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रामनगर के खनिज वाहन रजिस्ट्रेशन में बड़ा घोटाला, दफ्तर–बाहुबल गठजोड़ पर सवाल
SKSATISH KUMAR
Jan 22, 2026 12:04:14
Jaspur, Uttarakhand
स्लग खनिज निकासी वाहनों के रजिस्ट्रेशन में बड़ा झोल, बाहुबल और दफ्तर के गठजोड़ पर उठे सवाल,खनिज निकासी के वाहनों के रजिस्ट्रेशन में बड़ा झोल रामनगर उत्तराखंड राज्य जहां नियमों को ही धर्म माना जाता है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य को रामराज्य की दिशा में ले जाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। शासन-प्रशासन भी नियमों के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाने के निर्देश देता नजर आ रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कहीं न कहीं इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। रामनगर की कोसी नदी को खनिज निकासी का बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां खनिज निकासी के लिए कई प्वाइंट बनाए गए हैं, जिनमें कटिया पुल क्षेत्र सबसे प्रमुख माना जाता है। इस इलाके से हर साल सैकड़ों वाहनों के जरिए खनिज निकासी की जाती है, जिनका रजिस्ट्रेशन उत्तराखंड वन विकास निगम द्वारा किया जाता है। नियमों के अनुसार हर वाहन का समय-समय पर रजिस्ट्रेशन रिन्यू होना अनिवार्य है, लेकिन आरोप है कि रिन्यू करने के दौरान नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, कई ऐसे वाहन भी रिन्यू कर दिए जाते हैं जो मानकों पर खरे नहीं उतरते। सवाल यह उठता है कि यह लापरवाही वन विकास निगम में बैठे जिम्मेदार कर्मचारियों की है या फिर इसके पीछे किसी प्रकार का बाहुबल और अंदरूनी खेल काम कर रहा है। चर्चा है कि कुछ प्रभावशाली लोगों और दफ्तर के गठजोड़ के चलते नियमों को ताक पर रखकर रजिस्ट्रेशन रिन्यू किए जा रहे हैं। मामला संज्ञान में आने के बाद तराई पश्चिम वन प्रभाग के डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि संयुक्त टीम बनाकर ऐसे सभी वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जो नियमों के अनुरूप नहीं पाए जाएंगे। ऐसे वाहनों का रजिस्ट्रेशन तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाएगा। बताया जा रहा है कि उच्च अधिकारियों के निर्देश पर जल्द ही व्यापक चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। हालांकि चेकिंग के दौरान अक्सर वही वाहन पकड़े जाते हैं, जिन पर राजस्व बकाया होता है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि नियमों की अनदेखी कर रजिस्ट्रेशन रिन्यू करने वाले सरकारी कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होगी। फिलहाल, कटिया पुल क्षेत्र में संचालित सभी खनिज वाहनों की जानकारी उत्तराखंड वन विकास निगम से मांगी गई है, जिसका खुलासा जल्द होने की उम्मीद है। इसके बाद यह देखना अहम होगा कि धामी सरकार ऐसे लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों पर कब और कैसे कार्रवाई करती है। बाइट प्रकाश चंद्र आर्य, डीएफओ, तराई पश्चिम वन प्रभाग
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