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गैस सिलेंडर डिलीवरी में देरी, शहर में बड़ी कतारें और ऑनलाइन बुकिंग फेल
DGDeepak Goyal
Mar 12, 2026 12:31:51
Jaipur, Rajasthan
एंकर-रसोई गैस का सिलेंडर…जो आमतौर पर घर की रसोई तक बिना शोर-शराबे के पहुंच जाता था…आज वही सिलेंडर शहर की सड़कों पर दिखाई दे रहा है। कहीं लोग धूप में लंबी कतारों में खड़े हैं…तो कहीं बाइक और कारों पर खाली सिलेंडर बांधकर एजेंसियों तक पहुंच रहे हैं। तेल कंपनियां कह रही हैं कि गैस की कोई कमी नहीं है… लेकिन हकीकत ये है कि ऑनलाइन बुकिंग बंद होने और डिलीवरी में देरी ने लोगों को सीधे एजेंसियों तक ला खड़ा किया है। आइए दिखाते हैं…गैस सिलेंडर को लेकर शहर में कैसा माहौल बन गया है।
वीओ-1-सिलेंडर की तलाश में शहरवासी....ये तस्वीरें किसी राशन की लाइन की नहीं हैं…ये लाइनें हैं रसोई गैस सिलेंडर के लिए। शहर में आज का नजारा यही बता रहा था कि गैस सिर्फ एक सिलेंडर नहीं, बल्कि हर घर की रसोई की जरूरत है और जब वही जरूरत डगमगाती है तो शहर की सड़कों पर भी उसकी बेचैनी साफ दिखाई देने लगती है। दरअसल शहर में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग को लेकर अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिल रहा है। तेल कंपनियों के ऑनलाइन सिस्टम में तकनीकी दिक्कत आने के कारण बड़ी संख्या में उपभोक्ता गैस बुकिंग नहीं कर पा रहे हैं। जो उपभोक्ता सालों से सिर्फ मोबाइल पर बटन दबाकर गैस बुक करते थे, वो आज गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं। कहीं लोग हाथों में बुकिंग नंबर लिए खड़े थे, तो कहीं दोपहिया और कारों पर खाली सिलेंडर बांधकर लोग खुद गैस लेने निकल पड़े। तेल कंपनियां भले ही कह रही हों कि घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बता रही है। ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम ठप होने से उपभोक्ता दिनभर गैस एजेंसी के चक्कर काटते रहे। इंटर बुकिंग गैप के 25 दिन बाद भी गैस सिलेंडर की बुकिंग नहीं हो रही है.....ऑनलाइन बुकिंग नहीं होने और पहले से बुक किए गए सिलेंडर की डिलीवरी में देरी के कारण शहर की कई गैस एजेंसियों पर भारी भीड़ उमड़ रही हैं। स्थिति को संभालने के लिए कुछ एजेंसियों को अपने शटर तक बंद रखने पड़े, जबकि कुछ जगहों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बाउंसर्स तक तैनात करने पड़े। कई उपभोक्ता मोबाइल ऐप, वेबसाइट और फोन के जरिए गैस बुकिंग करने की कोशिश करते रहे, लेकिन सर्वर काम नहीं करने से बुकिंग नहीं हो सकी। हालात ये हैं कि कई एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं। धूप में खड़े लोग सिर्फ इस उम्मीद में इंतजार कर रहे हैं कि किसी तरह उनका सिलेंडर मिल जाए। दिलचस्प बात यह है कि जिन लोगों ने कभी गैस एजेंसी का रुख नहीं किया…वो भी आज खाली सिलेंडर लेकर एजेंसी पहुंच रहे हैं। शहर में बाइक, स्कूटर और कारों पर सिलेंडर लादकर ले जाते लोगों के दृश्य आम हो गए हैं।
वॉक थ्रू—दीपक गोयल
बाइट-उपभोक्ता
बाइट-उपभोक्ता
बाइट-कविता, गैस एजेंसी संचालक
वीओ-2-उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्होंने एक सप्ताह पहले गैस बुकिंग करा दी थी, लेकिन अब तक सिलेंडर घर तक नहीं पहुंचा। कुछ लोगों के मोबाइल पर डिलीवरी का मैसेज तक आ गया, लेकिन सिलेंडर अभी तक उनके घर की दहलीज तक नहीं पहुंचा है। डिलीवरी में हो रही इसी देरी के कारण एजेंसियों पर लोगों की भीड़ और बढ़ गई है। कई उपभोक्ता एजेंसियों पर मैन्युअल बुकिंग कराने की उम्मीद लेकर पहुंचे थे, लेकिन एजेंसी संचालकों ने साफ कर दिया कि अब मैन्युअल बुकिंग पूरी तरह बंद है और केवल ऑनलाइन माध्यम से ही बुकिंग की व्यवस्था है। एजेंसी संचालकों के अनुसार उपभोक्ता मोबाइल ऐप, वेबसाइट या डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बुकिंग कर सकते हैं। लेकिन ऑनलाइन बुकिंग में दिक्कत के कारण बड़ी संख्या में लोग सीधे एजेंसी पहुंच रहे हैं। एजेंसी संचालकों का कहना है कि मौजूदा समय में सबसे बड़ी समस्या सिलेंडरों की आवक कम होना है। इसके चलते डिलीवरी में देरी हो रही है और उपभोक्ताओं को इंतजार करना पड़ रहा है। जबकि तेल कंपनियों की ओर से यह भी निर्देश दिए गए हैं कि जिन उपभोक्ताओं की बुकिंग पहले से हो चुकी है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जाए। कई घरों में सिलेंडर खत्म होने के कारण रसोई का काम प्रभावित होने लगा है।
बाइट-उपभोक्ता
बाइट-उपभोक्ता
बाइट-उपभोक्ता
बाइट-उपभोक्ता
बाइट-उपभोक्ता
बहरहाल, कागज़ों में गैस की कोई कमी नहीं… लेकिन ज़मीन पर हालात कुछ और कहानी सुना रहे हैं। कहीं सर्वर ठप है, कहीं बुकिंग अटकी है, तो कहीं डिलीवरी का इंतज़ार लंबा हो गया है। नतीजा ये कि जो सिलेंडर कभी घर की दहलीज़ तक पहुंचता था, उसे लेने के लिए अब लोग खुद गाड़ियों में खाली सिलेंडर लेकर एजेंसियों की लाइन में खड़े हैं। अब सवाल यही है…क्या यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी है या सप्लाई चेन की हकीकत धीरे-धीरे सामने आ रही है....फिलहाल प्रशासन और तेल कंपनियां भरोसा दिला रही हैं कि गैस की कोई कमी नहीं है…लेकिन एजेंसियों के बाहर लगी लंबी कतारें कुछ और ही कहानी बयान कर रही हैं।
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