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सीबीआई ने गोड्डा डुमरिया SBI ब्रांच पर छापा मारा; मैनेजर और केशियर हिरासत में

Godda, Jharkhand:गोड्डा के डुमरिया SBI ब्रांच में सीबीआई का छापा पड़ा है। 3 घंटों से ज्यादा वक्त से जाँच चल रही है। ब्रांच मैनेजर और केशियर को हिरासत में लेने की खबर है। हालांकि उसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है! सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शिकायतकर्ता के रिश्तेदार की मृत्यु के बाद पेंशन देने में रिश्वत मांगने के आरोप में टीम आई हुई है और बैंक के आसपास दीवारों पर पोस्टर चिपका दिया गया है, तकरीबन 4:00 बजे सीबीआई की टीम बैंक में प्रवेश की है जिस वक्त बैंक में दो ग्राहक थे और दोनों ग्राहकों को बाहर निकाल दिया गया, 7:00 के करीब एसबीआई अधिकारी भी बैंक में बुलाए गए। सूत्रों के अनुसार ब्रांच मैनेजर राकेश सिंह, केशियर राकेश मरांडी को फिलहाल डिटेन कर लिया गया है।
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CPA में 40+ कर्मियों के तबादले: दिल्ली सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया

New Delhi, Delhi:नई दिल्ली, 1 जून 2026 मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा है कि राजधानी की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत कार्यरत केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) के 40 से अधिक मेडिकल, पैरामेडिकल और प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों का स्थानांतरण कर दिया गया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि दिल्लीवासियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी सरकार की प्रतिबद्धता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि सीपीए में एचओओ (हेड ऑफ ऑफिस) डॉ. विनोद कुमार रंगा समेत 10 डॉक्टरों का स्थानांतरण किया गया है। इसके अलावा पैरामेडिकल सेवाओं को मजबूत करने के लिए 19 कर्मचारियों का स्थानांतरण कर दिया गया है। इसमें फार्मासिस्ट, जूनियर मेडिकल लैब टेक्नीशियन, लैब अटेंडेंट और ड्राइवरो आदि शामिल हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार प्रशासनिक कार्यों में दक्षता बढ़ाने के लिए सेक्शन ऑफिसर, सीनियर असिस्टेंट और जूनियर असिस्टेंट स्तर के 10 कर्मचारियों का भी स्थानातंरण किया गया है। मानव संसाधनों की समीक्षा के दौरान सीपीए में कार्यरत अधिकारिकों और कर्मचारियों की स्थिति का भी आकलन किया गया है। साथ ही ऐसे कर्मचारियों की जानकारी भी संकलित की गई है जो सीपीए के वेतनमान पर हैं लेकिन अन्य कार्यालयों में कार्यरत हैं ताकि उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। इसके अलावा अन्य स्टाफ को भी सीपीए से हटाया गया है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि सीपीए दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां से दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सामग्रियों की खरीद एवं आपूर्ति का कार्य संचालित होता है। इस व्यवस्था को और अधिक सक्षम बनाने के लिए विभिन्न अस्पतालों और विभागों से अनुभवी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जोड़ा जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों से 12 चिकित्सा अधिकारियों की सीपीए में तैनात किया गया है। इनमें वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी और सीएमओ स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इनकी तैनाती से खरीद, भंडारण, आपूर्ति और प्रशासनिक कार्यों को और मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभागीय कार्यों को गति देने के लिए विभिन्न अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं। प्रोजेक्ट ब्रांच, केयरटेकिंग ब्रांच, स्टोर एवं परचेज ब्रांच, कंप्यूटर सेल, मोबाइल हेल्थ स्कीम, पीजीएमएस, आरटीआई, चाइल्ड राइट्स, हेल्थ मेला, अस्पताल समन्वय और अन्य महत्वपूर्ण इकाइयों के संचालन की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को दी गई है। इसके अलावा स्टोर एवं परचेज ब्रांच और सीपीए से जुड़े कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए भी आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्थाएं की गई हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य विभाग की प्रत्येक इकाई को आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराना और संस्थागत क्षमता को मजबूत बनाना है। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि दवाओं और चिकित्सा सामग्री की खरीद एवं आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सुदृढ़ हो तथा दिल्लीवासियों को बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों。
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RCB ने IPL 2026 जीता; शेलार ने बधाई दी, महाराष्ट्र में डेमोलिशन ड्राइव

Noida, Uttar Pradesh:AHMEDABAD, GUJARAT: MAHARASHTRA MINISTER ASHISH SHELAR ON ROYAL CHALLENGERS BENGALURU WINS IPL 2026. DEMOLITION DRIVE IN MAHARASHTRA / ATTACK ON TMC LEADER ABHISHEK BANERJEE. अहमदाबाद, गुजरात: महाराष्ट्र के मंत्री आशीष शेलार कहते हैं, "IPL का यह सीज़न, बाकी सभी सीज़नों की तरह ही, बेहद शानदार रहा। हमारे खिलाड़ियों को भी इस खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला। इस पूरे माहौल में बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर भी पैदा हुए। मालिकों को अपने निवेश पर अच्छा रिटर्न मिला, और दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों को एक बेहतरीन लीग देखने का मौका मिला। इसके लिए, मैं BCCI और IPL कमेटी, दोनों की तहे दिल से सराहना करता हूँ। मैं RCB को उनकी शानदार जीत के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ।"
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कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा जी के निर्देश के पालन में आज अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्री अनुपम शर्मा जी

Shivpuri, Madhya Pradesh:कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा जी के निर्देश के पालन में आज अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्री अनुपम शर्मा जी के नेतृत्व में आदिवासी बस्ती ग्राम पंचायत मडखेड़ा में शाम को चौपाल का आयोजन किया गया आमजन की समस्याओं को सुना तथा यथा संभव निराकरण किया गया जिसमें 13 आवेदन आवास, 4 पेंशन, 9 पोषण आहार, 7 आवेदन राजस्व 4 आधार अपडेट सहित कुल 47 आवेदन प्राप्त हुए जिनमें से अधिकतर आवेदनों का निराकरण मौके पर किया गया शेष के निराकरण हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया। Sdm श्री शर्मा ने समस्त ग्राम वासियों को जानकारी देते हुए कहा कि प्रत्येक पंचायत में अब प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को लगातार जनसुनवाई आयोजित होगी इन जनसुनवाइयों में आप अब अपनी समस्याओं का निराकरण अपनी अपनी पंचायत में ही करा सकते हैं, इस दौरान सभी सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, पटवारी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा सभी उपस्थित रहेंगे। इस चौपाल में तहसीलदार श्री शिवम् शर्मा, सीईओ श्री आफीसर सिंह गुर्जर सहित सभी विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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संबलपुर में SIR 2026 के तहत BLO घर-घर survey, वोटर सूची साफ रखने योजना

Sambalpur, Odisha:ସମ୍ବଲପୁର ଜିଲ୍ଲା ପ୍ରଶାସନ ପକ୍ଷରୁ ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ସଘନ ସଂଶୋଧନ (ଏସ୍‌ଆଇଆର୍)-୨୦୨୬ ପ୍ରକ୍ରିୟା ନିମନ୍ତେ ସାମ୍ବାଦିକ ସମ୍ମିଳନୀ|ଭାରତ ନିର୍ବାଚନ ଆୟୋଗଙ୍କ ନିର୍ଦ୍ଦେଶକ୍ରମେ ରାଜ୍ୟବ୍ୟାପୀ ଆରମ୍ଭ ହୋଇଥିବା ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ସଘନ ସଂଶୋଧନ (Special Intensive Revision–SIR) ୨୦୨୬ ପ୍ରକ୍ରିୟା ସମ୍ପର୍କରେ ଆଜି ଜିଲ୍ଲାପାଳ ତଥା ଜିଲ୍ଲା ନିର୍ବାଚନ ଅଧିକାରୀ ସିଦ୍ଧେଶ୍ୱର ବଳିରାମ ବୋନ୍ଦର (ଭା.ପ୍ର.ସେ.)ଙ୍କ ଅଧ୍ୟକ୍ଷତାରେ ସମଗ୍ର ଶିକ୍ଷା ସମ୍ମିଳନୀ ଲକ୍ଷ ଠାରେ ଏକ ସାମ୍ବାଦିକ ସମ୍ମିଳନୀ ଅନୁଷ୍ଠିତ ହୋଇଥିଲା।ଏହି ଅବସରରେ ଜିଲ୍ଲାପାଳ କହିଥିଲେ ଯେ, ଏସ୍‌ ଆଇ ଆର୍ ପ୍ରକ୍ରିୟାର ମୂଳ ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ ହେଉଛି ଭୋଟର ତାଲିକାକୁ ନିର୍ଭୁଲ, ତ୍ରୁଟିମୁକ୍ତ କରିବା। ଏହା ମାଧ୍ୟମରେ ଯୋଗ୍ୟ ନାଗରିକଙ୍କ ନାମ ଭୋଟର ତାଲିକାରେ ସାମିଲ କରାଯିବା ସହ ମୃତ, ସ୍ଥାନାନ୍ତରିତ ଏବଂ ଦ୍ୱିତୀୟ ନାମଭୁକ୍ତି ଗୁଡ଼ିକୁ ଚିହ୍ନଟ କରି ଆବଶ୍ୟକ ସଂଶୋଧନ କରାଯିବ।ଜନସାଧାରଣଙ୍କ ସୁବିଧା ଓ ସହଯୋଗକୁ ଦୃଷ୍ଟିରେ ରଖି ସମ୍ବଲପୁର ଜିଲ୍ଲାର ସମସ୍ତ ସହରାଞ୍ଚଳ ଓ ଗ୍ରାମାଞ୍ଚଳରେ ମୋଟ ୯୪୮ ଜଣ ବୁଥ୍ ସ୍ତରୀୟ ଅଧିକାରୀ (BLO) ନିୟୋଜିତ ହୋଇ ଘରକୁ ଘର ବୁଲି ସର୍ଭେ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଛନ୍ତି। ଏହି ସର୍ଭେ କାର୍ଯ୍ୟ ୩୦ ମେ’ରୁ ଆରମ୍ଭ ହୋଇ ୨୮ ଜୁନ୍ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଚାଲିବ। ଏହି ସମୟରେ ବିଏଲ୍‌ଐମାନେ ପ୍ରତ୍ୟେକ ପରିବାରକୁ ଯାଇ ଇନୁମରେଶନ ଫର୍ମ ବଣ୍ଟନ କରିବେ ଏବଂ ପୂରଣ ହୋଇଥିବା ଫର୍ମ ସଂଗ୍ରହ କରିବେ।ଜିଲ୍ଲାପାଳ ଜନସାଧାରଣ ଙ୍କୁ ਅନୁରୋଧ କରିଥିଲେ যେ, ବିଏଲ୍‌ଓମାନଙ୍କ ସହ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ସହଯୋଗ କରି ସଠିକ୍ ତଥ୍ୟ ପ୍ରଦାନ କରନ୍ତୁ। ସମସ୍ତ ବିଏଲ୍‌ଓ ବୈଧ ପରିଚୟପତ୍ର ସହିତ ଘରକୁ ଯିବେ ଏବଂ ସେମାନଙ୍କୁ ଏହି କାର୍ଯ୍ୟ ପାଇଁ ଯଥୋଚିତ ପ୍ରଶିକ୍ଷଣ ଦିଆଯାଇଛି। ସେ ସୂଚନା ଦେଇ କହିଥିଲେ ୫ ଜୁଲାଇରେ [chithā Bhōtara tālikā prakāś pā'iba]. ୫ ଜୁଲାୟ୍ରୁ ୪ অଗଷ୍ଟ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ୩୧ ଦିନିଆଁ ଆପତ୍ତି owo ଅଭିଯୋଗ ଅବଧି ରହିବ।  ଏହି ସମୟ ମଧ୍ୟରେ ୟଦି କୌଣସି ଯୋଗ୍ୟ ନାଗରିକଙ୍କ ନାମ ତାଲିକାରୁ ବାଦ ପଡ଼ିଥାଏ କିମ୍ବା କୌଣସି ତ୍ରୁଟି ଥାଏ, ସେମାନେ ଆବଶ୍ୟକ ଆବେଦନ ଦାଖଲ କରିପାରିବେ। ସମ୍ବଲପୁର, ରେଙ୍ଗାଲି, ରେଢାଖୋଲ ଓ କୁଚିଣ୍ଡାର ନିର୍ବାଚନ ପଞ୍ଜୀକରଣ ଅଧିକାରୀମାନେ (ERO) ଏହି ଆପତ୍ତି ଓ ଅଭିଯୋଗର ଶୁଣାଣି କରି ନିଷ୍ପତ୍ତି ଗ୍ରହଣ କରିବେ।ଯେଉଁ ନାଗରିକ ମାନଙ୍କର ନାମ ବର୍ତ୍ତମାନର ଭୋଟର ତାଲିକାରେ ନାହିଁ କିମ୍ବା ୨୦୦୨ ଭୋଟର ତାଲିକା ସହ କୌଣସି ସମ୍ପର୍କ ସ୍ଥାପିତ ହୋଇନାହାଁ, ସେମାନଙ୍କ ନାମ ସାମିଲ କରିବା ପାଇଁ ଆବଶ୍ୟକ ଦସ୍ତାବିଜ୍ ସହ ଆବେଦନ କରିବାର ସୁଯୋଗ ରହିଛି। ସରକାରଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ସ୍ୱୀକୃତ ୧୨ ପ୍ରକାରର ଦସ୍ତାବିଜ୍ ଏଥିପାଇଁ ଗ୍ରହଣ କରାଯିବ। ଜିଲ୍ଲାପାଳ ସ୍ପଷ୍ଟ କରିଥିଲେ ଯେ, ଏହି ସମସ୍ତ ନିୟମ ଓ ସମୟସୀମା ସମଗ୍ର ଓଡ଼ିଶାରେ ସମାନ ଭାବେ ଲାଗୁ হେଉଛି। କୌଣସି ଯୋଗ୍ୟ ଭୋଟର ଯେପରି ei ପ୍ରକ୍ରିୟାରୁ ବାଦ ନପଡ଼ନ୍ତି, ସେଥିପାଇଁ ସମସ୍ତ ନାଗରିକଙ୍କୁ ସଚେତନତାର ସହ ଏହି ଅଭିଯାନରେ ସକ୍ରିୟ ଭାଗ ନେବାକୁ ସେ ଆହ୍ୱାନ ଜଣାଇଥିଲେ। ସେ ଆହୁରି କହିଥିଲେ ଯେ, ଏସ୍‌ ଆଇ ଆର୍ ସମ୍ପର୍କିତ କୌଣସି ଭ୍ରମାତ୍ମକ ସୂଚନା କୁ ବିଶ୍ବାସ ନ କରି ନାଗରିକମାନେ କେବଳ ନିର୍ବାଚନ ଆୟୋଗ ଓ ଜିଲ୍ଲା ପ୍ରଶାସନର ଅଧିକୃତ ସୂଚନା ଉପରେ ନିର୍ଭର କରିବାକୁ аନୁରୋଧ କରିଥିଲେ। ଅଧିକ ସୂଚନା ପାଇଁ ଟୋଲ୍ Φ ରି ହେଲ୍ପଲାଇନ୍ ନମ୍ବର ୧୯୫୦ ଏବଂ ଭୋଟର ହେଲ୍ପଲାଇନ୍ ଆପ୍ ମାଧ୍ୟମରେ ସେବା ଉପଲବ୍ଧ ରହିଛି।ସୂଚନା ଅନୁଯାୟୀ, ୫ ଜୁଲାଇରେ ଚିଠା ଭୋଟର ତାଲିକା ପ୍ରକାଶ ପାଇବ ଏବଂ ୬ ସେପ୍ଟେମ୍ବରରେ ଚୂଡ଼ାନ୍ତ ଭୋଟର ତାଲିକା ପ୍ରକାଶ କରାଯିବ।ଏହି ସାମ୍ବାଦିକ ସମ୍ମିଳନୀରେ ଅତିରିକ୍ତ ଜିଲ୍ଲପାଳ ଶ୍ରୀ ସୁଧାଂଶୁ କୁମାର భୋଇ, ଡେପୁଟୀ କଲେକ୍ଟର ଇଲେକ୍ସନ ଗୀତିକା ନାୟକ, ଜିଲ୍ଲା ସୂଚନା ଓ ଲୋକସମ୍ପର୍କ ଅଧିକାରୀ ସଂଯୁକ୍ତା କୁଲ୍ଲୁ, ବିଭିନ୍ନ ଗଣମାଧ୍ୟମ ପ୍ରତିନିଧିମାନେ ଉପସ୍ଥିତ ଥିଲେ。
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वारिस पठान बोले: लाड़की बहिन योजना से 80 लाख महिलाएं पात्र नहीं, विवाद बढ़ा

Noida, Uttar Pradesh:MUMBAI (MAHARASHTRA): WARIS PATHAN (AIMIM) ON REMOVAL OF AROUND 80 LAKH WOMEN FROM MAHARASHTRA'S LADKI BAHIN SCHEME FOLLOWING E-KYC VERIFICATION/ ATTACK ON TMC LEADERS ABHISHEK BANERJEE & KALYAN BANERJEE/ UP DEPUTY CM BRAJESH PATHAK TRAVELS IN MUMBAI METRO/ COMMERCIAL LPG PRICE HIKE/ UP CM YOGI ADITYANATH’S STATEMENT मुंबई - TMC नेता अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए AIMIM नेता वारिस पठान कहते हैं, "हमारे किसी से भी वैचारिक और राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन यह प्रशासन, कानून और व्यवस्था से जुड़ा मामला है। एक मौजूदा सांसद पर इस तरह से हमला करके क्या संदेश दिया जा रहा है? दो मौजूदा सांसदों पर हमला किया गया है। यह निंदनीय है। सत्ता का पासा कल पलट भी सकता है... मेरी निजी राय है? कि यह घोर निंदनीय है? और ऐसा नहीं होना चाहिए। सभी को कानून का पालन करना चाहिए।" "लाड़की बहिन योजना" पर AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान कहते हैं, "पहला सवाल यह है: 80 लाख महिलाएं, जो अब तक इस योजना के लिए पात्र थीं, अचानक डेढ़ साल के भीतर अपात्र कैसे हो गईं? चुनावों से पहले, हर कोई पात्र था। महाराष्ट्र चुनावों के दौरान, सरकार ने 'लाड़की बहिन योजना' के तहत जनता का पैसा बांटा और महिलाओं के खातों में पैसे ट्रांसफर किए। यहाँ तक कि यह भी कहा गया था कि राज्य के खजाने में पैसे खत्म हो गए हैं। सरकार ने चुनावों के दौरान सब कुछ बहुत खुले तौर पर दिखाया और इसका इस्तेमाल वोट हासिल करने के लिए किया..."
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हुगली: भास्कर भट्टाचार्य ने अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर और ज़ीरो टॉलरेंस का संकेत दिया

Noida, Uttar Pradesh:HOOGHLY (WEST BENGAL): BHASKAR BHATTACHARYA (BJP) ON LAW & ORDER SITUATION हुगली, पश्चिम बंगाल: राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर BJP विधायक भास्कर भट्टाचार्य कहते हैं, “अतिक्रमण के पीछे जो सोच है—उसे भी बुलडोज़र का सामना करना पड़ेगा। सिर्फ़ अतिक्रमण का काम ही नहीं अगर कोई इसके बारे में ‘सोचता’ भी है, तो बुलडोज़र उस सोच पर भी चल जाएगा। यह शुरू से ही हमारा पक्का फ़ैसला रहा है: भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ पूरी तरह से ज़ीरो टॉलरेंस की नीति। मंत्री पद खोने का ख़तरा निश्चित रूप से एक ऐसा नतीजा है जो सिर पर मंडरा रहा है… हमने असल में अपना काम काफ़ी पहले ही शुरू कर दिया था यह काम एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। मेरे पास लागू करने के लिए पहले से ही कई प्रोजेक्ट तैयार हैं। ख़ास तौर पर श्रीरामपुर के विकास के संबंध में, मैं उन प्रस्तावों को कैबिनेट के सामने पेश करने का इरादा रखता हूँ…
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सुप्रीम कोर्ट ने जोजरी-बांडी-लूनी नदियों के प्रदूषण पर कड़ा कदम उठाने का आदेश दिया

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम राजस्थान की जोजरी, बांडी और लूनी नदी तंत्र में वर्षों से जारी प्रदूषण और पर्यावरणीय क्षरण को लेकर राज्य सरकार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित एजेंसियों को व्यापक निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यह मामला केवल एक नदी के प्रदूषण तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों लोगों के स्वास्थ्य, कृषि, भूजल और पर्यावरणीय संतुलन से जुड़ा गंभीर संकट है। सुप्रीम कोर्ट जस्टिस विक्रमनाथ व जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि जोजरी-बांडी-लूनी नदी प्रणाली लंबे समय से औद्योगिक अपशिष्ट और बिना उपचारित सीवेज के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। इस पूरे मामले की निगरानी के लिए गठित हाई लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी की रिपोर्टों में सामने आया कि कई स्थानों पर प्रदूषित स्लज (कीचड़) बड़ी मात्रा में जमा है, जिससे नदियों की प्राकृतिक जलधारा बाधित हो रही है और पर्यावरण को लगातार नुकसान पहुंच रहा है। कोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि मानसून से पहले यदि इन नदी क्षेत्रों की सफाई नहीं हुई तो जमा हुआ जहरीला स्लज बहकर कृषि भूमि, चारागाहों, भूजल स्रोतों और अन्य जलाशयों तक पहुंच सकता है। इससे न केवल पर्यावरणीय नुकसान बढ़ेगा बल्कि किसानों और ग्रामीण आबादी के लिए भी गंभीर खतरा पैदा होगा। सुनवाई के दौरान समिति ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया। सांगरिया रीको क्षेत्र के पास लगभग चार किलोमीटर लंबी एक छिपी हुई भूमिगत पाइपलाइन का पता चला, जिसके जरिए औद्योगिक अपशिष्ट सीधे नदी तंत्र में छोड़ा जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों को इस नेटवर्क की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। कोर्ट ने इसे पर्यावरणीय निगरानी तंत्र की गंभीर विफलता बताया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि इतनी बड़ी अवैध व्यवस्था वर्षों तक संचालित होती रही और नियामक संस्थाएं उसे पकड़ नहीं सकीं तो यह प्रशासनिक अक्षमता का मामला है। वहीं यदि जानकारी होने के बावजूद इसे छिपाया गया तो यह सार्वजनिक विश्वास के साथ धोखा माना जाएगा। अदालत ने इस पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आदेश दिया है, जो जोधपुर, पाली और बालोतरा जिलों में अवैध डिस्चार्ज नेटवर्क, उद्योगों और अधिकारियों की भूमिका की जांच करेगा। कोर्ट ने राज्य सरकार को युद्धस्तर पर स्लज हटाने, वैज्ञानिक तरीके से उसके निस्तारण और पूरे नदी बेसिन का सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। समिति को भी ऐसे सभी संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने को कहा गया है जहां प्रदूषण, जलभराव या बाढ़ का खतरा अधिक है। इसके अलावा कोर्ट ने प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूलने और जिम्मेदार व्यक्तियों पर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। संबंधित सीईटीपी से जुड़े उद्योगों को फिलहाल बंद रखने और कोर्ट की अनुमति के बिना दोबारा संचालन नहीं करने का आदेश भी दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि नदियां केवल जलधाराएं नहीं, बल्कि मानव जीवन, कृषि, जैव विविधता और आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण के लिए सरकार, उद्योगों और समाज सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी。
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राजस्थान हाईकोर्ट: धारा 91 के मामले में बेदखली आदेश रद्द, पुनः सुनवाई निर्देश

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने ब्यावर जिले के फलका गांव में कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उप तहसीलदार द्वारा पारित बेदखली आदेशों को रद्द कर दिया। जस्टिस संजीत पुरोहित की एकलपीठ ने माना कि राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 91 के तहत कार्रवाई करते समय प्रभावित लोगों को पर्याप्त सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया, जिससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता कुणाल उपाध्याय ने बताया कि वे लंबे समय से संबंधित भूमि पर बने मकानों में निवास कर रहे हैं। उन्हें 5 मार्च 2026 को धारा 91 के तहत नोटिस जारी कर 16 मार्च को उपस्थित होने के लिए कहा गया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे निर्धारित तिथि पर उपस्थित हुए और जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा, लेकिन उसी दिन उन्हें अतिक्रमणकारी घोषित करते हुए बेदखली के आदेश जारी कर दिए गए। बाद में 6 अप्रैल को अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई के आदेश भी जारी कर दिए गए। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ताओं के पास अपील का वैकल्पिक उपाय उपलब्ध था, इसलिए रिट याचिकाएं सुनवाई योग्य नहीं हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि जब किसी आदेश में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की अवहेलना हुई हो, तब वैकल्पिक उपाय न्यायिक हस्तक्षेप में बाधा नहीं बन सकता। कोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि याचिकाकर्ताओं की उपस्थिति दर्ज होने के बावजूद उनके पक्ष को आदेश में कहीं दर्ज नहीं किया गया और न ही उनकी दलीलों पर विचार करने का उल्लेख है। कोर्ट ने कहा कि धारा 91 की कार्यवाही भले ही संक्षिप्त प्रकृति की हो, लेकिन किसी व्यक्ति को बेदखल करने से पहले उसे प्रभावी सुनवाई देना कानूनन आवश्यक है। हाईकोर्ट ने सभी बेदखली आदेशों और उनसे जुड़े 6 अप्रैल 2026 के आदेश को निरस्त करते हुए मामलों को पुनः उप तहसीलदार के पास भेज दिया। साथ ही निर्देश दिया कि नए सिरे से सुनवाई कर कानून के अनुसार निर्णय लिया जाए。 प्रमुख सचिव को निर्देश फैसले में कोर्ट ने विशेष रूप से राज्यभर में धारा 91 के मामलों में प्रक्रिया संबंधी खामियों पर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने राजस्व एवं उपनिवेशन विभाग के प्रमुख शासन सचिव को निर्देश दिया कि सभी राजस्व अधिकारियों के लिए विस्तृत गाइडलाइन और परिपत्र जारी किए जाएं, ताकि नोटिस, सुनवाई और निर्णय प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय तथा पारदर्शिता के सिद्धांतों का अनिवार्य रूप से पालन हो। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की सके।
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