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भारत-यूएस व्यापार समझौता: किसानों के भविष्य और ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा सवाल
DKDAVESH KUMAR
Feb 16, 2026 08:36:17
New Delhi, Delhi
रणदीप सिंह सुरजेवाला
भारतीय हितों की रक्षा की बजाय एक समझौता कर लिया है जो किसानो की रोजी रोटी पर हमला है
भारत में बड़ी मात्रा में मक्का पैदा होता है अब अमरीका को भारत जैसा बड़ा देश चाहिए, अब भारत में अमरीका मक्का बेचेगा तो हमारे किसानो का क्या होगा
ज्वार उत्पादन 52 लाख मीट्रिक टन है भारत में, अमरीका में 87 लाख मीट्रिक टन उत्पादन किया अब वो भारत बेचेगे
सोयाबीन का उत्पादन भारत में 153 लाख मीट्रिक टन हमने पैदा किया, 12 करोड़ मीट्रिक टन अमरीका करता है अब वो भारत में बेचेगा, हमारे किसान कहा जायगे क्या करेंगे
कपास व्यापार समझौते का असर इसपर भी पड़ेगा, अमरीका ने हाल ही में बांग्लादेश से समझौता किया, इसका असर भी देखने को मिलेगा
भारत सबसे बड़ा कपड़ा उत्पादक है चीन के बाद हिंदुस्तान है हम सबसे ज़्यादा तादाद में कपास पैदा करते है उस भी असर पड़ेगा
भारत ने अमरीका से आयात किया है कपास, हिंदुस्तान के किसान का क्या होगा,
बांग्लादेश को हम कपास निर्यात करते है अब वो अमरीका से मगवाएगे तो भारत के किसानो का होगा भारत को नुकसान होगा
इन्होंने लिखा हम अमरीका से खाद्य और अतिरिक्त उत्पाद भी मगवाएगे, यह बताए अतिरिक्त क्या है
भारत की ऊर्जा सुरक्षा से खिलवाड़
6 फरवरी के व्यापार समझौते के बाद 6 फरवरी को ही अमेरिका के राष्ट्रपति ने भारत पर लगे 25 प्रतिशत पैनल्टी टैरिफ आदेश में लिखा कि भारत ने अमेरिका से वादा किया है कि वह अब रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा। चौंकानेवाली बात यह है कि उसी आदेश के सेक्शन 4 में अमेरिका के राष्ट्रपति ने लिखा कि वह भारत की निगरानी करेगा और अगर भारत ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रूस से कच्चा तेल खरीदा तो फिर भारत पर पैनल्टी दोबारा लगा देगा।
9 फरवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा जारी फैक्ट शीट में भी भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल न खरीदने का वादा करने बारे शर्त दोहराई।
अब 14 फरवरी, 2026 को 'म्यूनिख सिक्योरिटी काँफ्रेंस' में अमेरिका के विदेश मंत्री, श्री मार्को रुबियो ने अंतर्राष्ट्रीय पटल पर कहा कि भारत ने रूस से कच्चा तेल न खरीदने का सशर्त वादा अमेरिका से किया है।
अमेरिका पहले ही मई, 2024 में पाबंदी लगा चुका है कि भारत ईरान से भी कच्चा तेल नहीं खरीद सकता, जिसे मोदी सरकार ने स्वीकार कर लिया है। ज्ञात रहे कि ईरान भारत को भारतीय रुपयों में कच्चा तेल बेचता था。
भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक है, जो हमारी ऊर्जा सुरक्षा का हिस्सा है。
भारत 40 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से व 11 प्रतिशत कच्चा तेल ईरान से आयात करता आया है, यानी अपनी कुल जरूरत का लगभग 51 प्रतिशत 。
फरवरी, 2022 से जनवरी, 2026 के बीच भारत ने रूस से 168 बिलियन अमेरिकी डॉलर (₹15.24 लाख करोड़) का कच्चा तेल आयात किया और सस्ती दरों के चलते लगभग 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर (₹1.81 लाख करोड़) की बचत हुई।
अब भारत को व्यापार समझौते के तहत अमेरिका से कच्चा तेल खरीदना पड़ेगा, जिसमें रूस और ईरान के बराबर कम कीमतों का कोई आश्वासन नहीं है।
क्या यह सीधे-सीधे भारत की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता से समझौता नहीं?
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