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हरियाणा में MSP खरीद नहीं कराने की भाजपा की नई साजिश उजागर
VRVIJAY RANA
Mar 29, 2026 13:17:00
Chandigarh, Chandigarh
‘चोर-दरवाजे’ से MSP पर गेहूँ - सरसों न खरीदने की ‘नायब’ साजिश!
पेचीदगी, अड़ंगे, प्रक्रियागत बाधा पैदा करते जाओ - खरीद टारगेट घटाओ - उठान रुकवाओ - स्टोरेज खत्म करवाओ - यही है भाजपाई षडयंत्र!
खेती-विरोधी तीन काले कानून मजबूरन वापस लेने के बाद, अब केंद्र और हरियाणा की भाजपा सरकारें हर रोज चोर दरवाजे से फसलों की MSP खत्म करने की साजिश कर रही हैं।
हरियाणा सरकार का ताजातरीन ‘तुगलकी फरमान’ असल में रबी फसल, विशेषतः गेहूँ व सरसों की खरीद में अनर्गल पेचीदगियाँ, जबरन अड़ंगे व प्रक्रियागत बाधाएं पैदा कर किसान की फसल न खरीदने का घिनौना व क्रूर षडयंत्र है। आईये, इसे सिलसिलेवार देखेंः-
1. गेहूँ खरीद की पहली शर्त यह लगा दी गई है कि किसान अपने ट्रैक्टर ट्रॉली में फसल लाएगा, उस ट्रैक्टर ट्रॉली पर साफ अक्षरों में नंबर लिखा होगा, मंडी गेट पर उस ट्रैक्टर ट्रॉली तथा नंबर की फोटो ली जाएगी, उस फोटो को सरकार के पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा तथा साफ फोटो व नंबर अपलोड होने के बाद ही किसान को गेटपास जारी होने की प्रक्रिया आगे चल पाएगी। हरियाणा सरकार द्वारा जारी कागजात संलग्न A1 व A2 हैं।
अब सीधा सवाल है किः-
(I) क्या हर किसान के पास अपना ट्रैक्टर ट्रॉली की मल्कियत है। यदि नहीं, तो फिर वह क्या करेगा?
(II) किसान अगर अलग-अलग बार अलग-अलग ट्रैक्टर ट्रॉली लाएगा (जो वह किराए पर करके लाएगा), तो क्या पोर्टल हर बार एक ही किसान के द्वारा लाई गई अलग-अलग ट्रैक्टर ट्रॉली व अलग-अलग नंबर को स्वीकार करेगा?
(III) हरियाणा सरकार किसान को कमर्शियल ऑपरेशन के लिए, यानी किराए पर फसल ढुलाई के लिए ट्रैक्टर ट्रॉली को अनुमति ही नहीं देती। तो ऐसे में वह किसान, जो ट्रैक्टर ट्रॉली का मालिक नहीं है, वह फसल कैसे लाएगा? क्या किराए के ट्रैक्टर ट्रॉली का हरियाणा सरकार चालान नहीं करेगी? क्या पूरे हरियाणा के ट्रैक्टर ट्रॉली को फसल ढुलाई का परमिट देगी?
(IV) किसान मंडी में अपनी फसल बेचने को लाता है, तो फिर ट्रैक्टर ट्रॉली की फोटो, रजिस्ट्रेशन, फोटो अपलोड आदि पेचीदगियाँ पैदा क्यों की जा रही हैं? क्या इससे फसल बेचने में बाधा नहीं पड़ने वाली?
2. भाजपा सरकार ने दूसरी शर्त लगाई है कि किसान द्वारा अनाज मंडी में बेचने के लिए फसल लाने का समय सुबह 6 बजे से शाम 8 बजे तक ही होगा और उसके बाद कोई गेटपास जारी नहीं किया जाएगा।
किसान अपनी गेहूँ की फसल ज्यादातर कंबाईंड हार्वेस्टर से कटवाता है, जो दिनरात चलती हैं और अलग-अलग समय उपलब्ध होती हैं। कटाई के सीज़न में पूरी रात फसल मंडी में आती रहती है। अब सीधा सवाल है किः-
(I) सायं 8 बजे से सुबह 6 बजे तक मंडी में फसल लाने पर लगाई गई पाबंदी से क्या किसान को भयंकर समस्या पैदा होने वाली नहीं?
(II) क्या इससे मंडी के बाहर लंबी-लंबी लाईनें नहीं लग जाएंगी?
(III) वैसे तो एक ही साधन दिनरात कई-कई चक्कर लगाकर काटी जाने वाली सारी फसल एक से दो दिन में मंडी में ले आता है, पर इस पाबंदी के बाद क्या खेत से मंडी तक फसल लाने का खर्चा कई गुना नहीं बढ़ जाएगा और क्या फसल लाने के लिए एक से ज्यादा साधन चाहिएंगे और लंबी लाईनों के चलते फसल से भरे हुए ट्रैक्टर ट्रॉली को घंटों और दिनों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा?
3. भाजपा सरकार ने तीसरी शर्त यह लगाई है कि ‘मेरी फसल, मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर फसल रजिस्ट्रेशन करने वाले हर किसान को ट्रैक्टर ट्रॉली के साथ बायोमेट्रिक अंगूठा लगाने के लिए स्वयं मंडी में आना पड़ेगा या फिर वह तीन व्यक्तियों को नॉमिनी लगा सकता है।
(I) क्या भाजपा सरकार को यह भी समझ नहीं कि जब तक पूरी फसल की कटाई न हो जाए, किसान खेत में रहता है और परिवारजन या कोई साथी मजदूर साथ-साथ फसल को मंडी में ले जाता रहता है। अगर हर बार किसान को फसल कटाई बंद कर मंडी में जाना पड़ेगा, तो फसल की कटाई कैसे होगी और क्या यह बगैर कारण के अनर्गल बाधा पैदा करने का तरीका नहीं है?
(II) क्या सरकार यह नहीं जानती कि खेत में काम करने वाले व्यक्ति का अंगूठा हमेशा समय के साथ घिसकर धुंधला हो जाता है व हर बार बायोमेट्रिक में पेचीदगियाँ पैदा होती हैं? क्या बुजुर्गों की पेंशन में यह हर रोज देखने को नहीं मिलता? तो फिर अगर बायोमेट्रिक का अंगूठा धुंधला हुआ, तो फसल कैसे दिखेगी?
(III) अगर इंटरनेट खराब हो जाए, जो अक्सर होता है, तो फिर पोर्टल पर बायोमेट्रिक का और वाहन की फोटो کا सत्यापन कैसे हो पाएगा?
4. क्या यह सही नहीं कि हरियाणा में आधे से ज्यादा किसान भूमि के मालिक ही नहीं हैं। और वो पट्टे पर जमीन लेकर खेती करते हैं। जब किसान ने जमीन मालिक को पट्टा दे रखा होगा और वह जमीन मालिक किसी कारणवश फसल बिक्री के समय मंडी में न आए, तो उस भूमिहीन गरीब किसान का क्या होगा और वह अपनी फसल कैसे बेचेगा? अगर पट्टे पर जमीन लेने वाले किसान ने अपनी फसल एक महीने के अंतराल में 15 अलग-अलग बार बेची, और जमीन मालिक नहीं आया, तो क्या फसल बिक्री हो पाएगी?
5. हरियाणा की भाजपा सरकार ने एक अड़चन और पैदा कर दी है व हिदायत दी है कि जब आउटपास (Exit Pass) कटेगा, तो मंडी से बाहर फसल तब जाएगी, जब 3 Authorities के दस्तखत होंगे - सचिव, मार्केट कमिटी, खरीद एजेंसी के अधिकारी व उठान करने वाला ट्रांसपोर्टर।
क्या इससे मंडी से फसल उठान में पेचीदगियाँ पैदा नहीं होंगी? अगर इनमें से एक भी व्यक्ति मौजूद न हो, या फिर दस्तखत न करे, तो मंडी से फसल उठान हो ही नहीं पाएगा, और अगर फसल उठान नहीं हुआ, तो और फसल मंडी में आ ही नहीं पाएगी। नतीजा यह है कि खरीद की पूरी प्रक्रिया ही रुक जाएगी।
6. क्या उपरोक्त पेचीदगियों, अड़ंगों व जटिलताओं को इसलिए पैदा किया जा रहा है कि किसान की फसल MSP पर खरीदी ही न जाए?
o क्या इसी वजह से भाजपा सरकार ने हरियाणा से गेहूँ की फसल खरीद का टारगेट भी 80 लाख टन से घटाकर 72 लाख टन कर दिया है?
o क्या यह सही नहीं कि हरियाणा में 9.50 लाख किसानों ने 48.12 लाख एकड़ रबी फसल के लिए पंजीकरण करवाया है? तो फिर फसल खरीद का टारगेट 80लाख टन से घटाकर 72 लाख टन करने का क्या औचित्य है?
o क्या यह सही नहीं कि हरियाणा में रबी सीज़न में कुल 2.80 लाख गाँठ बारदाने की जरूरत है, पर सिर्फ 1.20 लाख गाँठ ही उपलब्ध है? क्या यह सही है कि 1.60 लाख गाँठ बारदाने की कमी है, जिसका कोई इंतजाम नहीं? क्या यह षडयंत्र भी इसलिए किया जा रहा है कि फसल खरीदनी न पड़े?
o क्या यह सही नहीं कि ‘मेरी फसल, मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर दर्ज किसानों के 20 लाख एकड़ रकबे के डेटा का मिसमैच है? जब खरीद 1 अप्रैल से शुरू है, तो यह मिसमैच ठीक क्यों नहीं किया जा रहा? क्या यह भी फसल न खरीदने का षडयंत्र है।
क्या यह सारी पेचीदगियाँ इसलिए पैदा की जा रही हैं ताकि गेहूँ की फसल खरीदनी ही ना पड़े。
यह साफ है कि मोदी व नायब सैनी सरकारें गेहूँ व सरसों की रबी फसलों को MSP पर न खरीदने का षडयंत्र कर रही हैं। हरियाणा के किसानों की ओर से इसे चेतावनी मानें कि अगर फौरन इन पेचीदगियों, अड़ंगों और प्रक्रियागत पैदा की गई बाधाओं को दूर नहीं किया गया, तो हरियाणा के किसान व खेत मजदूर को सड़कों पर आकर अपने अधिकारों की रक्षा करनी होगी。
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