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मुंगेर विश्वविद्यालय में रबड़ खेती का पायलट शुरू, किसानों को रोजगार के अवसर
PKPrashant Kumar
Mar 16, 2026 13:53:55
Munger, Bihar
प्रशांत कुमार सिंह मुंगेर मुंगेर : मुंगेर विश्वविद्यालय रबड़ की खेती को बढ़ावा देगा. इसके तहत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में मुंगेर के बीआरएम कालेज में लगभग एक कट्ठे में रबड़ का पौधा लगाया गया है. यह पौधा लगभग पांच महीने में अच्छी बढ़ोतरी किया है. अगले मानसून में खगड़िया जिले के परबत्ता तथा खगड़िया में कुल दो एकड़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसे लगाया जाएगा. यदि इसका आशातीत परिणाम रहा तो इसकी खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा. विगत सितंबर 2025 में बीआरएम कालेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के शिक्षक संदीप टाटा की ओर से सेमीनार का आयोजन किया गया था. इसमें हिमालयन वन शोध संस्थान शिमला व रबड़ शोध संस्थान केरल के प्रतिनिधि शामिल हुए थे. इसमें मुंगेर में रबड़ की खेती का प्रयोग शुरू करने पर सहमति जताई गई. इसके बाद रबड़ शोध संस्थान और हिमालयन वन शोध संस्थान के बीच त्रिपक्षीय समझौता को अंतिम रूप दिया गया. डा. संदीप टाटा ने बताया कि वर्तमान में उन्होंने बीआरएम कालेज परिसर में हेबिया ब्राजिलियेंसिस का पौधा लगाया है. इसका बीज मेघालय से मंगवाया गया था. इसका उष्ठकटिबंधीय इस पेड़ लगभग 30 से 40 फीट लंबा होता है तथा सात वर्ष की अवस्था से लेकर 30 वर्ष तक इससे रबड़ का उत्पादन किया जा सकता है. पिछले पांच महीने में इसके पौधे में अच्छा विकास हुआ है. वहीं खगड़िया में रशियन डंडेलियन प्रजाति के रबड़ पौधे को प्रायोगिक तौर पर लगाया जाएगा. यह शाक प्रकृति का पौधा है. इसके जड़ से रबड़ प्राप्त किया जाता है तथा इसका जीवन चक्र छह महीने का होता है. हमारे यहां लगभग चार महीने ठंड पड़ती है. ऐसे में इसका उत्पादन आसानी से किया जा सकेगा. वहीं दूसरी ओर एक अन्य प्रजाति गुआयुली (पार्थेनियम अर्जेंटेटम) का भी प्रयोग किया जाएगा. यह कम पानी में भी विकसित होता है. उन्होंने बताया कि प्राकृतिक रबड़ मजबूत और टिकाऊ होते हैं. इसका उपयोग टायर निर्माण से लेकर चिकित्सा व रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में किया जाता है. वायुयान के टायर निर्माण में प्राकृतिक रबड़ का अधिक प्रयोग होता है, क्योंकि ये अपेक्षाकृत कम ज्वलनशील होते हैं. चिकित्सा क्षेत्र में दस्ताने, कैथरेटर सहित अन्य उपकरणों के निर्माण में इसका प्रयोग किया जाता है. इसके बीज पर प्रति एकड़ लगभग 15 हजार रुपये तथा उर्वरक व अन्य चीजों में लगभग 56 हजार रुपये प्रतिवर्ष खर्च आता है. बाइट : डा. संदीप टाटा मुंगेर विश्वविधालय के कुलपति प्रो संजय कुमार ने कहा कि मुंगेर विश्वविद्यालय पायलट प्रोजेक्ट के रूप में खगड़िया में रशियन डंडेलियन प्रजाति के रबड़ की खेती लगभग 2 एकड़ जमीन में शुरु करने जा रहा है. इसके लिए आवश्यक बीज, तकनीक आदि रबड़ शोध संस्थान केरल तथा हिमलायन वन शोध संस्थान शिमला के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा. इसके उत्पादन में सफलता मिलने पर इसे किसानों को हस्तांतरित किया जाएगा. इससे वे आर्थिक रूप से सबल हो सकेंगे. बाइट: प्रो. संजय कुमार, कुलपति, एमयू वही बीआरएम कॉलेज की बॉटनी की छात्रा ने बताया कि मुंगेर विश्वविद्यालय द्वारा रबड़ की खेती को बढ़ावा देने के लिए जिस तरह रिसर्च कर रही है की आने वाले समय में बिहार में रबड़ की खेती को बढ़ावा मिल सके , उन्होंने बताया की आने वाले समय मे बिहार का पहला मुंगेर जिला होगा जहाँ रबड़ की खेती के नाम से जाना जायेगा. उन्होंने बताया रबड़ की खेती करने से किसानो को इसका फायदा होगा और इससे आने वाले समय में रोजगार की सम्भावन बढ़ेगी. बाइट : राजनंदनी छात्रा बीआरएम कॉलेज मुंगेर बाइट : मौसम कुमारी छात्रा बीआरएम कॉलेज मुंगेर
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