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ARAman RayFollow1 Sept 2024, 09:14 am
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RC नवीनीकरण में राहत: 30 सितम्बर तक जुर्माने में छूट, बूंदी

Noida, Uttar Pradesh:RC नवीनीकरण में राहत, 30 सितंबर तक मिलेगी जुर्माने में छूट बूंदी राज्य सरकार ने दुपहिया वाहन और कृषि ट्रैक्टर मालिकों को बड़ी राहत देते हुए आरसी (रजिस्ट्रेशन) नवीनीकरण में देरी पर लगने वाले जुर्माने को कम कर दिया है। परिवहन विभाग की एमेन्टी योजना 30 सितंबर तक लागू रहेगी। अब दुपहिया वाहनों पर अधिकतम 1000 रुपये और कृषि ट्रैक्टरों पर देरी के अनुसार अधिकतम 2500 से 5000 रुपये तक एकमुश्त जुर्माना देना होगा। डीटीओ सौम्या शर्मा ने बताया कि वाहन मालिक परिवहन विभाग के वाहन सिटीजन पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। योजना के बाद विशेष जांच अभियान भी चलाया जाएगा।
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जहांगीरपुरी में मारपीट से 23 वर्षीय आरिफ की मौत, 3 नाबालिग हिरासत

New Delhi, Delhi:राजधानी दिल्ली के जहांगीरपुरी में मारपीट के एक मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। H-4 ब्लॉक के पास हुई हिंसक मारपीट में गंभीर रूप से घायल 23 वर्षीय आरिफ की इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में तीन नाबालिगों को हिरासत में लिया है, वहीं, पोस्टमार्टम के बाद शव मिलने पर परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सड़क पर प्रदर्शन किया। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह हमला करीब छह से सात महीने पहले हुए एक पुराने विवाद का बदला लेने के इरादे से किया गया था। मामले में कानून के दायरे में आने वाले तीन नाबालिगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही आरिफ का शव परिजनों को सौंपा गया, वे शव को लेकर जहांगीरपुरी के कुशल चौक पहुंच गए और सड़क पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों का आरोप है कि पुलिस मामले के कुछ आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है। इस दौरान मौके पर जमकर नारेबाजी हुई और कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। सूचना मिलते ही ACP जहांगीरपुरी योगेंद्र खोखर मौके पर पहुंचे और परिजनों से बातचीत की। उन्होंने फरार आरोपियों के खिलाफ जल्द सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया। आश्वासन मिलने के बाद परिजन शव लेकर वहां से रवाना हो गए। फिलहाल एहतियात के तौर पर इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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गीतांजलि यूनिवर्सिटी ने अंतरराष्ट्रीय CCrISP कार्यक्रम का सफल आयोजन और समापन किया

Jaipur, Rajasthan:उत्तर भारत में पहली बार गीतांजलि यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय CCrISP कार्यक्रम का सफल आयोजनरॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स, इंग्लैंड के सहयोग से 17 जुलाई 2026 को हुआ सफल समापन उदयपुर। सर्जिकल क्रिटिकल केयर के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए गीतांजलि यूनिवर्सिटी, उदयपुर ने रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स ऑफ इंग्लैंड (Royal College of Surgeons of England) के सहयोग से आयोजित अंतरराष्ट्रीय CCrISP (Care of the Critically Ill Surgical Patient) कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन एवं समापन किया। 13 जुलाई से प्रारंभ हुआ यह प्रतिष्ठित प्रशिक्षण कार्यक्रम 17 जुलाई 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। गीतांजलि यूनिवर्सटी को उत्तर भारत का एकमात्र मान्यता प्राप्त (Accredited) CCrISP Centre होने का गौरव प्राप्त है, जहाँ भविष्य में भी इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम का नियमित आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का शुभारंभ 13 जुलाई 2026 को आयोजित Sensitization Programme से हुआ, जिसमें रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स ऑफ इंग्लैंड के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों एवं फैकल्टी सदस्यों ने CCrISP कार्यक्रम की उपयोगिता, आधुनिक सर्जिकल क्रिटिकल केयर की अवधारणाओं तथा वैश्विक उपचार मानकों पर अपने विचार साझा किए। इसके पश्चात 14–15 जुलाई को CCrISP Instructor Course तथा 16–17 जुलाई को CCrISP Provider Course का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम गीतांजलि यूनिवर्सिटी के लिए एक और ऐतिहासिक उपलब्धि रहा, क्योंकि यह किसी अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थान के साथ विश्वविद्यालय का पहला औपचारिक अकादमिक सहयोग (International Academic Collaboration) था। इस पहल को देश-विदेश के चिकित्सा विशेषज्ञों एवं चिकित्सकों से अत्यंत उत्साहजनक प्रतिसाद प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में प्रतिभागियों का अधिकांश प्रतिनिधित्व राजस्थान के बाहर से रहा, जिसमें भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सहित अन्य देशों से भी चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों ने भाग लिया। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली इस व्यापक सहभागिता ने गीतांजलि यूनिवर्सिटी की वैश्विक पहचान, उच्च शैक्षणिक गुणवत्ता तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान करने की प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ किया। CCrISP Course की प्रमुख विशेषताएँ CCrISP विश्वभर में मान्यता प्राप्त एक संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य गंभीर रूप से बीमार सर्जिकल मरीजों की शीघ्र पहचान, प्रारंभिक मूल्यांकन, समयबद्ध उपचार तथा बहु-विषयक (Multidisciplinary) टीम के समन्वित प्रबंधन की क्षमता विकसित करना है। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को निम्नलिखित विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया— •रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स (यूके) द्वारा विकसित एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण। •अनुभवी अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी द्वारा व्यावहारिक एवं इंटरैक्टिव शिक्षण। •वास्तविक क्लिनिकल परिस्थितियों पर आधारित केस एवं सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण। •सर्जन्स, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों, इमरजेंसी मेडिसिन विशेषज्ञों एवं रेजिडेंट चिकित्सकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी प्रशिक्षण। •मरीजों की सुरक्षा, त्वरित निर्णय क्षमता एवं बेहतर क्लिनिकल परिणामों पर विशेष फोकस। •वैश्विक मानकों के अनुरूप आधुनिक सर्जिकल क्रिटिकल केयर तकनीकों एवं प्रोटोकॉल का प्रशिक्षण। Instructor Course के माध्यम से भावी प्रशिक्षकों (Faculty) को तैयार किया गया, जबकि Provider Course में प्रतिभागियों को गंभीर सर्जिकल मरीजों के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक प्रबंधन का व्यापक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह कार्यक्रम न केवल उत्तर भारत, बल्कि देश एवं वैश्विक स्तर पर सर्जन्स, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स, क्रिटिकल केयर एवं इमरजेंसी मेडिसिन विशेषज्ञों, रेजिडेंट चिकित्सकों तथा अकादमिक समुदाय के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से सीखने का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों एवं विदेशों से आए प्रतिभागियों ने उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, सिमुलेशन आधारित अभ्यास तथा विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से अपने ज्ञान एवं कौशल को और अधिक सुदृढ़ किया। इस व्यापक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहभागिता को देखते हुए विश्वविद्यालय का मानना है कि इस पहल का लाभ भविष्य में केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश और वैश्विक स्तर पर सर्जिकल क्रिटिकल केयर की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान देगाa। इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभ भविष्य में मरीजों को मिलेगा। CCrISP प्रशिक्षण प्राप्त चिकित्सक गंभीर सर्जिकल मरीजों के मूल्यांकन, त्वरित निर्णय, प्रभावी उपचार एवं टीम आधारित प्रबंधन में अधिक दक्ष एवं सक्षम बनेंगे। इससे मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार, सुरक्षित देखभाल तथा बेहतर स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त होंगे। गीतांजलि यूनिवर्सिटी के लिए यह आयोजन एक ऐतिहासिक उपलब्धि रहा, जिसने संस्थान को अंतरराष्ट्रीय सर्जिकल क्रिटिकल केयर प्रशिक्षण के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया है। कार्यक्रम की सफल शुरुआत एवं समापन ने भविष्य में उत्तर भारत में नियमित CCrISP प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन का मार्ग भी प्रशस्त किया है। यह पहल सर्जिकल क्रिटिकल केयर शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने की दिशा में गीतांजलि यूनिवर्सिटी का एक महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी कदम साबित हुई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सहयोग भविष्य में चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान एवं रोगी देखभाल की गुणवत्ता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
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गोविंद नगर कच्ची बस्ती में अतिक्रमण हटाने पर प्रवर्तन दस्ता लाठीचार्ज

Kanpur, Uttar Pradesh:अतिक्रमण हटाने गई टीम ने किया लाठीचार्ज बाल घसीटकर जड़े थप्पड़, नाले में गिरे लोग कानपुर के गोविंद नगर कच्ची बस्ती में अवैध अतिक्रमण हटाने गई नगर निगम की टीम का विरोध करने पर प्रवर्तन दस्ते ने लाठीचार्ज कर दिया। दस्ते ने बस्ती में रहने वाले लोगों पर जमकर लाठियां भांजी, बाल नोच कर कई थप्पड़ जड़े। लाठीचार्ज के डर से भागे लोग नाले में गिर गए। भारी हंगामे के बाद प्रवर्तन दस्ता बिना अवैध अतिक्रमण ढहाए लौट गया। गोविंद नगर कच्ची बस्ती निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट रामलखन जायसवाल ने कुछ समय पहले गोविंदपुरी पुल के नीचे लगने वाले अवैध अतिक्रमण की शिकायत की थी, जिसमें कहा था कि पुराने पुल के नीचे अवैध रूप से स्ट्रीट वेंडर कब्जा किए हुए है। जिस पर शुक्रवार को नगर निगम प्रवर्तन दल की टीम अवैध अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। इलाकाई लोगों के मुताबिक इस दौरान आरटीआई एक्टिविस्ट ने प्रवर्तन दल को बस्ती के पास स्थित एक दुकान में अवैध रूप से मादक पदार्थों की बिक्री की जानकारी दी, जिसका लोगों ने विरोध किया। इस दौरान लोगों के विरोध करने पर नगर निगम अधिकारियों की इलाकाई लोगों से बहस होने लगी। दस्ते में शामिल रिटायर्ड सैन्यकर्मियों ने लोगों पर लाठियां बरसानी शुरू कर दी। लोगों के बाल घसीटकर उन्हें थप्पड़ जड़े, मारपीट होते ही इलाके में भगदड़ मच गई और आरटीआई एक्टिविस्ट नाले में जा गिरे।
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रीवा: शराबी नाती ने दादी की हत्या, 12 घंटे में आरोपी गिरफ्तार

Rewa, Madhya Pradesh:रीवा जिले के पनवार थाना क्षेत्र से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां शराब के नशे में धुत एक युवक ने अपनी ही दादी से गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर दी। जब बुजुर्ग बाबा अपनी पत्नी को बचाने के लिए बीच-बचाव करने पहुंचे तो आरोपी नाती ने उन पर लाठियों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल बाबा को पहले जवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और फिर संजय गांधी अस्पताल रीवा रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में मातम और आक्रोश का माहौल है। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 12 घंटे के भीतर आरोपी शिवम उर्फ शिवा कोल को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।
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बालोद स्टेशन का आधुनिक पुनर्विकास: एयरपोर्ट-स्तर सुविधाओं के साथ लोकार्पण

Raipur, Chhattisgarh:बालोद अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत देश के रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण और पुनर्विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हो चुकी है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देशभर के 75 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों का लोकार्पण एवं राष्ट्र को समर्पण करेंगे। इस ऐतिहासिक अवसर पर रायपुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले बालोद रेलवे स्टेशन का भी लोकार्पण किया गया जो जिले के लिए गौरव का विषय है। 1300 रेलवे स्टेशन का लक्ष्य आपको बता दें कि पुनर्विकास के पश्चात बालोद स्टेशन अब अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हो गया है, जिससे क्षेत्र के यात्रियों को बेहतर और सुविधाजनक आवागमन का लाभ मिलेगा, कांकेर लोकसभा क्षेत्र के सांसद भोजराज नाग ने मंच के स्टेशन का फिजिकल उदघाटन करते हुए इसे लोकसभा क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर बताया, उन्होंने कहा कि देशभर में 20 राज्यों के 75 रेलवे स्टेशन का आज लोकार्पण हुआ है उन्होंने कहा ये स्टेशन जनता की सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है यहां पर उन्हें एयरपोर्ट स्तर की सुविधाएं मिलेंगी, देशभर में 1300से अधिक रेलवे स्टेशन को पुनर्विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री और रेलमंत्री का आभार व्यक्त किया। क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष दुर्गानंद साहू ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री के दूरगामी सोच के परिणाम स्वरुप वर्षों से उपेक्षित इस रेलवे स्टेशन को पुनर विकसित किया गया है और काफी एक अच्छा अनुभव यहां पर आकर महसूस कर रहे हैं इसी के साथ ही संदीप सिंह ने कहा कि काफी अच्छा लग रहा है बालोद शहर को यह सुविधा मिल रही है देश के प्रधानमंत्री जी ने 75 स्टेशनों का उद्घाटन किया और यह स्टेशन आज एक अलग रूप में देखने को मिल रहा है वहीं राकेश छोटू यादव ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री ने हमें यह एक महत्वपूर्ण सौभाग्य दी है यह एक महत्वपूर्ण रेल लाइन है और यहां से शहर सहित ग्रामीण अंचलों के लाखों लोगों की उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। स्टेशन में ये सुविधाएं यात्रियों के सुगम प्रवेश व निकासी के लिए भव्य प्रवेश द्वार के साथ स्टेशन आकर्षक लग रहा है। यात्रियों की सुविधा के लिए लिफ्ट की सुविधा, जिससे यात्रियों, विशेषकर बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को अधिक आराम मिल सकेगा। बारिश और धूप से बचने के लिए प्लेटफॉर्म पर कवर शेड लगाए गए हैं। ट्रेन और कोच की स्थिति की सटीक जानकारी देने के लिए कोच गाइडेंस डिस्प्ले सिस्टम की स्थापना की है। मॉल्स की तरह स्टेशनों पर भी दिशा निर्देशों और जानकारी के लिए आधुनिक साइनेज बोड्र्स लगाए हैं। दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष सुविधाओं का भी प्रावधान किया जा रहा है इनमें रैंप, मार्क पार्किंग और लो हाइट टिकट बुकिंग काउंटर शामिल हैं। अलग से टॉयलेट, लो हाइट ड्रिंकिंग वाटर बूथ और व्हीलचेयर की व्यवस्था। कोच गाइडेंस सिस्टम, साइनेज और स्टैंडर्ड टैक्सटाइल गाइड जैसे साधन उपलब्ध हैं। बाइट - दुर्गानंद साहू, जनपद उपाध्यक्ष बाइट - संदीप सिन्हा, बालोद बाइट - राकेश छोटू यादव, बालोद बाइट - भोजराज नाग, सांसद
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महाराष्ट्र सरकार लिविंग विल के लिए दो मेडिकल बोर्ड गठित करेगी, मार्गदर्शक निर्णय जारी

Mumbai, Maharashtra:लिविंग विल’ पर महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी और निजी अस्पतालों में गठित होंगी दो मेडिकल समितियां  महाराष्ट्र सरकार ने गंभीर और असाध्य रोगों से जूझ रहे मरीजों के उपचार से जुड़े ‘लिविंग विल (Advance Directives)’ मामलों के निपटारे के लिए महत्वपूर्ण शासन निर्णय जारी किया है। इस फैसले के तहत राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों में प्राथमिक (Primary) और द्वितीय (Secondary) मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा, ताकि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जीवनरक्षक उपचार (Life Support) हटाने या बंद करने जैसे संवेदनशील मामलों पर समयबद्ध और पारदर्शी निर्णय लिया जा सके। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के ‘हरीश राणा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य’ मामले में दिए गए निर्देशों के आधार पर लिया गया है। इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने कॉमन कॉज मामले में भी स्पष्ट किया था कि यदि कोई मरीज असाध्य स्थिति में है और उसने पहले से ‘लिविंग विल’ तैयार की है, तो उसकी इच्छा के अनुरूप उपचार वापस लेने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत पूरी की जा सकती है। सरकार ने अपने आदेश में 13 वर्षों तक गंभीर बीमारी से पीड़ित रहे हरीश राणा का भी उल्लेख किया है। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उन्हें कृत्रिम भोजन, पानी और लाइफ सपोर्ट हटाने की अनुमति दी थी। इसके बाद 24 मार्च 2026 को दिल्ली एम्स में उनका शांतिपूर्वक निधन हो गया। इसी निर्णय के बाद राज्यों को मेडिकल बोर्ड गठित करने के निर्देश दिए गए थे। सरकारी अस्पतालों में ایسی होगी समिति सरकारी अस्पतालों में प्राथमिक मेडिकल बोर्ड की अध्यक्षता अतिरिक्त जिला शल्य चिकित्सक करेंगे। इसमें एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, शल्य चिकित्सक और फिजिशियन सदस्य होंगे, जबकि संबंधित चिकित्सा अधिकारी सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे। वहीं द्वितीय मेडिकल बोर्ड की अध्यक्षता जिला शल्य चिकित्सक करेंगे। इसमें एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, शल्य चिकित्सक, फिजिशियन और सदस्य सचिव के रूप में चिकित्सा अधिकारी शामिल होंगे。 निजी अस्पतालों के लिए भी अलग व्यवस्था निजी अस्पतालों में प्राथमिक मेडिकल बोर्ड का गठन अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) या मेडिकल सुपरिंटेंडेंट करेंगे। इस समिति में उपचार करने वाले चिकित्सक, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ और वरिष्ठ फिजिशियन या सर्जन शामिल होंगे。 इसके अलावा द्वितीय मेडिकल बोर्ड की अध्यक्षता संबंधित अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर करेंगे। इसमें उपचाररत चिकित्सक, संबंधित विषय के कम से कम पांच वर्ष के अनुभव वाले विशेषज्ञ, जिला शल्य चिकित्सक द्वारा नामित बाहरी विशेषज्ञ और जिला शल्य चिकित्सक सदस्य के रूप में शामिल होंगे। मुंबई और मुंबई उपनगर में जिला शल्य चिकित्सक के स्थान पर संबंधित सरकारी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक समिति का हिस्सा होंगे। सरकार ने सभी जिला शल्य चिकित्सकों को अपने-अपने जिलों में पंजीकृत चिकित्सा विशेषज्ञों का पैनल तैयार करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र विशेषज्ञों की नियुक्ति तुरंत की जा सके। इस शासन निर्णय के लागू होने से राज्य में ‘लिविंग विल’ से जुड़े मामलों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट, पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत होने की उम्मीद है।
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आजमगढ़ के सपा सांसद दरोगा प्रसाद सरोज पर तालाब कब्ज़े के आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

Azamgarh, Uttar Pradesh:सपा सांसद दरोगा प्रसाद सरोज पर तालाब और गांव के गरीबों की जमीन कब्जाने का आरोप, पीड़िता ने मंडलायुक्त से निष्पक्ष जांच की मांग, सपा सांसद ने आरोपों को बताया निराधार, किसी भी जांच के लिए तैयार। जनपद आजमगढ़ के लालगंज तहसील के मोहनपुर पटवास गांव के कुछ ग्रामीणों ने मंडलायुक्त, आजमगढ़ को शिकायत पत्र देकर लालगंज लोकसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के सांसद दरोगा प्रसाद सरोज एवं उनके परिजनों पर सार्वजनिक तालाब की भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया है। शिकायत में निष्पक्ष जांच कर तालाब की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की गई है। न्याय ना मिलने पर मुख्यमंत्री आवास के सामने जाकर आत्महत्या की दी चेतावनी है। वहीं इस मामले में सांसद दरोगा प्रसाद ने इन आरोपों को निराधार बताया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि गांव की आराजी संख्या 137, रकबा 7.798 हेक्टेयर, जो तालाब खाते में दर्ज है, उस पर कथित तौर पर फार्म हाउस बना लिया गया है। साथ ही कुछ हिस्से में खेती और मछली पालन किये जाने का भी मामला बताया गया। ग्रामीणों का दावा है कि पहले इस तालाब का उपयोग पशुओं के नहलाने, ग्रामीणों के दैनिक उपयोग और सार्वजनिक हित के कार्यों के लिए होता था, लेकिन अब आम लोगों का उपयोग बंद हो गया है। इस मामले की शिकायत पहले मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से भी की गई थी, जिसके बाद जिलाधिकारी आजमगढ़ को जांच के निर्देश दिए गए थे। लेकिन अबतक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है तथा मामले को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। शिकायतकर्ता ने मंडलायुक्त से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर यदि सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा पाया जाए तो उसे हटाकर तालाब को पुनः जन उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाए। पीड़िता गीता सरोज का आरोप है कि उनके गाँव के सपा सांसद दरोगा प्रसाद सरोज ने गाँव के लगभग 50 बीघे के तालाब ग्राम सभा की संपत्ति पर कब्ज़ा कर लिया है और वहाँ एक बड़ा फार्म हाउस बना लिया है। इसके अलावा, उन्होंने आस-पास के कई गरीब ग्रामीणों की ज़मीनें भी हड़प ली हैं। जहां फार्म हाउस के चारों तरफ ज़मीन पर बिजली के तार बिछाए गए हैं, 5-6 बोरिंग की गई है और वहाँ अवैध रूप से मछली पालन व पेड़ों की कटाई करके लकड़ी बेची जा रही है। आरोप लगाया कि सांसद के परिवार के सदस्य बेटे मनोज सरोज, प्रमोद सरोज और पोता/महाप्रधान अभिषेक सरोज शराब पीकर उनके घर के आस-पास गाड़ियाँ दौड़ाते हैं, हुड़दंग मचाते हैं और विरोध करने पर जान से मारने व तालाब में गाड़ देने की धमकी देते हैं। गीता सरोज ने बताया कि एक महीने पहले उनकी खुद की लगभग 1 बीघा ज़मीन जिसमें पोखरा था उस पर भी रात में इंजन लगाकर पानी सुखाया गया, मछलियाँ मार ली गईं और आधे पोखरे को पाटकर कब्ज़ा कर लिया गया। उन्होंने इस मामले की शिकायत एसडीएम, तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल से की थी, लेकिन सांसद के प्रभाव के कारण स्थानीय प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। 112 नंबर या अन्य हेल्पलाइन पर कॉल करने के बाद जब पुलिस आती है, तो उनके सामने भी ये लोग दबंगई और मारपीट करने की धमकी देते हैं। अगर प्रशासन उनकी सुनवाई नहीं करता और जाँच पूरी करके कार्रवाई नहीं की जाती, तो वे सांसद और उनके परिवार के हाथों मरने के बजाय मुख्यमंत्री आवास के सामने जाकर आत्महत्या कर लेंगी।
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टोंक दौरे पर सचिन पायलट का सरकार पर शिक्षा-स्वास्थ्य और तबादलों को लेकर सवाल

Tonk, Rajasthan:टोंक शिक्षा, स्वास्थ्य और तबादलों को लेकर सरकार पर विपक्ष के निशाने, सचिन पायलेट ने कई मुद्दों पर उठाए सवाल देश और प्रदेश के विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के लंबे समय से चल रहे अनशन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष सरकार पर गंभीर नहीं होने का आरोप लगा रहा है। साथ ही, राजस्थान में प्रसूताओं की मौतों को लेकर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। वहीं, शिक्षा विभाग में हाल ही में हुए तबादलों को लेकर भी विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि तबादले निष्पक्ष तरीके से नहीं किए गए। इसके अलावा, इथेनॉल नीति को लेकर भी सरकार की आलोचना की जा रही है और कहा जा रहा है कि इसे पर्याप्त तैयारी के बिना लागू किया गया। विपक्ष का कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार को जवाबदेही के साथ काम करना चाहिए, जबकि सरकार इन आरोपों से अलग अपना पक्ष रखती रही है।
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बलरामपुर में समय पर भुगतान से गन्ना किसानों की आय बढ़ी; समृद्धि लौटी

Balrampur, Uttar Pradesh:बलरामपुर में समय पर भुगतान और सरकारी योजनाओं से बदली गन्ना किसानों की तस्वीर, बढ़ी आय तो लौटी समृद्धि बलरामपुर में कभी गन्ना मूल्य भुगतान के लिए महीनों इंतजार करने वाले किसानों की तस्वीर अब बदलती नजर आ रही है। समय पर भुगतान, कृषि यंत्रों पर अनुदान और खेती से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने से जिले के गन्ना उत्पादक किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई है। सदर विकासखंड के सिरसिया फार्म के दो किसानों ने बताया कि समय पर भुगतान मिलने से न सिर्फ खेती आसान हुई है, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी पहले से बेहतर हुई है। सिरसिया फार्म निवासी बृजेश कुमार वर्मा, पुत्र स्वर्गीय राजकुमार वर्मा, ने ग्रेजुएशन के बाद खेती को ही अपना पेशा बनाया। पिछले करीब 20 वर्षों से वह लगभग 100 बीघा भूमि पर गन्ने की खेती कर रहे हैं। बृजेश बताते हैं कि पहले गन्ने की खेती तो होती थी, लेकिन भुगतान समय पर नहीं मिलने से अगली फसल की तैयारी प्रभावित होती थी। खेती में लगाया गया पैसा लंबे समय तक फंसा रहता था, जिससे आर्थिक दबाव बना रहता था। वह बताते हैं कि अब गन्ने का भुगतान समय से मिलने लगा है। इसके साथ ही कृषि यंत्रों पर सरकारी अनुदान और अन्य योजनाओं का लाभ मिलने से खेती की लागत कम हुई है। आधुनिक कृषि उपकरणों के इस्तेमाल से उत्पादन में भी सुधार आया है। उनका कहना है कि आय बढ़ने से परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं और आर्थिक स्थिरता आई है। इसी गांव के किसान शिवकुमार वर्मा, पुत्र स्वर्गीय छोटेलाल वर्मा, पिछले लगभग 35 वर्षें से करीब 70 बीघा भूमि पर गन्ने की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि पहले भुगतान में देरी होने के कारण अगली फसल की बुवाई और अन्य कृषि कार्य समय पर नहीं हो पाते थे। पूंजी फंस जाने से किसानों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। शिवकुमार बताते हैं कि अब समय पर भुगतान मिलने से खेती की पूरी योजना व्यवस्थित ढंग से बन जाती है। गन्ना खेती से जुड़े अनुदान, कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सहायता और अन्य सुविधाओं का लाभ भी आसानी से मिल रहा है। इससे खेती लाभ का सौदा बन रही है और किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है। दोनों किसानों का कहना है कि समय पर गन्ना मूल्य भुगतान, सरकारी योजनाओं की आसान उपलब्धता और खेती के लिए मिल रही सहायता ने उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका कहना है कि आर्थिक स्थिति मजबूत होने से परिवार के जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव आया है। किसानों ने केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
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