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केरोसिन वापसी: LPG संकट के बीच राजस्थान सहित राज्यों को आवंटन
DGDeepak Goyal
Mar 13, 2026 11:47:33
Jaipur, Rajasthan
कभी rasoee की पहचान रहा केरोसिन… फिर LPG आने के बाद धीरे-धीरे घरों से गायब हो गया। राजस्थान खुद को केरोसिन फ्री राज्य घोषित करने वाला देश के शुरुआती राज्यों में शामिल रहा है। लेकिन हालात ऐसे बने हैं कि अब वही केरोसिन फिर चर्चा में है। एलपीजी की किल्लत, बढ़ती पैनिक बुकिंग और गैस एजेंसियों के बाहर लगती लंबी कतारों के बीच केंद्र सरकार ने राज्यों को केरोसिन का आवंटन कर दिया है। राजस्थान को भी करीब 2928 किलोलीटर केरोसिन मिला है। अब सवाल यह है कि क्या गैस संकट के बीच रसोई में फिर केरोसिन की वापसी होने वाली है…देखिए रिपोर्ट।
कभी जिस केरोसिन को छोड़कर देश एलपीजी की तरफ बढ़ा था…वही केरोसिन अब फिर चर्चा में है। रसोई गैस की किल्लत और लंबी कतारों के बीच केन्द्र सरकार ने एक बार फिर पुराने ईंधन का सहारा लेने की तैयारी की है। खाड़ी देशों में जारी युद्ध से ईंधन आपूर्ति पर पड़े असर के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने पूरे देश में 48 हजार 240 किलोलीटर केरोसिन का आवंटन अलग-अलग राज्यों को किया है। ताकि जरूरत पड़ने पर आम लोगों को राहत दी जा सके। सरकार रसोई गैस की किल्लत और पैनिक बुकिंग से बिगड़ी आपूर्ति व्यवस्था के बीच एक पुराने विकल्प की ओर लौटने पर विचार कर रही है। खाड़ी देशों में जारी युद्ध के कारण पेट्रोलियम ईंधन की आपूर्ति प्रभावित होने के बाद कई राज्यों में एलपीजी की उपलब्धता दबाव में आ गई है। ऐसे हालात में केन्द्र सरकार ने राज्यों को केरोसिन का आवंटन कर दिया है, ताकि जरूरत पड़ने पर इसे वैकल्पिक ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके। राजस्थान को भी केरोसिन का आवंटन मिला है। केन्द्र सरकार की ओर से प्रदेश के लिए करीब 2928 किलोलीटर केरोसिन तय किया गया है। हालांकि फिलहाल यह तय करना राज्य सरकार के हाथ में है कि इस स्टॉक को उठाकर वितरण करना है या नहीं और अगर करना है तो किस श्रेणी के उपभोक्ताओं को कितनी मात्रा में दिया जाएगा। केन्द्र की गाइडलाइन के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि यही राजस्थान कभी “केरोसिन फ्री स्टेट” बनने की मिसाल देता था। लेकिन अब एलपीजी संकट के बीच वही केरोसिन फिर से सिस्टम में लौटने की तैयारी में है। केन्द्र सरकार से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक 7,932 किलोलीटर के साथ उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा केरोसिन का आवंटन किया है। जबकि दूसरे नंबर पर बिहार का है जहां 4452 किलोलीटर है। वहीं तीसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल में 4164 किलोलीटर, चौथे नंबर पर महाराष्ट्र 3,744 और पांचवे नंबर पर तमिलनाडु को 3228 किलोलीटर आवंटन किया गया है। जबकि सबसे कम 12 किलोलीटर लक्ष्यद्वीप में आवंटित किया है।
केरोसिन के वितरण को लेकर भी केन्द्र सरकार ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राजस्थान में अब सरकार विचार करेगी कि उसे केरोसिन का स्टॉक उठाकर वितरण करना है या नहीं। अगर करना है तो कैसे, किन कैटेगरी के लोगों को कितना लीटर आवंटित किया जाएगा। केन्द्र सरकार की जो गाइडलाइन है उसमें ग्रामीण अंचल में रहने वाले लोगों को प्राथमिकता से आवंटन के लिए कहा है। राज्यों से कहा गया है कि इसका वितरण पूरी निगरानी में किया जाए ताकि केरोसिन बाजार में गलत तरीके से न पहुंचे और पेट्रोल-डीजल में मिलावट के लिए इस्तेमाल न हो। राज्यों को यह भी कहा गया है कि यदि वे केरोसिन वितरण का निर्णय लेते हैं तो उन्हें केन्द्र के साथ समन्वय कर ग्रामीण क्षेत्रों में वितरण के लिए स्थान चिन्हित करने होंगे। आवंटित स्टॉक का उठाव 45 दिनों के भीतर करना होगा। हालांकि यह स्पष्ट है कि इसे स्थायी समाधान के तौर पर नहीं बल्कि अस्थायी विकल्प के रूप में ही देखा जा रहा है। गौरतलब हैं की पिछले कुछ दिनों से एलपीजी की कमी और अचानक बढ़ी बुकिंग के कारण जयपुर सहित प्रदेश के कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। कई जगहों पर रसोई गैस की कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आई हैं। हालात को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने फूड डिपार्टमेंट के अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं और हर जिले में विशेष जांच टीमें बनाई गई हैं, जो जमाखोरी और अवैध बिक्री पर नजर रख रही हैं। इसके साथ ही घरेलू उपभोक्ताओं तक नियमित आपूर्ति बनाए रखने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। शहरों में अब 25 दिन और ग्रामीण इलाकों में 45 दिन बाद ही गैस बुकिंग की अनुमति दी जा रही है, ताकि अनावश्यक बुकिंग और जमाखोरी को रोका जा सके।
बहरहाल, कुल मिलाकर, एलपीजी सप्लाई पर बने दबाव के बीच सरकार फिलहाल हर विकल्प खुला रखकर हालात संभालने की कोशिश में है। एक दौर में जिस केरोसिन को खत्म करने की दिशा में कदम उठाए गए थे, वही अब आपात विकल्प के तौर पर फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि अंतिम फैसला राज्य सरकारों को करना है कि वे इस आवंटन को उठाकर आम उपभोक्ताओं तक राहत पहुंचाती हैं या एलपीजी आपूर्ति सामान्य होने का इंतजार करती हैं। फिलहाल लोगों की नजर इस बात पर है कि रसोई गैस की किल्लत कब तक पूरी तरह खत्म हो पाती है.
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