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दिल्ली सरकार गणतंत्र दिवस पर कैदियों के लिए विशेष माफी की घोषणा
TCTanya chugh
Jan 25, 2026 11:00:14
New Delhi, Delhi
गणतंत्र दिवस–2026 के अवसर पर दिल्ली सरकार द्वारा कैदियों के लिए विशेष माफी (स्पेशल रिमिशन) की घोषणा
यह माफी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 473 (जो कि दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 432 के अनुरूप है) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा गृह मंत्रालय की अधिसूचना संख्या U-11011/2/74-UTL (i) दिनांक 20.03.1974 के साथ पठित होकर प्रदान की जा रही है।
यह माफी उन दोषसिद्ध कैदियों पर लागू होगी, जिन्हें दिल्ली के आपराधिक न्यायालयों द्वारा दंडित किया गया है तथा जो 26.01.2026 को दिल्ली की केंद्रीय जेलों में या दिल्ली के बाहर स्थित जेलों में सजा काट रहे हैं, बशर्ते वे निर्धारित शर्तों को पूरा करते हों, दिल्ली के गृह मंत्री श्री आशीष सूद ने बताया
65 वर्ष से अधिक आयु के कैदियों एवं महिला कैदियों के लिए माफी की सीमा (Scale of Remission) इस प्रकार होगी—
10 वर्ष से अधिक की सजा पर: 90 दिन
5 वर्ष से अधिक एवं 10 वर्ष तक की सजा पर: 60 दिन
1 वर्ष से अधिक एवं 5 वर्ष तक की सजा पर: 30 दिन
1 वर्ष तक की सजा पर: 20 दिन।
अन्य सभी कैदियों के लिए माफी की सीमा इस प्रकार होगी—
10 वर्ष से अधिक की सजा पर: 60 दिन
5 वर्ष से अधिक एवं 10 वर्ष तक की सजा पर: 45 दिन
1 वर्ष से अधिक एवं 5 वर्ष तक की सजा पर: 30 दिन
1 वर्ष तक की सजा पर: 15 दिन।
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह विशेष माफी दिल्ली जेल नियम, 2018 के अंतर्गत पहले से देय माफी के अतिरिक्त होगी। जो दोषसिद्ध कैदी 26.01.2026 को पैरोल या फरलो पर होंगे, वे भी इस माफी के पात्र होंगे, बशर्ते उक्त अवधि के दौरान उनके विरुद्ध कोई कदाचार दर्ज न हुआ हो।
यह लाभ केवल उन्हीं कैदियों को दिया जाएगा, जिन्हें पिछले एक वर्ष अर्थात् 26 जनवरी 2025 से 25 जनवरी 2026 की अवधि के दौरान किसी भी जेल अपराध के लिए दंडित नहीं किया गया हो।
गृह मंत्री ने आगे बताया कि कुछ श्रेणियों के कैदी इस विशेष माफी के पात्र नहीं होंगे। इनमें वे कैदी शामिल हैं जिन्हें मृत्युदंड दिया गया हो या जिनकी मृत्युदंड की सजा को आजीवन कारावास में परिवर्तित किया गया हो; निरुद्ध व्यक्ति (Detenues), सिविल कैदी अथवा सरकारी बकाया की अदायगी से बचने के अपराध में बंद कैदी; एनडीपीएस अधिनियम, पॉक्सो अधिनियम, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम अथवा जासूसी से संबंधित अपराधों में दोषसिद्ध कैदी; कोर्ट-मार्शल द्वारा दोषसिद्ध, न्यायालय की अवमानना के दोषी, या भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के अंतर्गत महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में दोषसिद्ध कैदी; परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) एवं अन्य निर्दिष्ट सिविल अपराधों में दोषसिद्ध कैदी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचित “अपवाद” श्रेणियों में आने वाले मामले, जिनमें संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची-I में उल्लिखित विषयों से संबंधित अपराध शामिल हैं, भी इस माफी के दायरे से बाहर होंगे।
गृह मंत्री ने दोहराया कि दिल्ली सरकार सुधारात्मक न्याय के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध है, साथ ही सार्वजनिक सुरक्षा तथा संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों के कठोर अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए भी संकल्पबद्ध है。
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