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Raj Kumar YadavRaj Kumar YadavFollow28 Jan 2025, 05:29 pm
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EC का हलफनामा: CEC अकेले फैसले नहीं लेते; फॉर्म-6 में बदलाव नहीं

Noida, Uttar Pradesh:'अकेले फैसले नहीं लेते CEC': सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का हलफनामा, फॉर्म-6 पर भी दी सफाई चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर इस आरोप को खारिज किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अकेले ही फैसले ले रहे हैं। आयोग ने कहा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े तीनों आदेश जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में आयोग के सभी सदस्यों की सहमति से जारी किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी किए थे। अब मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने अलग-अलग हलफनामा दाखिल करने के बजाय संयुक्त हलफनामा दाखिल किया है। *फाइल पर दिया गया सुझाव आयोग का आधिकारिक फैसला नहीं* चुनाव आयोग ने हलफनामे में कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त या अन्य चुनाव आयुक्तों की ओर से दूसरे आयुक्तों अथवा आयोग के किसी अधिकारी को दिया गया सुझाव, विचार या सवाल अपने-आप में आयोग का आधिकारिक निर्णय नहीं माना जा सकता। आधिकारिक निर्णय वही होगा, जो कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आयोग द्वारा लिया गया हो। आयोग ने आगे कहा कि किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले अधिकारियों और चुनाव आयुक्तों के सुझावों, विचारों तथा सवालों पर विचार किया जाता है। सभी संबंधित पहलुओं पर विचार करने के बाद आयोग के सक्षम सदस्य निर्णय लेते हैं और उसके अनुसार आदेश जारी किए जाते हैं। *ऐसे आगे बढ़ती है आयोग की फाइल* हलफनामे के मुताबिक, चुनाव आयोग की फाइल पहले एक निर्वाचन आयुक्त, फिर दूसरे निर्वाचन आयुक्त और अंत में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पास भेजी जाती है। मंजूरी मिलने के बाद निर्णय को आयोग की फाइल में दर्ज किया जाता है और संबंधित आयुक्तों के हस्ताक्षर लिए जाते हैं। इसके बाद चुनाव आयोग का सचिवालय निर्णय की सूचना जारी करता है और उसे लागू करता है। *चुनाव आयुक्तों और कैबिनेट सचिव के बीच पत्राचार पर सफाई* चुनाव आयोग ने चुनाव आयुक्तों और कैबिनेट सचिव के बीच हुए पत्राचार को लेकर लगाए गए आरोपों को गलतफहमी पर आधारित बताया है। हलफनामे में कहा गया है कि आयोग में आंतरिक कार्य-विभाजन 23 सितंबर 2025 के पुराने ऑफिस आर्डर के मुताबिक जारी था। 28 जुलाई 2026 को चुनाव आयोग में प्रतिनियुक्ति पर तैनात अतिरिक्त सचिव स्तर के एक IAS अधिकारी ने आंतरिक कार्य-विभाजन से संबंधित ऑफिस आर्डर जारी किया। इसके अगले दिन, 29 जुलाई 2026 को दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस आदेश और संबंधित अधिकारी के आचरण के संबंध में कैबिनेट सचिव को अलग-अलग पत्र लिखे। इसके बाद, दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से 30 जुलाई 2026 को संयुक्त निर्देश जारी किए गए। आयोग के अनुसार, इस वजह से 28 जुलाई 2026 को जारी आदेश कभी लागू नहीं हुआ। *फॉर्म-6 में बदलाव नहीं,डिक्लरेशन फॉर्म अलग दस्तावेज* चुनाव आयोग ने इस आरोप को खारिज किया है कि SIR से संबंधित आदेशों के जरिए फॉर्म-6 में संशोधन किया गया था। आयोग ने कहा कि फॉर्म-6 में बदलाव करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है।डिक्लेरेशन फॉर्म एक अलग दस्तावेज है। हालांकि, आयोग ने स्वीकार किया कि ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म-6 और डिक्लेरेशन फॉर्मको इस तरह प्रदर्शित किया गया था कि ऐसा लग सकता था कि फॉर्म-6 में बदलाव किया गया है। इस स्थिति को स्पष्ट करने के लिए 21 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को दो अलग-अलग हिस्सों में बांटने की बात कही गई है। इनमें पहला फॉर्म-6 और दूसरा घोषणा-पत्र होगा। *डिक्लेरेशन फॉर्ममें बदलाव से शुरू हुई मैपिंग की व्यवस्था* आयोग के अनुसार डिक्लेरेशन फॉर्म में बदलाव करके मैपिंग की व्यवस्था शुरू की गई, ताकि आवेदक अपनी या अपने माता-पिता अथवा दादा-दादी की वर्ष 2002–2003 की पुरानी मतदाता सूची में दर्ज जानकारी दे सकें। इस व्यवस्था का उद्देश्य पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जानकारी का मिलान करना और अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की जरूरत को कम करना था, ताकि मतदाताओं को सुविधा मिल सके। *CEC के कामकाज पर रोक लगाने की मांग बेमानी* चुनाव आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को सुनवाई योग्य नहीं बताया है। हलफनामे में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है, जैसा सुप्रीम कोर्ट के जजों को हटाने के लिए किया जाता है। आयोग ने कहा कि तीन सदस्यीय व्यवस्था का मकसद है कि मतभेद होने की स्थिति में बहुमत के आधार पर निर्णय हो। आयोग सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर ही फैसला ले सकता है। इसलिए, मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज पर रोक लगाने से आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया बाधित होगी और यह कानून में निर्धारित व्यवस्था के विपरीत होगा।
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हापुड - लोन एजेंट की प्रताड़ना से परेशान होकर, व्यक्ति ने ज़हर खाकर की खुदकुशी।

UMA RAGHAVUMA RAGHAVFollow18m ago
Masuri, Uttar Pradesh:हापुड़ के सिंभावली से एक दर्दनाक खबर है, जहां लोन एजेंट की प्रताड़ना से तंग आकर एक व्यक्ति ने जहर खा लिया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि किस्त एक-दो दिन लेट होने पर एजेंट घर आकर गाली-गलौज और धमकाता था। मामला थाना सिंभावली क्षेत्र के माधापुर गांव का है। बताया जा रहा है कि गांव निवासी जयप्रकाश ने किसी कंपनी से ऋण लिया था। किस्त समय पर जमा न होने पर फाइनेंस कंपनी का एजेंट उसके घर आया और कथित तौर पर उसे डराया-धमकाया। बेटे का कहना है कि पिछले 15 दिनों से पिता मानसिक रूप से परेशान थे। इसी तनाव में उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया। परिजनों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा है।
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यूपी बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति घोषित: ब्रिजभूषण सिंह के बेटे शामिल नहीं, कई नेता चयनित

Gonda, Uttar Pradesh:एंकर- भारतीय जनता पार्टी यूपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी द्वारा आज सोमवार देर रात प्रदेश कार्यसमिति सदस्य,स्थायी आमंत्रित सदस्य और विशेष आमंत्रित सदस्यों की सूची जारी कर दी है। जहां गोंडा के कैसरगंज से पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह को भारतीय जनता पार्टी द्वारा यूपी बीजेपी का प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बनाया गया है। जबकि गोंडा से बीजेपी सांसद व विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा भैया को यूपी भाजपा द्वारा स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया। इसके साथ ही साथ गोंडा जिले के मनकापुर विधानसभा से भाजपा विधायक व पूर्व कैबिनेट मंत्री रमापति शास्त्री, गोंडा के पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष सूर्य नारायण तिवारी, पूर्व जिला अध्यक्ष पीयूष मिश्रा, इसके साथ ही साथ भाजपा नेता राम उदार वर्मा,डॉक्टर रंजन शर्मा और राजकुमार दुबे को भी प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य बनाया गया है। वहीं भारतीय जनता पार्टी के यूपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी द्वारा बृजभूषण के सांसद बेटे करण भूषण सिंह और विधायक बेटे प्रतीक भूषण सिंह को कोई भी सदस्य नहीं बनाया गया है। गोंडा के भाजपा नेताओं को यूपी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष द्वारा अपने टीम में शामिल किए जाने पर अब सोशल मीडिया पर लगातार बधाई दी जा रही है।
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जयपुर: नाबालिग बहन से दुष्कर्म, सगा भाई गिरफ्तार; DNA से खुला राज

Jaipur, Rajasthan:राजस्थान की राजधानी जयपुर में रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। करीब 15 साल की नाबालिग के साथ दुष्कर्म के आरोप में उसके सगे भाई को गिरफ्तार किया गया है। मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब पेट दर्द की शिकायत पर परिजन नाबालिग को अस्पताल लेकर पहुंचे। जांच के दौरान डॉक्टरों ने उसके करीब तीन महीने की गर्भवती होने की जानकारी दी। इसके बाद परिजनों को नाबालिग के साथ हुए कथित दुष्कर्म का पता चला। पुलिस के अनुसार परिजनों की शिकायत पर अगस्त 2026 में पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पुलिस ने नाबालिग के बयान दर्ज किए और मेडिकल प्रक्रिया पूरी करवाई। मामले की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस ने परिवार के सदस्यों सहित संदिग्ध लोगों के DNA सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे। जांच रिपोर्ट में नाबालिग के सगे भाई का DNA मैच होने की बात सामने आई। इसके बाद पुलिस ने आरोपी भाई को गिरफ्तार कर लिया। सोमवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। पेट दर्द की शिकायत पर अस्पताल पहुंची थी नाबालिग.... पुलिस के अनुसार, जयपुर निवासी 15 वर्षीय नाबालिग की तबीयत खराब होने पर परिजन उसे अस्पताल लेकर गए थे। करीब दो महीने पहले पेट दर्द की शिकायत के बाद डॉक्टरों ने उसका चेकअप किया। जांच के दौरान नाबालिग के लगभग तीन महीने की गर्भवती होने का पता चला। इस जानकारी के सामने आने के बाद परिवार को उसके साथ कथित तौर पर हुए दुष्कर्म की जानकारी मिली। इसके बाद परिजनों ने अगस्त 2026 में पुलिस को शिकायत दी। पुलिस ने नाबालिग के मेडिकल परीक्षण और बयान दर्ज करने सहित आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। पूछताछ में सामने आई DNA जांच की अहम कड़ी.. मामले की जांच के दौरान पुलिस ने नाबालिग से घटना के संबंध में जानकारी जुटाने का प्रयास किया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान नाबालिग दुष्कर्म करने वाले व्यक्ति के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रही थी। ऐसे में पुलिस ने मामले से जुड़े संभावित लोगों के बारे में पड़ताल शुरू की। पुलिस ने परिवार और आसपास के लोगों सहित संदिग्धों से पूछताछ की। जांच के दौरान कुछ लोगों पर संदेह होने के बाद उनके DNA सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए। पुलिस के अनुसार, DNA जांच रिपोर्ट में नाबालिग के सगे भाई का सैंपल मैच होने की पुष्टि हुई। इसके बाद जांच की दिशा स्पष्ट हुई और आरोपी को हिरासत में लिया गया। सगे भाई पर दुष्कर्म का आरोप, पॉक्सो एक्ट में कार्रवाई पुलिस ने सोमवार दोपहर आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। मामले में पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है। जांच में DNA साक्ष्य की अहम भूमिका इस मामले में नाबालिग के गर्भवती होने के बाद शिकायत दर्ज हुई और जांच के दौरान DNA सैंपल की रिपोर्ट अहम कड़ी बनी। पुलिस ने संभावित संदिग्धों के सैंपल लेकर जांच करवाई, जिसके बाद आरोपी की पहचान तक पहुंचने में मदद मिली।
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प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी के पिता के अपमान के विरोध में फूंका गया खड़गे का पुतला

Umesh TrivediUmesh TrivediFollow1h ago
Unnao, Uttar Pradesh:शुक्लागंज (उन्नाव)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वर्गीय पिता के प्रति कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर शुक्लागंज के पोनी रोड क्षेत्र में कांग्रेस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों में जिला कार्यसमिति सदस्य कुशाग्र कौशल, नामित सभासद सुरेंद्र गुप्ता, भाजयुमो मंडल अध्यक्ष बदरका विवेक मिश्रा, बदरका मंडल मंत्री अंकित पाण्डेय सहित दर्जनों भाजपा पदाधिकारियों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का पुतला फूंककर अपना विरोध दर्ज कराया और कांग्रेस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में राजनीतिक मतभेदों के बावजूद भाषा की मर्यादा और व्यक्तिगत सम्मान बनाए रखना आवश्यक है। किसी के परिवार के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करना भारतीय राजनीतिक संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के विरुद्ध है। प्रदर्शन के माध्यम से कार्यकर्ताओं ने संदेश दिया कि राजनीति में विरोध के लिए लोकतांत्रिक तरीके अपनाए जाने चाहिए और भाषा की मर्यादा का पालन किया जाना चाहिए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों में मोहन कश्यप, शुभम दुबे, आनंद वर्मा, मुकेश शर्मा, हरिश्चंद्र दीक्षित, स्वदेश शुक्ला अमन राजपूत एवं अन्य समस्त बूथ अध्यक्ष और भाजपा के कार्यकर्ता पदाधिकारी गण उपस्थित रहे।
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ASHA सहयोगिनियों के मानदेय में 10% बढ़ोतरी, 1 अक्टूबर 2026 से लागू

Noida, Uttar Pradesh:जयपुर। आशा सहयोगिनियों को दिवाली से पहले सरकार की सौगात। राज्य सरकार ने आशा सहयोगिनियों का मानदेय बढ़ाया। आशा सहयोगिनियों के मानदेय में 10 फीसदी की बढ़ोतरी। अब हर महीने 4959 की जगह मिलेंगे 5455 रुपए। आशा सहयोगिनियों को हर महीने 496 रुपए का फायदा। बढ़ा हुआ मानदेय 1 अक्टूबर 2026 से होगा लागू। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए वित्तीय स्वीकृति आदेश। बजट घोषणा 2026-27 की अनुपालना में लिया फैसला। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत आशा सहयोगिनियों को लाभ। सभी ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को बढ़ी हुई दर से भुगतान के निर्देश।
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बारामूला IT एक्ट केस: कश्मीरी पंडित कार्यकर्ता हंडू गिरफ्तार, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

Chaka, कश्मीरी पंडित एक्टिविस्ट राकेश हंडू 'बंटी' को साइबर-आतंकवाद के मामले में गिरफ्तार। समुदाय की माँग निष्पक्ष जांच हो। सोशल मीडिया पर रिहाई के माँग ने पकड़ा ज़ोर।। कश्मीरी पंडित एक्टिविस्ट और RTI कार्यकर्ता राकेश हंडू, जिन्हें 'बंटी' के नाम से जाना जाता है, को 17 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के फरीदाबाद स्थित उनके घर से बारामूला पुलिस की एक टीम ने गिरफ्तार किया। फिलहाल, वह उत्तर कश्मीर में दर्ज एक साइबर-आतंकवाद मामले के सिलसिले में बारामूला जेल में बंद हैं। यह मामला FIR नंबर 151/2026 से जुड़ा है, जिसे 12 सितंबर 2026 को बारामूला पुलिस स्टेशन में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66F (साइबर-आतंकवाद) और 84C के तहत दर्ज किया गया था। यह शिकायत एक अन्य कश्मीरी पंडित, रोहित रैना ने दर्ज कराई थी, जो प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत काम करते हैं और बारामूला के वित्त विभाग में तैनात हैं। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, आरोप एक सार्वजनिक सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए बार-बार इलेक्ट्रॉनिक सामग्री (कंटेंट) प्रसारित करने से जुड़े हैं। बताया जा रहा है कि यह सामग्री 'यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल' (ULC) नामक एक कम ज्ञात आतंकी संगठन से जुड़ी थी। गिरफ्तारी मेमो में इलेक्ट्रॉनिक सामग्री में कथित तौर पर बदलाव करने और उसे आगे भेजने (ट्रांसमिट करने) का भी जिक्र है। इससे पहले, पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी कर हंडू को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था। कई बार समन भेजे जाने के बावजूद, वह जांच में शामिल नहीं हुए। हंडू ने बताया कि वह फरीदाबाद में रह रहे हैं और सुरक्षा खतरों के कारण कश्मीर की यात्रा नहीं कर सकते। उन्होंने वीडियो कॉनफ्रेंसिंग के जरिए जांच प्रक्रिया में शामिल होने का अनुरोध किया था। उन्हें गिरफ्तारी के कारणों और उनके कानूनी अधिकारों के बारे में बताया गया, जिसमें वकील से परामर्श करने और जमानत मांगने का अधिकार शामिल है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस गिरफ्तारी पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई हाल के महीनों में कश्मीरी पंडितों को मिली धमकियों की व्यापक जांच का हिस्सा है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि हंडू “लगातार ऐसे पोस्टर अपलोड करता था जिनमें कश्मीरी पंडितों को धमकियां दी गई होती थीं। भारत में धमकियां देने वाले आतंकवादी समर्थकों के अकाउंट ब्लॉक किए जाने के बाद भी, राकेश उन लोगों में सबसे पहले था जो इन धमकियों को पोस्ट करते थे।” अधिकारी ने आगे कहा कि जांच कानून के अनुसार चल रही है और “किसी भी निर्दोष को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा, कानून अपना काम करेगा।” हंडू अपने समुदाय में एक आरटीआई (RTI) और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। उनका काम मुख्य रूप से कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास, 'पीएम पैकेज' के तहत काम करने वाले प्रवासी कर्मचारियों की सुरक्षा, सुरक्षित आवास और सुरक्षा ऑडिट की मांग, तथा इन कर्मचारियों के निजी डेटा लीक होने के आरोपों की जांच से जुड़ा रहा है। सितंबर 2026 की पिछली रिपोर्टों से पता चलता है कि उन्होंने ULC नामक आतंकी संगठन द्वारा कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को दी गई धमकियों वाले पोस्ट को साझा किया और उजागर किया था। उन्होंने PMO और MHA को टैग करते हुए इस संगठन के खिलाफ FIR दर्ज करने और कर्मचारियों के लिए तुरंत सुरक्षित ट्रांजिट आवास उपलब्ध कराने की मांग की थी। उनके समर्थकों का तर्क है कि 'पीएम पैकेज' कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए की गई इस वकालत को उन कथित अपराधों के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। इस गिरफ्तारी ने कश्मीरी पंडित समुदाय के कुछ वर्गों के बीच चिंता और तीखा विवाद पैदा कर दिया है। लोक जनशक्ति पार्टी के नेता संजय सर्राफ ने सार्वजनिक रूप से हंडू का समर्थन किया है। उन्होंने एक पारदर्शी और निष्पक्ष जांच तथा कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की मांग की है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में सर्राफ ने कहा कि फरीदाबाद से गिरफ्तारी और उसके बाद बारामूला जेल में रखे जाने से, हंडू के काम से परिचित लोगों के बीच गहरी चिंता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आरोपों की गहन जांच होनी चाहिए, लेकिन साथ ही हंडू के साथ निष्पक्ष व्यवहार होना चाहिए, उनकी गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए और कानूनी प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। सर्राफ ने कहा, “कश्मीरी पंडित समुदाय न्याय और कानून के शासन में विश्वास रखता है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए सच्चाई सामने आएगी। समुदाय के सदस्यों और समर्थकों के बीच हंडू की रिहाई की मांग को लेकर ऑनलाइन अभियान भी शुरू हो गए हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस की ओर से अभी तक कोई चार्जशीट या विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है। कानून के तहत जांच जारी है, और समुदाय के लोग इस बात पर जोर दे रहे हैं कि जांच में पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का पालन होना अनिवार्य है।
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पुलिस की गिरफ्त से फरार हुए 50 हजारी गौकश मुकीम को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद किया गिरफ्तार।

SSSaurabh SharmaFollow2h ago
Bulandshahr, Uttar Pradesh:बुलन्दशहर ब्रेकिंग - 50 हजार के ईनामी गौकश से हुई चोला थाना पुलिस की मुठभेड़ मुठभेड़ में ईनामी गौकश ने पुलिस टीम पर की फायरिंग पुलिस की जबाबी फायरिंग में गिरफ्तार हुआ गौकश मुकीम गौकश मुकीम के पास से पुलिस ने सरकारी पिस्टल,9 जिंदा कारतूस,1 खोका कारतूस किया बरामद। 15 अगस्त की रात चोला थाना क्षेत्र में अपने साथियों के साथ जंगल मे मुकीम ने दिया था गोकशी की घटना को अंजाम तभी से मुकीम चल रहा था फरार पुलिस ने घोषित किया था 50 हजार का ईनाम मुकीम को चोला थाना पुलिस ने किया था गिरफ्तार गिरफ्तार के बाद पुलिस ईनामी मुकीम को बाईक पर मेडिकल परीक्षण के लिए ले जा रही थी हॉस्पिटल रास्ते मे गैस गोदाम के पास बाईक फिसलकर गिरी,तभी मौका पाकर ईनामी मुकीम पुलिस कर्मियों की पिस्टल लेकर हो गया था फरार। जिसकी सूचना पर पुलिस ने की ईनामी की घेराबंदी कर मुठभेड़ में किया गिरफ्तार। बुलन्दशहर के थाना चोला क्षेत्र में हुई मुठभेड़। बाइट प्रेमसुख दडिया (IPS) सीओ सिकंदराबाद
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वाराणसी: मतगणना के बीच स्टोर रूम का CCTV कैमरा 10 मिनट तक बंद रहने से मचा हड़कंप

Varanasi, Uttar Pradesh:मयंक कश्यप/वाराणसी में एमएलसी चुनाव की मतगणना के दौरान बड़ी लापरवाही सामने आई है। मतगणना के बीच स्टोर रूम का CCTV कैमरा करीब 10 मिनट तक बंद रहने से हड़कंप मच गया। जानकारी के मुताबिक, CCTV कैमरा बंद होने की सूचना मिलते ही सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा मौके पर पहुंच गए और आपत्ति जताई। इस दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कैमरा बंद दिखाई दे रहा है। कैमरा बंद रहने के दौरान स्टोर रूम में क्या हुआ, इसे लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रत्याशियों और समर्थकों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
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बेगूं में 11.4 किग्रा अफीम बरामद, चालक गिरफ्तार

Begun, Rajasthan:चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं से मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत बेगूं थाना पुलिस और डीएसटी की टीम ने एनएच-27 पर सूरतपुरा की सरहद में नाकाबंदी के दौरान क्रेटा कार से 11 किलो 400 ग्राम अवैध अफीम बरामद की है। पुलिस ने कार चालक रतनलाल धाकड़ को गिरफ्तार कर वाहन जब्त किया है। गिरफ्तार आरोपी बेगूं थाना क्षेत्र के तुरकड़ी गांव का निवासी है। जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह के अनुसार, यह कार्रवाई मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई। मामले में बेगूं थाने पर एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान किया जा रहा है। पुलिस अब अफीम की तस्करी से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच में जुटी है。
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आगरा MLC चुनाव में चुनाव आयोग की कड़ी कार्रवाई: 6 अधिकारी और 3 पुलिसकर्मी निलंबित

Agra, Uttar Pradesh:आगरा MLC चुनाव में लापरवाही पर चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्मतदान मामले में चुनाव आयोग सख्त * मतदान केंद्रों पर लापरवाही बरतने वाले 6 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने के निर्देश * सैंया और फतेहाबाद के मतदान केंद्रों पर तैनात अधिकारियों पर गिरी गाज * सेक्टर मजिस्ट्रेट समेत 3 पुलिसकर्मी सस्पेंड होंगे * सैंया के मतदान केंद्र संख्या 21 पर तैनात 3 अधिकारियों पर कार्रवाई * फतेहाबाद के मतदान केंद्र संख्या 26 पर तैनात 3 अधिकारियों पर कार्रवाई * सैंया में सेक्टर मजिस्ट्रेट ओपी चक, इंस्पेक्टर हरिशरण सिंह और सब-इंस्पेक्टर संदीप कुमार पर कार्रवाई के निर्देश * फतेहाबाद में सेक्टर मजिस्ट्रेट विशाल राठौर, इंस्पेक्टर पुरुषोत्तम पाल और सब-इंस्पेक्टर सुमित त्यागी पर कार्रवाई के निर्देश * चुनाव आयोग ने माना- पर्यवेक्षण और मतदान केंद्रों के आसपास नियंत्रण बनाए रखने में गंभीर चूक हुई * अन्य 5 मतदान अधिकारियों और 16 पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश * संबंधित अधिकारियों को 10 दिन के भीतर आरोपपत्र का मसौदा आयोग को भेजना होगा * आयोग ने तत्काल अनुपालन रिपोर्ट भेजने के दिए निर्देश * 25 अक्टूबर को आगरा मंडलायुक्त एवं रिटर्निंग ऑफिसर की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई के निर्देश
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