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रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में मोबाइल बैन: जंगल की शांति के नाम पर सख्ती लागू
ACAshish Chauhan
Jan 31, 2026 10:32:11
Jaipur, Rajasthan
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देशभर के टाइगर रिजर्व में मोबाइल पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है. राजस्थान के रणथम्भौर में भी मोबाइल पर बैन लगा दिया है. जंगल में मोबाइल पर बैन लगाना... सही या गलत... देखिए इस खास रिपोर्ट में! टाइगर रिजर्व में मोबाइल पर बैन- रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में सफारी के दौरान कोर जोन में अब पर्यटक मोबाइल फोन का उपयोग नहीं कर सकेंगे. इसके चलते अब सफारी शुरू होने से पहले पर्यटकों के मोबाइल फोन जमा कराने की जिम्मेदारी गाइड की होगी. सभी पर्यटकों के मोबाइल फोन निर्धारित बॉक्स में रखे जाएंगे. रणथम्भौर के साथ साथ सरिस्का टाइगर रिजर्व में भी मोबाइल बैन की तैयारी की जा रही है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि इको टूरिज्म को बड़े पैमाने पर होने वाले सामान्य पर्यटन जैसा नहीं माना जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा है कि बाघ अभयारण्य में कोर जोन में मोबाइल के उपयोग ही अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. इसके अलावा कोर्ट ने उन अभ्यारणों को भी निर्देश दिए है जहां सड़कें कोर क्षेत्र से गुजरती है. ऐसे क्षेत्रों में रात के समय यातायात पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा. केवल एंबुलेंस और आपातकालीन वाहनों को ही इसमें छूट मिलेगी. हालांकी रामगढ विषधारी और मुकुंदरा में मोबाइल पर बैन नहीं रहेगा, क्यों कि वहां कोर जोन नहीं है. क्यों पड़ी पाबंदी की जरूरत? माना जा रहा है कि मोबाइल फोन के बढ़ते क्रेज ने जंगल में ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति पैदा कर दी थी. जैसे ही बाघ दिखता है, रील बनाने की होड़ में सफारी गाड़ियां एक ही जगह जमा हो जाती हैं, जिससे पर्यटकों की सुरक्षा खतरे में बढ़ जाती है. सेल्फी और वीडियो के लिए बार-बार फ्लैश और शोर से जानवर हिंसक या तनावग्रस्त हो सकते हैं। फोटो क्लिक करने के कारण गाइड और ड्राइवर भी नियमों की अनदेखी करने लगते थे. कई बार राजस्थान के जंगलों से भी टाइगर के आक्रामक होने जैसी तस्वीरें सामने आई थीं. कई बार तो लोग जंगल के बीच रील बनाते हुए भी दिखाई दिए. जंगल की शांति भी भंग हो रही थी. रणथम्भौर से पहले देश के कई टाइगर रिजर्व में जिसमें जिम कार्बेट, एमपी के टाइगर रिजर्व में मोबाईल फोन बैन हो चुका है. लेकिन मोबाइल जिंदगी का हिस्सा है. वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट धर्मेंद्र खांडल का कहना है कि इसका ज्यादा प्रभाव पड़ेगा नहीं, उल्टा लोग परेशान होंगे. सेल्फी लेने के लिए टाइगर नजदीक जाते हैं तो उसे दूसरी तरह से रोका जा सकता है. जानकारों का कहना है कि कोर जोन में अधिकतर सरकारी गाड़ियां पर्यटन के लिए घूमती हुई दिखती हैं. जबकि सरकारी गाड़ियों का काम मॉनिटरिंग का होता है. जबकि अधिकतर पर्यटक तो कोर जोन तक पहुंच ही नहीं पाते. बाइट-धर्मेंद्र खांडल, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट 2 सी में अटैच है. पहले भी कोशिश थी- वन विभाग ने पहले गाइड और ड्राइवरो के लिए मोबाइल बैन किया था, लेकिन भारी विरोध के कारण कदम पीछे खींचने पड़े थे. हालांकि, इस बार आदेश सुप्रीम कोर्ट के हवाले से आया है. इसलिए इसे सख्ती से लागू किया जा रहा है. अब पर्यटकों को कैमरा ले जाने की अनुमति तो होगी, लेकिन मोबाइल को जेब या बैग से बाहर निकालने की मनाही रहेगी. हालाँकि वन विभाग को ये फैसला केवल टाइगर रिजर्व ही नहीं बल्कि लैपर्ड सफारी के लिए भी ठोस कदम उठाने होंगे, क्योंकि इसी तरह की भीड़ जयपुर के झालाना लेपर्ड सफारी में भी दिखाई देती है. इसी कारण लेपर्ड लगातार शहर की ओर भटक रहे हैं.
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