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Sambhal202412

मानवीयता की मिसाल बने संभल के DM, सड़क हादसे में घायल भाई-बहन को अस्पताल भिजवाया

Oct 28, 2024 17:44:56
Chandausi, Uttar Pradesh

संभल जिले के डीएम राजेंद्र पेंसिया की एक मानवीय पहल की तस्वीर सामने आई है। बहजोई इलाके में जनसुनवाई के लिए एसपी कृष्ण विश्नोई के साथ अपने काफिले के साथ मुरादाबाद-आगरा हाईवे से गुजरते समय डीएम ने एक बाइक सवार भाई-बहन को सड़क पर घायल देखा। बाइक फिसलने से गिरे इन दोनों को देखकर DM ने तुरंत अपना काफिला रुकवाया। DM राजेंद्र पेंसिया और एसपी कृष्ण विश्नोई घायल महिला और उसके भाई के पास पहुंचे और हालात का जायजा लिया।

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ASAshok Singh Shekhawat
Mar 12, 2026 06:30:53
Sikar, Rajasthan:सीकर 1 करोड़ का मायरा बहन के मायरा भरने की परंपरा तो देशभर में और खास तौर पर राजस्थान में हर जगह निभाई जाती है। माना जाता है कि अपनी बहन के भाई जरूर मायरा भरने जाता है और आदिकाल से यह परंपरा चली आ रही है। इस बहन के बच्चों की शादी में भाई की ओर से सहयोग और बहन के प्यार के तौर पर देखा जाता है। सीकर जिले के कुंडल की ढाणी में एक अनोखी मायरे की रस्म निभाई गई। रानोली की भरतावाली ढाणी निवासी दुबई प्रवासी कैलाश यादव ने अपनी बहन के बेटे के विवाह में दिल खोलकर मायरा भरते हुए करीब 1 करोड़ रुपए के नकद, जेवर और उपहार भेंट किए। इतना बड़ा मायरा क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। कैलाश की दुबई में बिल्डिंग की कंपनी है। कैलाश यादव बड़े भाई नारायण यादव और छोटे भाई छोटेलाल यादव के साथ बहन के घर कुंडल की ढाणी सीकर में मायरा लेकर पहुंचे। फिर मायरे की रस्म निभाई गई। मायरे में उन्होंने 51 लाख रुपए नकद, करीब 21 लाख की ज्वैलरी के साथ कपड़े व उपहार भेंट किए। मायरे की कुल कीमत लगभग 1 करोड़ बताई जा रही है। यह मायरा इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है。
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PKPRASHANT KUMAR1
Mar 12, 2026 06:18:05
Madhepura, Bihar:यहां कागजों पर मिलती है न्याय ! जमीन पर उतारने को भटकते रहते लोग! 16 साल बाद जमीन पर नहीं उतरा न्यायालय का आदेश! अधिकारी, एसडीएम से बन गए विभाग के सचिव! लेकिन तब भी देबू को नहीं मिला न्याय! अब बस सरकार के नए दावों पर है भरोसा! अब बने जिले के प्रभारी सचिव से है आश ! क्या 16 साल बाद जमीन पर उतरेगा इंसाफ ? बदले अधिकारी और सचिव के रूप में दिला पाएंगे न्याय? देखे यह खास रिपोर्ट। मेडhepura वार्ड नंबर 14 निवासी देवनारायण यादव 16 सालों से जमीन पर इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं। छोटे से पान की दुकान से परिवार का जीवन यापन करने वाले देबू और उसका परिवार साल दर साल अपने जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिये अधिकारीयों के कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। अब 16 साल बाद उप-मुख्यमंत्री के नए दावों और गोपाल मीणा के जिला प्रभारी सचिव बनाने से देव नारायण यादव को न्याय की एक बार फिर आस जगी है। पूजा, उपाय, फिर से आवेदन और निर्देश—पर कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित ने समय-समय पर प्रशासन से मदद मांगी, पर प्रक्रियाओं के चक्कर में जमीन पर असल न्याय नहीं मिला। अब देखने वाला विषय है कि जिले के वर्तमान अधिकारी कौन सा कदम उठाते हैं और कब तक न्याय मिलता है।
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