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ISI हैंडलरों से जुड़े जासूसी नेटवर्क गाजियाबाद में गिरफ्तार: चोरी SIM और लाइव CCTV
RRRaju Raj
Mar 23, 2026 10:16:02
Ghaziabad, Uttar Pradesh
गाजियाबाद जासूसी नेटवर्क सूत्रों के मुताबिक
जासूसी के लिए चोरी की SIM का इस्तेमाल करता था गाजियाबाद में पकड़ा गया जासूसी नेटवर्क... अबतक 200 से ज्यादा महत्वपूर्ण फोटो वीडियो पाकिस्तान में बैठे हैंडलर को भेजी जा चुकी हैं... 100 से ज्यादा सिम का इस्तेमाल किया गया...तकरीबन 15 लाख के आसपास की रकम इनके खातों में हैंडलर ने ट्रांजेक्शन की थी...
सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से जुड़ा एक जासूसी मॉड्यूल जो सुरक्षा एजेंसियों की नज़र से बचने के लिए संवेदनशील जगहों से CCTV फुटेज की लाइव-स्ट्रीमिंग करने के लिए चोरी की मोबाइल SIM कार्ड का इस्तेमाल करता था...
गाजियाबाद SIT के मुताबिक ISI के हैंडलर्स ने पश्चिमी भारत में काम कर रहे मॉड्यूल के सदस्यों को निर्देश दिया था कि वे चोरी की SIM कार्ड खरीदें और उन्हें महत्वपूर्ण जगहों के पास लगे लाइव-स्ट्रीमिंग CCTV कैमरों में लगा दें...
ये प्लानिंग इस तरह से बनाई गई थी कि अगर कैमरे पकड़े भी जाते तो जांच करने वाले उन डिवाइस के ज़रिए असली ऑपरेटिव तक नहीं पहुंच पाते...
पाकिस्तान में बैठे हैंडलर की पहचान सरफराज सरदार के तौर पर हुई है। वह VPN सेवाओं का इस्तेमाल करके अपनी पहचान छिपाते हुए अलग-अलग कम्युनिकेशन ऐप्स के ज़रिए मॉड्यूल के करीब 40 सदस्यों के संपर्क में रहता था...
अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क को छोटे-छोटे अलग-अलग ग्रुप में बांटा गया था ताकि इसके पकड़े जाने का खतरा कम से कम हो। दो हफ़्तों तक संवेदनशील जगहों की लाइव-स्ट्रीमिंग होती रही...
जांच में पता चला है कि आरोपियों ने इन रणनीतिक जगहों से लाइव-स्ट्रीमिंग फुटेज भेजने में कामयाबी हासिल कर ली थी, जिनमें ये जगहें शामिल हैं
ये आरोपी दिल्ली कैंटोनमेंट और सोनीपत रेलवे स्टेशन में सीसीटीवी कैमरा ऑपरेट कर चुके थे
सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा एजेंसीों द्वारा इस नेटवर्क का भंडाफोड़ किए जाने से पहले करीब दो हफ़्तों तक लगातार निगरानी फुटेज भेजी जाती रही...
सोहेल नाम के मुख्य आरोपी ने कथित तौर पर चोरी की SIM कार्ड करीब 1 हजार कीमत पर खरीदीं जिन्हें उसने मॉड्यूल के कई सदस्यों के बीच बांट दिया। इनका इस्तेमाल सिर्फ़ निगरानी और बातचीत के मकसद से किया गया।
पुलिस का मानना है कि चोरी की SIM का इस्तेमाल इसलिए किया गया था ताकि बातचीत के ऐसे चैनल बनाए जा सकें जिनका पता न लगाया जा सके。
सूत्रों के मुताबिक जांच से पता चलता है कि सोहेल को पैसे का लेन-देन करने के एक ऐसे सिस्टम के ज़रिए पैसे मिलते थे जिसमें कई लेवल होते थे, ताकि इसका पता न चल सके। छोटी-छोटी रकम कई बैंक खातों के ज़रिए भेजी जाती थी, और वह बिचौलियों का इस्तेमाल करके पैसे निकालता था... तकरीबन 15 लाख के आसपास रकम हासिल किए जाने की आशंका है जो बढ़ भी सकती है
पैसों के लेन-देन में मदद करने वाले खाताधारकों को करीब 30% कमीशन दिया जाता था...
अधिकारी इसे पैसे के सोर्स को छिपाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक आम गुपचुप फंडिंग तरीका बताते हैं।
एक दूसरे से सम्पर्क के लिए मॉड्यूल ने एनॉनिमाइज़्ड नेटवर्क के ज़रिए डाउनलोड किए गए एन्क्रिप्टेड एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया। एजेंसियों को डिजिटल फुटप्रिंट्स का पता लगाने से रोकने के लिए VPN मास्किंग और डिस्पोजेबल SIM कार्ड का इस्तेमाल किया गया。
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