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अबूझमाड़ के गारपा के रहस्यमयी झरना: सड़क निर्माण से खतरे में संरक्षण की मांग
HSHEMANT SANCHETI
Jan 04, 2026 03:50:56
Narayanpur, Chhattisgarh
नारायणपुर जिले का अबूझमाड़ केवल अपनी दुर्गम भौगोलिक स्थिति के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनुपम प्राकृतिक सुंदरता और रहस्यों के लिए भी जाना जाता है। घने जंगल, ऊँची-नीची पहाड़ियाँ, कल-कल बहती नदियाँ और मनमोहक झरने इस क्षेत्र को प्रकृति की अनमोल धरोहर बनाते हैं। इन्हीं प्राकृतिक चमत्कारों के बीच अबूझमाड़ के गारपा गांव के पास स्थित एक रहस्यमयी झरन आज ग्रामीणों की आस्था और चिंता दोनों का केंद्र बना हुआ है।
गारपा गांव के प्रवेश द्वार से पहले स्थित यह झरन एक अद्भुत विशेषता रखता है। यह झरन साल के 24 घंटे एक समान रफ्तार से बहता रहता है। चाहे भीषण गर्मी हो या मूसलाधार बारिश, इस झरने के पानी की गति और प्रवाह में कोई बदलाव नहीं आता। सबसे बड़ा रहस्य यह है कि इस पानी का स्रोत आज तक पता नहीं लगाया जा सका है। पीढ़ी दर पीढ़ी इस क्षेत्र में रह रहे ग्रामीण भी यह नहीं जान पाए कि यह जल आखिर जमीन के किस गर्भ से निकलकर निरंतर बहता रहता है।
इस झरन मे एक कुंड का निर्माण स्वाभाविक रूप से हो गया है, जिसमे पर्यादी गाँव के देवता “नुलेमुत्ते बापी” के स्नान कुंड से भी पहचाना जाता है । ग्रामीणों की मान्यता के अनुसार यह कुंड गांव के देवता स्थल से जुड़ा हुआ है और इसे देवताओं का पवित्र स्नान कुंड माना जाता है। विशेष अवसरों पर देवता को स्नान कराने के लिए इसी कुंड का जल उपयोग में लाया जाता है। यह स्थान केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।
इसके साथ ही यह झरना और कुंड ग्रामीणों के दैनिक जीवन से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। वर्षों से गांव के लोग इसी पानी का उपयोग पीने, खाना बनाने और अन्य घरेलू कार्यों में करते आ रहे हैं। शुद्ध और सतत बहाव वाला यह जल ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा के समान है।
हालांकि अब इस रहस्यमयी झरने पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। क्षेत्र में चल रहे सड़क निर्माण कार्य के दौरान इस जलस्रोत के दब जाने की आशंका ग्रामीणों को सताने लगी है। ग्रामीण बताते हैं कि इससे पहले भी गारपा गांव क्षेत्र में डोकरी माता से जुड़े कई आस्था स्थलों को सड़क निर्माण की भेंट चढ़ाया जा चुका है। इसी अनुभव के चलते ग्रामीण अब इस झरना-कुंड को बचाने के लिए सजग हो गए हैं।
पूर्व सरपंच ने बताया कि ग्रामीण इस संबंध में जिला प्रशासन से गुहार लगाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि इस अद्भुत और पवित्र जलस्रोत का संरक्षण किया जा सके। उनका कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन विकास के नाम पर प्रकृति और आस्था के प्रतीकों को नष्ट करना उचित नहीं है।
अबूझमाड़ का यह रहस्यमयी झरना न केवल प्राकृतिक चमत्कार है, बल्कि आदिवासी संस्कृति, विश्वास और जीवन पद्धति का अभिन्न हिस्सा भी है। ऐसे स्थलों को सहेजना और संरक्षित करना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते कदम उठाए जाएँ, तो यह झरना आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आस्था और प्रकृति का अमूल्य उपहार बना रह सके
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