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SShripatiFollow14 Jan 2025, 09:46 am

Sitapur- निराश्रित महिलाओं की सेवा पुनीत कार्य: जनक कुमारी सिंह

Kamlapur, Uttar Pradesh:

कसमंडा की ग्राम पंचायत नयागांव में प्रधान जनक कुमारी सिंह ने पंचायत भवन पर प्रदेश सरकार की लोककल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी।उन्होंने सभी से कहा जिनकी वृद्धावस्था ,निराश्रित महिला व विकलांग पेंशन नही बनी है वह सिर्फ अपना आधार ,खाता संख्या व मोबाइल नम्बर दे दे आगे की सम्पूर्ण कार्यवाही हम करेगे और बगैर किसी शोषण के पेंशन दिलाई जाएगी।प्रधान ने कहा प्रधानमंत्री आवास योजना में नए लाभार्थियों का चयन होना है आप स्वयं आवास प्लस एप पर अपना रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इस अवसर पर उन्होंने निराश्रित महिलाओ को कम्बल भी वितरित किये। 

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जोधपुर हाईकोर्ट ने निवेशकों के हित के लिए समिति गठित करने का आदेश दिया

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के कथित हजारों करोड़ रुपए के घोटाले में राजस्थान हाईकोर्ट ने निवेशकों को राहत दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जस्टिस समीर जैन की बेंच ने मामले की जटिलता और करीब 20 लाख निवेशकों की जमा पूंजी से जुड़े सार्वजनिक हित को देखते हुए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस (रिटायर्ड) संजीव खन्ना की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का आदेश दिया है। समिति का मुख्य उद्देश्य परिसमापन प्रक्रिया की निगरानी करना और निवेशकों को उनकी राशि जल्द से जल्द वापस दिलाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना होगा। कोर्ट के समक्ष निवेशकों की ओर से बताया गया कि सोसायटी और उसके प्रबंधन पर शेल कंपनियों के जरिए जनता की जमा राशि को कथित रूप से इधर-उधर करने के आरोप हैं। निवेशकों के अनुसार मूलधन करीब 10 हजार करोड़ रुपए और ब्याज सहित कुल दावा करीब 25 हजार करोड़ रुपए का है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामला बड़े पैमाने पर व्यवस्थित व्हाइट कॉलर अपराध से जुड़ा बताया गया है, जिसमें ऊंची ब्याज दरों का लालच देकर निवेश जुटाने, बिचौलियों को भारी कमीशन देने और धन को शेल कंपनियों के माध्यम से रियल एस्टेट में लगाने के आरोप सामने आए हैं। सुनवाई के दौरान ऑफिशियल लिक्विडेटर एचएस पटेल ने बेंच को बताया कि वर्ष 2018 में घोटाला सामने आने के बाद से निवेशकों को अब तक कोई रिटर्न नहीं मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि सीमित स्टाफ और संसाधनों के कारण परिसमापन प्रक्रिया को आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा है। विभिन्न एजेंसियों की कार्रवाई और अलग-अलग कोर्ट के स्टे के कारण कुर्क संपत्तियों की बिक्री और नीलामी की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। कोर्ट के समक्ष यह भी बताया गया कि करीब 2000 करोड़ रुपए की संपत्तियों पर प्रोविजनल अटैचमेंट है, जबकि उनका अनुमानित बाजार मूल्य करीब 5000 करोड़ रुपए बताया गया है। हाईकोर्ट ने कहा कि निवेशकों में बड़ी संख्या गरीब लोगों, पेंशनर्स और ऐसे लोगों की है जिन्होंने अपनी जीवनभर की बचत और सेवानिवृत्ति की राशि निवेश की थी। कई निवेशक चिकित्सा, विवाह और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए धन की तत्काल आवश्यकता में हैं। कोर्ट ने इस मामले की व्यापकता को देखते हुए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर और गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी गांधीनगर से भी समिति को अकादमिक और शोध सहयोग देने को कहा है। दोनों विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई है। आदेश के अनुसार ऑफिशियल लिक्विडेटर को 5 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे समिति के अध्यक्ष के समक्ष उपस्थित होकर प्रारंभिक जानकारी उपलब्ध करानी होगी। समिति अपने काम के लिए विशेषज्ञों, चार्टर्ड अकाउंटेंट और अधिवक्ताओं की सेवाएं लेने का प्रस्ताव हाईकोर्ट के समक्ष दो सप्ताह में रख सकेगी। प्रवर्तन निदेशालय, पुलिस और एसआईटी सहित संबंधित एजेंसियों से भी आवश्यक सहयोग लिया जा सकेगा। केंद्र सरकार को समिति के लिए कार्यालय, लॉजिस्टिक और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं, पूर्व प्रबंधन और शेल कंपनियों के पक्ष में दिए गए सभी अंतरिम आदेश अब समाप्त माने जाएंगे। समिति की पहली बैठक 5 अगस्त को होगी। समिति के अध्यक्ष को शुरुआती बैठक के लिए पांच लाख रुपए फीस और अन्य खर्च के तौर पर ऑफिशियल लिक्विडेटर द्वारा भुगतान किया जाएगा। हाईकोर्ट ने मामले को आगे आवेदन पेश होने पर सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है, अन्यथा अगली सुनवाई 24 अगस्त 2026 को होगी.
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उदयपुर की पहाड़ियों, झीलों के खिलाफ तेज निर्माण पर राजस्थान हाईकोर्ट की गम्भीर टिप्पणी

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर की पहाड़ियों, झीलों, वन्यजीव अभयारण्यों और संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र में तेजी से हो रहे निर्माण पर गंभीर चिंता जताई है। होटल निर्माण से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस समीर जैन ने कोर्ट कमिश्नर की निरीक्षण रिपोर्ट और एरियल फोटोग्राफी का अवलोकन करते हुए कहा कि उदयपुर की पहाड़ियों को बेरहमी से काटकर उन पर निर्माण किए जा रहे हैं और ऐसा लगता है कि पहाड़ियों की जगह होटल ले रहे हैं। कोर्ट ने इस पूरे मामले को शहर के पारिस्थितिक अस्तित्व से जुड़ा गंभीर विषय माना है। मामला बंसत होटल्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। कोर्ट के निर्देश पर कोर्ट कमिश्नर अधिवक्ता कामिनी जोशी और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राजेंद्र भणावत ने मौके का निरीक्षण कर अंतरिम रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में याचिकाकर्ता की संपत्ति के साथ आसपास के क्षेत्र की एरियल तस्वीरें भी शामिल हैं। सुनवाई के दौरान कमिश्नर ने बताया कि संबंधित पहाड़ियों पर कई होटल बन चुके हैं और संचालित हो रहे हैं। याचिकाकर्ता की संपत्ति की खास बात केवल यह है कि वह अपेक्षाकृत अधिक ढलान पर स्थित है। हाईकोर्ट ने कहा कि निरीक्षण रिपोर्ट से सामने आया है कि पहाड़ियों और पर्वतों को काटकर बड़े पैमाने पर निर्माण किया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि 2018 की हिल पॉलिसी और हिल बायलॉज तैयार करने में निजी बाहरी एजेंसियों की भूमिका रही, लेकिन जलवायु, वन्यजीव, प्रदूषण और पर्यावरण से जुड़े संबंधित वैधानिक विभागों और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से उचित सलाह या परामर्श नहीं लिया गया। कोर्ट ने उदयपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की जानकारी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि अधिकारियों को पहाड़ी निर्माण से संबंधित नीति और मौजूदा कानूनों की पर्याप्त जानकारी नहीं थी। हाईकोर्ट ने कहा कि झीलों, पहाड़ियों और वन्यजीव अभयारण्यों के लिए प्रसिद्ध उदयपुर में सतत विकास के नाम पर होटल, रिसॉर्ट और व्यावसायिक निर्माण तेजी से बढ़े हैं। कोर्ट ने सार्वजनिक न्यास सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण जीवन का अधिकार है और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा राज्य की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने संकेत दिया कि अगली सुनवाई में इस मामले को व्यापक जनहित के दृष्टिकोण से देखते हुए स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज करने पर भी विचार किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने और आसपास स्वीकृत सभी निर्माण एवं व्यावसायिक अनुमतियों का पूरा रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही 2018 और 2024 की हिल पॉलिसी के लेखकों के नाम, इनके निर्माण से जुड़े मूल दस्तावेज, नीतियों के औचित्य और निजी एजेंसी की रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है.
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जोधपुर हाईकोर्ट: गवाहों पर दबाव, सामाजिक बहिष्कार के आरोपों की निष्पक्ष जांच के निर्देश

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने लूणी थाना क्षेत्र में दर्ज एक मामले की जांच के दौरान गवाहों को कथित तौर पर धमकाने, दबाव बनाने और सामाजिक बहिष्कार किए जाने की शिकायतों को गंभीरता से लिया है। जस्टिस फरजंद अली ने कहा कि किसी भी व्यक्ति द्वारा गवाहों को धमकाना, प्रभावित करना, दबाव में लेना या सामाजिक बहिष्कार करना आपराधिक न्याय व्यवस्था में गंभीर हस्तक्षेप है और इसे कोर्ट बर्दाश्त नहीं कर सकती। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि मामले से जुड़े गवाह या इसी तरह प्रभावित कोई अन्य व्यक्ति जांच अधिकारी के समक्ष धमकी, दबाव, सामाजिक बहिष्कार या डराने-धमकाने की शिकायत करता है तो उसकी निष्पक्ष और शीघ्र जांच की जाए। मामला लूणी थाना क्षेत्र में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। याचिकाकर्ता राजाराम पालीवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की थी। एफआईआर के अनुसार, राजाराम ने 3 दिसंबर 2022 को युवती से विवाह किया था। आरोप है कि पत्नी के दूसरी जाति से होने की बात को लेकर पालीवाल समाज के कुछ लोगों ने राजाराम और उसके परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया। कई सामुदायिक पंचायतें आयोजित कर कथित रूप से परिवार को बंधक बनाया गया, अपमानित किया गया और सामाजिक बहिष्कार की धमकी दी गई। आरोप है कि एक लाख रुपए का जुर्माना वसूला गया तथा 21 लाख रुपए की अतिरिक्त राशि की मांग की गई। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि इस मामले की जांच पहले से हाईकोर्ट के निर्देश पर नियुक्त जांच अधिकारी कर रहे हैं और उन्हें जांच अधिकारी या जांच की प्रक्रिया से कोई शिकायत नहीं है। हालांकि, आरोप लगाया गया कि आरोपी पक्ष द्वारा मामले से जुड़े स्वतंत्र गवाहों पर दबाव बनाया जा रहा है। तीन गवाहों लादूराम, अशोक पालीवाल और अनिल के साथ धमकी, दबाव और सामाजिक बहिष्कार किए जाने का आरोप लगाया गया। यह भी कहा गया कि आरोपी पक्ष के खिलाफ नहीं जाने के कारण गवाहों के परिवारों को भी समाज से बाहर करने की कार्रवाई की गयी। कोर्ट ने कहा कि पहले दिए गए निर्देशों का उद्देश्य केवल किसी एक मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि जबरदस्ती, धमकी और सामाजिक बहिष्कार जैसी गैरकानूनी सामाजिक प्रथाओं को खत्म करना भी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि शिकायतों में तथ्य पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए। साथ ही, जांच को बाहरी दबाव से मुक्त रखते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी गवाह सच बोलने से भयभीत न हो। कोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए सभी लंबित आवेदन भी समाप्त कर दिए।
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नागर के आरोपों से दूदू बैठक में हलचल, भ्रष्टाचार के दावे तेज

Dudu, Rajasthan:पूर्व मंत्री बाबूलाल नागर ने दूदू बैठक में दिया बयान, नागर ने कहा - मेरा दावा है... भ्रष्टाचार करने वाले इस साल में जेल नहीं जाएंगे तो दो साल बाद तो जरूर जेल जाएंगे। नागर ने आरोप लगाते हुए कहा - राज बदलते ही आबादी के पट्टों में कर दी हेराफेरी। नगरपालिका के अधिकारी और जनप्रतिनिधियों पर साधा निशाना। छापरवाडा बांध की नहर के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर के एक सोलर कंपनी को फायदा पहुंचाने का भी लगाया आरोप। छापरवाडा बांध के जीर्णोद्धार कार्य में गड़बड़झाले को लेकर भी उठाए सवाल। पंचायतीराज चुनाव के चलते पूर्व मंत्री हुए आक्रामक, नागर के बयान बने चर्चा का विषय।
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राजस्थान हाईकोर्ट: उदयपुर में नाबालिग हत्या में मौत की सजा रद्द, उम्रकैद

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर जिले में नाबालिग बच्ची की हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट से मिली मौत की सजा को रद्द करते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी को हत्या समेत अन्य अपराधों में दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि बलात्कार, पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट के तहत दोषसिद्धि को संदेह का लाभ देते हुए निरस्त कर दिया। वहीं मामले में दो सह आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत की ओर से भेजा गया डेथ रेफरेंस अब विचारणीय नहीं है। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने मर्डर रेफरेंस और उससे जुड़ी आपराधिक अपीलों पर आदेश सुनाया। अभियुक्तों की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता सपना वैष्णव ने बताया कि मामला 25 अक्टूबर 2024 को उदयपुर की विशेष पॉक्सो एवं चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्ट कोर्ट की ओर से सुनाई गई सजा से जुड़ा था। ट्रायल कोर्ट ने मुख्य आरोपी को कई धाराओं में दोषी ठहराते हुए बलात्कार और पॉक्सो एक्ट के तहत मौत की सजा तथा हत्या के मामले में उम्रकैद दी थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष हत्या का अपराध साबित करने में सफल रहा। कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषसिद्धि बरकरार रखी। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार बच्ची की मौत गला घोंटने से हुई थी और उसके बाद शव को कई टुकड़ों में काटा गया था। कोर्ट ने माना कि शव को काटकर छिपाने की कार्रवाई अपराध के साक्ष्य को मिटाने के उद्देश्य से की गई थी। इस आधार पर हत्या और साक्ष्य मिटाने से जुड़े अपराधों में आरोपी की दोषसिद्धि कायम रखी गई। हालांकि बलात्कार के आरोप को लेकर हाईकोर्ट ने कहा कि मेडिकल और फोरेंसिक साक्ष्य अभियोजन के आरोप को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। शव के काफी समय तक सड़ने के कारण मेडिकल बोर्ड यौन हमले को लेकर कोई निश्चित राय नहीं दे सका था। ऐसे में कोर्ट ने धारा 376एबी आईपीसी और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। साथ ही एससी-एसटी एक्ट के तहत दोषसिद्धि भी रद्द कर दी गई। फैसले के अंतिम आदेश में हाईकोर्ट ने आरोपी की धारा 201, 302, 342, 363 और 366 आईपीसी तथा आर्म्स एक्ट की धारा 4/25 के तहत दोषसिद्धि और सजा बरकरार रखी। हालांकि मौत की सजा हटाकर कोर्ट ने कहा कि न्याय के उद्देश्य के लिए उम्रकैद पर्याप्त होगी। इस तरह डेथ रेफरेंस को नकारते हुए मौत की सजा की पुष्टि नहीं की गई और आरोपी को अब आजीवन कारावास भुगतना होगा। मामले में सह आरोपी को भी हाईकोर्ट से राहत मिली। कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ साक्ष्य मिटाने या अपराध की जानकारी छिपाने के आरोप पर्याप्त रूप से साबित नहीं हुए। उनके खिलाफ न तो कोई बरामदगी हुई, न कोई वैज्ञानिक या फोरेंसिक साक्ष्य उन्हें अपराध से जोड़ता है और न ही कोई प्रत्यक्षदर्शी उनके खिलाफ सामने आया। इसके चलते दोनों को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
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जोधपुर कोर्ट ने CAS मामले में जेएनवीयू के वेतन रोक के आदेश दिए

Jodhpur, Rajasthan:जோதपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के लाभ से जुड़े वर्ष 2008 के आदेश की पालना नहीं करने को गंभीरता से लेते हुए जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय (जेएनवीयू) के कुलपति, रजिस्ट्रार और वित्त नियंत्रक के वेतन व अन्य भुगतानों को अटैच करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक पूर्व में दिए गए आदेश की पूरी तरह पालना नहीं होती, तब तक तीनों अधिकारी विश्वविद्यालय से किसी प्रकार का वेतन या भुगतान आहरित नहीं कर सकेंगे। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को होगी और उस दिन संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना होगा। जस्टिस अशोक कुमार जैन की बेंच ने डॉ. रेनू सोलंकी भाटी व अन्य की ओर से अधिवक्ता नरपतसिंह चारण ने अवमानना याचिका पेश की थी। कोर्ट ने कहा कि 8 दिसंबर 2017 को रिट याचिका में पारित आदेश के तहत याचिकाकर्ताओं की प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से सेवा अवधि की गणना करते हुए सीएएस का लाभ देने पर विचार करने के निर्देश दिए गए थे। पात्र पाए जाने पर उन्हें सीएएस का लाभ देने और इसके वित्तीय लाभ 24 जुलाई 2008 से देने के निर्देश भी स्पष्ट रूप से दिए गए थे। सुनवाई के दौरान पेश अतिरिक्त शपथ पत्र और दस्तावेजों से सामने आया कि विश्वविद्यालय ने याचिकाकर्ताओं को वास्तविक लाभ 7 मार्च 2018 से प्रदान किया। हाईकोर्ट ने कहा कि पूर्व आदेश में वास्तविक वित्तीय लाभ की प्रभावी तारीख 24 जुलाई 2008 निर्धारित थी। इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने 7 मार्च 2018 से लाभ देने का आदेश जारी किया, जो कोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवहेलना यानी अवमानना का मामला बनता है। कोर्ट ने कहा कि अवमानना की सजा पर विचार करने से पहले विश्वविद्यालय को आदेश की पालना का एक और अवसर दिया जा रहा है। साथ ही कुलपति, रजिस्ट्रार और वित्त नियंत्रक को 17 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
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आनंद रेलवे स्टेशन के पास दोस्ती के झगड़े में चाकू से हत्या, आरोपी गिरफ्तार

Anand, Gujarat:એંકરઃ આણંદ શહેરમાં રેલ્વે સ્ટેશન નજીક આવેલી ફ્રુટ માર્કેટમાં NECકભાંદુ બાબતે બે શ્રમિક મિત્રો વચ્ચે બોલાચાલી થતા ઉસ્કેરાઈ ગયેલા એકfriendએ બીજા મિત્ર પર ચપ્પુનાં ધા ઝીંકીયાં કરપીણ હત્યા કરતી ચકચાર મચી જવા પામી હતી, આણંદ ટાઉન પોલીસે હત્યાનો ગુનો નોંધી ગણતરીનાં કલાકોમાં આરોપીને ઝડપી પાડી તેની હત્યાના ગુનામાં ધરપકડ કરી હતી. વીઓઃ આણંદ શહેરમાં પરિખભુવન વિસ્તારમાં આશિર્વાદ ફળીયામાં રહેતા રમેશભાઈ બાલકદાસ ગોસાઈ (ઉ.વ.45) અને કાંતીભાઈ દેસાઈભાઈ ઠાકોર બન્ને નજીકમાં રહેતા હતા અને બન્ને સાથે જ મજૂરી કામે પણ જતા હતા. બંને જણા આણંદ રેલ્વે સ્ટેશન નજીક આવેલી ફ્રુટ માર્કેટમાં વાહનોમાંથી ફ્રૂટનાં બોક્ષ ઉતારવાની મજૂરી કરવી રહ્યા હતા. ગત બુધવારે બપોરે ત્રણ વાગે રમેશભાઈ ફ્રુટ માર્કેટમાં ટેમ્પોમાંથી ફ્રુટનાં બોક્ષ ઉતારવાની મજૂરી કરતો હતો ત્યારે કાંતીભાઈ ઠાકોરએ ત્યાં આવીને રમેશ સાથે ઝઘડો કરી હતું અને તુ મજૂરી કામે એકલો કેમ આવીયો મને સાથે લઈને કેમ નહીં આવ્યો તેમ કહી ઝઘડો કર્યો હતું જેના કારણે બંને વચ્ચે ઉગ્ર બોલાચાલી થઈ. ત્યારબાદ ઝપાઝપી થઈ હતી, ઉત્કુષરાઈ ગયા કાંતી ઠાકોરે પેન્ટના ખિસ્સામાંથી ચપ્પુ કાઢયું હતું અને રમેશ પર ચપ્પુનાં ધા ઝિક્યા હતા જેમાં છાતી અને ગળાના ભાગે ચપ્પુનાં ધા વાગતા રમેશ લોહીલુહાણ થઈ ત્યું હતું. આ ધટનાને લઈને આસપાસના લોકો દોડી ગયા હતા અને તેઓએ જોતા રમેશનું મોત નિપજયું હતું, જયારે હત્યા કર્યા બાદ કાંતી ત્યાંથી ફરાર થઈ ગયો હતો. વીઓ-ધટનાની જાણ થતા જ આણંદ ટાઉન પોલીસ મથકનાં પી.આઈ જે એસ કન્ડોરીયા સ્ટાફ સાથે ધટના સ્થળે દોડી ગયા હતા અને એફએસએલની મદદથી મૃતદેહને પોષ્ટમોર્ટમ માટે હોસ્પિટલમાં મોકલી આપી પોલીસાએ ફ્રૂટના વેપારી મોહંમદ હનીફ વ્હોરાની ફરીયાદના આધારે કાંતીભાઈ દેસાઈભાઈ ઠાકોર વિરુદ્ધ હત્યાનો ગુનો નોંધી તેની ધરપકડ કરવાના ચક્રો ગતિમાન કર્યા હતા. વીઓ-કરૂણતા એ વાતની છે કે મૃતક રમેશની વૃદ્ધ માતાને હત્યાની જાણ થતા તેનાથી મથાળો પડ્યો હતો અને તેણે ધટના સ્થળે દોડી આવી મોટી આક્રંદ કર્યો હતો. રમેશની હત્યાથી તેની માતા નિરાધાર થઈ ઉઠયા હતા અને સમગ્ર વિસ્તારમાં અરેરાટી પ્રસરી ગઈ હતી. વીઓ. પોલીસે ઘટના સ્થળના સીસીટીવી ફૂટેજની ચકાસણી કરતા સીસીટીવીમાં હત્યાના દૃશ્યો કેદ Tragિક થયા હોવા સીસીટીવીમાં દર્શાયા હતા. વીઓઃ આણંદ ટાઉન પોલીસ મથકનાં સર્વેલન્સ સ્ટાફની જુદી જુદી ટીમોએ હત્યા કરનારને ઝડપી પાડવા માટે તપાસ હાથ ધરી હતી જેમાં આરોપી કાંતી ઠાકોર મોબાઈલફોન રાખતો ન હોત તેથી પોલીસે સગાવ્હાલાઓને તપાસ હાથ ધરી હતી. દરમિયાન આણંદ ટાઉન પોલીસ જેથી મળેલી બાતમી આધારે નજીક કાંતિભાઈ દેસાઈભાઈ ઠાકોર (ઉ.વ. 63)રને ગામડી રોડ પર ગરનાળા પાસે સંતોષી માતાનાં મંદીર પાસેથી ઝડપ пики પાડાયો હતો. પોલીસે તેની પાસેથી હત્યારાં ગુનામાં વપરાયેલું ચપ્પુ કબ્જે કરી તેની ધરપકડ કરી કાયદેસરની કાર્યવાહી કરી હતી. અહીં પોલીસ જણાવ્યું હતું કે આરોપી કેટલાક વર્ષો અગાઉ એક મહિલાની હત્યાનો પણ પ્રયાસ કર્યો હતો. આ ગુનામાં તે 15 મહિના જેલમાં રહ્યા બાદ જામીન પર મુકત થયો હતો.
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लोहरदगा में दुकान संचालक की गोली मारकर हत्या, आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग तेज

Lohardaga, Jharkhand:लोहरदगा- लोहरदगा शहर के पतरा टोली इलाके में अपराधियों ने दुकान संचालक शुभम कुमार साहू की गोली मारकर हत्या कर दी। घटना को अंजाम देने के बाद हमलावर बाइक से फरार हो गए। शुभम साहू अपनी दुकान पर मौजूद था। इसी दौरान बाइक सवार दो युवक पहुंचे और उनमें से एक ने उसकी छाती में गोली मार दी। गंभीर रूप से घायल शुभम को तत्काल सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गया। आक्रोशित लोगों ने पावरगंज चौक को जाम कर अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी और शहर में सुरक्षा का माहौल बनाने की मांग की। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं तथा आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि हत्या के कारणों की जांच की जा रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। वही लोहरदगा के लोगों ने नशा पर रोक लगाने की मांग करते हुए अपराधियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग गई।
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विंध्यवासिनी मंदिर परिसर में दो पुजारियों के बीच मारपीट, क्षेत्र में दहशत

Ukhdand, Uttar Pradesh:राजेश मिश्र मीरजापुर लाइव मारपीट माँ विंध्यवासिनी धाम में, दो पुरोहितो ने किया मारपीट, एक पुरोहित ने ग्रुप बनाकर मंदिर एवम रास्ते तक पुरानी वीआईपी स्थित एक दूकान पर लेजाकर दूसरे पुरोहित को जमकर पीटा, Vedio में दिख रहे इतने पुलिसकर्मियों के रहने के बावजूद खुले आम हो रहा मारपीट विंध्याचल मन्दिर एवम क्षेत्र मे दहशत का माहौल, आएदिन क्षेत्र मे हो रहा बवाल, पुलिस का नही रह गया लोगो मे भय, स्थानीय लोगों में भारी चर्चा। मन्दिर पर दर्शन कराने को लेकर दो पुरोहितो मे बवाल, दर्शनार्थियों मे अफरातफरी, विंध्याचल थाना क्षेत्र के क़स्बा विंध्यवासिनी मन्दिर का मामला
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राजस्थान सरकार सिलिकोसिस मरीजों के लिए उपचार, पुनर्वास और क्लेम जल्द निस्तारण के निर्देश

Jaipur, Rajasthan:सिलिकोसिस प्रभावित मरीजों के उपचार, पुनर्वास और लंबित सहायता प्रकरणों के त्वरित निस्तारण को लेकर राज्य सरकार ने सख्ती दिखाई है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सिलिकोसिस प्रभावित प्रत्येक मरीज की मैपिंग कर उसे समय पर चिकित्सा सुविधा, नियमित परामर्श और फॉलोअप उपलब्ध कराया जाए। साथ ही लंबित जांचों और सहायता-क्लेम के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा है। सचिवालय में राजस्थान न्यूमोकोनियोसिस (सिलिकोसिस) नीति-2019 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित राज्य स्तरीय सिलिकोसिस क्रियान्वयन समिति की बैठक हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि सिलिकोसिस लाइलाज बीमारी है, इसलिए प्रभावितों को समय पर उपचार, आर्थिक राहत और पुनर्वास का लाभ पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। मुख्य सचिव ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को सिलिकोसिस से अत्यधिक प्रभावित जिलों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर होने वाली एक्स-रे स्क्रीनिंग की समुचित मैपिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मरीज की पहचान और मैपिंग के साथ उसकी नियमित निगरानी और फॉलोअप भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ खान एवं श्रम विभाग को लंबित सहायता और क्लेम प्रकरणों के लिए विशेष अभियान चलाकर उनका जल्द निस्तारण करने को कहा। सिलिकोसिस उन्मूलन और प्रभावितों के कल्याण से जुड़े प्रयासों की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट (PMU) स्थापित करने के निर्देश भी दिए। मुख्य सचिव ने खनन उद्योगों में श्रमिकों की सुरक्षा की भी समीक्षा की। उन्होंने खान विभाग को सिलिकोसिस के लिहाज से हाई रिस्क वाले खनन और संबंधित उद्योगों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। सुरक्षा मानकों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने और नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। खान एवं श्रम विभाग को लंबित भुगतान की राशि निदेशालय विशेष योग्यजन विभाग, जो इस मामले में नोडल विभाग है, को एक सप्ताह में उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि लंबित प्रकरणों का भुगतान किया जा सके। बैठक में आयुक्त एवं विशिष्ट शासन सचिव, निदेशालय विशेष योग्यजन इकबाल खान ने बताया कि राजस्थान न्यूमोकोनियोसिस (सिलिकोसिस) नीति-2019 के तहत प्रमाणित सिलिकोसिस मरीज को 3 लाख रुपए की एकमुश्त पुनर्वास सहायता दी जाती है। सिलिकोसिस से मृत्यु होने पर नामित व्यक्ति को 2 लाख रुपए की सहायता और आश्रितों को 10 हजार रुपए की अंत्येष्टि सहायता दी जाती है। प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि सिलिकोसिस की रोकथाम और उपचार को बेहतर बनाने के लिए प्रदेश के 25 चिकित्सालयों में विशेष सिलिकोसिस कॉर्नर स्थापित किए गए हैं। यहां मरीजों को समर्पित चिकित्सा एवं परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रमुख सचिव ने सिलिकोसिस के कारणों, बचाव के उपायों और state government की सहायता योजनाओं को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए। बैठक में प्रमुख शासन सचिव सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता दिनेश कुमार, शासन सचिव श्रम पी.सी. किशन, विशिष्ट शासन सचिव खान एवं पेट्रोलियम नम्रता वृष्णि सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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