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एनटीडी के शैल क्षेत्र में आयुर्वेदिक शिविर में 213 मरीजों को मुफ्त उपचार

Almora, Uttarakhand:एनटीडी के शैल क्षेत्र में जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी विभाग की ओर से वेदना management शिविर लगाया गया। सुबह 8 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक चले शिविर में 213 मरीजों ने निशुल्क उपचार कराया। मरीजों की जांच के साथ उन्हें निशुल्क दवाएं भी दी गईं। शिविर में पंचकर्म, मर्म चिकित्सा, अग्निकर्म, न्यूरोथेरेपी और अन्य उपचार की सुविधाएं दी गईं। इसके अलावा रक्त, शुगर, बीपी और ईसीजी की जांच भी की गई। छह विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित 22 सदस्यीय टीम ने मरीजों को उपचार और परामर्श दिया। जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. मुहम्मद शाहिद ने बताया कि शिविर का उद्देश्य लोगों को आयुर्वेदिक उपचार का लाभ पहुंचाना है। मरीजों ने शिविर में मिली जांच, उपचार और निशुल्क दवाओं की सुविधा को बेहतर बताया।
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कोटा निकाय चुनाव: बगावत से भाजपा-कांग्रेस के मुकाबले में संग्राम शुरू

Kota, Rajasthan:कोटा में नगर निकाय चुनाव को लेकर सोमवार को नामांकन के आखिरी दिन सियासी तस्वीर काफी हद तक साफ होती नजर आई। कलेक्ट्री परिसर सुबह से ही ढोल-नगाड़ों, नारेबाजी और समर्थकों की भीड़ से चुनावी अखाड़े में तब्दील रहा। भाजपा और कांग्रेस ने अंतिम समय तक अपने पत्ते खोले, तो टिकट मिलते ही प्रत्याशी समर्थकों के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंचे। पुलिस ने भीड़ को देखते हुए बैरिकेडिंग और अतिरिक्त जाब्ता तैनात किया। एडिशनल एसपी सिटी सुभाष चंद्र मिश्रा ने बताया कि पुलिस की निगरानी में नामांकन प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से जारी रही।
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करौली निकाय चुनाव: भाजपा-कांग्रेस सभापति उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल

Karauli, Rajasthan:करौली। निकाय चुनाव में नामांकन का आखिरी दिन, करौली शहर में भाजपा-कांग्रेस के संभावित सभापति प्रत्याशियों ने दाखिल किए नामांकन, भाजपा से वीरेंद्र शर्मा, पुष्पेंद्र सैनी, बनवारी शर्मा (हरदेनिया) ने भरा नामांकन, कांग्रेस से सुनील सैनी, हाजी रुकसार अहमद, अमीनुद्दीन खान और प्रेमसिंह माली ने भरा नामांकन, आवेदन के बाद विरोधियो से नाम वापसी को लेकर समझाइश के प्रयास शुरू, कलेक्ट्रेट में 3 बजे तक नामांकन प्रक्रिया रहेगी जारी, कल 1 सितम्बर को होगी नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी, रिटर्निंग अधिकारियों के समक्ष दाखिल किए जा रहे नामांकन,
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राजगढ़ नगरपालिका के लिए कांग्रेस ने 33 वार्डों से एक साथ नामांकन दाखिल किया

Churu, Rajasthan:पूर्व विधायक डॉ कृष्णा पूनिया के नेतृत्व में कांग्रेस के 33 वार्डो से प्रत्याशियों ने एक साथ नामांकन दाखिल किए. चूरू जिले के सादुलपुर मे नगरपालिका चुनाव को लेकर आज अंतिम दिन नामांकन दाखिल करने का क्रम जारी रहा. आज सादुलपुर पूर्व विधायक डॉ कृष्णा पूनिया के नेतृत्व में कांग्रेस के 33 प्रत्याशियों ने एक साथ नामांकन दाखिल किए. पूनिया के निवास स्थान से कांग्रेस के 33 प्रत्याशी और उनके समर्थक जुलूस के रूप में रवाना होकर नामांकन दाखिल करवाने पहुंचे. जुलूस में हजारों कांग्रेस कार्यकर्ता रेलवे स्टेशन, मोदी पेट्रोल पंप होते हुए मिनी सचिवालय पहुंच कर नामांकन दाखिल किए. पूनिया ने कहा कि देखकर लगता है नगरपालिका में कांग्रेस का बोर्ड बनेगा. उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में शुरू हुए विकास कार्य भाजपा सरकार में बंद पड़े हैं. भाजपा सरकार ने राजगढ़ नगरपालिका को भ्रष्टाचार का अड्डा बनाने का काम किया है. लोग रोजमर्रा के कार्यों के लिए नगरपालिका के चक्कर काट रहे हैं. पूरे राजस्थान में कांग्रेस के प्रति माहौल बना हुआ है और भाजपा सरकार की नाकामी के कारण जनता में रोष है. कांग्रेस पार्टी ने पार्टी के प्रति समर्पित और जिताऊ उम्मीदवारों को प्रत्याशी बनाया है; हम सभी एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे और राजगढ़ नगरपालिका में कांग्रेस का परचم लहरायेंगे जिससे शहर के विकास को गति मिलेगी और अधूरे विकास कार्य पूरे होंगे. राजगढ़ शहर की सफाई व्यवस्था, पेयजल, सड़क, बिजली आदि समस्याओं के निराकरण के लिए कांग्रेस प्रतिबद्ध है. बाइट डॉ कृष्णा पूनिया, पूर्व विधायक राजगढ़.
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दूदू-फागी नगरपालिका टिकट चयन में घमासान, बाबूलाल नागर का नेतृत्व हावी

Dudu, Rajasthan:दूदू और फागी नगरपालिका के टिकट चयन में मचा घमासान, दूदू नगरपालिका में पूर्व मंत्री बाबूलाल नागर के नेतृत्व को मिली तवज्जो लेकर फागी में पायलट गुट ने दिखाई ताकत। पूर्व मंत्री बाबूलाल नागर और जिला अध्यक्ष विधाधर सिंह चौधरी के बीच टिकट चयन को लेकर चल रहा था घमासान। फागी में भाजपा से पूर्व प्रधान रहे सुकुमार झंडा को मिली कांग्रेस से टिकट। विश्वसनीय सूत्रों ने दी जानकारी, फागी के पूर्व चेयरमैन और पूर्व प्रधान गुट के 4-5 दावेदारों को मिली टिकट। दूदू फागी नगरपालिका में अंतिम समय पर दावेदारों की नामांकन के लिए उमड़ी भीड़। रिटर्निग अधिकारी के पास जमा कराने पहुंचे नामांकन।
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जयपुर जलदाय विभाग 4 नए डिविजन बनाने का प्रस्ताव तैयार करेगा

Jaipur, Rajasthan:जयपुर में जलदाय विभाग बनाएगा 4 नए डिविजन, जल्द पीएचईडी सरकार को प्रस्ताव बनाकर भेजेगा जयपुर-जयपुर में बढ़ती आबादी के बाद अब पेयजल की डिमांड भी बढ़ती जा रही है. जिस कारण अब डिविजनों में काम का प्रेशर बढ रहा है. अब जलदाय विभाग नए डिवीजन बनाने पर विचार कर रहा है, ताकि पेयजल उपभोक्ताओं तक तय समय पर शुद्ध और स्वच्छ पानी पहुंच सके..आखिरकार पीएचईडी कहां कहां बना रहा नए डिवीजन..देखे इस रिपोर्ट में! 4 नए डिविजन बनाए जाएंगे- जयपुर में बढ़ती आबादी और पेयजल से जुड़े कामकाज के बढ़ते दायरे को देखते हुए जलदाय विभाग नए डिविजन बनाने की तैयारी कर रहा है। विभाग की ओर से 4 नए डिविजन बनाने को लेकर प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद जयपुर में जलदाय विभाग के प्रशासनिक ढांचे का विस्तार होगा। विभागीय स्तर पर जिन क्षेत्रों में नए डिवीजनों बनाए जाने पर विचार किया जा रहा है, उनमें जगतपुरा, विद्याधर नगर और जयसिंहपुरा खोर प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा एक अन्य नए डिवीजन को लेकर भी प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। अभी दूसरे डिवीजनों में शामिल हैं क्षेत्र- वर्तमान व्यवस्था के तहत जगतपुरा क्षेत्र जलदाय विभाग के प्रोजेक्ट और मालवीय नगर डिवीजन में आता है। वहीं विद्याधर नगर क्षेत्र फ़िलहाल झोटवाड़ा डिवीजन के अंतर्गत है। जयसिंहपुरा खोर का इलाका अभी ब्रह्मपुरी डिवीजन में शामिल है। जयपुर शहर के लगातार विस्तार और नई कॉलोनियों के विकसित होने के साथ इन क्षेत्रों में पेयजल की मांग भी बढ़ी है। ऐसे में मौजूदा डिवीजनों पर बढ़ते कार्यभार को कम करने और उपभोक्ताओं तक विभागीय सेवाएं अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाने के लिए नए डिवीजन बनाने पर विचार किया जा रहा है। प्रशासनिक कामकाज होगा आसान- नए डिवीजन बनने के बाद संबंधित क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं की मॉनिटरिंग, रखरखाव, शिकायतों के निस्तारण और नई परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है। साथ ही अधिकारियों के लिए क्षेत्रवार योजनाओं की निगरानी करना भी आसान होगा। फिलहाल विभाग नए डिवीजनों को लेकर प्रस्ताव तैयार कर रहा है। सरकार की मंजूरी के बाद ही नए डिवीजनों के गठन और उनके क्षेत्राधिकार को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी。 नोट-इस खबर की फीड 2 सी में अटैच है.जल भवन के फाइल शॉट्स भी लगाए।
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घड़साना में नामांकन अंतिम दिन भारी भीड़ के साथ प्रत्याशियों का उत्साह

Sri Ganganagar, Rajasthan:एंकर श्रीगंगानगर जिले के घड़साना नगर निकाय चुनाव के नामांकन के अंतिम दिन सोमवार को घड़साना तहसील परिसर के बाहर दावेदारों और समर्थकों की भारी भीड़ नजर आई। प्रत्याशी ढोल-नगाड़ों के साथ अपने समर्थकों के काफिले में नामांकन दाखिल करने पहुंचे। SDM कार्यालय में लगातार नामांकन फॉर्म जमा करवाए गए। नामांकन को लेकर तहसील परिसर में दिनभर सियासी हलचल बनी रही। प्रशासन की ओर से उम्मीदवारों की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गई। वहीं सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस ने तहसील के आसपास बैरिकेड्स लगाए। अंतिम दिन प्रत्याशी तथा समर्थकों में खासा चुनावी उत्साह देखने को मिला।
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अलवर नगर निगम चुनाव: टिकट नहीं मिलने पर बगावत की बढ़ती धार

Alwar, Rajasthan:अलवर नगर निगम चुनाव: टिकट मिला या नहीं, नामांकन भरने उमड़ी भीड़; बगावत के संकेत अलवर। नगर निगम चुनाव में वार्ड पार्षदों के नामांकन की अंतिम तारीख के चलते सोमवार को मिनी सचिवालय में प्रत्याशियों की भारी गहमागहमी देखने को मिली। राजनीतिक दलों से हरी झंडी मिलने वाले प्रत्याशीों के साथ-साथ टिकट नहीं मिलने वाले दावेदार भी नामांकन दाखिल करने पहुंचे। वहीं, कई ऐसे कार्यकर्ता भी नामांकन भरने पहुंचे, जिन्हें पार्टी से टिकट कटने का अंदेशा है। ऐसे दावेदारों के तेवरों से चुनाव में बगावत के संकेत भी नजर आ रहे हैं। मिनी सचिवालय में नामांकन के लिए कतार में लगे प्रत्याशियों से जब टिकट मिलने को लेकर सवाल किया गया तो अधिकांश ने टिकट नहीं मिलने की बात कही। ऐसे में माना जा रहा है कि या तो पार्टी के भीतर टिकट वितरण को लेकर नाराजगी है या फिर अंतिम समय में पार्टी ने सिंबल जमा कराये । नामांकन की अंतिम तारीख पर राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रत्याशियों के साथ-साथ बागी तेवर वाले दावेदारों की सक्रियता ने नगर निगम चुनाव का मुकाबला और दिलचस्प बना दिया है।
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उत्तराखंड में ग्लेशियर लेक के खतरे के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम तैनात

Dehradun, Uttarakhand:स्पेशल खबर एंकर नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद उत्तराखंड में भी ग्लेशियर लेक का खतरा चिंता बढ़ा रहा है। उत्तराखंड में जल्द ही ग्लेशियर लेक के विस्तृत अध्ययन के लिए देश के कई संस्थानों की विशेषज्ञ टीमें ग्राउंड जीरो पर काम शुरू करेंगी। ग्लेशियर लेक को लेकर देखिए यह स्पेशल रिपोर्ट ग्राफिक्स उत्तराखंड में लगभग 450 के करीब ग्लेशियर लेक हैं । इनमें से 13 ग्लेशियर लेक को A ,B,C कैटेगरी में रखा गया है अति संवेदनशील A कैटेगरी की झील हैं। A कटेगरी में आने वाली प्रमुख झील 1 वसुधारा झील - चमोली 2 मांबाग झील - धारचूला पिथौरागढ़ 3 स्यूंतियानकित्त झील - धारचूला पिथौरागढ़ 4 प्यूंगरू झील - धारचูला धारचूला पिथौरागढ़ 5 अनाम झील - जोशीमठ चमोली B कैटेगरी में थोड़ा संवेदनशील झील शामिल है 1 - सरस्वती ताल - चमोली 2 - केदारताल - उत्तरकाशी C कैटेगरी में टिहरी पिथौरागढ़ बागेश्वर की कुछ ग्लेशियर लेके शामिल है जो कम संवेदनशील हैं। वीओ नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा को लेकर यह कहा जा रहा है कि इसका कारण GLOF यानी ग्लेशियर लेके आउटबर्स्ट फ्लड है। ग्लेशियर की झील के अचानक फटने से कई गुना तेजी के साथ बड़ा मलबा और बोल्डर निचले इलाकों की ओर आते हैं जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। इन खतरनाक झीलों के प्राकृतिक बांध या मोरन टूटने से अचानक नीचे की और घाटियों में भारी बाढ़ आ जाती है जिसकी वजह से बड़ा नुकसान कुछ ही सेकंड में हो जाता है। उत्तराखंड में 400 से ज्यादा ग्लेशियर लेके हैं। जिनमें से 13 संवेदनशील कैटेगरी में आती हैं। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ विनीत गहलोत ने बताया है कि उत्तराखंड में 13 में से 5 ग्लेशियर लेक बेहद संवेदनशील हैं। जिनके अध्ययन के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। इन पर अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाना बेहद जरूरी है जिसके लिए पिछले कई सालों से प्रयास चल रहे हैं। उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन विभाग भी काफी गंभीर है। उत्तराखंड स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के Ceo और सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने इस मामले में जानकारी दी है की 8 सितंबर से 13 में से दो संवेदनशील जिलों के अध्ययन के लिए एक्सपर्ट की टीम भेजी जाएगी। उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन का कहना है की ग्लेशियर में अर्ली वार्निंग सिस्टम के लिए NDMA से स्पेशल पैकेज भी दिया गया है जिसके जरिए इस तरह की झील की मॉनिटरिंग के लिए अत्याधुनिक संसाधन भी इंस्टॉल करने पर कार्य किया जा रहा है। बहुत ज्यादा ऊंचाई और तापमान इस तरह की तकनीक के लिए हालांकि एक बड़ी चुनौती हैं। उत्तराखंड के सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया है की ग्लेशियर लेक के अध्ययन के लिए वाडिया संस्थान, बीरबल साहनी संस्थान , CWC, सीडेक, और कई अन्य संस्थाओं के विशेषज्ञ इन खतरनाक ग्लेशियर लेक के अध्ययन के लिए ग्राउंड जीरो पर जाएंगे और भविष्य के खतरे को लेकर भी इस पर कार्य किया जा रहा है।
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सेवानिवृत्त ASI ने SSP कार्यालय के बाहर ज़हरीला पदार्थ निगलकर आत्महत्या का प्रयास किया

Khanna, Punjab:ਖੰਨਾ SSP ਦਫ਼ਤਰ ਦੇ ਬਾਹਰ ਰਿਟਾਇਰਡ ASI ਨੇ ਕੀਤੀ ਆਤਮਹੱਤਿਆ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼, ਜ਼ਹਿਰੀਲਾ ਪਦਾਰਥ ਖਾਧਾ ਖੰਨਾ ਸਰਕਾਰੀ ਹਸਪਤਾਲ ਦਾਖ਼ਲ, ਪੁਲਿਸ ਨੇ ਰਿਟਾਇਰਡ ASI ਖ਼ਿਲਾਫ਼  ਦਰਜ ਕੀਤਾ ਮੁਕੱਦਮਾ  ਖੰਨਾ ਦੇ SSP ਦਫ਼ਤਰ ਦੇ ਬਾਹਰ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਪੁਲਿਸ ਦੇ ਰਿਟਾਇਰਡ ASI ਅਮਰਜੀਤ ਸਿੰਘ ਵੱਲੋਂ  ਜ਼ਹਿਰੀਲਾ ਪਦਾਰਥ ਨਿਗਲ ਕੇ ਆਤਮਹੱਤਿਆ ਕਰਨ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰਨ ਦਾ ਮਾਮਲਾ ਸਾਹਮਣੇ ਆਇਆ ਹੈ। ਜ਼ਹਿਰੀਲਾ ਪਦਾਰਥ ਖਾਣ ਤੋਂ ਬਾਅੰਦ ਉਸ ਦੀ ਹਾਲਤ ਵਿਗੜ ਗਈ, ਜਿਸ ਉਪਰਨ ਉਸ ਨੂੰ ਖੰਨਾ ਦੇ ਸਰਕਾਰੀ ਹਸਪਤਾਲ ਵਿੱਚ ਦਾਖ਼ਲ ਕਰਵਾਇਆ ਗਿਆ。 ਜਾਣਕਾਰੀ ਅਨੁਸਾਰ ਰਿਟਾਇਰਡ ASI ਅਮਰਜੀਤ ਸਿੰਘ ਆਪਣੇ ਮਾਪਿਆਂ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਪੁਲਿਸ ਕਾਰਵਾਈ ਕਰਵਾਉਣ ਦੀ ਮੰਗ ਕਰ ਰਿਹਾ ਸੀ। ਉਸਦਾ ਆਪਣੇ ਪਿਤਾ ਨਾਲ ਜਾਇਦਾਦ ਅਤੇ ਪੈਸਿਆਂ ਦੇ ਲੈਣਦੇਣ ਦਾ ਮਾਮਲਾ ਦੱਸਿਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਇਸ ਮਾਮਲੇ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਉਹ ਪੁਲਿਸ ’ਤੇ ਦਬਾਅ ਬਣਾ ਰਿਹਾ ਸੀ। ਇਸੇ ਦੌਰਾਨ SSP ਦਫ਼ਤਰ ਦੇ ਬਾਹਰ ਉਸ ਨੇ ਜ਼ਹਿਰੀਲਾ ਪਦਾਰਥ ਨਿਗਲ ਲਿਆ ਅਤੇ ਆਤਮਹੱਤਿਆ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕੀਤੀ。 ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ ਪੁਲਿਸ ਨੇ ਇਸ ਘਟਨਾ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਰਿਟਾਇਰਡ ASI ਅਮਰਜੀਤ ਸਿੰਘ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਹੀ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਧਾਰਾਵਾਂ ਤਹਿਤ ਮਾਮਲਾ ਦਰਜ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਪੁਲਿਸ ਵੱਲੋਂ ਉਸ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ BNS ਦੀਆਂ ਧਾਰਾਵਾਂ 226, 270, 351 ਅਤੇ 132 ਲਗਾਈਆਂ ਗਈਆਂ ਹਨ。 ਪੁਲਿਸ ਅਨੁਸਾਰ ਧਾਰਾ 226 ਕਾਨੂੰਨੀ ਅਧਿਕਾਰ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਰਹੇ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਮਜਬੂਰ ਜਾਂ ਰੋਕਣ ਲਈ ਆਤਮਹੱਤਿਆ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰਨ ਨਾਲ ਸਬੰਧਤ ਹੈ। ਧਾਰਾ 270 ਜਨਤਕ ਪਰੇਸ਼ਾਨੀ, ਧਾਰਾ 351 ਅਪਰਾਧਿਕ ਧਮਕੀ, ਜਦਕਿ ਧਾਰਾ 132 ਸਰਕਾਰੀ ਮੁਲਾਜ਼ਮ ਨੂੰ ਉਸਦੀ ਡਿਊਟੀ ਨਿਭਾਉਣ ਤੋਂ ਰੋਕਣ ਲਈ ਹਮਲਾ ਜਾਂ ਅਪਰਾਧਿਕ ਬਲ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨ ਨਾਲ ਸਬੰਧਤ ਹੈ。 ਦੱਸਿਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ ਕਿ ਅਮਰਜੀਤ ਸਿੰਘ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਪਹਿਲਾਂ ਵੀ DDR ਦਰਜ ਹੋ ਚੁੱਕੀਆਂ ਹਨ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਉਸ ਵੱਲੋਂ ਆਪਣੇ ਮਾਪਿਆਂ ਅਤੇ ਪੁਲਿਸ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਨੂੰ ਕਥਿਤ ਤੌਰ ’ਤੇ ਆਤਮਹੱਤਿਆ ਕਰਨ ਦੀਆਂ ਧਮਕੀਆਂ ਦੇ ਕੇ ਜਾਇਦਾਦ ਵਿੱਚ ਆਪਣਾ ਹਿੱਸਾ ਦੇਣ ਲਈ ਦਬਾਅ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਦੋਸ਼ ਲਗਾਏ ਗਏ。 ਫਿਲਹਾਲ ਪੁਲਿਸ ਵੱਲੋਂ ਮਾਮਲੇ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ ਅਤੇ ਰਿਟਾਇਰਡ ASI ਦਾ ਇਲਾਜ ਖੰਨਾ ਦੇ ਸਰਕਾਰੀ ਹਸਪਤਾਲ ਵਿੱਚ ਚੱਲ ਰਿਹਾ ਹੈ。
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Marathi Language Bias Accusations Hit BJP Amid Maratha-OC Dispute

Ratnagiri, Maharashtra:भाजप मराठाद्वेष्टा तर आहेच, पर मराठी भाषाद्वेष्टाही;.. रिक्षाचालकांच्या मराठ्या अटीला स्थगिती दिल्यावरून भास्कर जाधव यांचा मुख्यमंत्र्यांवर घणाघात.. भाजपला मित्रपक्षांचे ओझे.. भाजपा की जरूरत अब खत्म हो गई है जिससे उन्हें मित्र पक्षों का बोझ महसूस होने लगा है; उन्हें अब मित्र नहीं बल्कि केवल सत्ता चाहिए है.. जानबूझकर वाद निर्माण करने का प्रयास.. राज्य में मराठा बनाम ओबीसी का वाद हेतुपुरस्सर और जाणीवपूर्वक लाया जा रहा है उसका आरोप. मराठी भाषेचा द्वेष.. मुख्यमंत्री ने संबंधित मंत्रियों से कोई चर्चा नहीं करते हुए परप्रांतीय रिक्षाचालकों को मराठी बोलने के नियम से 1 वर्ष के लिए स्थगिती दी; इससे सरकार का मराठी द्वेष स्पष्ट दिखता है.. अत्यंत संतापजनक निर्णय.. रिक्षाचालकां को 'हाँ-ना', 'कहाँ जाना है', 'भाडे किती' और 'धन्यवाद' जैसे मूल मराठी शब्द बोलने ही होते हैं; उन सरल शब्दों को भी स्थगिती देना छत्रपती शिवाजी महाराज, फुले-शाहू-आंबेडकर और संतों के महाराष्ट्र में अत्यंत संतापजनक और निषेधार्ह है..
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