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AAsgharFollow25 Jan 2025, 09:06 am

Sultanpur- पंजाब का संदिग्ध युवक फर्जी दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार, एटीएस ने की कार्रवाई

Kharsoma, Uttar Pradesh:उत्तर प्रदेश एटीएस ने महाकुंभ की सुरक्षा को लेकर की जा रही छानबीन में एक बड़ी कार्रवाई की है। एटीएस ने शुक्रवार रात 10 बजे सुल्तानपुर से पंजाब के फजिलका जिले के रहने वाले मान सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोपी कई दिनों से सुल्तानपुर में फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। एटीएस की अयोध्या यूनिट को मिली सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई। जांच में पता चला कि आरोपी ने खुद को सुल्तानपुर के कादीपुर स्थित तवक्कलपुर नगरा का निवासी बताकर फर्जी पहचान पत्र बनवाया था। इसके बाद वह किराए के मकान में रहने लगा था।
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फरीदाबाद जिला कोर्ट के पास वकीलों की चैंबर में आग, जनहानि नहीं, लाखों का नुकसान

Faridabad, Haryana:फरीदाबाद: जिला कोर्ट के पास वकीलों की बिल्डिंग में लगी आग, कोई जनहानि नहीं, लाखों का सामान जलकर खाक। एंकर- फरीदाबाद के सेक्टर-12 स्थित जिला कोर्ट के पास बनी वकीलों की चैम्बर बिल्डिंग के पांचवें फ्लोर पर स्थित चेंबर नंबर 552 में शुक्रवार दोपहर बाद अचानक आग लग गई, जानकारी के अनुसार बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट होने से कागजी फाइलों में आग लगी, जो देखते ही देखते पूरे चेंबर में फैल गई। आग की लपटें स्प्लिट एसी तक पहुंच गईं, जिससे एसी में धमाका होने के बाद आग और भड़क गई। घना धुआं पूरी मंजिल पर फैल गया, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई वकीलों ने पहले फायर सिलेंडर से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। सेक्टर-15 फायर स्टेशन से पहुंची दमकल की तीन गाड़ियों ने करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया। बार एसोसिएशन के प्रधान राजेश बैसला ने बताया कि आग चेंबर नंबर 552 में लगी, जहां अधिवक्ता चंद्र कौशिक बैठते हैं। इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन चेंबर में रखा फर्नीचर, फाइलें, किताबें और अन्य बिजली का सामान जलकर नष्ट हो गया। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।
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दिल्ली बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सीएजी ऑडिट पर जोर

New Delhi, Delhi:सीएजी ऑडिट मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश पर दिल्ली के ऊर्जा मंत्री श्री आशीष सूद की प्रतिक्रिया "माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आज पारित अंतरिम आदेश एक प्रक्रियात्मक (Procedural) आदेश है, जिसका उद्देश्य मामले के कानूनी पहलुओं पर विस्तृत विचार होने तक यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखना है। यह न तो मामले के गुण-दोष (Merits) पर अंतिम निर्णय है और न ही निजी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) को किसी प्रकार की क्लीन चिट। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को निर्धारित की है, जिसमें ऑडिट की कानूनी व्यवस्था और उसके अधिकार क्षेत्र पर विस्तार से विचार किया जाएगा। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्वीकार किया है कि दिल्ली के बिजली क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों पर गंभीरता से विचार किया जाना आवश्यक है。 महत्वपूर्ण बात यह है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने रेगुलेटरी एसेट्स (Regulatory Assets) के परिसमापन (Liquidation) पर लगी रोक को भी अगले आदेश तक जारी रखा है। यह दिल्ली की जनता के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि इससे ऐसी प्रक्रिया पर तत्काल रोक बनी हुई है, जिसके परिणामस्वरूप बिजली उपभोक्ताओं पर भारी वित्तीय बोझ पड़ सकता था। हम जनहित में दिए गए इस संरक्षण का स्वागत करते हैं。 सीएजी ऑडिट पर लगी अंतरिम रोक को डिस्कॉम्स की जीत नहीं माना जा सकता। यह आदेश केवल प्रस्तावित सीएजी ऑडिट तथा चार्टर्ड अकाउंटेंट की नियुक्ति—दोनों प्रक्रियाओं को अंतिम निर्णय तक अस्थायी रूप से स्थगित करता है। न्यायालय ने कहीं भी यह नहीं कहा है कि सीएजी ऑडिट अवैध है। न्यायालय ने डिस्कॉम्स के तर्कों को स्वीकार भी नहीं किया है। न्यायालय ने केवल कानूनी प्रश्नों पर विचार होने तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है。 दिल्ली सरकार ने इस पूरे मामले में पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और कानून के अनुरूप कार्य किया है। हम 15 जुलाई को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष पूरी तैयारी के साथ अपना पक्ष रखेंगे और यह स्थापित करेंगे कि दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं एवं करदाताओं के हितों की रक्षा के लिए एक स्वतंत्र एवं कठोर सीएजी ऑडिट क्यों आवश्यक है। हमारा उद्देश्य स्पष्ट है—वित्तीय पारदर्शिता, सार्वजनिक जवाबदेही और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा。 हम दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं। दिल्ली सरकार लगभग ₹38,500 करोड़ का संभावित बोझ बिना कठोर एवं स्वतंत्र वित्तीय जांच के बिजली दरों और अधिभार (Surcharges) के माध्यम से जनता पर नहीं पड़ने देगी। उपभोक्ताओं से वसूले गए प्रत्येक रुपये का पूरा हिसाब होना चाहिए। हमारी जिम्मेदारी ईमानदार करदाताओं और बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है, न कि निजी कॉरपोरेट हितों की。 सीएजी ऑडिट का विरोध कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है। जिस प्रकार निजी डिस्कॉम्स किसी भी कीमत पर इस ऑडिट को रोकने का प्रयास कर रहे हैं, वह अपने आप में अनेक सवाल पैदा करता है। यदि छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो संविधान सम्मत एक स्वतंत्र सार्वजनिक ऑडिट से डरने का कोई कारण नहीं होना चाहिए। इस ऑडिट का लगातार विरोध केवल इस बात को और मजबूत करता है कि व्यापक पारदर्शिता की आवश्यकता है。 पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी सरकार ने भी निजी डिस्कॉम्स के कार्यकलापों में अधिक पारदर्शिता का लगातार विरोध किया। स्वतंत्र ऑडिट को रोकने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयास इस आशंका को और बल देते हैं कि पिछली सरकार और निजी बिजली कंपनियों के बीच संबंधों से जुड़े कई असहज तथ्य जनता के सामने आ सकते हैं。 दिल्ली की जनता सच्चाई जानने की हकदार है। दिल्ली सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के अपने संकल्प पर पूरी तरह कायम है। सख्त और व्यापक सीएजी ऑडिट की हमारी मांग सुशासन, पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही के सिद्धांतों पर आधारित है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं को प्रभावित करने वाला प्रत्येक वित्तीय निर्णय स्वतंत्र जांच के दायरे में आए。 आज का अंतरिम आदेश एक प्रक्रियात्मक कदम है।
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EWS आरक्षण मांग से राजस्थान के पंचायत-निकाय चुनाव में राजनीति तेज

Jaipur, Rajasthan:राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनाव को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। एक तरफ ओबीसी आरक्षण का मसला अभी तक पूरी तरह सुलझा नहीं है, तो दूसरी तरफ अब आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग यानी EWS को भी राजनीतिक आरक्षण देने की मांग तेज होने लगी है। जयपुर में जल्द ही सवर्ण महापंचायत बुलाने की तैयारी है, जिसमें पंचायत और निकाय चुनावों में EWS वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग प्रमुख मुद्दा होगी। आखिर इस नई मांग का सियासी असर क्या होगा... देखिए ये रिपोर्ट... राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनाव से पहले आरक्षण की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। अभी ओबीसी आरक्षण का विवाद थमा भी नहीं है कि अब EWS वर्ग ने भी राजनीतिक आरक्षण की मांग बुलंद कर दी है। EWS आरक्षण मंच ने ऐलान किया है कि इसी महीने जयपुर में सवर्ण महापंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें पंचायत और नगर निकाय चुनावों में आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग उठाई जाएगी। EWS आरक्षण मंच का कहना है कि ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य समाज समेत सामान्य वर्ग की कई जातियों का पंचायत और निकाय राजनीति में प्रतिनिधित्व लगातार घट रहा है। मंच का दावा है कि पिछले कई वर्षों से सरकारों के सामने यह मांग रखी जा रही है, लेकिन अब तक न कांग्रेस ने ध्यान दिया और न ही भाजपा ने। ऐसे में अब महापंचायत के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है。 मंच का आरोप है कि पंचायत चुनावों में सामान्य सीटों पर भी राजनीतिक समीकरणों और जातीय दबाव के चलते दूसरे वर्गों के उम्मीदवारों को टिकट मिल जाते हैं। इससे सामान्य वर्ग के दावेदारों में लगातार असंतोष बढ़ रहा है। महापंचायत के जरिए इसी मुद्दे पर व्यापक जनसमर्थन जुटाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि इस मांग के सामने कई संवैधानिक और कानूनी सवाल भी खड़े हो सकते हैं। अभी तक पंचायत और निकाय चुनावों में आरक्षण व्यवस्था मुख्य रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए लागू है। EWS आरक्षण शिक्षा और सरकारी नौकरियों में लागू है, लेकिन स्थानीय निकायों में राजनीतिक आरक्षण के रूप में इसे लागू करने का कोई स्पष्ट प्रावधान फिलहाल मौजूद नहीं है। ऐसे में यदि यह मांग आगे बढ़ती है तो कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बहस तेज होना तय माना जा रहा है। उधर पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर पहले से ही ओबीसी आरक्षण का मुद्दा चर्चा में है। ऐसे समय EWS आरक्षण की नई मांग सरकार के सामने एक और चुनौती बन सकती है। चुनावी साल नहीं होने के बावजूद स्थानीय निकायों की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा अब सियासी दलों के लिए भी अहम होता जा रहा है। फिलहाल सभी की नजर प्रस्तावित सवर्ण महापंचायत पर है। यदि बड़ी संख्या में समाजों की भागीदारी होती है तो पंचायत और नगर निकाय चुनावों से पहले EWS आरक्षण का मुद्दा भी प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ सकता है। अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर कोई पहल करती है या यह सिर्फ एक राजनीतिक दबाव की रणनीति बनकर रह जाती है。
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राजद सांसद सुधाकर सिंह समेत 27 पर नामजद के खिलाफ पिपरा कोठी में प्राथमिकी दर्ज

Motihari, Bihar:वाटर पार्क जमीन अधिग्रहण के विरोध में पहुंचे राजद सांसद सुधाकर सिंह सहित 27 पर नामजद और 30 अज्ञात लोगों पर पिपरा कोठी थाना में हुआ प्राथमिकी दर्ज। झुंड बना कर निर्माण कार्य रुकवाने और वहाँ के कर्मी से मारपीट का है आरोप, पिपरा कोठी थाना के वाटगंज में वाटर पार्क के लिए ली गई जमीन को किसानो को वापस कराने के लिए राजद सांसद सुधाकर सिंह ने आज किया था किसान सभा का आयोजन, सभा के बाद किसानो के साथ वाटर पार्क निर्माण स्थल पर पहुच निर्माण कार्य का किया था विरोध और खेत में चलाया था ट्रैक्टर। मोतीहारी के पिपराकोठी में सरकारी गैरमजरूआ जमीन पर प्रस्तावित वाटर पार्क निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। प्रशासन द्वारा जारी दस्तावेजों के अनुसार, कृषि विज्ञान केंद्र के बगल स्थित करीब 14 एकड़ सरकारी जमीन में से 3 एकड़ भूमि को वाटर पार्क निर्माण के लिए प्रस्तावित किया गया है।हालांकि, इस कार्रवाई का स्थानीय ग्रामीणों ने जमकर विरोध किया।ग्रामीणों का दावा है कि वे वर्षों से इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं, इसलिए यह जमीन उनकी निजी संपत्ति है। दूसरी ओर, पिपराकोठी अंचलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि संबंधित भूमि गैरमजरूआ जरपेशकी श्रेणी की सरकारी जमीन है और इस पर किसी का निजी swamiti नहीं है। अंचलाधिकारी के मुताबिक, जब तक सरकार को जमीन की आवश्यकता नहीं थी, तब तक किसान उस पर खेती करते रहे, लेकिन सार्वजनिक उपयोग के लिए आवश्यकता पड़ने पर सरकार को उस जमीन को वापस लेने का अधिकार है। उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित जमीन की सभी जमाबंदियां रद्द की चुकी हैं और वर्तमान में किसी व्यक्ति के नाम पर न तो रसीद है और न ही वैध जमाबंदी है।इसी बीच आज राजद के सांसद सुधाकर सिंह भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के समर्थन में धरने पर बैठ गए। इतना ही नहीं, सांसद स्वयं ट्रैक्टर पर सवार होकर विवादित सरकारी जमीन की जुताई करते नजर आए, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।प्रशासन का कहना है कि वाटर पार्क भारत सरकार की एक सार्वजनिक परियोजना है, जिसका लाभ पूरे क्षेत्र के लोगों को मिलेगा। वहीं, ग्रामीणों और सांसद के विरोध के बाद यह मामला अब राजनीतिक रंग भी लेता दिखाई दे रहा है। सांसद सुधाकर सिंह का कहना है कि यह जमीन गैरمजूरवा मालिक है इसे कैसे गैरمजूरवा जरपेशकीदार बना दिया गया?
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बोतल विवाद के बाद हत्या: आरोपी चंद्रशेखर गिरफ्तार, शव नदी किनारे दफन

Jaipur, Rajasthan:बोतल को लेकर हुए विवाद में हत्या हुई. एक माह बाद ब्लाइंड मर्डर का खुलासा: चंदवाजी थाना पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया. शव नदी किनारे गड्ढे में दबाकर फरार हो गया था आरोपी. घटना जयपुर ग्रामीण जिले में जमवारामगढ़ के आसपास स्थित हरचंदपुरा गांव की है. पुलिस के अनुसार मामूली विवाद के बाद आरोपी ने चाकू से वार कर युवक की हत्या कर दी और साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को नदी किनारे गड्ढा खोदकर मिट्टी में दबा दिया. आरोपी ने कुछ दिनों बाद प्रेमिका के साथ भागने का नाटक भी किया ताकि हत्या का शक उसे पर न जाए. आरोपी चंद्रशेखर उर्फ शेखर निवासी हरचंदपुरा को गिरफ्तार किया गया है. पूछताछ जारी है और हत्या में प्रयुक्त चाकू व अन्य साक्ष्यों की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं. मामले के खुलासे में चंदवाजी थाने के कांस्टेबल रोहिताश बराला की अहम भूमिका रही.
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दामाद ने कर्ज से परेशान होकर ससुर के घर 13.58 लाख चुराए: DST गिरफ्तार

Tonk, Rajasthan:टोंक जिले में DST टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नकबजनी के आरोपी को गिरफ्तार कर चोरी की गई 13 लाख 58 हजार 500 रुपये की नकदी बरामद की है. वारदात में इस्तेमाल की गई ऑल्टो कार भी जब्त कर ली गई है. गिरफ्तार आरोपी पीड़ित का दामाद है, जिसने कर्ज से छुटकारा पाने के लिए अपने ससुर के घर चोरी की वारदात को अंजाम दिया. पुलिस अधीक्षक रोशन मीणा के निर्देशन में DST ने तकनीकी साक्ष्यों व CCTV फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया. आरोपी की पहचान श्योराज बैरवा (30) निवासी सुरतपुरा लुहारा, थाना निवाई सदर के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार, 30 जून 2026 को बरोनी थाना क्षेत्र के सोहेला गांव निवासी नंदलाल बैरवा ने अपने घर से करीब 14 लाख रुपये चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी पीड़ित की बेटी का पति है. पूछताछ में उसने कर्ज के बोझ से परेशान होकर चोरी करना स्वीकार किया. पुलिस ने उसके कब्जे से 13.58 लाख रुपये नकद बरामद कर लिए हैं. फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और चोरी की वारदात से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल जारी है.
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मानसून में चित्रकोट जलप्रपात बस्तर का प्रमुख पर्यटन आकर्षण बना

Jagdalpur, Chhattisgarh:मानसून की बारिश के बीच बस्तर में पर्यटन केंद्र गुलजार नजर आने लगे है, मानसून में पर्यटकों की पहली पसंद चित्रकोट जलप्रपात बना हुआ है, बता दें कि बारिश के दिनों में बस्तर की खूबसूरती में चार चांद लग जाते हैं, हरी भरी वादियों के बीच झरने का शोर यहां हर किसी को अपनी ओर खींच लेता है, बारिश के दिनों में बस्तर का जलप्रपात चित्रकोट बेहद खूबसूरत हो जाता है, हर साल मानसून सीजन के दौरान यहां पर्यटकों की भारी भीड़ जुटती है, चित्रकोट जलप्रपात देखने पहुंच रहे पर्यटक कैमरे में जलप्रपात की खूबसूरत तस्वीरें और यादें कैद करते हुए नजर आ रहे है।
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AI से बना वीडियो: हाई कोर्ट जज पर फटकार, सिंगरौली में जांच शुरू

Singrauli, Madhya Pradesh:मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के झांपी गांव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में झांपी निवासी अमित तिवारी कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखाई दे रहे हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगत की तस्वीर के सामने उन्हें फटकार लगाते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में वह न्यायाधीश की कार्यप्रणाली, प्रैक्टिस और न्यायिक व्यवस्था को लेकर कई बातें कहते दिखाई देते हैं। इतना ही नहीं, वह खुद को एक उच्च अधिकारी जैसा बताते हुए जज को संविधान का पाठ पढ़ाते हुए भी नजर आते हैं। वीडियो वायरल होने के बाद ज़ी मीडिया की टीम पूरे मामले की सच्चाई जानने के लिए ग्राउंड जीरो पर झांपी गांव पहुंची। ज़ी मीडिया से बातचीत के दौरान अमित तिवारी ने दावा किया कि यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बना है और उनसे ईर्ष्या रखने वाले कुछ लोगों ने इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वीडियो किसने बनाया और किसने सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। कैमरे पर उन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि वह सरकार या न्यायपालिका के किस पद पर कार्यरत हैं। वहीं, ऑफ कैमरा अमित तिवारी ने दावा किया कि वह NIA और IB के लिए कार्य करते हैं। उनका कहना था कि न्यायालय में पेश किए जाने वाले दस्तावेजों की जांच और इन्वेस्टिगेशन से जुड़े कार्यों में उनकी भूमिका रहती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि 'प्रचंड प्रहार' नाम का एक फेसबुक पेज उनसे जुड़ा है, जिसके हजारों एडमिन होने की बात उन्होंने कही। हालांकि इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। उल्लेखनीय है कि इस फेसबुक पेज पर समय-समय पर विभिन्न व्यक्तियों के खिलाफ आपत्तिजनक और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाली पोस्ट किए जाने के आरोप भी लगते रहे हैं। उधर, सिंगरौली पुलिस अधीक्षक षियाज के.एम. ने कहा कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में है। फिलहाल इस मामले में पुलिस को कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर या जांच में तथ्य सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया के माध्यम से न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्था और हाई कोर्ट के न्यायाधीश पर इस तरह की टिप्पणी करता है, तो उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा? और यदि वीडियो वास्तव में AI से तैयार किया गया है, तो उसे बनाकर वायरल करने वालों पर क्या कार्रवाई होगी? फिलहाल इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
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गाजियाबाद: फैक्ट्री से कॉपर पाइप चोरी मामले में दो चोर गिरफ्तार, 40 किलोग्राम बरामद

Ghaziabad, Uttar Pradesh:गाजियाबाद के लिंक रोड थाना पुलिस ने फैक्ट्री से लाखों रुपये के कॉपर पाइप चोरी करने वाले दो शातिर चोरों को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 40 किलोग्राम चोरी की कॉपर पाइप, घटना में प्रयुक्त वैगनआर कार तथा चोरी का माल बेचकर प्राप्त 2,700 रुपये नकद बरामद किए हैं। बरामद सामान की कुल कीमत लगभग 80 हजार रुपये बताई गई है। पुलिस के अनुसार 30 जून को मकुंदनगर निवासी अनूप डिब्बर, जो साहिबाबाद स्थित एक रेफ्रिजरेशन कंपनी में एडमिनिस्ट्रेटर हैं, ने थाना लिंक रोड में तहरीर देकर बताया था कि 29 जून की रात अज्ञात चोर फैक्ट्री से नए कॉपर पाइप चोरी कर ले गए। शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर की सूचना के आधार पर 2 जुलाई को चेकिंग के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अंचल और फैसल उर्फ शकील के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से चोरी की गई 40 किलोग्राम कॉपर पाइप, वारदात में प्रयुक्त वैगनआर कार और 2,700 रुपये बरामद किए। इसके बाद मुकदमे में संबंधित धाराओं की बढ़ोतरी करते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने मिलकर फैक्ट्री से कॉपर पाइप चोरी की थी। आरोपी फैसल ने यह भी कबूल किया कि वह पहले भी अपने साथियों के साथ कई फैक्ट्रियों में चोरी की वारदातों को अंजाम दे चुका है। चोरी का माल कबाड़ियों को बेच दिया जाता था और उससे मिले पैसों का इस्तेमाल नशे की लत पूरी करने में किया गया था। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी फैसल के खिलाफ गाजियाबाद और दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न थानों में चोरी, लूट, एनडीपीएस एक्ट और आर्म्स एक्ट सहित डेढ़ दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। वहीं अंचल के खिलाफ भी चोरी और आर्म्स एक्ट समेत कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस दोनों के अन्य आपराधिक इतिहास की भी जांच कर रही है। लिंक रोड थाना पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस कार्रवाई से फैक्ट्री क्षेत्रों में सक्रिय चोरी करने वाले गिरोहों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी। पुलिस ने कहा कि फरार अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास भी जारी हैं।
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