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GGovindFollow24 Jul 2024, 09:44 am
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आंगनवाड़ी भोजन में गड़बड़ी? पड़ताल में सच खुलकर सामने आया

Seoni, Madhya Pradesh:मासूमों के निवालों की ग्राउंड रिपोर्ट सरकार द्वारा आंगनवाड़ी से लेकर स्कूलों में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले मासूम बच्चों की सेहत की चिंता करते हुए पोषण आहार और भोजन की व्यवस्था की गई है जिसको लेकर कई राज्यों और कई जिलों में इस योजना का संचालन करने वाले अधिकारी,ठेकेदार और स्व सहायता समूह संचालक सेंध लगाकर घटिया और गुणवत्ता विहीन भोजन परोस रहे हैं..जहां जी न्यूज सिवनी की टीम ने शहर की दो आंगनबाड़ियों में जाकर पड़ताल की यहां पर मीनू के हिसाब से आज कढ़ी और चांवल था जो बच्चों की थाली में मिला। बच्चे बढ़े स्वाद के साथ खाते नजर आये। बच्चों ने भी बताया कि वे कढ़ी और चांवल खा रहे हैं जो उन्हें स्वादिष्ट लग रहा है
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धौलपुर रोड पर शहतूत पेड़ पर महिला का संदिग्ध शव: पुलिस जांच में जुटी

Dholpur, Rajasthan:बाड़ी। शहर के धौलपुर रोड काली माई मंदिर के पास एक शहतूत के पेड़ पर संदिग्ध अवस्था मे लटका हुआ महिला का शव मिला है। घटना की सूचना पर कोतवाली पुलिस के साथ उपखंड प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं। एफएसएल टीम को मौके पर बुलाया गया है। मामले की जांच की जा रही है। मृतक महिला की पहचान गांव धीमरी निवासी 22 वर्षीय निरमेश पत्नी रामवकील गुर्जर के रूप में हुई है। जो बाड़ी में कायस्थ पाड़ा पुलिया के पास अपने रिश्तेदारों के यहां रह रही थी। महिला का पति बाहर काम करता है। जानकारी के अनुसार काली माई मंदिर के पास ईंटों की टाल के बगल में खड़े पेड़ पर आज सुबह घूमने वाले लोगों ने जब महिला के शव को लटका देखा तो मौके पर हड़कंप मच गया। सूचना पर कोतवाली थाना अधिकारी महेंद्र शर्मा के साथ बाड़ी सीओ महेंद्र कुमार,उपखंड अधिकारी अमित कुमार वर्मा मौके पर पहुंचे हैं। मामले की जांच की जा रही है। मृतक महिला की पहचान धीमरी गांव निवासी 22 वर्षीय निरमेश पत्नी रामवकील गुर्जर के रूप में हुई है। जिसका पीहर कोटरा थाना बसई डांग में है। बताया गया है कि महिला की दो महीने पहले शादी हुई थी। उसका पति रामवकील जयपुर में गाड़ी चलाने का काम करता है। जिसे पुलिस ने सूचना दी है। वह जयपुर से बाड़ी रवाना हो गया है। एफएसएल टीम बुलाकर मौके से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। मृतक महिला के पास कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।मौके पर मौजूद रिश्तेदारों का कहना है कि महिला कल शाम से घर से गायब थी। जिसको लेकर उसके पति को भी उन्होंने सूचना दी थी और उसको खोजने का भी प्रयास किया था। लेकिन वह मिली नही। कोतवाली थाना अधिकारी महेंद्र कुमार शर्मा का कहना है पूरे मामले की हर एंगल से जांच जारी है। एफएसएल टीम मौके से साक्ष्य जुटा रही है। महिला के परिजन एवं पति के आने के बाद पोस्टमार्टम एवं अन्य कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल शव को साक्ष्य जुटाने के बाद बाड़ी अस्पताल की मोर्चरी रखवाया जा रहा है।
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मैहर में दो दिवसीय नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, पूर्व राज्यमंत्री पटेल ने लिया भाग

Maihar, Madhya Pradesh:मैहर जिले के अमरपाटन स्थित यूनिक कॉलेज परिसर में पूर्व राज्यमंत्री रामखेलावन पटेल के सौजन्य से दो दिवसीय निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में भोपाल से आए आठ विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने विभिन्न बीमारियों से पीड़ित लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक परामर्श और उपचार संबंधी सलाह दी। शिविर में हृदय रोग, स्त्री एवं प्रसूति रोग, हड्डी रोग सहित कई अन्य गंभीर बीमारियों के विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद रहे। दूर-दराज के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में लोग स्वास्थ्य परीक्षण कराने पहुंचे और विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेकर शिविर का लाभ उठाया। पूर्व राज्यमंत्री रामखेलावन पटेल ने भी शिविर में पहुंचकर अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराना इस शिविर का मुख्य उद्देश्य है, ताकि समय रहते गंभीर बीमारियों की पहचान और उपचार संभव हो सके। उन्होंने मैहर जिले के नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में इस निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का लाभ लेने की अपील की है शिविर के दौरान चिकित्सकों ने मरीजों को आवश्यक दवाइयों के साथ स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। दो दिवसीय इस स्वास्थ्य शिविर को लेकर क्षेत्र के लोगों में उत्साह देखने को मिला और बड़ी संख्या में मरीजों ने विशेषज्ञ डॉक्टरों से जांच कराकर इसका लाभ प्राप्त किया।
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STET परीक्षा TRE 4 से पहले: पटना में छात्रों का BSEB कार्यालय के बाहर आंदोलन

Patna, Bihar:TRE 4 से पहले STET की परीक्षा की मांग को लेकर छात्र आज पटना के बिहार स्कूल ऐक्जामीनेशन बोर्ड के बाहर प्रदर्शन करने लगे। करीब 500 की संख्या में छात्रों ने BSEB कार्यालय के बाहर पात्रता परीक्षा की मांग को लेकर उग्र हो गए और मांग करने लगे कि BPSC द्वारा होने वाली TRE 4 से पहले उनकी परीक्षा ले। आपको बता दें कि बिहार में करीबन साढ़े 5 लाख छात्र STET परीक्षा का इंतज़ार कर रहे हैं। 2024 में पात्रता परीक्षा की घोषणा हुई और उसकी परीक्षा 2025 में ली गयी। उसके बाद से कोई परीक्षा नही हुई। जबकि 2025 में साल में दोबार परीक्षा की घोषणा हुई थी। छात्रों ने कहा कि आज बोर्ड अध्यक्ष लिखित आश्वाशन दे कि शिक्षक परीक्षा से पहले उनकी परीक्षा ली जाएगी अन्यथा छात्र आंदोलन को महाआंदोलन में बदलने को मजबूर होंगे।
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पंजाब कलह पर धर्मवीर गांधी ने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए

Noida, Uttar Pradesh:कांग्रेस की कलह पर खुलकर बोले लोकसभा सांसद डॉ धर्मवीर गांधी कांग्रेस अगर पंजाब में विधानसभा चुनाव हारती हैं तो इसका नुकसान पूरे देश को होगा केंद्रीय नेतृत्व पर उठाए सवाल प्रभारी भूपेश बघेल के पंजाब दौरे पर उठाए सवाल उन्होंने कहा प्रभारी की इतनी मजबूरी क्या थी कि एक तरफ जहां संसद और दूसरी तरफ विधानसभा चल रही है और आप कांग्रेस के सम्मेलन कर रहे हो इसकेसे कांग्रेस की छवि खराब हो रही है पंजाब के कांग्रेसी नेता आपस में लड़के कांग्रेस कार्यकर्ताओं का अपमान कर रहे हैं केंद्रीय नेतृत्व इसको हल नहीं कर पा रही जिससे कि कांग्रेस को नुकसान हो रहा है पार्टी हाईकमान को प्लान A, प्लान B, ओर प्लान C पर काम करना चाहिए प्लान A फेल हो गया है तो पार्टी हाईकमान को B पर काम करना चाहिए दुर्घाग्य की बात है इलेक्शन पास है और पंजाब एक ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस सत्ता में आ सकती है लेकिन यहां राज्य की सत्ता हासिल करने के लिए बल्कि कुछ लोग अपना अस्तित्व के लिए लड़ रहें है पंजाब के कांग्रेस के नेताओं को आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आना चाहिए, पोस्टर वार पर कहा कि इससे कांग्रेस का ही नुकसान हो रहा है क्योंकि पोस्टर कोई भी लगाए ये कांग्रेस विरोधी है पार्टी अध्यक्ष राजा वाडिंग पर कहा कि जब पुराने कांग्रेसी सब इक्कठा हों गए है जिन्होंने कांग्रेस को अभी तक जिंदा रखा है इसका क्या मतलब है कि सब इस फैसले के खिलाफ है लेकिन पार्टी हाईकमान हो देखना चाहिए
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जमैअत इस्लामी हिंद ने शिक्षा नीति पर व्यापक समीक्षा और बहाली के संकेत दिए

New Delhi, Delhi:जमात-ए-इस्लामी हिंद ने आज तीन अहम मुद्दों पर की प्रेस कॉन्फ्रेंस। प्रोफेसर सलीम इंजीनियर उपाध्यक्ष जमाते इस्लामी हिंद जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के निकट नीट विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा देश में शिक्षा की स्थिति को लेकर जनता की गहरी नाराज़गी को दिखाता है। हालाँकि, केवल एक व्यक्ति को बदलने से उन व्यवस्थागत कमियों को दूर नहीं किया जा सकता जो बरसों से जमा हो गई हैं। मौजूदा संकट भारत की शिक्षा व्यवस्था की दिशा, प्राथमिकताओं और कामकाज के तरीक़े की व्यापक समीक्षा की मांग करता है। भारत में शिक्षा के क्षेत्र में असमानता बढ़ रही है। हज़ारों सरकारी स्कूलों का बंद होना, सरकारी निवेश में कमी, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों को मिलने वाली ग्रांट में कटौती और शिक्षा के तेज़ी से हो रहे कमर्शियलाइज़ेशन ने समान और अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा की नींव को कमज़ोर कर दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि अल्पसंख्यक शिक्षा, स्कॉलरशिप और शिक्षा से जुड़े सपोर्ट प्रोग्राम के लिए बजट में बार-बार कटौती की जा रही है, जिसका सबसे ज़्यादा असर उन समुदायों पर पड़ रहा है जो पहले से ही पिछड़े हुए हैं। अल्पसंख्यकों, दलितों, आदिवासियों, ग्रामीण पृष्ठभूमि और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को अच्छी शिक्षा और उच्च शिक्षा के अवसरों तक पहुँचने में कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही कई अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को बढ़ते विनियामक दबाव और चुनिंदा तरीके से निशाना बनाए जाने का सामना करना पड़ा है। मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद ने असमान व्यवहार और अल्पसंख्यकों द्वारा चलाए जा रहे शैक्षिक प्रयासों के लिए घटती गुंजाइश को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। ऐसी घटनाएं शैक्षिक विविधता और समान अवसर के प्रति संवैधानिक प्रतिबद्धता में भरोसे को कम करती हैं। जमात शिक्षा और रोज़गार के बीच बढ़ती दूरी को लेकर भी चिंतित है। उच्च शिक्षा में दाखिले बढ़ने के बावजूद, लाखों पढ़े-लिखे युवा बेरोज़गारी और अपनी योग्यता से कम स्तर के काम (अंडर-एम्प्लॉयमेंट) से जूझ रहे हैं। जो शिक्षा प्रणाली छात्रों को ज़रूरी कौशल, इनोवेशन, हालात के अनुसार ढलने की क्षमता और आलोचनात्मक विचार नहीं सिखा पाती, वह उन्हें ऐसी अर्थव्यवस्था के लिए ठीक से तैयार नहीं कर सकती जो तेज़ी से टेक्नोलॉजी, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से आकार ले रही है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) और इसे लागू करने के तरीके पर भी जनता की ओर से गंभीरता से विचार-विमर्श और जांच-परख होनी चाहिए। बहुत ज़्यादा केंद्रीकरण, भाषा थोपने, डिजिटल सुविधाओं तक असमान पहुँच, अहम परीक्षाओं पर बहुत ज़्यादा निर्भरता और संघीय व संस्थागत स्वायत्तता के कमज़ोर होने जैसी चिंताओं पर ध्यान देना ज़रूरी है। उतनी ही चिंता की बात यह है कि "मूल्य-आधारित शिक्षा" का इस्तेमाल बहुसंख्यकवादी सांस्कृतिक नैरेटिव को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। मूल्यों की शिक्षा संवैधानिक सिद्धांतों, सार्वभौमिक नैतिक मूल्यों और भारत की सांस्कृतिक विविधता के प्रति सम्मान पर आधारित होनी चाहिए, न कि सांस्कृतिक एकरूपता या विचारधारा की समानता थोपने का ज़रिया बननी चाहिए। इसलिए जमाअत सरकार से आग्रह करता है कि वह शिक्षा नीतियों की व्यापक और विचार-विमर्श पर आधारित समीक्षा करे और निम्नलिखित उपाय अपनाए: • शिक्षा पर सरकारी खर्च को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का कम से कम 6% तक बढ़ाएं और स्कूलों, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों के लिए अनुदान में आई कमी को दूर की जाए। • अल्पसंख्यकों, दलितों, आदिवासियों, लड़कियों और आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्रों के लिए स्कॉलरशिप, फ़ेलोशिप और शैक्षिक सहायता योजनाओं को बहाल किया जाय और बेहतर बनाया जाय। • सरकारी स्कूलों और सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को मज़बूत किया जाए, खासकर ग्रामीण, आदिवासी और कम सुविधा वाले इलाकों में। • संवैधानिक गारंटियों के अनुसार, सभी शिक्षण • अत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षाओं और कोचिंग इंडस्ट्री पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए परीक्षा और प्रवेश प्रणालियों में सुधार की जाए। • शिक्षा को रोज़गार सृजन, व्यावसायिक प्रशिक्षण, उद्यमिता, अनुसंधान और उभरती हुई तकनीकों के साथ और अधिक निकटता से जोड़ा जाए। • शैक्षिक परिवेश में संस्थागत स्वायत्तता, शैक्षणिक स्वतंत्रता और विचारों की विविधता की रक्षा की जाए। • संवैधानिक मूल्यों, नैतिक नागरिकता, सामाजिक सद्भाव और भारत की विविधतापूर्ण विरासत के प्रति सम्मान पर आधारित मूल्य-शिक्षा के लिए एक सचमुच समावेशी ढांचा विकसित की जाए। शिक्षा को केवल बाज़ार के लिए कामगार तैयार करने का ज़रिया नहीं, बल्कि जागरूक, कुशल, नैतिक और सामाजिक रूप से ज़िम्मेदार नागरिक तैयार करने की प्रक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए। देश की तरक्की, सामाजिक justice और भारत के संवैधानिक विज़न को साकार करने के लिए एक लोकतांत्रिक, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा प्रणाली ज़रूरी है। 2, मलिक मोहतासीम खान उपाध्यक्ष जमाते इस्लामी हिंद राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने 'वंदे मातरम' से जुड़े 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' के पारित होने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। हालांकि जमाअत देश की संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान का पूरी तरह समर्थन करती है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से कहा जाना चाहिए कि 'वंदे मातरम' के कुछ छंद—खासकर वे जिनमें मातृभूमि को एक देवी के रूप में संबोधित किया गया है और उसे कुछ देवियों से जोड़ा गया है—इस्लाम की एकेश्वरवादी मान्यताओं के अनुकूल नहीं हैं। यह चिंता न तो नई है और न ही किसी खास समुदाय तक सीमित; मुस्लिम विद्वानों और संगठनों ने दशकों से इसे उठाया है और भारत के लोकतांत्रिक और संवैधानिक ढांचे के भीतर इसे मान्यता भी मिली है।इसलिए, यह बात चिंताजनक है कि संसद ने जिस तरह से कानून बनाया है, उससे धार्मिक अल्पसंख्यकों के बीच चिंताएं बढ़ सकती हैं और ऐसे मुद्दे पर अनावश्यक तनाव पैदा हो सकता है जो सीधे तौर पर अंतरात्मा और आस्था की स्वतंत्रता से जुड़ा है। हालांकि यह बिल साफ़ तौर पर 'वंदे मातरम' गाने के लिए मजबूर नहीं करता, लेकिन यह इस गाने के प्रति 'अपमान' या 'अनादर' माने जाने वाले कामों को अपराध बनाता है। जब इसे सरकारी कार्यक्रमों में इसे गाने के नियमों के साथ जोड़कर देखा जाता है, तो अपनी मर्ज़ी से सम्मान करने और मजबूरी में शामिल होने के बीच का फ़र्क़ नाजुक हद तक धुंधला हो जाता है। जमाअत को "अपमान" और "बेअदबी" जैसे शब्दों के अस्पष्ट और व्यक्तिपरक (subjective) स्वरूप को लेकर खास चिंता है। मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक माहौल में, ऐसे प्रावधानों के गलत इस्तेमाल का गंभीर खतरा है। मौलिक स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाले कानून स्पष्ट और सटीक होने चाहिए; उन्हें मनמाने ढंग से व्याख्या करने या बहुमत के दबाव के आधार पर तय करने के लिए खुला नहीं छोड़ा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने 'बिजो इमैनुएल' मामले के ऐतिहासिक फ़ैसले में यह माना कि सच्ची धार्मिक आस्था के आधार पर सम्मानपूर्वक किसी गतिविधि में शामिल न होना, संविधान के तहत सुरक्षित है। चुप रहने या किसी खास तरह से अपनी बात न कहने का अधिकार भी संवैधानिक आज़ादी का उतना ही अहम हिस्सा है, जितना कि उसमें शामिल होने का अधिकार। कोई भी ऐसा कानून जो इस अधिकार के इस्तेमाल को लेकर डर, अनिश्चितता या सज़ा का डर पैदा करता है, वह अनुच्छेद 19 और 25 की भावना और भारत के विविधतापूर्ण लोकतंत्र की नींव को भी कमज़ोर करता है। देशभक्ति को किसी खास गाने, नारे या प्रतीकात्मक काम में हिस्सा लेने से नहीं मापा जा सकता। देशभक्ति को किसी खास सांस्कृतिक या धार्मिक अभिव्यक्ति को मानने से जोड़कर देखने पर उन नागरिकों के अलग-थलग पड़ने का खतरा रहता है जिनकी मान्यताएं ऐसे कामों में हिस्सा लेने की इजाज़त नहीं देतीं। जमाअत का मानना है कि भारत की असली ताकत बिना किसी ज़बरदस्ती के विविधता को अपनाने की क्षमता में है। राष्ट्रीय एकता ऐसे कानूनों से नहीं बन सकती जो नागरिकों को अपनी अंतरात्मा की आवाज़ मानने और आरोप लगने के डर के बीच किसी एक को चुनने की मुश्किल स्थिति में डाल दें। ऐसे कदम लोगों को जोड़ने के बजाय अलग-थलग करते हैं और उस भरोसे को कमज़ोर करते हैं जो एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए ज़रूरी है। इसलिए जमाअत-ए-इस्लामी हिंद सरकार से आग्रह करती है कि वह इस कानून की समीक्षा करे और स्पष्ट सुरक्षा उपाय लागू करे। राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान तो बना रहना चाहिए, लेकिन भारतीय संविधान की मूल भावना यानी मौलिक अधिकारों और आज़ादी की कीमत पर नहीं। 3, प्रो सलीम इंजीनियर जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने असम और देश के कई अन्य हिस्सों यथा, ओडिशा, गुजरात, केरल और बाढ़ की आशंका वाले अन्य क्षेत्रों में बाढ़ से हुई व्यापक तबाही पर गहरी चिंता व्यक्त की है। इन आपदाओं के बारंबार होने से एक बार फिर यह साफ़ हो गया है कि राहत-केंद्रित नज़रिए से हटकर आपदा से बचाव, तैयारी और जलवायु के प्रति मज़बूती (क्लाइमेट रेज़िलिएंस) पर केंद्रित नज़रिए को अपनाने की तत्काल ज़रूरत है। हालांकि बचाव कार्य और मानवीय सहायता ज़रूरी हैं, लेकिन सरकारों को वैज्ञानिक तरीके से नदियों का प्रबंधन, आर्द्रभूमि का संरक्षण, बेहतर जल निकासी व्यवस्था, पूर्व चेतावनी यंत्र, जलवायु से प्रभावहीन इंफ्रास्ट्रक्चर और असुरक्षित समुदायों के सुनियोजित पुनर्वास जैसे स्थायी उपायों को भी समान रूप से प्राथमिकता देनी चाहिए। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद अपने स्वयंसेवकों और स्थानीय यूनिट्स के कार्यकर्ताओं की समर्पित कोशिशों की सराहना करती है जो देश के अलग-अलग हिस्सों में बाढ़ से प्रभावित परिवारों को राहत, भोजन, मेडिकल मदद और दूसरी ज़रूरी सहायता पहुँचाने में सक्रिय हैं। हम सरकारों, स्वयंसेवी संस्थाओं, कॉर्पोरेट निकायों और नागरिकों से अपील करते हैं कि वे उन लोगों की उदारतापूर्ण मदद करें जिन्होंने अपने घर, आजीविका और प्रियजनों को खो दिया है। टीटी विथ प्रो सलीम इंजीनियर मदरसे को लेकर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर बोले प्रोफेसर सलीम इंजीनियर अफसोस होता है कि ऐसे लोग संवैधानिक पद पर हैं जिनको भारत के इतिहास और मद्रास के इतिहास के बारे में पता नहीं है इनको नहीं मालूम मद्रास में जो स्वतंत्रता का आंदोलन चला उसमें लोगों ने शहादते दी है इनको नहीं पता है ना तो देश का इतिहास मालूम है ना देश की विरासत मालूम है इनको नहीं पता मदरसे में पड़े लोग देश के राष्ट्रपति बने हैं अगर इनको यह लगता है कि मद्रास में इस तरह की कोई गतिविधि होती है तो उसके लिए कानून है उसे पर कार्रवाई करें लेकिन इस तरह का बयान देना सिर्फ नफरत फैलाना है। वंदे मातरम बिल्कुल लेकर बोले सलीम इंजीनियर हमने इस बिल का मुतालबा किया है इस बिल में यह नहीं है कि जबरदस्ती पढ़ना जरूरी है लेकिन इस बिल के जरिए मुसलमान को टारगेट करने और उसे बिल का मिस यूज़ करने के इमकान ज्यादा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मद्रास में आप सिर्फ 12वीं तक पढ़ाई के दिए आदेश क्रिएशन की डिग्री मान्य नहीं होगी इस पर प्रोफेसर सलीम इंजरी का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था पहले से ही चौपट है इनको पता नहीं मद्रास से कौन और कैसे लोग देश में आगे आए हैं अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान की मौत को लेकर प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने कहा निष्पक्ष जांच होनी चाहिए सवाल उठने शुरू हुए हैं वाकई एक्सीडेंट है नेचुरल डेथ है या कुछ और इसकी सही से जांच होनी चाहिए।
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