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मधेपुरा के नूरुल हसन DSP बनकर गणतंत्र दिवस परेड की प्रेरणा बने
PKPRASHANT KUMAR1
Jan 26, 2026 11:17:21
Madhepura, Bihar
77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर बी एन मंडल स्टेडियम, मधेपुरा में आयोजित मुख्य समारोह के दौरान आयोजित भव्य परेड लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इस शानदार परेड की अगुवाई 68वीं बैच के बिहार पुलिस सेवा (बीपीएस) अधिकारी नूरुल हसन ने परेड कमांडर के रूप में की। उनकी बुलंद आवाज, सधा हुआ नेतृत्व और अनुशासित मार्च-पास्ट ने उपस्थित दर्शकों को राजधानी दिल्ली के राजपथ पर होने वाली परेड की याद दिला दी।
मुख्य समारोह में मधेपुरा के प्रभारी मंत्री लेसी सिंह ने ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी अभिषेक रंजन, पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह सहित जिले के तमाम वरीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक मौजूद रहे।
बेहतर साज-सज्जा, चमचमाती वर्दी, कंधों पर सितारे और विभिन्न बटालियनों की सुसंगठित टुकड़ियों के साथ परेड ने समारोह को गौरवपूर्ण बना दिया। दर्शकों ने एक स्वर में कहा कि लंबे समय बाद मधेपुरा में इस level की भव्य और अनुशासित परेड देखने को मिली है।
परेड कमांडर नूरुल हसन की सफलता की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मूल रूप से पटना निवासी नूरुल हसन की दसवीं तक की पढ़ाई देहरादून में हुई, जबकि बारहवीं की शिक्षा उन्होंने हैदराबाद से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने मरीन इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर लगभग छह वर्षों तक नौकरी की। हालांकि मन में सिविल सेवा में जाने का सपना जीवित रहा。
बीपीएससी 67वीं परीक्षा में उन्हें 399वीं रैंक प्राप्त हुई थी, जिसमें उन्हें आरओ का पद मिल रहा था, लेकिन बेहतर लक्ष्य के लिए उन्होंने उस सेवा को ज्वाइन नहीं किया। कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ 68वीं बीपीएससी परीक्षा में उन्होंने 15वीं रैंक हासिल की और डीएसपी के पद पर चयनित हुए। वर्तमान में वे मधेपुरा में प्रशिक्षु डीएसपी के रूप में कार्यरत हैं।
एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले नूरुल हसन के पिता रेलवे में कार्यरत हैं और माता गृहिणी हैं। उनके नाम बिहार का दो बड़ा पदक है। सीएम पिस्टल फॉर बेस्ट प्रॉबिशनर तथा डीजीपी अवॉर्ड फॉर बेस्ट आउटडोर जैसे सम्मान दर्ज हैं। उनके परिवार में दो भाई हैं, जिनमें एक खिलाड़ी हैं और दूसरा मर्चेंट नेवी में कार्यरत है। नूरुल हसन स्वयं दो बच्चों के पिता हैं और उनकी पत्नी पेशे से डॉक्टर हैं।
परेड की सराहना पर प्रतिक्रिया देते हुए नूरुल हसन ने कहा, “कार्य में निष्ठा और ईमानदारी हो तो परिणाम हमेशा बेहतर होते हैं। मेहनत करने से कभी हार नहीं होती। आज अगर हमारे परेड की तारीफ हो रही है तो इसके लिए मैं ईश्वर का धन्यवाद करता हूं।”
उनकी यह उपलब्धि न केवल मधेपुरा जिले बल्कि पूरे बिहार के युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है कि समर्पण, अनुशासन और निरंतर प्रयास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
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