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Sultanpur222302

सुल्तानपुरः छात्रा से एटीएम बदल कर बदमाशों ने निकाले पैसे

Jan 28, 2025 17:29:25
Rikhpur, Uttar Pradesh

लंभुआ स्थित बैंक ऑफ़ बड़ौदा के एटीएम से छात्रा पैसे निकालने गई जहां पर एटीएम बदलकर बदमाशों ने खाते से ₹25000 उड़ा दिए। मामले में छात्रा की मां ने लंभुआ कोतवाली में तहरीर दी है। लंभुआ के नरेंदापुर निवासिनी निशा सिंह ने पुलिस को बताया कि उसकी बेटी रिशु एटीएम लेकर पैसे निकालने गई थी जैसे ही उसने एटीएम कार्ड डालकर पिन डाला पैसे नहीं निकले पीछे खड़े बदमाशों ने चतुराई से उसका एटीएम कार्ड बदल दिया। इसके बाद निशा के खाते से ₹25000 निकाल लिए जानकारी होने पर पीड़िता ने तुरंत बैंक में जाकर खाता बंद करवाया।

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YSYeswent Sinha
Mar 06, 2026 18:00:13
Nawada, Bihar:नवादा सदर अस्पताल में आग, लाखों की दवाएं नष्ट सरकारी दवाएं जलकर राख, मरीजों में मची अफरा-तफरी नवादा जिले के सदर अस्पताल में भीषण आग लग गई है। इस घटना में लाखों रुपये से अधिक की सरकारी दवाएं जलकर खाक हो गईं। आग लगने के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों में अफरा-तफरी मच गई और वे सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। आग लगने के तुरंत बाद पूरे अस्पताल की बिजली काट दी गई, जिससे परिसर में अंधेरा छा गया। अस्पताल के अंदर हर तरफ धुएं का अंबार देखा जा रहा था, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकलकर्मी आग पर पूरी तरह काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं। घटना के समय सदर अस्पताल में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। आग लगते ही लोगों में भगदड़ मच गई और वे अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
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Mar 06, 2026 17:47:47
Baheri, Uttar Pradesh:बरेली की बहेड़ी तहसील के कस्बा रिछा निवासी मिनहाज शकील ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में स्थान प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे इलाके में खुशी का माहौल है। मिनहाज ने यूपीएससी परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 513वीं रैंक हासिल की है। वह बहेड़ी बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट शकील अहमद के पुत्र हैं और रिछा राइस मिलर एसोसिएशन के अध्यक्ष अतहर हुसैन नियाज़ी के भांजे हैं। मिनहाज की प्रारंभिक शिक्षा रिछा और बहेड़ी में कक्षा पांच तक हुई। इसके बाद उन्होंने अलीगढ़ में कक्षा छह से ग्यारह तक पढ़ाई की, जबकि 12वीं की पढ़ाई कोटा से पूरी की। आगे चलकर उन्होंने आईआईटी दिल्ली से कंप्यूटर साइंस में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय नौकरी भी की, लेकिन यूपीएससी में सफलता पाने के लक्ष्य के लिए नौकरी छोड़कर पूरी तरह तैयारी में जुट गए। कड़ी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। मिनहाज ने बताया कि उन्होंने भारतीय वन सेवा (IFS) की लिखित परीक्षा भी पास कर ली है और उसका साक्षात्कार होना बाकी है। उनकी सफलता पर क्षेत्र के विधायक अतार्रहमान, रिछा नगर पंचायत से जुड़े जनप्रतिनिधियों और कई गणमान्य लोगों ने खुशी जताते हुए उन्हें बधाई दी है।
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RKRakesh Kumar
Mar 06, 2026 17:46:18
New Delhi, Delhi:उत्तर पूर्वी दिल्ली के सोनिया विहार इलाके में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब तीसरा पुस्ता पर चल रहे खुदाई कार्य के दौरान एक मजदूर गड्ढे में उतर गया और जेसीबी द्वारा ऊपर से मिट्टी डाले जाने से वह बेहोश हो गया। बताया जा रहा है कि मौके पर दिल्ली जल बोर्ड से संबंधित कार्य चल रहा था, जिसके तहत जेसीबी मशीन से गड्ढा खोदा जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार खुदाई के दौरान गड्ढे में केबल की तार दिखाई दी। उसी तार को निकालने के लिए एक मजदूर गड्ढे के अंदर उतर गया। इसी दौरान जेसीबी मशीन चला रहे चालक को इस बात की जानकारी नहीं थी कि गड्ढे के अंदर मजदूर मौजूद है और उसने ऊपर से मिट्टी डालना शुरू कर दिया। मिट्टी गिरने से मजदूर दब गया और कुछ ही देर में उसकी हालत बिगड़ गई तथा वह बेहोश हो गया। घटना के बाद मौके पर मौजूद अन्य मजदूरों और स्थानीय लोगों में হडकंप मच गया। लोगों ने तुरंत गड्ढे में दबे मजदूर को बाहर निकाला और उसे प्राथमिक सहायता देने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि बाद में उसे इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि खुदाई के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। अगर काम के दौरान उचित सतर्कता बरती जाती तो इस तरह की घटना से बचा जा सकता था। फिलहाल मजदूर की स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है, वहीं घटना को लेकर संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। मामाले की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर जुट गए और घटना को लेकर चिंता जताई। वहीं संबंधित एजेंसियों से इस तरह के कामों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
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BSBHUPENDAR SINGH SOLANKI
Mar 06, 2026 17:45:55
Tonk, Rajasthan:दो समुदाय आमने-सामने, हीरा चौक पर पत्थरबाजी; भारी पुलिस बल तैनात एंकर...टोंक शहर के पुरानी टोंक थाना क्षेत्र के हीरा चौक पर दो समुदायों के बीच अचानक तनाव की स्थिति बन गई। देखते ही देखते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और जमकर पत्थरबाजी होने लगी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। मौके पर पुरानी टोंक सहित शहर के चार थानों की पुलिस और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने हालात को काबू में करने के लिए तत्काल कार्रवाई करते हुए कुछ पत्थरबाजों को डिटेन किया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक राजेश मीणा पूरे मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। वहीं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रतनलाल भार्गव भी मौके पर मौजूद रहे और हालात का जायजा लिया। एडिशनल एसपी रतनलाल भार्गव ने बताया कि फिलहाल मौके पर स्थिति पूरी तरह शांत है। पुलिस ने कुछ लोगों को डिटेन किया है और जिन्होंने माहौल खराब करने की कोशिश की है उनकी पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। घटना के बाद क्षेत्र में एहतियात के तौर पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और पुलिस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है。
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MGMOHIT Gomat
Mar 06, 2026 17:45:34
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RKRakesh Kumar Bhardwaj
Mar 06, 2026 17:45:19
Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक गंभीर और संवेदनशील मामले में नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म के आरोपी पिता की उम्रकैद की سजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि पिता बच्चे का संरक्षक होता है और यदि वही उसके विश्वास को तोड़े तो यह समाज के लिए बेहद चिंताजनक है। जस्टिस विनीत कुमार माथुर व जस्टिस चन्द्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने आरोपी की ओर से दायर आपराधिक अपील को खारिज करते हुए पाली की विशेष पॉक्सो अदालत के फैसले को सही ठहराया। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि पीड़िता को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की योजना के तहत 7 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए ताकि उसके पुनर्वास में सहायता मिल सके। मामले के अनुसार मार्च 2023 में पाली जिले में पीड़िता के चचेरे भाई ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई कि उसकी 14 वर्षीय चचेरी बहन अचानक घर से लापता हो गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि नाबालिग लंबे समय से अपने ही पिता के गलत व्यवहार का शिकार हो रही थी। सुनवाई के दौरान पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि उसकी माँ अलग रह रही थी और वह अपने पिता के साथ रह रही थी। इसी दौरान आरोपी ने उसके साथ अनुचित कृत्य किया। शुरुआत में जब पीड़िता ने यह बात परिवार के लोगों को बताई तो किसी को विश्वास नहीं हुआ। इसके बाद पीड़िता ने साहस दिखाते हुए अपने मोबाइल फोन से एक वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुआ। जांच और सुनवाई के दौरान यह वीडियो अदालत के सामने प्रस्तुत किया गया। पाली की विशेष पॉक्सो अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपी को भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए प्राकृतिक जीवनकाल तक की उम्रकैद की सजा सुनाई थी। ट्रायल कोर्ट के इस फैसले को आरोपी ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन कोर्ट ने पीड़िता के बयान और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए अपील को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि पीड़िता की गवाही स्पष्ट और भरोसेमंद हो तो वह अपने आप में अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हो सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में न्यायालय का दायित्व पीड़ित को न्याय दिलाने के साथ समाज में सुरक्षा और विश्वास की भावना को मजबूत करना भी है। जस्टिस विनीत कुमार माथुर ने इस बेहद संवेदनशील मामले में अपने फैसले में बेटियों के दर्द को सामने लाते हुए शब्दों में अपना दर्द बयां किया हैं। “आज भी वातावरण में करुण पुकारों की प्रतिध्वनि सुनाई देती है; इस समाज की अनेक बेटियाँ भीतर ही भीतर पीड़ा सहते हुए जीवन व्यतीत कर रही हैं। समाचारों की सुर्खियाँ फिर किसी अस्मिता के रौंदे जाने की कथा कहेंगी; किसी मासूम के रक्त से समाज का माथा पुनः कलंकित होगा। और वह अबोध प्रश्न फिर हवा में तैरता रहेगा—‘मेरा अपराध क्या था? क्या केवल बेटी होना ही मेरा दोष है?’ जब सभ्यता के आवरण में छिपी दरिंदगी खुलेआम विचरती हो, जब मानवता का चेहरा ओढ़े भेड़िए निर्भीक घूमते हों, तब नारी के लिए जीवन का प्रत्येक कदम भय से घिर जाता है। कब तक उसकी गरिमा यूँ ही तार-तार होती रहेगी? कब वह समय आएगा जब इस समाज की राहें, गलियाँ और चौखटें सचमुच बेटियों के लिए सुरक्षित होंगी? यह केवल एक पीड़िता की वेदना नहीं, बल्कि समूचे समाज की अंतरात्मा पर लगा प्रश्न है—क्या हम वह वातावरण निर्मित कर पाएँगे जहाँ बेटी होना अपराध नहीं, सम्मान का प्रतीक होगा؟
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RKRakesh Kumar Bhardwaj
Mar 06, 2026 17:32:37
Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने माउंट आबू क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कोर्ट की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने सिरोही जिले के प्रशासनिक अधिकारियों को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह अहम आदेश दिया। सिरोही जिले के आबू रोड निवासी नितिन जैन, मनोज चौरसिया और जयंतीलाल उपाध्याय की ओर से जनहित याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता राजेश शाह ने अदालत को बताया कि माउंट आबू क्षेत्र में झीलों और वन क्षेत्रों के आसपास बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। इसके समर्थन में अदालत के समक्ष फोटो और गूगल लोकेशन भी प्रस्तुत किए गए। याचिका में आरोप लगाया गया कि पर्यावरणीय नियमों और पूर्व प्रतिबंधों के बावजूद कई स्थानों पर बहुमंजिला इमारतों का निर्माण किया जा रहा है। याचिका में विशेष रूप से गांव दानव, गांव उमरनी, शांतिवन-मनमोहिनी कॉम्प्लेक्स के आसपास और आनंद सरोवर क्षेत्र में अतिक्रमण और अवैध निर्माण की शिकायतें उठाई गई हैं। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि ब्रह्माकुमारी संस्थान से जुड़े कुछ परिसरों में भी पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी कर निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि माउंट आबू एक संरक्षित वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र है, जहां पहले से कई वैधानिक प्रतिबंध लागू हैं। ऐसे में अनियंत्रित निर्माण गतिविधियां क्षेत्र की पारिस्थितिकी के लिए खतरा बन सकती हैं। हाईकोर्ट ने मामले में वन विभाग के अधिकारियों और संबंधित संस्थानों को नोटिस जारी किए हैं। इसके अलावा अदालत ने सिरोही जिला कलेक्टर, आबू रोड के उपखंड अधिकारी और तहसीलदार को अगली सुनवाई पर अदालत में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि माउंट आबू क्षेत्र में अदालत की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है。
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RKRakesh Kumar Bhardwaj
Mar 06, 2026 17:32:20
Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर--राजस्थान हाईकोर्ट ने एक नाबालिग लड़की को बालिग होने तक बालिका गृह में रहने की अनुमति देते हुए उसके पिता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बालिग होने के बाद लड़की अपनी इच्छा के अनुसार कहीं भी रहने के लिए स्वतंत्र होगी। मामले की सुनवाई जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ के समक्ष हुई। याचिका में पिता ने आरोप लगाया था कि उनकी नाबालिग बेटी को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है और उसे उनके पास लौटाया जाए। सुनवाई के दौरान जब लड़की को अदालत के सामने पेश किया गया तो उसने साफ तौर पर अपने माता-पिता के साथ घर लौटने से इनकार कर दिया। लड़की ने कहा कि उसे अपने माता-पिता द्वारा प्रताड़ित किए जाने का डर है। साथ ही उसने यह भी आरोप लगाया कि उसके पिता कुछ अवैध गतिविधियों में शामिल हैं। अदालत ने परामर्शदाताओं की रिपोर्ट और लड़की के बयान को ध्यान में रखते हुए पाया कि उसे काउंसलिंग और मार्गदर्शन की जरूरत है। इसके बाद अदालत ने निर्देश दिया कि लड़की को बालिग होने तक बालिका गृह में रखा जाए, जहां उसे आवश्यक देखभाल और परामर्श मिल सके।
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RKRakesh Kumar Bhardwaj
Mar 06, 2026 17:31:56
Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान ने राज्य सरकार की आबकारी एवं मद्यनिषेध नीति 2025–2029 को वैध ठहराते हुए शराब दुकानों के नवीनीकरण से जुड़ी 70 प्रतिशत शर्त और क्लस्टर प्रणाली को संवैधानिक माना है। कोर्ट ने कहा कि शराब का व्यापार मौलिक अधिकार नहीं है और इस क्षेत्र में नीति बनाना तथा लाइसेंस के नवीनीकरण की प्रक्रिया तय करना राज्य सरकार का विशेषाधिकार है। जस्टिस डॉ पुष्पेन्द्रसिंह भाटी व जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने बांदमेर निवासी जमना और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए सरकार की आबकारी नीति में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। मामले के अनुसार राज्य सरकार ने 29 जनवरी 2025 को नई आबकारी नीति लागू की थी। इसके तहत राज्य की 7665 शराब दुकानों को पहली बार क्लस्टर प्रणाली में समूहित किया गया। नीति के अनुसार एक क्लस्टर में एक से पांच तक दुकानों को शामिल किया जा सकता है और दुकानों का नवीनीकरण तभी संभव होगा जब जिले में कम से कम 70 प्रतिशत लाइसेंसधारक नवीनीकरण के लिए आवेदन करें। याचिकाकर्ता जमना, जो बारमेर जिले में देशी शराब और आईएमएफएल की खुदरा दुकान की लाइसेंसधारक थीं, ने समय पर नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था। लेकिन उनके क्लस्टर की एक दुकान का नवीनीकरण नहीं होने पर आबकारी विभाग ने पूरे क्लस्टर को ई-नीलामी के लिए प्रस्तावित कर दिया और उनका आवेदन निरस्त हो गया। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि नीति की कुछ धाराएं मनमानी और भेदभावपूर्ण हैं तथा यह संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन करती हैं। वहीं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता महावीर विश्नोई ने अदालत को बताया गया कि शराब का व्यापार राज्य का विशेषाधिकार है और लाइसेंस का नवीनीकरण किसी का अधिकार नहीं है। खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि आबकारी नीति बनाना कार्यपालिका का अधिकार है और जब तक नीति स्पष्ट रूप से मनमानी या असंवैधानिक न हो, तब तक अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती। इसी आधार पर कोर्ट ने याचिकाओं को खारिज कर दिया और नीति की विवादित धाराओं को वैध माना।
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AGAbhishek Gour
Mar 06, 2026 17:31:28
Narmadapuram, Madhya Pradesh:जिले के रामपुर गांव में होली की तीज पर लगने वाला करीब 100 साल पुराना वीर बंबो मेला इस बार भी चर्चा का केंद्र बन गया। मेले में आस्था और परंपरा के नाम पर एक हैरान कर देने वाला नजारा देखने को मिला। गांव के एक बुजुर्ग को करीब 40 फीट ऊंची लकड़ी की मचान पर बांधकर हवा में कई बार घुमाया गया, जबकि नीचे खड़े ग्रामीण “वीर बंबो” के जयकारे लगाते रहे। इस पारंपरिक उत्सव में सैकड़ों ग्रामीणों ने शिरकत की। ग्रामीणों की मान्यता है कि वीर बंबो बाबा के प्रति यह समर्पण गांव को विपदाओं से बचाता है और समृद्धि लाता है, लेकिन इस तरह का जोखिम भरा करतब किसी भी वक्त बड़ी दुर्घटना का कारण भी बन सकता था। बताया जा रहा है कि करीब 60 साल के बुजुर्ग को पहले दूल्हे की तरह सजाया गया और गांव में जुलूस निकालते हुए एक घर से दूसरे घर ले जाया गया। इसके बाद लोहे की सीढ़ियों के सहारे उन्हें करीब 40 फीट ऊंची लकड़ी की मचान पर चढ़ाया गया। मचान पर पहुंचने के बाद बुजुर्ग के पेट में कपड़ा बांधकर उन्हें लकड़ी से कसकर बांधा गया। इसके बाद नीचे खड़े लोगों ने रस्सी पकड़कर उन्हें हवा में तेजी से घुमाया। बुजुर्ग भी आकाश में घूमते हुए करतब दिखाते रहे और मौके पर मौजूद ग्रामीण “वीर बंबो” के जयकारे लगाते रहे। आयोजकों के अनुसार यह मेला करीब एक सदी पुरानी परंपरा का हिस्सा है और इसका मुख्य उद्देश्य गांव की सुख-शांति और खुशहाली की कामना करना है। हालांकि इस तरह के खतरनाक करतब को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं कि आस्था के नाम पर इस तरह के जोखिम कितने सुरक्षित हैं।
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