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Anshuman PandeyAnshuman PandeyFollow31 Aug 2024, 06:11 am
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बुंदेलखंड की दीपावली पर्व में चांदी की मछली की धूम,200 साल पुरानी परंपरा आज भी है कायम

RavindraRavindraFollowJust now
Sisolar, Uttar Pradesh:बुंदेलखंड के जनपद हमीरपुर के मौदहा तहसील में 18 वीं सदी से चांदी की मछली बनाए जाने का व्यवसाय चल रहा है यह बुंदेलखंड की एक ऐतिहासिक एवं पौराणिक परंपरा के अंतर्गत माना जाता है यहां के कारीगर चांदी की मछली की नक्काशी इस तरह करते हैं जैसे की वास्तविक मछली की संरचना होती है जिससे कि कोई भी देखने वाला यह नहीं कह सकता की यह एक वास्तविक मछली नहीं है... मौदहा तहसील में चांदी की मछली की नक्काशी कोई आज की नक्काशी नहीं है ये 18 वीं सदी से होती चली आई है इस नक्काशी में पीढ़ी दर पीढ़ी चांदी की मछली की नक्काशी का काम करते चले आए हैं दीपावली का पर्व आते ही यहां की बाजारों में चांदी की मछली की धूम देखी जा सकती है लोग दीपावली के पर्व में चांदी की मछली को खरीदना अत्यंत ही शुभ मानते हैं जिसको लेकर बाजारों में चांदी की मछली की डिमांड काफी बढ़ जाती है इस चांदी की मछली की धूम बुंदेलखंड की जनपद हमीरपुर में ही नहीं बल्कि विदेशों तक इसकी डिमांड होती चली आई है कोई भी इस चांदी की मछली को एक बार देखने के बाद बिना इसको खरीदे रह नहीं पता है एक समय चांदी की मछली जो कि हर साइज की बनाई जाती थी जिससे कि हर व्यक्ति के बजट में इसको समायोजित किया जा सके... इस चांदी की मछली से जुड़े कारीगरों का कहना है कि यह एक बुंदेलखंड की विरासत है जिसको हम ज्यादातर सोनी परिवार के लोग इसको संरक्षित करते चले आए लेकिन शासन प्रशासन ने कभी इसकी और ध्यान नहीं दिया जिससे आज महंगाई की दौर में इस चांदी की मछली का निर्माण करने में संकट गहराता चल रहा है, इससे जुड़े कारीगरों का कहना है कि अगर शासन प्रशासन की ओर से हमको किसी प्रकार की सुविधा मिलती है तो हम इस व्यवसाय को और अच्छे ढंग से कर सकते हैं जिसके लिए समय-समय पर हमने शासन के प्रतिनिधियों एवं प्रशासन के अधिकारियों को समय-समय पर उनके संज्ञान में भी डाला है लेकिन आज तक हम लोग के उत्थान के लिए किसी भी प्रकार के कदम नहीं उठाए ......... आज महंगाई की दौर में चांदी की मछली की हालत वो हो गई है चांदी की मछली का आकार छोटे से छोटा होता जा रहा है लोगों की जेब पर इसका अत्यधिक भर दिखाई दे रहा है,जितनी जेब भारी उतनी बड़ी मछली खरीदते है लोग अंग्रेजी शासन में जब इस परिवार के बुजुर्गो ने विक्टोरिया राजकुमारी को चाँदी की मछली भेट की थी तो राजकुमारी ने मछली की खूबसूरती को देख कर इन्हें एक मैडल भी दिया था .मछली की इसी कला के कारन इस परिवार का नाम आईने अकबरी पुस्तक में भी दर्ज है ! BYTE - राजेन्द्र सोनी (मछली बनाने वाला कारीगर )
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हांसी के यति नगर पार्क में 3100 दीपों से दीपोत्सव, जय श्रीराम की आकृति उजागर

Hansi, Haryana:हांसी हांसी में 3100 दीप जलाकर मनाया भव्य दीपोत्सव, अनूठी मिसाल कायम कर रोशनी से जगमगाया यति नगर यति नगर पार्क में पहली बार एक साथ प्रज्वलित हुए 3100 मिट्टी के दीप, दीपों से उकेरी गई जय श्रीराम की आकृति और भगवान की प्रतिमा चाइनीज लाइटों سے दूरी बनाकर सरसों के तेल और रुई की बत्तियों से रोशन किए दीप, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का दिया संदेश हांसी। दीपावली का पर्व केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का ही नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों को सहेजने का भी पर्व है। इसी भावना को साकार करते हुए हांसी के यति नगर पार्क में ऐसा भव्य दीपोत्सव आयोजित किया गया, जिसने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। यहां एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 3100 मिट्टी के दीप प्रज्वलित कर दीपावाली का पर्व श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। हांसी में पहली बार इतने बड़े स्तर पर 3100 दीप जलाकर दीपोत्सव मनाने की अनूठी पहल की गई। दीपों की जगमगाहट से यति नगर पार्क का नजारा देखते ही बन रहा था। इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि दीपों को केवल रोशनी के लिए ही नहीं जलाया गया, बल्कि उनके माध्यम से भारतीय संस्कृति और धार्मिक आस्था की सुंदर तस्वीर भी प्रस्तुत की गई। पार्क में 3100 दीपों को आकर्षक ढंग से सजाकर भगवान की प्रतिमा और 'जय श्रीराम' की भव्य आकृति बनाई गई। जैसे ही सभी दीप प्रज्वलित हुए, पूरा पार्क रोशनी से नहा उठा। इस मनमोहक दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोग भावविभोर हो गए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर आयु वर्ग के लोगों ने इस आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लिया और सामूहिक रूप से दीप जलाकर दीपावली की खुशियां साझा कीं।इस भव्य दीपोत्सव को आयोजित करने के लिए काफी मेहनत और तैयारियां करनी पड़ीं। 3100 दीपों की व्यवस्था करना, उन्हें सही तरीके से सजाना और पूरे आयोजन को सफल बनाना आसान नहीं था, लेकिन जब सभी दीप एक साथ जगमगाए तो सारी मेहनत सफल हो गई। उन्होंने कहा कि हिंदुओं के इस पावन पर्व को अपनी संस्कृति और परंपराओं के अनुरूप इतने धूमधाम से मनाकर उन्हें बेहद खुशी हो रही है। यह आयोजन सभी क्षेत्रवासियों के सहयोग और सामूहिक प्रयास का परिणाम है। वहीं समाजसेवी नरेश यादव ढाणा वाले ने कहा कि इस प्रकार सामूहिक रूप से दीपावली मनाने का अनुभव बेहद सुखद है। आज जिस तरह लोग एक साथ आकर अपनी संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं, वह सराहनीय है। ऐसे आयोजन समाज में आपसी भाईचारे, एकजुटता और धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि दीपावली के पर्व पर पारंपरिक मिट्टी के दीप जलाने की पहल भारतीय संस्कृति को जीवंत रखने का अच्छा माध्यम है। दीपोत्सव में एक विशेष संदेश भी देखने को मिला। आयोजन में चाइनीज लाइटों और आधुनिक सजावटी सामान की बजाय भारतीय परंपरा के प्रतीक मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता दी गई। सभी 3100 दीपों में सरसों का तेल डालकर रुई की बत्तियों से उन्हें प्रज्वलित किया गया। इस पहल के माध्यम से लोगों को अपनी पारंपरिक संस्कृति, स्वदेशी भावना और पुरानी रीति-रिवाजों को अपनाने का संदेश दिया गया। यति नगर पार्क में आयोजित यह दीपोत्सव केवल रोशनी का आयोजन बनकर नहीं रहा, बल्कि इसने सामूहिक सहभागिता, धार्मिक आस्था और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश भी दिया। 3100 मिट्टी के दीपों से सजी जय श्रीराम की आकृति और भगवान की प्रतिमा ने आयोजन को विशेष बना दिया। क्षेत्रवासियों के सामूहिक प्रयास से आयोजित इस दीपोत्सव ने हांसी में एक अनूठी मिसाल कायम की और यह संदेश दिया कि आधुनिकता के दौर में भी अपनी परंपराओं और संस्कृति को सहेजकर त्योहारों की खुशियां और भी खास बनाई जा सकती हैं।
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श्रीराम कॉलोनी में पांच मंजिला मकान में दरार, मकान झुका; पुलिस ने रास्ता बंद कर मोर्चा संभाला

New Delhi, Delhi:उत्तर पूर्वी दिल्ली की श्रीराम कॉलोनी में पांच मंजिला मकान में अचानक दरारें आने और मकान के झुकने से इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और एहतियात के तौर पर मोर्चा संभाल लिया। सुरक्षा को देखते हुए मकान के आसपास का रास्ता बंद कर दिया गया और स्थानीय लोगों को घटनास्थल से दूर कर दिया गया। एहतियातन मकान को खाली करा लिया गया ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके। मामला एमसीडी को भी दे दिया गया है; एमसीडी की टीम मौके पर पहुंचकर मकान की स्थिति का निरीक्षण करेगी और जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी। फिलहाल पुलिस मौके पर सतर्क है और पूरे इलाके में सुरक्षा के मद्देनजर आवाजाही पर रोक लगाई गई है।
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विकास नगर में 72 वर्षीय बुजुर्ग की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

ADArvind DubeyFollow10m ago
Chhapaka, Uttar Pradesh:रिपोर्टर अरविन्द दुबे / सोनभद्र सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के विकास नगर में शनिवार की सुबह 72 वर्षीय बुजुर्ग की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। पत्नी के वापस लौटने पर हुई घटना की जानकारी मृतक की पहचान योगेंद्र सिंह भंडारी (72) पुत्र स्वर्गीय हरीदेव सिंह निवासी विकास नगर के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार शनिवार की सुबह करीब साढ़े सात बजे यह घटना हुई। बताया जा रहा है कि घटना के समय उनकी पत्नी गुरुद्वारा गई हुई थीं। जब वह वापस घर लौटीं तो पति को मृत अवस्था में देखकर शोर मचाने लगीं। आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। मौत की वजह स्पष्ट नहीं, जांच में जुटी पुलिस बताया जा रहा है कि मृतक का एक बेटा और दो बेटियां हैं, जो बाहर रहते हैं। फिलहाल बुजुर्ग की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसकी वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी है। मौत के कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।
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दिवाली पर कोटा-सोगरिया से 74 स्पेशल ट्रेनों से 1.25 लाख यात्रियों को राहत

Kota, Rajasthan:कोटा। दिवाली और त्योहारी सीजन में घर जाने वाले यात्रियों की भीड़ को देखते हुए रेलवे ने कोटा और सोगरिया स्टेशन से विशेष ट्रेनों का संचालन कर यात्रियों को बड़ी राहत दी है। अक्टूबर और नवंबर में कोटा मंडल की ओर से 5 विशेष ट्रेनों के कुल 74 फेरे लगाए जा रहे हैं। इनसे 1.25 लाख से ज्यादा यात्रियों को अतिरिक्त यात्रा सुविधा मिली है। रेलवे ने त्योहारी सीजन में ट्रेनों में अतिरिक्त कोच भी लगाए हैं। पिछले दो महीनों में स्लीपर और एसी श्रेणी की करीब 1300 अतिरिक्त बर्थ बढ़ाई गई हैं। वहीं, 22 कोच वाली विशेष ट्रेन में एक फेरे के दौरान कुल 1696 यात्रियों के सफर करने की क्षमता है। इसमें एसी, स्लीपर और जनरल श्रेणी के कोच शामिल हैं। एक ट्रेन में 1696 यात्रियों के सफर की क्षमता। 22 कोच की स्पेशल ट्रेन में फर्स्ट एसी का एक कोच (20 बर्थ), सेकंड एसी के दो कोच (64 बर्थ), थर्ड एसी के चार कोच (288 बर्थ), स्लीपर के 11 कोच (792 बर्थ) और जनरल के चार कोच (400 सीटें) शामिल हैं। इस तरह एक ट्रेन में कुल 1696 यात्रियों के लिए सीट और बर्थ उपलब्ध हैं। सोगरिया-धनबाद स्पेशल (09821/09822) का संचालन 18 जुलाई से 28 नवंबर तक किया गया है। इसके 40 फेरों से 67,840 यात्रियों को यात्रा सुविधा मिली। वहीं जयपुर-बयाना ट्रेन (19721/19722) को भरतपुर तक विस्तारित किया गया है। 6 से 20 नवंबर के बीच इसके 30 अतिरिक्त फेरे संचालित किए जा रहे हैं, जिससे 50,880 यात्रियों को सुविधा मिलेगी। सौरभ जैन, सीनियर डीसीएम, कोटा मंडल ने बताया कि त्योहारी सीजन को देखते हुए कोटा और सोगरिया स्टेशनों से अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। यात्रियों की संख्या और मांग को देखते हुए जरूरत पड़ने पर ट्रेनों के फेरों में और बढ़ोतरी की जाएगी। रेलवे का प्रयास है कि त्योहारों पर यात्रियों को सुविधाजनक सफर मिल सके। कोटा-सोगरिया से चलने वाली विशेष ट्रेनें: सोगरिया-दानापुर स्पेशल: 10 अक्टूबर से 16 नवंबर तक 12 फेरे, 20,352 यात्रियों को सुविधा। सोगरिया-मथुरा अनारक्षित स्पेशल (पहला चरण): 14 से 26 अक्टूबर तक 26 फेरे, 44,096 यात्रियों के लिए सीटें। कोटा-पानीपत एक्सप्रेस: 22 से 26 अक्टूबर तक 4 फेरे, 6,784 यात्रियों को सुविधा। BYTE - सौरभ जैन, सीनियर डीसीएम, कोटा मंडल
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डिंडौरी कलेक्टर ने वृद्धाश्रम में दीपावली-धनतेरस की खुशियाँ बांटकर मुस्कान बिखेरी

Dindori, Madhya Pradesh:एंकर।त्योहार की खुशियां अपनों के साथ बांटने का संदेश देते हुए डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया शुक्रवार को मंडला रोड बायपास स्थित जीवन आश्रम वृद्धाश्रम पहुंचीं। यहां उन्होंने बुजुर्गों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और उपहार भेंट कर दीपावली एवं धनतेरस की शुभकामनाएं दीं। इतना ही नहीं, कलेक्टर ने बुजुर्गों के साथ बैठकर भजन गाए और आत्मीय बातचीत कर उनके चेहरों पर मुस्कान बिखेरी। कलेक्टर की इस पहल ने त्योहार के मौके पर बुजुर्गों को अपनत्व और सम्मान का सुखद एहसास कराया。
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