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पराली से बायो-बिटुमेन: किसान की आय बढ़ेगी, सड़कें बनेगी आत्मनिर्भर भारत की दिशा
RBRohit Bansal
Mar 30, 2026 12:34:37
Chandigarh, Chandigarh
युद्ध आज की जरूरत नहीं, भगवान महावीर के अहिंसा के मार्ग से सब संभव- केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान पराली से सड़क तक बायो-बिटुमेन की ऐतिहासिक पहल- केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान
शिवराज सिंह बोले– पराली जलाने से समाधान तक, किसान की आय बढ़ाने वाली तकनीक
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संदेश– बायो-बिटुमेन से आत्मनिर्भर भारत की नई राह और बिटुमेन आयात में कमी
शिवराज सिंह चौहान ने रेखांकित की प्राचीन भारतीय विज्ञान से आधुनिक शोध तक वैज्ञानिकों की भूमिका
समारोह में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और वैज्ञानिक एवं किसान भी हुए शामिल
नई दिल्ली, 30 मार्च 2026, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज सीएसआईआर मुख्यालय, अनुसंधान भवन, नई दिल्ली में आयोजित “लिग्नोसेल्युलोसिक बायोमास से बायो-बिटुमेन – फार्म रेजिड्यू टू रोड्स” विषयक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम में कहा कि पराली से बायो-बिटुमेन बनाकर सड़क निर्माण तक का यह सफ़र सचमुच ऐतिहासिक, शानदार और भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम है। उन्होंने इसे किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी प्रौद्योगिकी– इन चारों लक्ष्यों को एक साथ साधने वाली पहल बताया और वैज्ञानिकों की पूरी टीम को हृदय से बधाई दी, वहीं उन्होंने कुछ देशों के बीच चल रहे युद्ध के दौर में भगवान महावीर स्वामी जी के अहिंसा के सिद्धांत से दुनिया में शांति का संदेशभी दिया। समारोह में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और वैज्ञानिक एवं किसान भी शामिल हुए।
महावीर जयंती का संदेश और अहिंसा से जुड़ा कार्यक्रम
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन की शुरुआत महावीर जयंती के पावन अवसर पर भगवान महावीर स्वामी को नमन करते हुए की और कहा कि जो अपने आप को जीत ले वही महावीर है, जो इंद्रियों पर विजय प्राप्त करे वही जितेन्द्र और जो जितेन्द्र वही जिन है। उन्होंने कहा कि आज के वैश्विक परिदृश्य में सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य की शिक्षाएँ और भी प्रासंगिक हो गई हैं, क्योंकि “जिसकी लाठी उसकी भैंस” और “सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट” के बीच मानवता को महावीर के मार्गदर्शन की जरूरत है। मंत्री श्री चौहान ने पराली जलाने को भी अहिंसा के विरोध में बताते हुए कहा कि खेत में आग लगने से असंख्य जीव-जंतुओं और कीट-पतंगों का जीवन नष्ट होता है और पर्यावरण पर अलग से भारी आघात पड़ता है।
पराली समस्या से समाधान तक– किसान की आय और पर्यावरण दोनों की रक्षा
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि पहले गाँवों में पराली के अनेक उपयोग थे– बैलों के लिए भूसा, घरों के छज्जे और अन्य काम– इसलिए उसे जलाने की प्रथा नहीं थी, लेकिन आधुनिक साधनों के साथ यह उपयोग घटते गए और आज किसान को धान काटकर तुरंत गेहूँ बोने के लिए पंद्रह–बीस दिन भी नहीं मिलते, इसलिए वह मजबूरी में पराली जला देता है। उन्होंने बताया कि सरकार ने डायरेक्ट सीडिंग जैसी कई वैकल्पिक पद्धतियाँ विकसित की हैं, जिसके कारण पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाएँ घटी हैं, परन्तु बायो-बिटुमेन ने “आम के आम और गुठलियों के दाम” की तरह पराली को अतिरिक्त आय का स्रोत बना दिया है। श्री चौहान ने कहा कि जैसे नालियों में बहाया जाने वाला बेकार तेल अब मूल्यवान संसाधन बन गया, वैसे ही अब किसानों की पराली भी पैसे में बदलेगी, उनकी आय बढ़ेगी और पर्यावरण की रक्षा होगी।
आत्मनिर्भर भारत और आयात पर निर्भरता घटाने की ठोस राह
श्री चौहान ने जोर देकर कहा कि आज की दुनिया में भारत किसी पर निर्भर रहकर नहीं चल सकता, इसलिए आत्मनिर्भर बनना अनिवार्य है, क्योंकि “पता नहीं कब कौन सी चीज रुक जाए, किसका क्या गड़बड़ हो जाए।” उन्होंने बताया कि बायो-बिटुमेन के माध्यम से बिटुमेन आयात में कमी आने से देश को लगभग साढ़े चार हज़ार करोड़ रुपये का सीधा लाभ होने की संभावना है, जो आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को ठोस आधार देगा। शिवराज सिंह ने कहा कि जब नीति सही, नियत स्पष्ट और नेता नरेंद्र मोदी जी जैसा हो, तब एक कदम से अनेकों समस्याओं के समाधान निकलते चले जाते हैं और वही आज इस कार्यक्रम के माध्यम से दिखाई दें रहा है।
विज्ञान, किसान और आत्मनिर्भर कृषि की साझा यात्रा
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने कहा कि भारत जितना प्राचीन राष्ट्र है, उतनी ही प्राचीन यहाँ की कृषि और उतनी ही प्राचीन यहाँ की वैज्ञानिक परंपरा है, जिसमें आर्यभट्ट, सुश्रुत, चरक, कणाद, भास्कराचार्य, नागार्जुन, वराहमिहिर, बौधायन, महर्षि पराशर और ऋषि कश्यप जैसे महान नाम जुड़े हैं। उन्होंने प्राचीन काल की उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी ऐसी क्षमता थी कि मिसाइल दागने के बाद जरूरत पड़ने पर उसे बीच में से वापस बुला लिया जाए, जिससे स्पष्ट है कि भारतीय विज्ञान की जड़ें अत्यंत गहरी हैं। श्री चौहान ने कहा कि आज के वैज्ञानिक साथी “सृजन के सारथी, समृद्धि के साधक और राष्ट्र निर्माण के नायक” हैं, जिनकी संगत ज्ञान, भक्ति और कर्म– तीनों का त्रिवेणी संगम बनाती है और यही संगम खेत, खलिहान और प्रयोगशाला को एक सूत्र में पिरोता है।
फसल उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और नए शोध की दिशा
अपने संबोधन में श्री चौहान ने बताया कि भारत ने चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया में पहला स्थान प्राप्त किया है और कभी अमेरिका से पीएल–480 गेहूँ मँगाने वाला देश आज शरबती गेहूँ और बासमती चावल की खुशबू से दुनिया को आकर्षित कर रहा है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ की आबादी वाले भारत के लिए खाद्य सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए दलहन, तिलहन, फल, सब्जियाँ और दालों में भी आत्मनिर्भरता जरूरी है तथा आईसीएआर और अन्य संस्थान जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच ऐसी किस्में विकसित कर रहे हैं जो अधिक गर्मी और अधिक नमी जैसी विपरीत परिस्थितियों में भी स्थिर उत्पादन दे सकें। केंद्रीय मंत्री ने भरोसा जताया कि सीएसआईआर, सीआरआरआई, आईआईटी और कृषि अनुसंधान संस्थानों के संयुक्त प्रयास से “परिश्रम के पसीने और प्रौद्योगिकी के प्रकाश का संगम” बनाकर पराली से बायो-बिटुमेन, बायो-फ्यूल और अन्य नवाचारों के माध्यम से देश को विकसित और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य तक पहुँचाया जाएगा।
“जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान” का नया संकल्प
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत गांवों का देश है, जहाँ किसान गाँव की आत्मा और अन्न, फल, सब्जी देकर जीवन दाता के रूप में भगवान से कम नहीं हैं, इसलिए कृषि मंत्री के रूप में किसानों की सेवा ही उनके लिए भगवान की पूजा है। उन्होंने जोर दिया कि यह कार्यक्रम केवल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर नहीं, बल्कि “मिट्टी की महक को मशीन की महत्ता से जोड़ने”, “खेत के अवशेष को देश के विशेष गौरव में बदलने” और “खेत, खलिहान और विज्ञान के विधान का गठबंधन” करने वाला ऐतिहासिक अवसर है। मंत्री श्री चौहान ने वैज्ञानिकों, सड़क परिवहन क्षेत्र और किसानों को बधाई देते हुए कहा कि सिलचर से तिरुपति बालाजी तक और आगे पूरे देश में ऐसी सड़कों का जाल बिछे, आयात पर निर्भरता समाप्त हो और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान” का नारा विकसित भारत के सशक्त संकल्प के रूप में गूंजता रहे।
"बायो-बिटुमेन का सफल प्रयोग एक साथ कई प्रमाणिकताएँ स्थापित करता है"
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध और बार‑बार उठ रही आत्मनिर्भरता की आवश्यकता के बीच यह बायो-बिटुमेन से जुड़ा कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण समय पर आयोजित किया जा रहा है, क्योंकि दुनिया दूसरे देशों से आयात घटाने के विकल्प खोज रही है, जबकि भारत में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2014 से ही आत्मनिर्भर भारत का मंत्र देकर तैयारियाँ शुरू कर दी थीं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कोविड आपदा के समय भारत अपना वैक्सीन स्वयं विकसित कर सका, किसानों तक सीधे लाभ पहुँचाने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की व्यवस्था पहले से तैयार थी और जनधन योजना के कारण किसी गरीब को खाली पेट सोने से बचाने की ऑनलाइन व्यवस्था पहले ही बन चुकी थी, जो किसी भी दूरदर्शी नेतृत्व की असली पहचान है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सीएसआईआर‑सीआरआरआई और अन्य संस्थाओं के समन्वय से बायो-बिटुमेन का सफल प्रयोग एक साथ कई प्रमाणिकताएँ स्थापित करता है– पहली, यह कि फॉसिल फ्यूल्स, पेट्रोल और कोयले पर भारत की निर्भरता घटेगी और नेट‑ज़ीरो लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम उठेगा; दूसरी, यह कि अब सड़क निर्माण में भी मेक इन इंडिया की ठोस भागीदारी होगी और वेस्ट‑टू‑वेल्थ की अवधारणा के तहत पराली जैसे क्रॉप रेसिड्यू से मूल्यवान उत्पाद तैयार कर आयातित बिटुमेन पर होने वाला 25 से 35 हजार करोड़ रुपये तक का व्यय घटाया जा सकेगा।
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KSKuldeep Singh
FollowMar 30, 2026 14:00:130
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KSKuldeep Singh
FollowMar 30, 2026 13:47:01243
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RKRAJESH KATARIA
FollowMar 30, 2026 13:34:431004
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MJManoj Joshi
FollowMar 30, 2026 13:34:21857
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SSSandeep Singh
FollowMar 30, 2026 13:33:43Kullu, Himachal Pradesh:अगले 6 घंटों में चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला के कुछ स्थानों पर मध्यम गरज और बिजली के साथ एक-दो स्थानों पर ओलावृष्टि होने की संभावना है।
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SSSanjay Sharma
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HSHarmeet Singh Maan
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SSSanjay Sharma
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MSManish Shanker
FollowMar 30, 2026 12:37:08Sahibzada Ajit Singh Nagar, Punjab:परल ग्रुप की जो लिस्ट आप द्वारा मुहैया करवाई गई थी जिसमें गांव बहरामपुर के बारे में जिक्र किया गया है वह जिला रोपड़ में पड़ता है। तथा सुल्तानपुर, बेगमपुरा, दुगली गांव का पता नहीं चल पा रहा।
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