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Devendra KumarDevendra KumarFollow27 Dec 2024, 02:45 pm

उन्नावः फतेहपुर 84 मार्ग पर ओवरलोड डंपर सड़क में धंसा, 2 घंटे तक सड़क रही जाम

Bangarmau, Uttar Pradesh:

फतेहपुर 84 मार्ग पर ओवरलोड डंपर सड़क में धंस गया इससे करीब 2 घंटे तक 6 किलोमीटर लंबा जाम लगा गया। कानपुर को उन्नाव हरदोई रोड से जोड़ने वाले शिवराजपुर मार्ग पर कानपुर से फतेहपुर 84 की ओर जा रहे मौरंग लदे डंपर कल्याणी नदी के पास सड़क में धंस गया। उसे निकालने में 2 घंटे का समय लग गया। इस दौरान दोनों तरफ वाहनों की करीब 6 किलो मीटर लंबी कतारे लग गई। सूचना पर एआरटीओ प्रवर्तन अरविंद सिंह पहुंचे और पुलिस की मदद से डंपर को निकलवा कर जाम खुलवाया। डंपर में करीब 20 टन मौरंग ओवरलोड 55 के बजाय 75 टन पाई गई। 74 हजार रुपए जुर्माना तय करते हुए उसे सीज कर दिया।

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सामोद में दूध बिक्री मामले में पुलिस ने 3 हजार किलो पाउडर बरामद

Jaipur, Rajasthan:चौमूं जयपुर मिड- डे मील में मिलने वाले दूध को बेचने का मामला सामोद के चीथवाड़ी में कल हुई थी बड़ी कार्रवाई स्कूल में बच्चों को मिलने वाले दूध को बेचा गया बाजार में दूध पॉउडर मावा भट्टियों पर पहुंचने से पहले ही पहुंच गई पुलिस पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के तहत सरकार बच्चों को करती हैं निःशुल्क वितरण पुलिस ने दूध के पैकेट से भरी पिकअप को किया बरामद पिकअप चालक सहित कुछ लोगों को पुलिस ने किया था डिटेन करीब 3 हजार किलो दूध पाउडर के पैकेट किये गए बरामद अभी तक भी पुलिस थाने में जिम्मेदारों ने दर्ज नहीं कराया मुकदमा मुकदमा दर्ज होने के बाद ही आगे बढ़ पाएगी जांच आखिर बड़ा सवाल 24 घंटे बाद भी मुकदमा दर्ज क्यों नहीं कराया जिम्मेदारों ने जबकि सामोद पुलिस ने सम्बंधित विभागों को दी सूचना भीलवाड़ा, गंगानगर, जयपुर के गोविंदगढ़ से जुड़े हैं माफियाओं के तार आखिर कब दर्ज होगा मुकदमा...?
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श्रावण आरम्भ: रांची के पहाड़ी शिव मंदिर में तैयारियाँ पूरी, सुरक्षा बढ़ी

Ranchi, Jharkhand:कल से श्रावण के पावन माह की शुरुआत होने जा रही है। इसे लेकर राजधानी रांची के ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है और साफ-सफाई के साथ श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इस बार श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश और निकास मार्ग अलग-अलग बनाए गए हैं। प्रवेश पीछे स्थित सेंट्रल मार्ग से होगा, जबकि मुख्य मार्ग से निकास होगा। रविवार और सोमवार को श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक अर्घ से कर सकेंगे, जबकि अन्य दिनों में नियमित पूजा-अर्चना की व्यवस्था रहेगी. सुरक्षा के लिहाज से भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मंदिर में पहले से मौजूद 64 सीसीटीवी कैमरों के अलावा 100 अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। वहीं 150 से अधिक प्रशासनिक और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाएगी. पहाड़ी मंदिर विकास समिति का कहना है कि जिला प्रशासन और नगर निगम के सहयोग से सभी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। कुल मिलाकर, श्रावण माह को लेकर ऐतिहासिक पहाड़ियों मंदिर शिवभक्तों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है।
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जयपुर के सरस निकुंज में मुस्लिम संत सनम साहब की गुरु भक्ति कथा

Jaipur, Rajasthan:दीपक गोयल जयपुर एक मुस्लिम युवक... संस्कृत सीखता है, अपनी मां को वाल्मीकि रामायण सुनाता है... और फिर वैष्णव संत बनकर गुरु की शरण में पहुंच जाता है। जयपुर के सरस निकुंज में आज भी लगा है उस ‘सनम साहब’ की तस्वीर..जो बता रही है कि गुरु के दरबार में धर्म नहीं पूछा जाता, सिर्फ श्रद्धा देखी जाती है। गुरु पूर्णिमा पर देखिए... एक ऐसी गुरु-भक्ति की कहानी, जहां मां की इच्छा से शुरू हुआ सफर भक्ति में जाकर पूरा हुआ। तस्वीर में चेहरे कई हैं... लेकिन कहानी एक ऐसी है, जिसे सुनकर आप ठहर जाएंगे। गुरु-शिष्यों की कतार में एक तस्वीर है एक मुस्लिम संत की। नाम मोहम्मद याकूब... जिन्हें गुरु ने प्यार से नाम दिया सनम साहब। मां रामायण सुनना चाहती थीं... बेटे ने संस्कृत सीखी। रामायण सुनाने की यह यात्रा यहीं खत्म नहीं हुई। रामायण ने याकूब के भीतर अध्यात्म का ऐसा बीज बोया, जिसने उन्हें वैष्णव भक्ति की राह पर ला खड़ा किया। अलवर में याकूब की मुलाकात शुक संप्रदाय के संत सरस माधुरी शरण महाराज से हुई। उन्होंने गुरु से शिष्य बनाने का आग्रह किया। 11 दिसंबर 1912 को सरस माधुरी शरण महाराज ने मोहम्मद याकूब को दीक्षा दी। दीक्षा के बाद उनका नाम रखा गया श्यामाशरण, लेकिन गुरु उन्हें प्यार से सनम साहब कहकर पुकारते थे। इसके बाद सनम साहब सरस निकुंज की धार्मिक परंपरा का हिस्सा बन गए। रासलीला में शामिल हुए, वृंदावन जाते रहे, अजमेर में राधाष्टमी मनाते रहे और वैष्णव परंपरा के धार्मिक उत्सवों में पूरी श्रद्धा से शामिल होते रहे। आज भी सरस निकुंज में गुरु परंपरा के संतों के बीच सनम साहब की तस्वीर उसी सम्मान के साथ मौजूद है। तस्वीर नहीं, भक्ति का दस्तावेज हैं...सरस निकुंज की झांकी में श्री शुक सखिजी और श्रीप्रेम मंजरीजी की सेवा भावना के साथ गुरु परंपरा में सरस माधुरी शरण, रसिक माधुरी शरण और सनम साहब भी स्मरण किए जाते हैं। यानी एक ही परंपरा में अलग-अलग पहचानें नहीं, एक ही भाव भक्ति। सरस माधुरी शरण महाराज के बारे में सनम साहब ने श्री सरस सागर में लिखा कि वह उस दिन को कभी नहीं भूलेंगे, जिस दिन सतगुरु ने उन्हें अपना शिष्य बनाया। सरस निकुंज पीठ के प्रवक्ता प्रवीण बड़े भैया के मुताबिक, सनम साहब की कहानी आज के दौर में और भी प्रासंगिक हो जाती है। मां की सेवा से शुरू हुई यह यात्रा भगवान की सेवा तक पहुंची। गुरु के सामने धर्म नहीं, श्रद्धा मायने रखती है। सरस निकुंज पीठ की करीब 150 साल पुरानी परंपरा में दिल्ली से जयपुर आई शुक संप्रदाय की धारा के पहले आचार्य सरस माधुरी शरण महाराज रहे। उनके बाद रसिक माधुरी शरण महाराज और अब वर्तमान में अलबेली माधुरी शरण महाराज पीठ पर विराजमान हैं। बहरहाल, भारत की भक्ति परंपरा में ऐसे उदाहरण पहले भी मिलते हैं। मुस्लिम संत-कवि रसखान ने कृष्ण भक्ति को अपने काव्य का केंद्र बनाया। वहीं काले खां करौली के मदनमोहनजी महाराज के अनन्य भक्त माने जाते हैं। यानी सदियों से भक्ति ने पहचान की दीवारों को चुनौती दी है। और आज गुरु पूर्णिमा पर जयपुर के सरस निकुंज की दीवार पर लगी सनम साहब की तस्वीर उसी परंपरा की एक जीवंत याद है। एक मुस्लिम युवक... जिसने मां के लिए संस्कृत सीखी। रामायण पढ़ी..रामायण सुनाते-सुनाते कृष्ण भक्ति में डूब गया...और आखिरकार वैष्णव संत बनकर गुरु की शरण में पहुंच गया। शायद इसीलिए गुरु पूर्णिमा का सबसे बड़ा संदेश यही है गुरु के द्वार पर पहचान नहीं पूछी जाती...वहां सिर्फ श्रद्धा देखी जाती है।
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जयपुर के मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में सावन के लहरिया रंग में गणेशजी का श्रृंगार

Jaipur, Rajasthan:सावन की फुहारों के बीच लहरिया रंग में सजा गणेशजी का दरबार मोतीडूंगरी गणेशजी महाराज धारण की खास लहरिया पोशाक रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ भी राजस्थानी रंग में जयपुर में सावन की फुहारों के साथ अब भगवान गणेश भी राजस्थानी रंग में रंगे नजर आ रहे हैं। जयपुर के प्रसिद्ध मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में इस सावन भगवान गजानन को लहरिया पोशाक धारण करवाई गई। बुधवार और रविवार को भक्तों को गणेशजी महाराज के लहरिया श्रृंगार के दर्शन होंगे। खास बात ये है कि इस बार सिर्फ गणेशजी ही नहीं, बल्कि रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ भी लहरिया पोशाक में नजर आएंगे। सावन... यानी हरियाली, बारिश और राजस्थान के पारंपरिक रंगों का महीना। इसी सावनी रंगत को अब जयपुर के आराध्य देव मोतीडूंगरी गणेशजी के दरबार में भी देखा जा रहा हैं। भगवान गणेशजी महाराज को इस बार सावन के माह में खास लहरिया पोशाक धारण करवाई जाएगी। बुधवार और रविवार को भक्तों को गजानन महाराज के इस खास स्वरूप के दर्शन होंगे। गणेशजी की पोशाक को खास तौर पर तैयार करवाया गया है। लहरिया कपड़े पर बारीक आरातारी का काम किया गया है। पोशाक के साथ भगवान गणेशजी के लिए लहरिया साफा भी तैयार करवाया गया है। यानी सावन के महीने में गजानन महाराज का श्रृंगार पूरी तरह राजस्थानी रंग और परंपरा में नजर आएगा। इस पोशाक को तैयार करना भी अपने आप में खास है। भगवान गणेशजी की एक पोशाक के लिए करीब 30 मीटर कपड़ा और 30 मीटर अस्तर इस्तेमाल होता है। इस बार मंदिर ट्रस्ट की ओर से चार लहरिया पोशाकें तैयार करवाई गई हैं। पहले पूरे सावन के लिए एक ही पोशाक तैयार karvai जाती थी, लेकिन इस बार चार पोशाकों के जरिए अलग-अलग अवसरों पर गजानन महाराज का लहरिया श्रृंगार किया जाएगा। गणेशजी के साथ मंदिर में विरাজमान रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ को भी लहरिया पोशाक धारण करवाई जाएगी। यानी सावन में मोतीडूंगरी का पूरा गणेश दरबार राजस्थान के पारंपरिक लहरिया रंग में रंगा दिखाई देगा। महंत मोतीडूंगरी गणेश मंदिर कैलाश शर्मा ने बताया की इस सावन मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में आस्था के साथ राजस्थान की लोक संस्कृति का रंग भी नजर आएगा। बारिश की बूंदों, सावन की हरियाली और लहरिया के रंगों के बीच गजानन महाराज के ये विशेष दर्शन भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेंगे। लहरिया सिर्फ कपड़े का डिजाइन नहीं, बल्कि राजस्थान की पहचान और सावन की रंगीन परंपरा से जुड़ा हुआ है। सावन में महिलाएं लहरिया की साड़ियां और चुनरियां पहनती हैं, बाजार लहरिया के रंगों से सजते हैं और अब इसी परंपरा की झलक जयपुर के आराध्य देव के दरबार में भी दिखाई देगी। बहरहाल, करीब 265 साल पुरानी आस्था, सावन का मौसम और राजस्थान का पारंपरिक लहरिया रंग इस बार मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में इन तीनों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। बुधवार और रविवार को जब गणेशजी महाराज लहरिया साफे और पोशाक में दर्शन देंगे, तो भक्तों के लिए ये नजारा भी किसी उत्सव से कम नहीं होगा।
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गांव के सरकारी स्कूल में अध्यापकों के विवाद से तालाबंदी, ग्रामीण धरना पर

Sri Ganganagar, Rajasthan:विद्यालय में अध्यापकों की आपसी खींचतान और विवाद से तंग आकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। विद्यालय में शैक्षणिक माहौल खराब होने से नाराज ग्रामीणों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर दी और विद्यालय परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों का आरोप है कि अध्यापकों के बीच लंबे समय से चल रहे इस विवाद के संबंध में शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को पूर्व में भी सूचित किया गया था, लेकिन किसी ने इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया। अधिकारियों की इस अनदेखी के चलते ग्रामीणों को मजबूरन तालाबंदी का कदम उठाना पड़ा। हैरान करने वाली बात यह है कि घटना के बाद भी शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले पर कुछ भी कहने से कतरा रहे हैं और मीडिया के सवालों से बचते नजर आ रहे हैं। धरना स्थल पर ग्रामीणों के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि और कमरेड श्योपत राम भी डटे हुए हैं। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का साफ कहना है कि जब तक विद्यालय के पूरे स्टाफ का यहां से तबादला नहीं कर दिया जाता और नया स्टाफ तैनात नहीं होता, तब तक यह तालाबंदी और धरना प्रदर्शन लगातार जारी रहेगा।
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बेला में पुल टूटने से 60 हजार लोग मुख्य मार्ग से कटे, प्रशासन चेत जाये?

Jammu, उफनता नाला, टूटा पुल और 60 हज़ार लोगों की पुकार... प्रशासन कब जागेगा?\n\nकठुआ: जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कई इलाके अब भी मुख्य सड़कों से कटे हुए हैं, तो कई गांवों में लोगों के घरों तक पानी पहुंच चुका है। लेकिन कठुआ जिले के बेला इलाके की तस्वीर सबसे ज्यादा भयावह है, जहां एक पुल के पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाने से 60 हजार से अधिक आबादी का संपर्क मुख्य मार्ग से टूट गया है।\n\nज़मीन पर हकीकत जानने और प्रशासन तक लोगों की आवाज़ पहुंचाने के लिए ज़ी न्यूज़ की टीम अपनी जान जोखिम में डालकर तेज बहाव वाले नाले को पार करते हुए प्रभावित गांवों तक पहुंची। टीम ने स्थानीय लोगों से बातचीत की और उनकी परेशानियों को करीब से देखा, जो अब तक प्रशासनिक फाइलों से दूर हैं।\n\nपिछले साल बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुआ पुल, इस बार पूरी तरह बह गया\n\nस्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले साल आई बाढ़ में इस पुल को भारी नुकसान पहुंचा था। इसके बाद प्रशासन की ओर से स्थायी पुल का निर्माण नहीं कराया गया। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर एक अस्थायी रास्ता तैयार किया था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश ने उसे भी बहा दिया। अब लोगों के सामने सिर्फ दो ही विकल्प हैं—या तो जान जोखिम में डालकर उफनते नाले को पार करें या फिर 25 से 30 किलोमीटर लंबा दूसरा रास्ता अपनाएं। स्थानीय लोगों ने बताया कि जो रास्ता पहले 5 मिनट में तैय हो जाता था आज उसके लिए हमें 3 घंटे लग जाते हैं।\n\nस्कूल, अस्पताल और सरकारी सेवाएं सब प्रभावित\n\nग्रामीणों ने बताया कि पुल टूटने से सबसे ज्यादा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा है। छात्र-छात्राएं स्कूल और कॉलेज नहीं पहुंच पा रहे हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ाने आने वाले शिक्षक, स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात कर्मचारी और अन्य सरकारी कर्मचारी भी समय पर अपने कार्यस्थल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।\n\nआपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। स्थानीय महिलाओं ने बताया कि गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के समय हालात और भी गंभीर हो जाते हैं, क्योंकि एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकती।\n\nग्रामीणों का आरोप—प्रशासन ने छोड़ दिया भगवान भरोसे\n\nग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद से लगातार प्रशासन से गुहार लगाई जा रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। उनका आरोप है कि प्रशासन उनकी सुध लेने तक नहीं पहुंचा।\n\nग्रामीणों की मांग\n\nग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि युद्ध स्तर पर नए पुल का निर्माण कराया जाए या फिर तत्काल वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग बनाया जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई, मरीजों का इलाज, मजदूरों की रोज़ी-रोटी और सरकारी सेवाएं फिर से सामान्य हो सकें।
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गोंडा के खुले नालों से हो रही मौत, जीएम की टीम ने चेक किया

Gonda, Uttar Pradesh:प्रदेश के अलग-अलग जिलों में खुले नालों में गिरकर के लोगों की हो रही मौत खुले नालों में बह रहे लोगों को लेकर के जी मीडिया की टीम द्वारा आज गोंडा में ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर शहर में बने नालों की रियलिटी चेक की गई। जहां रियलिटी चेक में देखने को मिला कि श्रम विभाग के सामने डीएम आवास से 100 मीटर की दूरी पर स्थित लगभग 200 मीटर नाला खुला हुआ है। लोगों की सुरक्षा को लेकर कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया है कोई भी इस नाले में गिर करके हादसे का शिकार हो सकता है। यह नाला गोंडा लखनऊ और बलरामपुर राजमार्ग के ठीक बगल बना हुआ है प्रतिदिन लाखों की संख्या में लोग इस न्यायालय के बगल से गोंडा बलरामपुर लखनऊ राजमार्ग से होकर के जाते है। इस नाले का निर्माण किया गया है बड़ी-बड़ी सरिया भी छोड़ दी गई है। कोई भी अगर अनियंत्रित होकर के वाहन लेकर के इस नाले में गिरता है तो सरिया घुसने के चलते उसकी मौत भी हो सकती है। वही जी मीडिया की टीम इसके बाद शहर में बने और नालों की रियलिटी चेक करने के लिए टॉमसन इंटर कॉलेज के पास पहुंची। जहां पर देखने को मिला कि बीते 5 सालों से यहां पर विद्यालय के ठीक बगल नाला बना हुआ है जो लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय चौराहा की तरफ जाता है। यह नाला भी खुला हुआ है इस नाले में भी गिरकर के किसी भी व्यक्ति की मौत हो सकती है यह नाला भी गोंडा बलरामपुर लखनऊ राज मार्ग के ठीक बगल बना हुआ है। हजारों की संख्या में बच्चे भी यहां प्रतिदिन पढ़ने के लिए आते हैं ऐसे में वह भी यहां गिर करके हादसे के शिकार हो सकते हैं। इसके बाद जी मीडिया की टीम कैसरगंज से पूर्व सांसद ब्रिजभूषण शरण सिंह के कार्यालय के पास बन रहे निर्माणाधीन नाले का रियलिटी चेक किया गया कि यहाँ निर्माण के दौरान लोगों की सुरक्षा को लेकर कोई भी इंतजाम नहीं किया गया है नाले को खुला छोड़ कर निर्माण किया जा रहा है। यह भी नाला गोंडा बलरामपुर और लखनऊ राज मार्ग के ठीक बगल बनाया जा रहा है इसमें भी गिरकर कोई भी हादसे का शिकार हो सकता है। प्रति वर्ष गोंडा जिले में नाला निर्माण, नाला मरम्मत और नालों की सुरक्षा को लेकर लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं लेकिन इसके बावजूद भी शहर के बीचो-बीच बने नाले खुले हुए हैं और हादसे को दावत दे रहे हैं।
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कक्षा 5 के विवाद में छात्र की मौत, शिक्षक पर कार्रवाई की मांग

Gohara Marufpur, Uttar Pradesh:छात्रों के झगड़े में एक छात्र की मौत कौशाम्बी ज़िले में एक प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 5 के दो छात्रों के बीच हुए विवाद ने दर्दनाक मोड़ ले लिया। आरोप है कि क्लास के अंदर दोनों छात्रों के बीच मारपीट होती रही और शिक्षक मूकदर्शक बने रहे। मारपीट में गंभीर रूप से घायल छात्र को प्रयागराज रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और लापरवाह शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है। रिपोर्ट: मामला चरवा थाना क्षेत्र के पहाड़पुर सुधवर प्राथमिक विद्यालय का है। बताया जा रहा है कि कक्षा 5 में पढ़ने वाले दो छात्रों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। देखते ही देखते विवाद मारपीट में बदल गया। परिजनों का आरोप है कि घटना के दौरान मौजूद शिक्षक ने दोनों बच्चों को रोकने की कोशिश नहीं की और मूकदर्शक बने रहे。 मारपीट में विभान पुत्र वीरू गंभीर रूप से घायल हो गया। हालत बिगड़ने पर उसे पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने प्रयागराज रेफर कर दिया। इलाज के दौरान विभान ने दम तोड़ दिया। मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया。 घटना से नाराज़ बड़ी संख्या में ग्रामीण स्कूल पहुंच गए। स्कूल परिसर में भारी भीड़ जुट गई और लोगों ने लापरवाही बरतने वाले शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी।
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लखीसराय में विजय कुमार सिन्हा ने NDA की बांकीपुर उपचुनाव जीत का भरोसा जताया

Lakhisarai, Bihar:बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा एक दिवसीय दौरे पर लखीसराय पहुंचे। जहां गुरू पूर्णिमा के पावन अवसर पर उन्होंने अपनी पत्नी के साथ जिले के प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर पहुंचकर भगवान शिव की विधिवत पूजा-अर्चना की। पूजा के दौरान उन्होंने बिहारवासियों की सुख, शांति, समृद्धि और राज्य के सर्वांगीण विकास की कामना की। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच मंत्री ने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूजा के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की जीत का भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता विकास, सुशासन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में चल रही जनकल्याणकारी योजनाओं पर विश्वास करती है। इसी विश्वास के आधार पर एनडीए बांकीपुर उपचुनाव में जीत दर्ज करेगा। उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जनता अब केवल विकास की राजनीति चाहती है और भ्रम फैलाने वाली राजनीति को पूरी तरह नकार चुकी है। मंत्री के दौरे को लेकर मंदिर परिसर और आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए थे। उनके आगमन पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पार्टी कार्यकर्ताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका स्वागत किया。
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ददरेवा मेले की सुरक्षा और सुविधाओं के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए

Churu, Rajasthan:ददरेवा मेले की तैयारियों को लेकर प्रशासन अलर्ट, श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा पर रहेगा विशेष फोकस सादुलपुर _ प्रदेश के प्रसिद्ध लोक आस्था के केंद्र ददरेवा मेले की तैयारियों को लेकर बुधवार को उपखंड अधिकारी कार्यालय में प्रशासन, पुलिस एवं मेला समिति की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा, यातायात व्यवस्था, पेयजल, चिकित्सा, बिजली, साफ-सफाई सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मेले में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की सुविधा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। बैठक की अध्यक्षता उपखंड अधिकारी मनोज खेमदा ने की। इस दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रिछपाल सिंह चारण तथा आईपीएस अभिजीत पाटिल भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मेला समिति के सदस्यों से सुझाव लिए और सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ समय रहते व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए। सरपंच जाहिद कुरैशी ने मेले से जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं एवं आवश्यकताओं को अधिकारियों के समक्ष रखा। उन्होंने विशेष रूप से श्रद्धालुओं की सुविधा, गढ़ क्षेत्र की व्यवस्थाओं तथा विभिन्न मूलभूत सुविधाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की। अधिकारियों ने सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। बैठक में निर्णय लिया गया कि मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा। पूरे मेला परिसर में सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाएगी। इसके अलावा ड्रोन कैमरों से भी लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर प्रभावी नजर रखी जा सके तथा किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।अधिकारियों ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि मेले के दौरान पेयजल, चिकित्सा सेवाएं, विद्युत आपूर्ति, साफ-सफाई, यातायात प्रबंधन एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए। श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सभी विभागों को पूरी जिम्मेदारी और समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।बैठक में जलदाय विभाग, चिकित्सा विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे और अपनी-अपनी तैयारियों की जानकारी दी। हालांकि बिजली विभाग एवं सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारी बैठक में अनुपस्थित रहे, जिस पर भी चर्चा की गई। इस अवसर पर तहसीलदार, विकास अधिकारी (बीडीओ) रविंद्र सिंह, सादुलपुर थाना प्रभारी राजेश कुमार सिहाग, ग्राम विकास अधिकारी राजेंद्र ओला सहित प्रशासन, पुलिस एवं मेला समिति के पदाधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि ददरेवा मेले में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की सुरक्षा, सुविधा और सुचारु व्यवस्थाओं के लिए सभी आवश्यक इंतजाम समय पर पूरे किए जाएंगे, ताकि श्रद्धालु आस्था के इस महापर्व में बिना किसी परेशानी के शामिल हो सकें। बाइट: मनोज खेमदा SDM सादुलपुर
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कांकेर में भारी बारिश के बीच शिक्षकों ने नाव से नदी पार किया

Kurustikur, Chhattisgarh:कांकेर। पिछले 24 घंटे से जिले में भारी बारिश हो रही है, कई नदी नाले उफान पर है ऐसे में एक हैरान करने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें जिले के छोटे बेठिया क्षेत्र के कोटरी नदी को शिक्षकों का समूह नाव के सहारे पार करता नजर आ रहा है, जिसमें महिला शिक्षक भी शामिल है, वीडियो में शिक्षक अपनी तकलीफ बताते दिख रहे है, शिक्षकों ने खुद वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया में पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम में रोजाना इसी तरह जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुँचना पड़ता है, स्कूल नहीं जाएंगे तो अटेंडेंस नहीं लगेगी और वेतन नहीं मिलेगा तो घर कैसे चलेगा, शिक्षक खुद नाव भी चलाते वीडियो में नजर आ रहे है, शिक्षकों ने वीडियो के माध्यम से प्रशासन से ऐसे इलाकों में शिक्षकों को लाइफ जैकेट देने की मांग की है।
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धामी ने ग्लोबल टाइगर डे पर सिंगल-यूज़ प्लास्टिक रोक के लिए वर्कशॉप में हिस्सा लिया

Noida, Uttar Pradesh:DEHRADUN (UTTARAKHAND): CM PUSHKAR SINGH DHAMI ने देहरादून के হयात सेंट्रिक में 'ग्लोबल टाइगर डे' के मौके पर आयोजित सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर रोक को असरदार ढंग से लागू करने और उसके पालन के लिए राज्य-स्तरीय कंसल्टेशन वर्कशॉप में हिस्सा लिया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, 'यह हमारे लिए वाकई एक खास दिन है। अगर हमारे जंगल सुरक्षित रहेंगे, तो पूरा इकोसिस्टम फलेगा-फूलेगा। जब पूरा इकोसिस्टम फलेगा-फूलेगा, तो बाघ सुरक्षित रहेंगे। जब बाघ सुरक्षित रहेंगे, तो प्रकृति का संतुलन बना रहेगा। हम हमेशा कहते हैं कि इकोसिस्टम और इकॉनमी के बीच संतुलन होना चाहिए...'
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