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Prabhanjan Kumar SinghPrabhanjan Kumar SinghFollow23 Jul 2024, 09:48 am
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जयपुर में पहले चरण के मतदान के बीच अधिकारी ने फील्ड में निरीक्षण किया

Jaipur, Rajasthan:नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण में बुधवार को मतदान के बीच जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर संदेश नायक खुद फील्ड में उतरे। उन्होंने शाहपुरा नगर परिषद, बस्सी, मनोहरपुर क्षेत्र के अलग-अलग मतदान केंद्रों का दौरा कर मतदान प्रक्रिया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। नायक ने बूथों पर पहुंचकर मतदान की स्थिति देखी और चुनाव से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष, निर्भीक और स्वतंत्र तरीके से संपन्न कराने के निर्देश दिए। जिला निर्वाचन अधिकारी मतदान के दौरान लगातार अलग-अलग मतदान केंद्रों का निरीक्षण कर रहे हैं। प्रशासन का फोकस मतदान केंद्रों पर व्यवस्थाएं बनाए रखने के साथ चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित कराने पर है। इस दौरान जयपुर ग्रामीण एसपी हनुमान प्रसाद भी साथ मतदान केंद्रों का विजिट कर रहे हैं। संवाददाता दीपक गोयल ने जयपुर जिला निर्वाचन अधिकारी संदेश नायक और जयपुर ग्रामीण एसपी हनुमान प्रसाद से की बातचीत।
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असम के ACS देवेश्वर बोरा गिरफ्तार: आवाज़ मिलान से करोड़ों की ठगी

Guwahati, Assam:CM Vigilance Cell द्वारा असम के वरिष्ठ एसीएस अधिकारी देवेश्वर बोरा की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ दर्ज मामलों का पूरा विवरण हिंदी में नीचे दिया गया है: मिमिक्री के जरिए धोखाधड़ी: देवेश्वर बोरा ने एक गिरोह बना रखा था, जो पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई, वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और मुख्य सचिव की आवाजों की नकल कर सकता था. फोन पर मुख्यमंत्री या बड़े अधिकारियों की फर्जी आवाज सुनाकर वे नौकरी, सरकार ठेके और शराब की दुकान के लाइसेंस दिलाने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये ठगते थे. करोड़ों की रिश्वत की मांग: उन्होंने अलग-अलग लोगों से 50 लाख रुपये से 2 करोड़ रुपये तक की रिश्वत मांगी थी. यहां तक कि राजनेता रमेन बोरठाकुर से भी उन्होंने 50 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी. इसके अलावा, अपने सरकारी बंगले की मरम्मत करवाने के बाद उन्होंने ठेकेदार को उसका पैसा भी नहीं चुकाया था. फर्जी सिम कार्ड और मोबाइल जब्त: सतर्कता सेल ने देवेश्वर बोरा के पास से 9 मोबाइल फोन बरामद किए हैं. इनमें से सिर्फ एक सिम कार्ड उनके खुद के नाम पर था, जबकि बाकी सभी सिम कार्ड दूसरों के नाम पर रजिस्टर्ड थे. यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत एक गंभीर अपराध है. कानूनन कार्रवाई केस दर्ज: कई पीड़ितों की शिकायतों को एक साथ मिलाकर सतर्कता सेल ने उनके खिलाफ मामला संख्या 14/26 दर्ज किया है. चूंकि यह धोखाधड़ी साल 2011 से चल रही थी, इसलिए इस मामले में पुरानी भारतीय दंड संहिता की धाराओं का इस्तेमाल किया गया है. भाई के नाम पर बेनामी संपत्ति: खुद को बचाने के लिए देवेश्वर बोरा ने अपनी काली कमाई से बनाई कई संपत्तियों का मालिकाना हक अपने भाई को दे रखा था. सीएम विजिलेंस की टीम ने इस सिलसिले में उनके भाई का बयान भी दर्ज किया है. अब उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज किया जाएगा. अरुणाचल प्रदेश में भी मामला दर्ज: देवेश्वर बोरा का यह खेल सिर्फ असम तक ही सीमित नहीं था. पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश में भी एक कंपनी को ठेका दिलाने के नाम पर 3% कमीशन वसूलने के आरोप में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.
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नेहरू विहार में अवैध लाइब्रेरी पर MCD का ताला, सुरक्षा खामियाँ उजागर

New Delhi, Delhi:नेहरू विहार में अवैध लाइब्रेरी पर MCD का ताला। उत्तरी दिल्ली के नेहरू विहार इलाके में नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई की है। जर्जर हालत में खड़ी वर्धमान मॉल की बिल्डिंग में चल रही कई लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर पर एमसीडी ने सीलिंग की कार्रवाई की। आरोप है कि इन लाइब्रेरियों में फायर सेफ्टी से जुड़े जरूरी इंतजाम नहीं थे। न पर्याप्त एग्जिट गेट और न ही आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने का सुरक्षित रास्ता। कई जगह कम स्पेस में बड़ी संख्या में छात्र पढ़ते मिले। तस्वीरें उत्तरी दिल्ली के नेहरू विहार इलाके की हैं जहां जर्जर हालत में खड़ी वर्धमान मॉल की बिल्डिंग के अंदर चल रही लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर पर नगर निगम का एक्शन देखने को मिला। एमसीडी की टीम ने सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली कई लाइब्रेरियों को सील कर दिया। खास तौर पर उन लाइब्रेरियों पर कार्रवाई की गई, जहां उपलब्ध जगह के मुकाबले छात्रों की संख्या काफी ज्यादा थी। तस्वीरों में दिखाई दे रही इस लाइब्रेरी में 150 से ज्यादा बच्चे पढ़ने के लिए आते थे। लेकिन सवाल ये है कि अगर अचानक आग लग जाए या कोई दूसरी आपात स्थिति पैदा हो जाए, तो इन बच्चों के बाहर निकलने का रास्ता क्या था? एमसीडी के मुताबिक, मौके पर फायर सेफ्टी और इमरजेंसी एग्जिट से जुड़े जरूरी इंतजाम नहीं मिले। ऐसे में बड़ी संख्या में छात्रों की मौजूदगी को गंभीर सुरक्षा खतरा माना गया। वहीं, इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर इतने लंबे समय से इन इमारतों के अंदर लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर कैसे संचालित हो रहे थे? जर्जर बिल्डिंग... सीमित जगह... बड़ी संख्या में छात्र... और सुरक्षा इंतजामों की कमी—इन सबके बीच नगर निगम ने अब सख्त रुख अपनाया है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के सख्त दिशा-निर्देशों के बाद नगर निगम के अधिकारी लगातार ऐसी जगहों का निरीक्षण कर रहे हैं जहां नियमों की अनदेखी कर बड़ी संख्या में छात्रों को बैठाया जा रहा है। नेहरू विहार में हुई ये कार्रवाई उसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। फिलहाल एमसीडी की कार्रवाई के बाद कई लाइब्रेरियों और कोचिंग सेंटर पर ताला लग चुका है लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या कार्रवाई सिर्फ हादसे के बाद होगी या ऐसी जर्जर इमारतों और असुरक्षित लाइब्रेरियों की पहले ही पहचान कर उन्हें सुरक्षित किया जाएगा?
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दौसा के छह नगर निकायों में पहला चरण, 80% से अधिक मतदान की उम्मीद

Jaipur, Rajasthan:दौसा जिले की 6 नगर निकायों में प्रथम चरण का मतदान जारी है मतदान को लेकर मतदाताओं में भारी उत्साह है उम्मीद है जिले में 80% से ऊपर मतदान पहुंचेगा जिला निर्वाचन अधिकारी डॉक्टर सौम्या झा लगातार सभी मतदान केंद्रों का दौरा कर रही है सुरक्षा के लिहाज से भी व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं बांदीकुई और भांडारेज में एक-एक मतदान केंद्रों पर ईवीएम मशीन में कुछ समय के लिए तकनीकी खराबी आई तो तत्काल प्रभाव से दूसरी मशीन लगाकर मतदान प्रक्रिया सुचारू की गई मतदान प्रक्रिया को लेकर हमने खास बातचीत की जिला निर्वाचन अधिकारी डॉक्टर सौम्या झा से क्या उन्होंने कहा यह आप सुनिए उन्हीं की जुबानी
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झारखंड में डॉप्लर रडार से मौसम सटीक भविष्यवाणी; रांची और देवघर में 2027 तक स्थापित

Ranchi, Jharkhand:भारत सरकार के मौसम विज्ञान केंद्र के डायरेक्टर जनरल डॉक्टर मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि झारखंड में अभी कोई रडार नहीं है। रांची में वह रडार लगेगा और 400 मीटर की दूरी में जो भी वेदर डेवलपमेंट होगा उसको डिटेक्ट किया जाएगा। इसके साथ-साथ देवघर में भी एक रडार लगेगा और रांची में भी डॉप्लर रडार 2027 अप्रैल तक एस्टेब्लिश हो जाएगा। दरअसल भारत सरकार के मौसम विज्ञान केंद्र के डायरेक्टर जनरल डॉ मृत्युंजय महापात्र,रांची आए थे। उन्होंने मौसम विज्ञान केंद्र रांची से जुड़े तमाम अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ एक बैठक की पूर्वानुमान में नई तकनीक के इस्तेमाल, के बारे में बातचीत हुई। दरअसल डॉप्लर मौसम रडार (Doppler Weather Radar - DWR) एक विशेष प्रकार का रिमोट सेंसिंग उपकरण है, जिसका उपयोग आसमान में मौजूद बारिश, बर्फ, ओलों और हवा की गति और दिशा का पता लगाने के लिए किया जाता है。
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जहानाबाद विधायक राहुल कुमार ने जदयू यात्रा पर तीखा हमला, NDA के भीतर घमासान दिखा

Jehanabad, Bihar:जहानाबाद के राजद विधायक राहुल कुमार ने जदयू के वरिष्ठ नेता संजय झा की हालिया यात्रा पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने इस यात्रा को पूरी तरह से नौटंकी करार देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य दोनों जगह एनडीए की सरकार है, फिर भी जदयू नेता किस बात के लिए यात्रा निकाल रहे हैं? दरअसल जहानाबाद सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राजद विधायक ने कहा, जब आपकी खुद की सरकार है, आप पूर्व में जल संसाधन मंत्री रह चुके हैं, तो फिर यह संघर्ष किसके खिलाफ है? अगर बराज तुड़वाना है या गाद की सफाई करवानी है, तो संजय झा को दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर बात करनी चाहिए। इस यात्रा से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रधानमंत्री मोदी आपकी बात नहीं सुन रहे हैं और केंद्र के संबंधित मंत्री काम करने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि संजय झा इस यात्रा के जरिए जनता को कोई संदेश देने के बजाय सरेआम जदयू की अंदरूनी सिरफुटौव्वल को जगजाहिर कर रहे हैं। पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए राजद विधायक ने कहा कि जब फरक्का बराज और गंगा जल संधि की बात चल रही थी, तब बिहार में लालू प्रसाद यादव की सरकार थी। उस समय तत्कालीन सिंचाई मंत्री जगदानंद सिंह ने मजबूती से बिहार का पक्ष रखा था और इसका पुरजोर विरोध किया था। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गंगा ड्रेसिंग के नाम पर अडानी ने कम से कम 1500 करोड़ रुपये का गोलमाल किया है। संजय झा जब जल संसाधन मंत्री थे, तब उन्होंने क्या किया? उन्हें इन सभी सवालों का जनता को जवाब देना चाहिए। राजद विधायक राहुल यही नही रुके आगे उन्होंने जदयू नेता नीरज कुमार और अनंत सिंह के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए राजद विधायक ने पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का प्रभाव कम होने के बाद से जदयू में सिर्फ वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। वहां कोई किसी की सुनने वाला नहीं है। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही दोनों गुटों को आपस में लड़वा रहा है। जदयू में अब किसी भी स्तर पर लोकतंत्र बाकी नहीं बचा है。
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पिथौरागढ़ जिला अस्पताल: बेड पर कुत्ता सोना प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

Pithoragarh, Uttarakhand:जिला अस्पताल मैं मरीज सो रहे जमीन पर कुत्ता सो रहा बेड पर बाइट मुख्य चिकित्साअधिकारी पिथौरागढ़ के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल से आई एक तस्वीर ने पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है... जो अस्पताल में मरीज इलाज और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, उसी अस्पताल के पेडियाट्रिक वार्ड के बेड पर एक कुत्ता आराम फरमाता नजर आया। जी हां... मरीज के लिए बने बेड पर कुत्ता! और हैरानी की बात ये है कि यह मामला यहीं खत्म नहीं होता। बी.डी. पांडे जिला अस्पताल में बेड की कमी के चलते मरीजों को बरामदे में सोना पड़ रहा है। दूसरी तरफ, वार्ड के अंदर बेड पर कुत्ते के सोने का वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि बीडीसी सदस्य रमेश धामी जब अपनी पत्नी के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे, तो उन्होंने इस अव्यवस्था का वीडियो बना लिया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो मामला प्रशासन तक पहुंच गया। इसके बाद जिलाधिकारी देर रात खुद अस्पताल पहुंचे और औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पेडियाट्रिक वार्ड में नाइट ड्यूटी को लेकर भी सवाल सामने आए। अस्पताल में डॉक्टरों की कमी की बात भी सामने आई है। हार्ट स्पेश्यलिस्ट और न्यूरो सर्जन नहीं होने के कारण गंभीर मरीजों को हल्द्वानी, देहरादून और दिल्ली तक जाना पड़ रहा है。 now सवाल सिर्फ ये नहीं कि अस्पताल के बेड पर कुत्ता कैसे पहुंचा... सवाल ये है कि जिस बेड पर किसी मरीज का इलाज होना चाहिए, वहां ऐसी लापरवाही की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? पिथौरागढ़ जिला अस्पताल की इस तस्वीर ने स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों पर बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है।
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कटनी में रेत स्टॉक गड़बड़ी: 1.46 लाख घनमीटर गायब, 27.44 करोड़ जुर्माना

Katni, Madhya Pradesh:कटनी; विस्टा सेल्स के रेत स्टॉक में भारी गड़बड़ी पोर्टल पर 1.46 लाख घनमीटर रेत, मौके पर 100 घनमीटर मिली कलेक्टर कोर्ट ने 27.44 करोड़ का जुर्माना लगाया कटनी जिले में खनिज संपदा के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर जिला प्रशासन ने कार्रवाई की है। कलेक्टर आशीष तिवारी के न्यायालय ने मेसर्स विस्टा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड (आनंद बिहार कॉलोनी, कटनी) पर 27 करोड़ 44 लाख 29 हजार 650 रुपए का जुर्माना लगाया है।यह कार्रवाई रेत के आधिकारिक स्टॉक में भारी फर्जीवाड़ा और गड़बड़ी पकड़े जाने पर की गई है। फर्म को यह राशि सरकारी खजाने में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। यह पूरी कार्रवाई मध्यप्रदेश खनिज नियम, 2022 के नियम 19 के तहत हुई है。 कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी ने बताया कि यह मामला 30 सितंबर 2023 की रात सेंड पोर्टल पर दर्ज रेत के आंकड़ों और मौके पर हुए सत्यापन के दौरान सामने आया। तहसील विजयराघवगढ़ के ग्राम पुरैनी में मेसर्स विस्टा सेल्स के लाइसेंस वाले स्थल (खसरा क्रमांक 43/1, 43/2 एवं 43/3, कुल रकबा 1.320 हेक्टेयर) की जांच की गई थी। जांच में पता चला कि सेंड पोर्टल पर रेत का स्टॉक 1,46,462 घनमीटर दर्ज था। जबकि, मौके पर सिर्फ 100 घनमीटर रेत मिली। इस तरह कुल 1,46,362 घनमीटर रेत का अंतर पाया गया। इतनी बड़ी मात्रा में गायब रेत के बारे में जब फर्म से वैध बिक्री या परिवहन से जुड़े ई-ट्रांजिट पास, बिल और रजिस्टर मांगे गए, तो फर्म कोई भी सही दस्तावेज नहीं दे पाई संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्म, मध्यप्रदेश के निर्देशों के अनुसार, अगर सेंड पोर्टल पर रेत का बड़ा स्टॉक दिखे और मौके पर वह गायब मिले, तो इसका मतलब है कि बिना किसी अभिवहन पास (TP) के रेत की कालाबाजारी या अवैध परिवहन हुआ है। कलेक्टर न्यायालय में सुनवाई के दौरान फर्म ने जांच प्रक्रिया में तकनीकी और प्रक्रिया संबंधी कमियों की दलीलें दीं। हालांकि, न्यायालय ने सभी मौखिक और दस्तावेजी सबूतों, मौके के पंचनामे और गवाहों के बयानों की जांच के बाद इन तर्कों को खारिज कर दिया। शासकीय भूमि पर किया रेत स्टॉक。 न्यायालय ने स्पष्ट टिप्पणी की कि 1.46 लाख घनमीटर जैसी विशाल मात्रा का गायब होना कोई मामूली प्रक्रियात्मक त्रुटि नहीं है। यदि यह रेत वैध तरीके से बेची गई होती, तो फर्म के पास इसके परिवहन के कानूनी साक्ष्य उपलब्ध होते, जिन्हें प्रस्तुत करने में फर्म पूरी तरह विफल रही。 बाइट आशीष तिवारी जिला कलेक्टर कटनी
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नई टिहरी में मेडिकल कॉलेज मांग पर विधायक दलों की वर्चस्व लड़ाई जारी

New Tehri, Uttarakhand:नई टिहरी में मेडिकल कॉलेज निर्माण की मांग को लेकर अनिश्चित कालीन धरना 25 वे दिन भी जारी है और वही क्रमिक अनशन को 9 दिन हो चुके है, आंदोलनोंकारियों का कहना है कि नरेंद्र नगर और टिहरी दोनों विधायक कांग्रेसी है और कांग्रेस से बीजेपी में आए है और बीजेपी में दोनों की वर्चस्व की लड़ाई चल रही है एक पहले बीजेपी में गए तो एक बाद में लेकिन मानसिकता दोनों की कांग्रेसी है और इसे कांग्रेस बीजेपी राजनीतिक मुद्दा बनाकर फुटबॉल बनाया जा रहा है और अब जनता सब समझ चुकी है और चुनाव में इसका परिणाम देखने को मिलेगा.
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