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बाड़मेर नगर निकाय चुनाव: कांग्रेस-भाजपा के बीच निर्दलीयों की त्रिकोणीय चुनौती

Barmer, Rajasthan:बाड़मेर नगर निकाय चुनाव को लेकर बाड़मेर में सियासी सरगर्मियां अब अपने चरम पर पहुंच गई हैं। नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन सोमवार को निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर प्रत्याशी, समर्थकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की जबरदस्त भीड़ देखने को मिल रही है। सुबह से ही अलग-अलग वार्डों से प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंच रहे हैं। इसके चलते निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के आसपास का माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में नजर आ रहा है। बाड़मेर नगर निकाय चुनाव में इस बार मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच माना जा रहा है, लेकिन राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) की मौजूदगी और बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों के मैदान में उतरने से कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय होने के आसार हैं। नामांकन के अंतिम दिन राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रत्याशियों के साथ ऐसे कई चेहरे भी सामने आ रहे हैं, जो टिकट नहीं मिलने या पार्टी की पसंद से असहमति के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। यही निर्दलीय प्रत्याशी कई वार्डों में स्थापित राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। बाड़मेर की स्थानीय राजनीति में कांग्रेस का दबदबा भी इस चुनाव को खास बनाता है। बीते तीन बोर्ड कांग्रेस बनाने में कामयाब रही है। ऐसे में कांग्रेस के सामने अपने पुराने प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती है, जबकि भाजपा लंबे समय से नगर निकाय की सत्ता में बदलाव की कोशिश में जुटी दिखाई दे रही है। भाजपा के लिए यह चुनाव केवल पार्षदों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर निकाय में अपना बोर्ड बनाने की बड़ी राजनीतिक लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर आरएलपी की सक्रियता और निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी ने दोनों प्रमुख दलों की चिंता बढ़ा दी है। कई वार्डों में व्यक्तिगत प्रभाव, स्थानीय समीकरण, जातीय गणित और प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकती है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी। अब सबकी नजरें नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी पर रहेंगी। इसके बाद मैदान में बचे प्रत्याशियों की वास्तविक संख्या सामने आएगी और चुनावी मुकाबले की दिशा भी स्पष्ट होने लगेगी। फिलहाल बाड़मेर में अंतिम दिन उमड़ी भीड़ ने इतना जरूर संकेत दे दिया है कि इस बार का नगर निकाय चुनाव काफी रोचक, प्रतिष्ठापूर्ण और कांटे का मुकाबला बनने जा रहा है। कांग्रेस के सामने जहां लगातार चौथी बार बोर्ड बनाने की चुनौती है, वहीं भाजपा सत्ता परिवर्तन के लिए पूरी ताकत झोंकती नजर आ रही है। आरएलपी और निर्दलीय प्रत्याशी इस मुकाबले में कितना असर डालते हैं, इसका फैसला मतदाता करेंगे।
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बलरामपुर जरवा तेंदुए की दहशत : नेवलगढ़ मार्ग झाड़ियों से पटा, राहगीर परेशान

MADAN LAL JAISWALMADAN LAL JAISWALFollow1m ago
Newal Garh, Uttar Pradesh:विकासखंड गैसड़ी के ग्राम पंचायत नेवलगढ़ को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग इन दिनों जंगल में तब्दील हो गया है। जुगनभरिया से नेवलगढ़ तक करीब एक किलोमीटर लंबा रास्ता घने जंगल से होकर गुजरता है। सड़क के दोनों तरफ घनी झाड़ियां व बड़े-बड़े खरपतवार उग आए हैं, जिससे यह मार्ग राहगीरों के लिए मौत का सबक बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार शाम होते ही इस रास्ते पर सन्नाटा पसर जाता है। ग्रामीणों में सबसे ज्यादा दहशत तेंदुए को लेकर है। पूर्व प्रधान रामबचन थारू ने बताया कि अक्सर घनी झाड़ियों के बीच तेंदुआ छिपा रहता है, जिसे कई बार बाइक और पैदल आते-जाते लोगों ने देखा है। किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। स्कूली बच्चों और महिलाओं को आने-जाने में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। ग्रामीणों ने बताया कि इस मार्ग से नेवलगढ़ सहित कई गांवों के लोगों का प्रतिदिन आना-जाना लगा रहता है, लेकिन झाड़ियों के कारण सड़क पर दूर तक दिखाई नहीं देता।। इस समस्या को लेकर ग्राम प्रधान घनश्याम यादव, दिलीप चौधरी, कृष्ण कुमार थारू, राधेश्याम थारू, विनती राम थारू, कमलेश थारू, बजरंग थारू, विजय चौधरी, सत्य प्रकाश थारू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों से झाड़ियों को साफ कराने की मांग की है। महाराणा प्रताप जनजातीय सेवा संस्थान के अध्यक्ष मदन लाल जायसवाल ने जिलाधिकारी महोदय से जनहित में संज्ञान में लेते हुए झाड़ियां साफ कर जाने की मांग की है।। इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी, जनकपुर रेंज अमरजीत ने बताया कि मामला संज्ञान में है, संबंधित टीम को भेजकर जल्द ही सड़क किनारे की झाड़ियों को साफ कराया जाएगा।
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NGT clamps down on Bahadurgarh industry; joint committee to inspect 2,500 units

Jhajjar, Haryana:बहादुरगढ़ इंडस्ट्री पर एनजीटी की सख्ती प्रदूषण की जांच के लिए बनाई संयुक्त कमेटी करीब 2,500 औद्योगिक इकाइयों की होगी जांच 26 अक्टूबर से एक सप्ताह पहले एनजीटी में सबमिट करनी है रिपोर्ट 26 अक्टूबर को एनजीटी में मामले की अगली सुनवाई मैन्युफैक्चरिंग, ईंधन और उत्सर्जन की होगी जांच बहादुरगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने सख्त रुख अपनाया है। औद्योगिक इकाइयों में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन और प्रदूषण फैलाने के आरोपों की जांच के लिए एक चार सदस्यीय संयुक्त कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी को 26 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई से पहले सभी औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपनी होगी। बहादुरगढ़ के एचएसआईआईडिसी औद्योगिक क्षेत्र में करीब 2,500 उद्योग संचालित हो रहे हैं। इन इकाइयों पर वायु और जल प्रदूषण से जुड़े पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। एनजीटी की प्रधान पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को संयुक्त कमेटी बनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण की वास्तविक स्थिति और नियमों के अनुपालन की जांच की जा सके। कमेटी में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ और जिला प्रशासन के अधिकारी शामिल होंगे। जिला कलेक्टर इस कमेटी के नोडल अधिकारी के तौर पर काम करेंगे। एनजीटी ने कमेटी को आठ सप्ताह के भीतर निरीक्षण पूरा करने और अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले अपनी रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। बहादुरगढ़ के सैक्टर 2 में रहने वाले याचिकाकर्ता हरिन्द्र कुमार ने आरोप लगाया गया है कि बहादुरगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र में कुछ इकाइयां वायु अधिनियम 1981 और जल अधिनियम 1974 के प्रावधानों का पालन नहीं कर रही हैं। कुछ इकाइयां पर पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करने और जीपीएस से लैस तस्वीरों के जरिए निरीक्षण प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए गए हैं। इसके अलावा रात के समय इकाइयों में निरीक्षण नहीं होने का फायदा उठाकर औद्योगिक कचरे के खुले में जमा होने और उसके प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। एनजीटी ने संयुक्त कमेटी को औद्योगिक इकाइयों की मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया, ईंधन का इस्तेमाल, प्रदूषण नियंत्रण उपकरण, चिमनियों से निकलने वाला उत्सर्जन, फ्यूजिटिव एमिशन और सहमति से जुड़ी शर्तों की मौके पर जाकर जांच करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, दिल्ली एनसीआर में सितंबर-अक्टूबर के दौरान हवा की गुणवत्ता खराब होने और स्मॉग का खतरा बढ़ने के बीच औद्योगिक प्रदूषण पर भी सवाल उठते रहे हैं। एनजीटी ने इससे पहले भी प्रदूषण के सभी स्रोतों को लेकर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट तैयार करने पर जोर दिया था। अब बहादुरगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों की जांच के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट से यह साफ हो सकेगा कि यहां प्रदूषण के लिए जिम्मेदार स्रोत कौन-कौन से हैं और कितनी औद्योगिक इकाइयां पर्यावरणीय मानकों का पालन कर रही हैं। यानी आने वाले दिनों में बहादुरगढ़ की औद्योगिक इकाइयों पर जांच का शिकंजा और कस सकता है। अब सबकी नजरें संयुक्त कमेटी की रिपोर्ट और 26 अक्टूबर को होने वाली एनजीटी की अगली सुनवाई पर रहेंगी। हालांकि अभी तक कमेटी ने जांच आरम्भ नही की है जबकि 14 अगस्त को एनजीटी ने आदेश दिए थे।
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दिल्ली MCD मेयर प्रवेश वाही ने सेंट्रल ज़ोन में स्वच्छता अभियान का निरीक्षण किया

New Delhi, Delhi:दिल्ली नगर निगम (MCD) के मेयर प्रवेश वाही राजधानी में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार विभिन्न ज़ोन और संवेदनशील इलाकों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। इसी करी में आज सेंट्रल जोन में सुबह 9:30 बजे दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही स्वच्छता अभियान का औचक निरीक्षण करने के लिए पहुंचे हैं इस दौरान उनके साथ सेंट्रल जोन के डिप्टी कमिश्नर और सेंट्रल जोन के अध्यक्ष मौजूद रहे इस दौरान انہوںने विभिन्न विभिन्न इलाके का निरीक्षण किया है. मेयर प्रवेश वाही के नेतृत्व में 'कूड़े से आज़ादी' और विशेष सफाई अभियानों के तहत ज़मीनी स्तर पर कचरा प्रबंधन की समीक्षा की जा रही है। आज सेंट्रल जोन में निरीक्षण के दौरान उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि देखिए आज हम स्वच्छता अभियान के तहत सेंट्रल जोन पहुंचे हैं आज इस क्षेत्र का हम दौड़ा कर रहे हैं और हमारे साथ सेंट्रल जोन के डिप्टी कमिश्नर और अध्यक्ष साथ रहेंगे साथ ही अधिकारियों को भी बुलाया गया है हमारा संकल्प है कि हम दिल्ली को स्वच्छ और साफ बनाएं इसलिए स्वच्छता के साथ-साथ जितने भी जल भराव के हॉटस्पॉट है इस जोन में उसका हम निरीक्षण कर रहे हैं और उस पर अधिकारियों को तुरंत कार्यवाही करने का निर्देश दिया जा रहा है साथ ही कूड़े के निष्पादन के लिए अलग-अलग क्षेत्र में नए-नए कूड़ा घर बनाए जा रहे हैं जहां पर क्षेत्र का कूड़ा वहां पहुंचेगा.
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अंबाला में सफाई कर्मचारियों की 26वें दिन हड़ताल, 22 मांगों पर ठोस फैसला नहीं

Ambala, Haryana:अंबाला शहर में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल 26वें दिन भी जारी है। कर्मचारियों और सरकार के बीच मांगों को लेकर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है। हड़ताल के चलते शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। वहीं, विरोध में सफाई कर्मचारियों ने नगर निगम कार्यालय समेत शहर के अलग-अलग इलाकों में कूड़ा फैलाकर जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार से जल्द उनकी मांगें पूरी करने की अपील की है. अंबाला शहर में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल लगातार 26वें दिन में प्रवेश कर गई है। लंबे समय से जारी हड़ताल के कारण शहर में सफाई व्यवस्था पर असर पड़ता नजर आ रहा है। अपनी मांगों को लेकर सफाई कर्मचारियों ने अंबाला शहर नगर निगम कार्यालय सहित शहर के विभिन्न इलाकों में कूड़ा फैलाकर विरोध जताया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सफाई कर्मचारियों का कहना है कि सरकार और कर्मचारियों के बीच 22 मांगों को लेकर बातचीत हुई थी, जिसमें 17 मांगों पर सहमति भी बनी थी। लेकिन इन मांगों को अब तक लागू नहीं किया गया, जिसके चलते कर्मचारियों को दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना और ठेकेदारी प्रथा को खत्म करना शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को लेकर ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
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चौमूं नगर निकाय चुनाव: कांग्रेस ने 33 वार्डों के टिकट घोषित

Jaipur, Rajasthan:चौमूं जयपुर नगर निकाय चुनाव को लेकर बिछी चुनावी चौसर कॉंग्रेस ने पहली सूची में 17 वार्डो की टिकट की जारी देर रात दूसरी सूची में 16 वार्डो के प्रत्याशियों के नामों का खुलासा कॉंग्रेस ने 45 वार्डो के लिए अभी तक 33 वार्डो की सूची की जारी अभी तक 12 वार्डो की टिकटों पर फंसा हुआ हैं पेच इधर ,भाजपा ने अभी तक टिकटों के नाम नहीं किये फायनल भाजपा सीधे ही RO को जमा करवा सकती हैं सिम्बल टिकट नहीं मिलने से नाराज प्रत्याशियों पर RLP लगा सकती हैं दाव चौमूं उपखण्ड कार्यलय में लोगों लगा जमावड़ा एंकर-नगर निकाय चुनाव को लेकर चौमूं में चुनावी चौसर बिछ चुकी है और सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने प्रत्याशियों की पहली सूची में 17 वार्डों के उम्मीदवारों के नाम जारी किए थे। इसके बाद देर रात जारी दूसरी सूची में 16 और वार्डों के प्रत्याशियों के नामों के खुलासा किया गया। इस तरह कांग्रेस ने चौमूं के 45 वार्डों में से अब तक 33 वार्डों के टिकट घोषित कर दिए हैं, जबकि 12 वार्डों की टिकटों पर अभी भी पेच फंसा हुआ है। वहीं, भाजपा में अभी तक प्रत्याशियों के नामों पर अंतिम मुहर नहीं लगी है। माना जा रहा है कि भाजपा अपने प्रत्याशियों के नाम सीधे निर्वाचन अधिकारी यानी RO के समक्ष सिंबल के साथ जमा करवा सकती है। टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों पर आरएलपी भी दांव खेल सकती है। ऐसे में आने वाले समय में चुनावी मुकाबला और रोचक होने के आसार हैं। चौमूं उपखंड कार्यालय में नामांकन को लेकर लोगों की भीड़ और राजनीतिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।
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भाई वीरेंद्र: आरक्षण बचाने की जंग और डस्टबिन घोटाला पहले से बड़ा

Jehanabad, Bihar:बिहार विधानसभा की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष और आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने आरक्षण, नेपाल की आपदा और राज्य में हुए कथित डस्टबिन खरीद मामले को लेकर बड़ा बयान दिया है। जहानाबाद के सर्किट हाउस में मीडिया से मुखातिब होते हुए भाई वीरेंद्र ने साफ कहा कि आरक्षण और बाबा साहब के संविधान को खत्म करने की हिम्मत किसी माई के लाल में नहीं है। वहीं उन्होंने डस्टबिन खरीद मामले को चारा घोटाले से भी बड़ा घोटाला करार दिया है। देशभर में आरक्षण और संविधान को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच आरजेडी के वरिष्ठ नेता और लोक लेखा समिति के अध्यक्ष भाई वीरेंद्र ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। मीडिया से बात करते हुए भाई वीरेंद्र ने दो टूक शब्दों में कहा कि आरक्षण को लेकर जो बवाल मचाया जा रहा है, उस पर मैं स्पष्ट कर दूं कि किसी में इतनी हिम्मत नहीं है जो बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के दिए संविधान और आरक्षण को समाप्त कर सके। अगर आरक्षण खत्म करने की कोशिश हुई तो हम चुप नहीं बैठेंगे। हम राजनीति किसलिए कर रहे हैं? आरक्षण और संविधान को बचाए रखने के लिए हम जान की बाजी लगा देंगे, लेकिन इसे समाप्त नहीं होने देंगे। वहीं दूसरी तरफ नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक तबाही पर शोक व्यक्त करते हुए राजद नेता ने नेपाल सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। भाई वीरेंद्र ने कहा, भारत और नेपाल का रिश्ता रोटी और बेटी का है। लेकिन नेपाल का कभी चीन तो कभी भारत के पाले में जाना उसकी बड़ी भूल है। उन्होंने नेपाल की मौजूदा सरकार को नसीहत देते हुए भारत के साथ मजबूती से खड़े रहने की सलाह दी। वही आरक्षण और विदेश नीति के अलावा लोक लेखा समिति के अध्यक्ष ने बिहार में नगर निकायों के डस्टबिन खरीद में हुए कथित भ्रष्टाचार पर सरकार को घेरा। भाई वीरेंद्र का इसे बड़ा भ्रष्टाचार करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस डस्टबिन की वास्तविक कीमत 500 से 600 रुपये है, उसे 15,000 रुपये से अधिक की कीमत पर खरीदा गया है। भाई वीरेंद्र ने कहा, सामाजिक न्याय के नेता आदरणीय लालू प्रसाद यादव जी को तो एक साज़िश के तहत चारा घोटाले में फंसाया गया था, लेकिन आज जो डस्टबिन घोटाला हुआ है, वह उससे भी कहीं बड़ा है। ताज्जुब की बात यह है कि इतने बड़े घोटाले पर न तो कोई नेता बयान दे रहा है और न ही कोई टीवी चैनल इसे दिखा नहीं रहा है। दरअसल राजद विधायक लोक लेखा समिति की बैठक करने जहानाबाद पहुंचे थे जहां उन्होंने उक्त बातें कही है।
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