स्थान: रुद्रप्रयाग 23 जुलाई 26 एंकर: 22 अप्रैल 2026 को बाबा केदार के कपाट खुलने के बाद से लेकर अब तक केदारनाथ धाम में 14 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इतनी विशाल यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुगम बनाए रखना पुलिस के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन, आपदा के दौरान रेस्क्यू और साइबर ठगी पर कार्रवाई जैसे कई मोर्चों पर पुलिस लगातार सक्रिय रही। अब यात्रा के अब तक के अनुभव और उपलब्धियों को लेकर पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग नीहारिका तोमर ने विस्तृत जानकारी दी है। वीओ-1: केदारनाथ यात्रा 2026 में पुलिस ने सुरक्षा और व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर के अनुसार कपाट खुलने के बाद से अब तक 14 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराने के साथ-साथ पुलिस ने ट्रैफिक व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण की चुनौती को भी सफलतापूर्वक संभाला। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए लगातार निगरानी की गई। वहीं श्रद्धालुओं की सहायता के लिए पुलिस सेवा केंद्र और सात खोया-पाया केंद्र संचालित किए गए। इन केंद्रों के माध्यम से लगभग 350 मोबाइल फोन, 300 खोए हुए पर्स और 450 बिछड़े श्रद्धालुओं को उनके परिजनों से मिलाया गया। इसके अलावा एसडीआरएफ और डीडीआरएफ टीमों ने करीब 800 लोगों का रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। पुलिस और प्रशासन की टीमें पूरी यात्रा के दौरान सेवा भाव के साथ श्रद्धालुओं की सहायता में जुटी रहीं। बाइट-1: नीहारिका तोमर, पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग वीओ-2: केदारनाथ यात्रा के दौरान साइबर अपराधों पर भी पुलिस ने सख्त कार्रवाई की। पिछले वर्षों में हेलीकॉप्टर टिकट, होटल बुकिंग और टैक्सी बुकिंग के नाम पर होने वाली ऑनलाइन ठगी को देखते हुए यात्रा शुरू होने से करीब एक माह पहले विशेष साइबर टीम का गठन किया गया था। इस टीम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, फर्जी वेबसाइट, मोबाइल नंबर और बैंक खातों के माधुर्य से चल रहे धोखाधड़ी के नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार यात्रा अवधि में अब तक कुल 936 फर्जी प्लेटफॉर्म बंद कराए जा चुके हैं। वहीं इस संबंध में तीन मुकदमे दर्ज किए गए हैं और दो आरोपियों की गिरफ्तारी भी की गई है। पुलिस ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सरकारी वेबसाइट और अधिकृत प्लेटफॉर्म से ही हेलीकॉप्टर, होटल और यात्रा संबंधी बुकिंग करें तथा सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर आने वाले भ्रामक विज्ञ विज्ञापनों से सावधान रहें। बाइट-2: नीहारिका तोमर, पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग
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अनंतनाग हमले के बाद सुरक्षा बलों ने दो घर गिराकर संदेश दे दिया

Chaka, अनंतनाग आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबलों की बड़ी करवाई। दो सकरी आतंकियों के मकान ढहा दिया गए। 2800 OGW हिरासत में। दक्षिण से उतरी कश्मीर तक तलाशी अभियान जारी। अनंतनाग आतंकवादी हमले में पुलिस कॉन्स्टेबल की हत्या के बाद, पूरे कश्मीर में आतंक विरोधी अभियान तेज़ कर दिए गए हैं। दक्षिण कश्मीर के बिजबेहरा इलाके में लश्कर-ए-तैयबा के दो बड़े कमांडरों—हारून गनई और आदिल ठाकुर—के घर ढहा दिया गए हैं। ये दोनों लश्कर-ए-तैयबा के सक्रिय आतंकवादी हैं जो पिछले कुछ सालों से इस इलाके में सक्रिय हैं। हारून राशिद गणाई के बारे में बताया जाता है वह २०१८ से लश्कर के साथ जुड़ा और एक ogw के तौर पर काम करने लगा बाद में २०२१ में सकरी आतंकी बना। गावों वालों के मुताबिक हारून के घर पर बीती रात करीब तीन बजे आसपास घेराबंदी हुवी और फिर एक धमाका हुवा और घर को ढह दिया गया। हारून के घर से WT और शॉट्स। माना जाता है कि वे कल अनंतनाग में पुलिस कॉन्स्टेबल पर हुए हमले के बाद सुरक्षाबल एक सकत संदेश देना चाहते हैं। इसे के चलते हुए, सुरक्षा बलों ने कल रात अलग-अलग ऑपरेशन के दौरान इन दोनों घरों को गिरा दिया। इसके अलावा, लगभग २८०० OGWs (ओवर-ग्राउंड वर्कर्स) को हिरासत में लिया गया है। जिनसे पूछताछ जारी है ताकि कोई सुराग मिले। अधिकारियों के अनुसार, घर गिराने जैसी कार्रवाई आतंकवाद-विरोधी व्यापक प्रयासों का हिस्सा हैं, जैसे कि खुफिया जानकारी पर आधारित ऑपरेशन, घेराबंदी और तलाशी अभियान, और उन OGWs (ओवरग्राउंड वर्कर्स) के खिलाफ कार्रवाई जो आतंकवादियों को पनाह, फंडिंग और लॉजिस्टिक्स मुहैया कराते हैं। घर गिराने की कार्रवाई यह संकेत देती है कि सक्रिय आतंकवादियों को पनाह देने या उनसे जुड़े रहने का सीधा असर परिवार की संपत्तियों पर पड़ सकता है। 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए घातक आतंकी हमले के बाद, जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों और उनके सहयोगियों से जुड़ी संपत्तियों को निशाना बनाते हुए तेजी से कई घर गिराए। यह आतंकवाद-विरोधी उपायों में एक स्पष्ट तेजी थी, जिसमें हमले के तुरंत बाद के दिनों में कम से कम ७ घर गिरा दिए गए। अधिकारियों ने कहा, "इन कदमों का मकसद आतंकी इकोसिस्टम को खत्म करना, सक्रिय आतंकवादियों पर दबाव बनाना और उनकी पारिवारिक संपत्तियों व सपोर्ट नेटवर्क को प्रभावित करना है।"
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