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హయత్ నగర్: సెల్ టవర్ నిర్మాణాన్ని అడ్డుకున్న బీజేపీ కార్పొరేటర్
Hyderabad, Telangana:హయత్ నగర్ డివిజన్ పరిధిలోని ద్వారకమయి నగర్ లో సెల్ టవర్ నిర్మాణాన్ని డివిజన్ బీజేపీ కార్పొరేటర్ కళ్లెం నవజీవన్ రెడ్డి అడ్డుకున్నారు. స్థానికుల సమాచారం మేరకు ఘటనా స్థలాన్ని పరిశీలించిన కార్పొరేటర్ స్థానికలతో కలిసి నిరసన వ్యక్తం చేశారు. సెల్ టవర్ నుంచి వచ్చే రేడియేషన్ వల్ల స్థానిక పిల్లలకు, వృద్ధులకు హాని జరిగే అవకాశం ఉందన్నారు. సెల్ టవర్ నిర్మాణాన్ని ఆపాలని టౌన్ ప్లానింగ్ ఏసీపీకి ఫిర్యాదు చేశారు.0
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सूरजपुर के करोड़ों के ऑडिटोरियम की बदहाली: बिजली, सुरक्षा सब फेल
Surajpur, Chhattisgarh:एंकर -- विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच कितना फासला होता है, इसका एक उदाहरण सूरजपुर में देखने को मिल रहा है, शहर के रिंग रोड पर करीब साढ़े छह करोड़ रुपये की लागत से बना एक आलीशान ऑडिटोरियम आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है, डीएमएफ मद से तैयार यह इमारत जो कभी जिले की शान बढ़ाने और भव्य आयोजनों के लिए बनाई गई थी, आज तक किसी विभाग को हैंडओवर नहीं हो पाई है, विडंबना यह है कि आम जनता के लिए बना यह शानदार भवन अब कला और संस्कृति का केंद्र बनने के बजाय, चोरों की ऐशगाह में तब्दील होता जा रहा है,0
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LG संधू: दिल्ली पुलिस विजन के अनुरूप सुरक्षा और नागरिक भरोसे पर केंद्रित
Noida, Uttar Pradesh:दिल्ली | दिल्ली पुलिस कमिश्नरेट दिवस के मौके पर, दिल्ली के LG तरनजीत सिंह संधू ने कहा, "मैं इस खास दिन पर कमिश्नर और सभी सीनियर पुलिस अधिकारियों को दिल से बधाई देता हूँ आज कई पुलिस अधिकारियों को वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। दिल्ली पुलिस भारत के सबसे अहम संस्थानों में से एक है। मैंने आज इस बात पर ज़ोर दिया कि देश के लिए प्रधानमंत्री के विज़न को पूरा करने में दिल्ली पुलिस अहम भूमिका निभायेगी। साथ ही, मैंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि पुलिस फ़ोर्स को नागरिकों पर केंद्रित होना चाहिए जहाँ भी सुरक्षा और जनता के भरोसे की ज़रूरत हो, वहाँ दिल्ली पुलिस को अहम भूमिका निभानी चाहिए और मुझे पूरा भरोसा है कि वे ऐसा करेंगे."0
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झांसी रेलवे में पत्थरबाजी: आरपीएफ ने पाँच Trेनों में पत्थर फेंकने वाले अर्जुन पाल को गिरफ्तार
Jhansi, Uttar Pradesh:झांसी के रेलवे सुरक्षा बल की टीम ने ट्रेनों पर पत्थर फेंककर यात्रियों की جان जोखिम में डालने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपी ने पांच अलग-अलग ट्रेनों पर पथराव करने की बात कबूल की है। आरपीएफ टीम ने आरोपी को चिरगांव रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया है। पिछले दिनों झांसी के मुस्तरा रेलवे स्टेशन के पास से गुजर रही बरौनी-ग्वालियर एक्सप्रेस ट्रेन पर पत्थर फेंका गया था। इस घटना में ट्रेन के एक कोच का शीशा टूट गया था। सूचना मिलने के बाद आरपीएफ ने रेलवे एक्ट के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।0
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पंचकूला में मानसून की पहली बारिश से जलभराव की चिंता, प्रशासन की तैयारी पर सवाल
Panchkula, Haryana:पंचकूला में मानसून की पहली बारिश ने एक बार फिर प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोल दी है। 1 जुलाई की सुबह से ही आसमान में काले बादल छाए रहे और इसके बाद शहर के कई इलाकों में बारिश शुरू हो गई। बारिश के साथ ही सेक्टर-6 पंचकूला का नजारा भी सामने आया, जहां पीएमडीए की ओर से ड्रेनेज सिस्टम की सफाई का काम किया जा रहा था。 सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह सफाई मानसून शुरू होने से पहले नहीं होनी चाहिए थी? अब जबकि बारिश ने दस्तक दे दी है, तब प्रशासन हरकत में आता दिखाई दे रहा है। अगर समय रहते नालों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई पूरी कर ली जाती तो शायद जलभराव जैसी समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता था। मौसम विभाग पहले ही हरियाणा समेत उत्तर भारत में मानसून के सक्रिय होने और आगामी दिनों में लगातार बारिश की संभावना जता चुका है। ऐसे में पंचकूला की स्थिति को लेकर लोगों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान कई इलाकों में जलभराव की समस्या देखने को मिलती है, जिससे यातायात प्रभावित होता है और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अब देखना होगा कि प्रशासन मानसून के इस सीजन में कितनी तैयारी के साथ काम करता है और लगातार बारिश होने की स्थिति में पंचकूला को जलभराव से बचा पाता है या नहीं। फिलहाल शहरवासियों की निगाहें प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर टिकी हुई हैं, क्योंकि मानसून की शुरुआत के साथ ही सिस्टम की असली परीक्षा शुरू हो चुकी है।0
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चंडीगढ़ के स्कूलों को बम धमकी: ईमेल में सीएम हाउस का उल्लेख, रेलवे ट्रैक भी धमकी पर
Noida, Uttar Pradesh:चंडीगढ़ एक बार फिर चंडीगढ़ के स्कूलों को बम से उड़ने की धमकी ईमेल के जरिए भेजी गई धमकी ईमेल में सीएम हाउस हरियाणा का भी जिक्र इसके अलावा अंबाला दिल्ली रेलवे ट्रैक को भी बम से उड़ाने की धमकी0
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राजस्थान में मानसून इस सप्ताह प्रवेश करेगा, पांच साल की देरी खत्म
Jaipur, Rajasthan:राजस्थान में इसी सप्ताह मानसून का प्रवेश संभव, अबकी बाद देरी से पहुच रहा मानसून जयपुर-राजस्थान में बहुत जल्द मानसून की एंट्री हो सकती है. माना जा रहा है कि इसी सप्ताह राजस्थान में मानसून प्रवेश कर सकता है. लेकिन इस साल पिछले सालों के मुकाबले मानसून देरी से आ रहा है. कब आएगा मानसून? राजस्थान में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने पिछले पांच साल का रिकॉर्ड तोड़ते सबसे लंबा इंतजार कराया. साल 2021 से 2025 के दौरान मानसून कभी सामान्य समय से पहले तो कभी तय तिथि पर प्रदेश में पहुंच गया था, लेकिन इस बार जुलाई शुरू होने के बावजूद मानसून राजस्थान की सीमा तक नहीं पहुंच सका. मौसम विभाग के अनुसार इसी सप्ताह मानसून प्रवेश कर सकता है. इसके साथ ही जुलाई से ही बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद जताई गई है. मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार वर्तमान में मानसून की उत्तरी सीमा गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों से होकर गुजर रही है. अगले तीन से चार दिनों में इसके आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनने की संभावना है. यदि मौसम की स्थिति अनुकूल रही, तो दक्षिण-पूर्वी राजस्थान से मानसून की औपचारिक एंट्री हो सकती है. पांच साल में पहली बार इतनी देरी- पिछले पांच साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो साल 2021 में मानसून सामान्य तिथि से करीब आठ दिन पहले 18 जून को राजस्थान पहुंच गया था. साल 2022 में मानसून ने 30 जून को प्रदेश में प्रवेश किया, जो सामान्य तिथि से लगभग छह दिन देरी से था. साल 2023 और 2024 में मानसून ने 25 जून को तय समय पर दस्तक दी. वहीं साल 2025 में मानसून 18 जून को ही प्रदेश पहुंच गया था. इसके विपरीत इस वर्ष 28 जून तक भी मानसून राजस्थान में प्रवेश नहीं कर पाया और अब इसके 2 जुलाई तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. इस तरह पिछले पांच वर्षों में यह सबसे लंबा इंतजार माना जा रहा है. पिछले साल की तुलना में 52 फीसदी कम बारिश- मानसून की देरी का सीधा असर प्रदेश में साल के आंकड़ों पर दिखाई दे रहा है. पिछले साल 18 जून को मानसून आने के बाद 28 जून तक राजस्थान में 109.89 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी. वहीं इस वर्ष 28 जून तक केवल 56.98 मिलीमीटर वर्षा हुई है. जो पिछले साल की तुलना में करीब 52 प्रतिशत कम है. बारिश की कमी के कारण कई क्षेत्रों में गर्मी और उमस का असर लगातार बना हुआ है. यदि मानसून सक्रिय होता है. तो प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी. इन संभागों में तेज बारिश की संभावना- अगले चार दिनों के दौरान कोटा, उदयपुर, जयपुर और भरतपुर संभाग के कुछ इलाकों में कहीं-कहीं तेज बारिश हो सकती है. वहीं जोधपुर, बीकानेर और अजमेर संभाग के कई इलाकों में अधिकतम तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने और उमस भरी गर्मी का दौर जारी रहने की संभावना है. जुलाई के पहले सप्ताह पर टिकी उम्मीदें- मौसम वैज्ञानिक राधेश्याम शर्मा का मानना है कि अगर आगामी दिनों में मानसून की गति तेज होती है. तो जुलाई का पहला सप्ताह राजस्थान के लिए राहत लेकर आ सकता है. इससे न केवल तापमान में गिरावट आएगी, बल्कि किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई में भी मदद मिलेगी. लंबे इंतजार के बाद अब प्रदेशवासियों की निगाहें मानसून की पहली अच्छी बारिश पर टिकी हैं, जिससे जल संकट और भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है.0
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राजस्थान में इस सप्ताह मानसून प्रवेश संभव, गर्मी से राहत पाने की उम्मीद
Jaipur, Rajasthan:राजस्थान में बहुत जल्द मानसून की एंट्री हो सकती है. माना जा रहा है कि इसी सप्ताह राजस्थान में मानसून प्रवेश कर सकता है. लेकिन इस साल पिछले सालों के मुकाबले मानसून देरी से आ रहा है. आखिरकार कब कहां कैसे पहुंचेगा राजस्थान में मानसून..देखे इस रिपोर्ट में! कब आएगा मानसून? राजस्थान में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने पिछले पांच साल के रिकॉर्ड को तोड़ते सबसे लंबा इंतजार कराया. साल 2021 से 2025 के दौरान मानसून कभी सामान्य तिथि से पहले तो कभी तय तिथि पर प्रदेश में पहुंच गया था, लेकिन इस बार जुलाई शुरू होने के बावजूद मानसून राजस्थान की सीमा तक नहीं पहुंच सका. मौसम विभाग के अनुसार इसी सप्ताह मानसून प्रवेश कर सकता है. इसके साथ ही जुलाई से ही बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद जताई गई है. मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार वर्तमान में मानसून की उत्तरी सीमा गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों से होकर गुजर रही है. अगले तीन से चार दिनों में इसके आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनने की संभावना है. यदि मौसम की स्थिति अनुकूल रही, तो South-पूर्वी राजस्थान से मानसून की औपचारिक एंट्री हो सकती है. पांच साल में पहली बार इतनी देरी- पिछले पांच साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो साल 2021 में मानसून सामान्य तिथि से करीब आठ दिन पहले 18 जून को राजस्थान पहुंच गया था. साल 2022 में मानसून ने 30 जून को प्रदेश में प्रवेश किया, जो सामान्य तिथि से लगभग छह दिन देरी से था. साल 2023 और 2024 में मानसून ने 25 जून को तय समय पर दस्तक दी. वहीं साल 2025 में मानसून 18 जून को ही प्रदेश पहुंच गया था. इसके विपरीत इस वर्ष 28 जून तक भी मानसून राजस्थान में प्रवेश नहीं कर पाया और अब इसके 2 जुलाई तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. इस तरह पिछले पांच वर्षों में यह सबसे लंबा इंतजार माना जा रहा है. पिछले साल की तुलना में 52 प्रतिशत कम बारिश- मानसून की देरी का सीधा असर प्रदेश में साल के आंकड़ों पर दिखाई दे रहा है. पिछले साल 18 जून को मानसून आने के बाद 28 जून तक राजस्थान में 109.89 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी. वहीं इस वर्ष 28 जून तक केवल 56.98 मिलीमीटर वर्षा हुई है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 52 प्रतिशत कम है. बारिश की कमी के कारण कई क्षेत्रों में गर्मी और उमस का असर लगातार बना हुआ है. यदि मानसून सक्रिय होता है, तो प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी. इन संभागों में तेज बारिश की संभावना- अगले चार दिनों के दौरान कोटा, उदयपुर, जयपुर और भरतपुर संभाग के कुछ इलाकों में कहीं-कहीं तेज बारिश हो सकती है. जबकि जोधपुर, बीकानेर और अजमेर संभाग के कई इलाकों में अधिकतम तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने और उमस भरी गर्मी का दौर जारी रहने की संभावना है. जुलाई के पहले सप्ताह पर टिकी उम्मीदें- मौसम वैज्ञानिक राधेश्याम शर्मा का मानना है कि अगर आगामी दिनों में मानसून की गति तेज होती है, तो जुलाई का पहला सप्ताह राजस्थान के लिए राहत लेकर आ सकता है. इससे न केवल तापमान में गिरावट आएगी, बल्कि किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई में भी मदद मिलेगी. लंबे इंतजार के बाद अब प्रदेशवासियों की निगाहें मानसून की पहली अच्छी बारिश पर टिकी हैं, जिससे जल संकट और भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है.0
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जयपुर के सी-स्कीम में स्टे आदेश के बावजूद बुलडोजर से अतिक्रमण हटाने पर विवाद
Jaipur, Rajasthan:शहर के सी-स्कीम क्षेत्र में जयपुर विकास प्राधिकरण की बुलडोजर कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया। जेडीए ने सी-स्कीम स्थित प्रसिद्ध चीलवा एवं दही-बल्ले की दुकान पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया। कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश देखने को मिला। दुकान के मालिक राकेश शर्मा का आरोप है कि उन्होंने कार्रवाई से पहले सक्षम न्यायालय से स्थगन (स्टे) आदेश प्राप्त कर लिया था। उनका कहना है कि इसके बावजूद जेडीए अधिकारियों ने न्यायालय के आदेशों की अनदेखी करते हुए बुलडोजर कार्रवाई की। उन्होंने इसे न्यायालय की अवमानना बताते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही। कार्रवाई के दौरान मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और कई व्यापारियों ने जेडीए की कार्यशैली पर सवाल उठाए। पीड़ित राकेश ने कहा कि यदि न्यायालय से स्टे आदेश जारी हो चुका था, तो प्रशासन को कार्रवाई रोकनी चाहिए थी। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है।0
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गोंडा में सरकारी जमीन अवैध कब्जों पर बुलडोजर से बड़ी कार्रवाई
Gonda, Uttar Pradesh:जहां गोंडा में सरकारी जमीनों पर किए गए अवैध कब्जे को लेकर की लगातार एक के बाद एक जगह पर बुलडोजर के माध्यम से कार्रवाई करके अवैध निर्माण को तोड़कर सरकारी जमीन खाली कराई जा रही है। गोंडा के कर्नलगंज तहसील क्षेत्र अंतर्गत नारायणपुर मर्दन ग्राम पंचायत के तिलक पुरवा में सरकारी चकमार्ग पर अवैध कब्जा करके बनाए गए व्यास गद्दी को बुलडोजर के माध्यम से तोड़कर के कल मंगलवार देर शाम 7 बजे प्रशासन द्वारा बड़ी कार्रवाई की गई है। मेवा लाल सहित काफी लोगों को कर्नलगंज तहसील प्रशासन द्वारा सरकारी चकमार्ग की जमीन से अवैध कब्ज़ा हटाए जाने को लेकर के कई बार निर्देश दिया गया नोटिस दिया गया। मौके पर कर्नलगंज तहसील के अधिकारी और कर्मचारी पहुंचे इसके साथ ही साथ राजस्व विभाग के कर्मचारियों द्वारा भी कई बार नोटिस दिए लेकिन उसके बावजूद भी यह लोग अवैध अतिक्रमण हटाने को तैयार नहीं थे। इसके बाद बुलडोजर के माध्यम से कार्रवाई करते हुए तोड़कर के हटाया गया है और अब सरकारी चक मार्ग की जमीन खाली हो गई जिससे लोगों के आने-जाने में काफी कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकारी चक मार्ग पर अवैध रूप से कब्जा करके किए गए अवैध निर्माण के चलते लोगों के आने-जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। लगातार राजेश कश्यप सहित काफी संख्या में गांव के रहने वाले लोग तहसील दिवस अन्य तरीके से शिकायत करके कार्रवाई की मांग कर रहे थे जहां काफी शिकायत के बाद अब कार्रवाई की गई है।0
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हरिद्वार: नकली नोट बनाने वाले गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार, जाली नोट बरामद
Haridwar, Uttarakhand:हरिद्वार पुलिस ने देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले नकली नोट गिरोह पर बड़ी कार्रवाई करते हुए कोतवाली श्यामपुर क्षेत्र में गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 50 हजार रुपये के छपे हुए जाली नोट, लैपटॉप, प्रिंटर और नकली नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए हैं। यह कार्रवाई दो दिन पहले बरामद हुए 52,500 रुपये के नकली नोटों के मामले की जांच के बाद की गई है।एसपी क्राइम निशा यादव ने बताया लालढांग तिराहे के पास घेराबंदी कर क्विड कार से जा रहे आरोपियों को पकड़ा। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी सॉफ्टवेयर और प्रिंटर की मदद से असली नोट की कॉपी तैयार कर नकली नोट छापते थे और उन्हें बाजार में चलाने की योजना बना रहे थे। पुलिस के अनुसार गिरोह का पर्दाफाश कर इसकी जड़ तक पहुंचने का काम किया गया है, वहीं मामले में आगे की जांच जारी है। बाइट - निशा यादव, एसपी क्राइम0
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डॉक्टर्स डे के साथ 125 दिन ग्रामीण रोजगार गारंटी, GST राहत और वेतन संशोधन का ऐलान
Noida, Uttar Pradesh:Lucknow (Uttar Pradesh): Suresh Khanna (Uttar Pradesh Cabinet Minister) On National Doctors' Day / VB-GRAMG Act 2025 implementation / Rural employment guarantee scheme / 125-day employment provision / Rural labour wages / Minimum wage revision / GST Day observance इस जानकारी में कई अहम बातें बताई गई हैं: डॉ. बिधान चंद्र रॉय के सम्मान में 'डॉक्टर्स डे' मनाना। वे पश्चिम बंगाल के इतिहास की एक जानी-मानी हस्ती थे और इसी दिन उनका जन्म और निधन हुआ था। इसमें मेडिकल सेवाएं देने में डॉक्टरों की अहम भूमिका को माना गया है और मरीज़ों की देखभाल में ज़्यादा संवेदनशीलता बरतने की बात कही गई है। इसके अलावा, एक बेहतर सरकारी योजना की शुरुआत का भी ज़िक्र है, जिसे पहले MNREGA के नाम से जाना जाता था। अब यह ग्रामीण मज़दूरों को 125 दिन के काम की गारंटी देती है, जिसमें कामों का ब्यौरा, केंद्र सरकार से 60% और राज्य सरकारों से 40% फ़ंडिंग, और 15 दिनों के अंदर काम न मिलने पर मुआवज़े का प्रावधान है। इसमें GST दिवस के जश्न और प्रधानमंत्री द्वारा टैक्स में बड़ी राहत की घोषणा का भी ज़िक्र है। इसके तहत GST स्लैब को कम किया गया है और जनता को पहली बार राहत दी गई है, ये बदलाव 22 सितंबर, 2025 तक लागू हो0
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36 साल बाद बिहार में पंचायत परिसीमन: क्या बदलेगी सत्ता?
Noida, Uttar Pradesh:बिहार में पंचायत परिसीमन कब? 36 वर्षों से लंबित व्यवस्था पर अब निर्णय जरूरी। बिहार में लगभग 36 वर्षों से पंचायतों का परिसीमन नहीं हुआ है। इस दौरान जनसंख्या बढ़ी, नए गांव और टोले बसे, कई क्षेत्रों की भौगोलिक एवं सामाजिक परिस्थितियां बदल गईं, लेकिन पंचायतों की सीमाएं आज भी पुराने आधार पर बनी हुई हैं। इससे समान प्रतिनिधित्व का सिद्धांत प्रभावित होता है। देश के अनेक राज्यों—महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात, ओडिशा और उत्तर प्रदेश—में समय-समय पर पंचायतों का परिसीमन कर जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। बिहार भी इस दिशा में पीछे नहीं रहना चाहिए। परिसीमन का उद्देश्य केवल सीमाएं बदलना नहीं है, बल्कि प्रत्येक पंचायत और वार्ड में जनसंख्या के अनुसार न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। यही लोकतंत्र की मूल भावना है। हम सरकार से आग्रह करते हैं कि पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप पूरी की जाए। इससे भविष्य में विवाद और न्यायालयी चुनौतियां भी कम होंगी। हमारा स्पष्ट मत है कि परिसीमन के बाद ही पंचायतों के लिए आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। नई भौगोलिक सीमाएं तय होने के बाद ही वार्डों और पंचायतों की वास्तविक स्थिति सामने आती है। उसके बाद ही आरक्षण रोस्टर तैयार करना अधिक न्यायसंगत और संविधान सम्मत होगा। हमारा विश्वास है कि बिहार के माननीय मुख्यमंत्री पंचायतों को सशक्त बनाने के पक्षधर हैं। यदि 36 वर्षों बाद बिहार में पंचायतों का परिसीमन कराया जाता है, तो यह केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं होगा, बल्कि पंचायती राज व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार के रूप में दर्ज होगा। हमारी मांग स्पष्ट है—पंचायतों का परिसीमन शीघ्र कराया जाए। परिसीमन पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और विधिसम्मत हो। परिसीमन के बाद संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार आरक्षण का निर्धारण किया जाए। इसके बाद पंचायत चुनाव कराए जाएं। हम चुनाव टालने की बात नहीं कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि बिहार में पंचायत चुनाव ऐसे हों जो संविधान की भावना, समान प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय—तीनों कसौटियों पर खरे उतरें। यही मजबूत पंचायत, मजबूत लोकतंत्र और विकसित बिहार की आधारशिला होगी.0
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बोरवेल में गिरने से निरवैर सिंह की मौत, पोस्टमार्टम में चोटें और डूबना सामने
Ambala, Haryana:धनयोड़ा गांव में बोरवेल में गिरे मासूम निरवैर सिंह की मौत के मामले में अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ चुकी है। सिविल अस्पताल अंबाला कैंट के डॉक्टरों ने बच्चे की मौत की मुख्य वजहों का खुलासा किया है। अंबाला के धनयोड़ा में बोरवेल हादसे का शिकार हुए बच्चे निरवैर सिंह का शव लगभग 3:30 बजे बरामद किया गया, जिसके बाद डॉक्टरों की टीम ने उसका पोस्टमार्टम किया। मामलों की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ के आदेश पर गठित टीम के सदस्य डॉक्टर सुमित कुकरेजा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि बच्चे के शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। डॉक्टर ने बताया कि निरवैर सिंह जिसकी बोरवेल में गिरने से मौत हुई है, उसकी बॉडी सुबह करीब 4 बजे रिकवर होकर अस्पताल लाई गई थी। पोस्टमार्टम में सामने आया है कि बच्चे के शरीर पर काफी चोटें थीं। सिर पर, छाती पर और दोनों टखनों पर रगड़ और चोट के निशान पाए गए हैं। इसके अलावा, शरीर के अंदर मडी वाटर यानी मिट्टी वाले पानी और डूबने के अंश भी मिले हैं।0
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अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बना: सभी अल्पसंख्यकों के बच्चों के लिए 1–8 तक सिलेबस
Dehradun, Uttarakhand:एंकर उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म हो चुका है और अब नया अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण अस्तित्व में आ गया है। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रोफेसर सुरजीत गांधी ने जी मीडिया से प्राधिकरण को लेकर खास बातचीत की। प्रोफेसर सुरजीत गांधी ने बताया कि अब तक मदरसा बोर्ड केवल मुस्लिम एजुकेशन तक सीमित था। लेकिन नया अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण मुस्लिम, सिख, जैन, पारसी, बौद्ध सभी अल्पसंख्यकों के बच्चों की शिक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। प्राधिकरण ने कक्षा एक से कक्षा 8 तक का सिलेबस तैयार कर दिया है। किसी भी बच्चे पर प्राधिकरण के सिलेबस का कोई प्रेशर नहीं होगा जो भी इच्छुक होगा वह इसके अंतर्गत अध्ययन कर सकता है। राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा का सिलेबस सभी संस्थाओं में लागू होगा स्कूल की शिक्षा होने के बाद ही दोपहर में या स्कूल शुरू होने से पहले धार्मिक शिक्षा से संबंधित सिलेबस पढ़ाया जा सकता है। टिक टैक प्रोफेसर सुरजीत गांधी अध्यक्ष अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण0
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बरसात की मार: अल्मोड़ा में 18 घंटे बिजली बाधित से पेयजल संकट
Almora, Uttarakhand:बरसात की शुरुआत के साथ अल्मोड़ा में पेयजल संकट गहरा गया। कोसी पावर हाउस में तकनीकी खराबी के कारण पंपिंग क्षेत्र की बिजली आपूर्ति 18 घंटे बाधित रहने से कोसी नदी स्थित चारों पेयजल पंप बंद रहे। इससे नगर के 94 मोहल्लों और आसपास की ग्राम पंचायतों की जलापूर्ति प्रभावित हुई और लगभग एक लाख लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ा। जल संस्थान ने राहत के लिए विभिन्न क्षेत्रों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति की, जहाँ पानी भरने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। कई इलाकों में तीन दिनों से पानी नहीं आया, जिससे पेयजल के साथ रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हो गए। लोगों ने कहा कि बरसात के मौसम में कोसी नदी के सिल्ट आने से हर साल ऐसी समस्या खड़ी हो जाती है। कई परिवारों को नौलों और टैंकरों के सहारे पानी की व्यवस्था करनी पड़ी। जल संस्थान ने बिजली आपूर्ति बहाल होने के बाद पंपिंग शुरू कर जलापूर्ति सामान्य करने की बात कही।0
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